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Adultery एक रंडी की दास्तान-The story of a corporate whore
#28
अब बारी करण की थी। वह लड़का, जिसे चैताली ने अभी-अभी मुंह से सुख दिया था। वह सबसे ज्यादा आक्रामक था।

"अब मेरा बदला लेने का वक्त है," करण ने कहा और कंडोम पहनकर चैताली के ऊपर कूद पड़ा।

उसने उसे 'स्पूनिंग' पोजीशन में लिया। दोनों एक ही दिशा में लेटे हुए थे। करण ने पीछे से उसकी चूत में प्रवेश किया।

"तेरी ये चर्बी वाली बॉडी... सच में कमाल है। तू तो बिल्कुल असली रंडी लगती है," करण ने गालियां देते हुए कहा।

चैताली ने अपनी आंखें मूँद लीं। वह केवल शारीरिक सुख और उस मानसिक दबाव को महसूस कर रही थी जो ये लड़के उस पर डाल रहे थे। करण ने उसे जोर-जोर से हिलाना शुरू किया। वह उसकी कमर को इतनी जोर से पकड़ रहा था कि वहां उंगलियों के निशान पड़ रहे थे।

"बोल, तुझे कैसा लग रहा है? बोल कि तू हमारी गुलाम है!" करण ने चिल्लाकर कहा।

"मैं... मैं आपकी गुलाम हूँ... आह! और तेज करो," चैताली ने अपनी कामुकता में बहते हुए जवाब दिया।

करण ने दूसरी बार के लिए उसे 'प्रोन बोन' पोजीशन में डाला। चैताली पेट के बल पूरी तरह सपाट लेट गई। करण उसके ऊपर चढ़ा और अपने पूरे वजन के साथ अंदर घुसा। चैताली का चेहरा गद्दे में दबा हुआ था, और वह केवल घुटनों के बल टिककर अपनी कमर को ऊपर उठा रही थी।

"ये देख, कैसे हिल रही है ये मोटी," करण ने बाकी लड़कों की ओर देखते हुए कहा।

बाकी लड़के हंस रहे थे और अपनी उत्तेजना को देख रहे थे। करण ने उसे बुरी तरह पटका। हर धक्के के साथ चैताली का शरीर आगे-पीछे हो रहा था। कंडोम के कारण होने वाला घर्षण अब और भी तीव्र हो गया था।

"तुम रुकना मत," करण ने हांफते हुए कहा, उसकी उंगलियां चैताली की जांघों पर मजबूती से जमी थीं, जैसे वह उसे अपनी ओर खींच रहा हो।

कमरे की हवा भारी थी, जिसमें पसीने और उत्तेजना की मिली-जुली गंध घुली हुई थी। यह उनकी इस रात की तीसरी कोशिश थी, लेकिन इस बार वे एक अलग लय की तलाश में थे। करण ने धीरे से उसे ऊपर उठाया और अपनी जांघों के बीच, 'रिवर्स काउगर्ल' पोजीशन में बिठाया। चैताली अब उसकी तरफ मुंह करके बैठी थी, उसकी नजरें सीधे करण की आंखों में थीं, जिनमें बेतहाशा चाहत और कामवासना का मिश्रण था।

चैताली ने अपने हाथों को करण के सीने पर टिका दिया ताकि वह अपना संतुलन बना सके। उसकी सांसें तेज थीं, और वह धीरे-धीरे अपनी कमर को एक लयबद्ध तरीके से ऊपर-नीचे करना शुरू किया। यह गति धीमी थी, लेकिन असर गहरा था। जैसे-जैसे वह नीचे झुकती, उसका पूरा वजन करण के उत्तेजित लन्ड  पर पड़ता, जिससे वह दबाव और भी तीव्र हो जाता। वह महसूस कर सकती थी कि कैसे वह उसे गहराई तक दबा रही थी, और करण के चेहरे पर दर्द और आनंद का एक अजीब सा संगम था।

हर बार जब वह ऊपर उठती, तो एक पल के लिए दोनों के बीच एक खालीपन आता, और फिर वह पूरी ताकत से नीचे आती, जिससे वह दबाव और भी ज्यादा महसूस होता। करण की कमर बिस्तर की चादर में धंसी हुई थी, और वह बस चैताली के इस खेल को महसूस कर रहा था, जो अपनी मर्जी से इस तीव्रता को नियंत्रित कर रही थी। उनकी सांसों की आवाज अब कमरे के सन्नाटे को चीर रही थी, और यह सिलसिला इस तरह आगे बढ़ा जैसे समय रुक गया हो। "हाँ, ऐसे ही। अपनी पूरी चर्बी का इस्तेमाल कर," करण ने उसके कूल्हों को पकड़कर नीचे खींचते हुए कहा।

चैताली की सांसें अब बहुत तेज हो गई थीं। उसका पूरा शरीर पसीने से चमक रहा था। उसके बूब्स उसके पेट से रगड़ रहे थे। जब करण ने अपना काम पूरा किया, तो वह बुरी तरह हांफ रहा था।
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RE: एक रंडी की दास्तान-The story of a corporate whore - by MohdIqbal - 19-08-2026, 11:47 PM



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