19-08-2026, 05:44 AM
अंकल का शरीर पूरी तरह से अकड़ गया था और उनकी नसें उभड़कर बाहर आ गई थीं। उन्होंने मम्मी के पिछले छेद को अपने लंड से इतनी ज़ोर से जकड़ लिया था कि ऐसा लग रहा था जैसे वे उनके शरीर के भीतर समा जाएंगे। "आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!" अंकल एक जंगली दहाड़ के साथ चिल्लाए और उन्होंने मम्मी के कूल्हों को अपनी ओर खींचते हुए अपना सारा वीर्य उनके गुदा के अंदर गहराई तक उगल दिया।
मम्मी का शरीर एक ज़ोरदार झटके के साथ धनुष की तरह मुड़ गया। उनके मुँह से एक लंबी और बेजान सिसकी निकली "उह्ह्ह्ह... आह्ह्ह्ह..."। उनके पिछले छेद के अंदर अंकल का गरम और गाढ़ा वीर्य तेज़ी से भर रहा था। मम्मी को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे उनके अंदर कोई गर्म लावा बह रहा हो। वे दर्द और बेइंतहा सुख के उस चरम पर थीं जहाँ दिमाग काम करना बंद कर देता है।
अंकल ने अपना लंड बाहर निकाला, जिससे एक गंदी 'पॉप' की आवाज़ आई। मम्मी के पिछले छेद से सफेद और गाढ़ा वीर्य एक धार की तरह बाहर बहने लगा और उनके सुडौल नितंबों के बीच से फिसलकर चादर को गंदा करने लगा। मम्मी बिस्तर पर बेसुध सी पड़ी थीं, उनकी आँखें आधी खुली थीं और साँसें अभी भी तेज़ चल रही थीं। उनका पिछवाड़ा अभी भी उस गहरे प्रहार के कारण कांप रहा था।
कमरे में सन्नाटा छा गया था, बस दोनों की भारी साँसों की आवाज़ आ रही थी। रवि, जो अब तक स्तब्ध होकर यह सब देख रहा था, अपनी फटी आँखों से मम्मी के उस गंदे और वीर्य से लथपथ पिछले हिस्से को देख रहा था। लेकिन यह अंत नहीं था। अंकल ने मम्मी के कांपते हुए शरीर को देखा और उनकी आँखों में फिर से वही वासना जाग उठी। उन्होंने मम्मी के कान के पास झुककर फुसफुसाया, "अभी तो सिर्फ शुरुआत हुई है, अब तुम्हारी चूत की बारी है।"
अंकल की आवाज़ में जो भारीपन और वासना थी, उसने मम्मी के शरीर में एक नई लहर दौड़ा दी। मम्मी ने अपनी धुंधली आँखों से अंकल की ओर देखा, उनके चेहरे पर अभी भी चरम सुख की थकावट और उत्तेजना के निशान थे। "भाई साब... आप... आह्ह्ह..." मम्मी की आवाज़ लड़खड़ा रही थी, लेकिन उनकी आँखों में भी अब एक गंदी प्यास झलक रही थी।
अंकल ने बिना एक पल गंवाए मम्मी के गीले और चिपचिपे शरीर पर अपना हाथ फेरा। उन्होंने मम्मी के दोनों पैरों को और ज़ोर से फैलाया और उनके सुडौल नितंबों को अपने हाथों में भरकर अलग कर दिया। अब मम्मी का सामने वाला हिस्सा उनकी भीगी हुई और लाल पड़ चुकी चूत पूरी तरह से अंकल के सामने खुली हुई थी। 'चप... चप...' की आवाज़ तब आई जब अंकल की उँगलियाँ मम्मी की गीली योनि के बीच रगड़ने लगीं।
"उह्ह्ह... भाई साहब... वहाँ नहीं... आह्ह्ह... हाँ... वहीं..." मम्मी की सिसकियां फिर से कमरे में गूँजने लगीं। उनकी चूत अंकल के स्पर्श से और भी ज़्यादा गीली हो रही थी। अंकल ने अपना हाथ नीचे किया और मम्मी की चूत के छेद को उँगलियों से टटोलना शुरू किया। वे देख रहे थे कि कैसे मम्मी का शरीर हर स्पर्श पर कांप रहा है।
रवि भी अब अपनी जगह से हिल नहीं पा रहा था। वह देख रहा था कि कैसे अंकल अब मम्मी के सामने वाले हिस्से पर हमला करने की तैयारी कर रहे हैं। अंकल ने अपना हाथ अपनी पैंट के अंदर डाला और अपना फिर से खड़ा हुआ, मोटा और पसीने से लथपथ लंड बाहर निकाला। वह अब पहले से भी ज़्यादा बड़ा और सख्त लग रहा था। अंकल ने मम्मी की जांघों को अपने कंधों पर टिकाया और अपना लंड मम्मी की गीली चूत के मुहाने पर टिका दिया। "अब देखो तुम्हारी चूत कैसे मेरा लंड सोखती है," अंकल ने गुर्राते हुए कहा
अंकल ने बिना किसी चेतावनी के अपना मोटा और सख्त लंड मम्मी की गीली चूत के छेद पर ज़ोर से टिकाया और एक ही झटके में उसे पूरा अंदर तक धकेल दिया। "आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!" मम्मी के मुँह से एक ऐसी चीख निकली जो दर्द और बेइंतहा कामुकता का मिश्रण थी। उनकी आँखें पूरी तरह से ऊपर चढ़ गईं और शरीर में एक ज़ोरदार झटका लगा। उनका योनि मार्ग अंकल के भारी लंड के दबाव से पूरी तरह से फैल गया था।
'चप... चप... चप...' की गंदी और गीली आवाज़ें अब और भी तेज़ हो गईं। अंकल अब पागलों की तरह मम्मी की चूत में अपने लंड को अंदर बाहर करने लगे। हर प्रहार के साथ मम्मी का शरीर बिस्तर पर बुरी तरह उछल रहा था। "भाई साहब... आह्ह्ह... बहुत बड़ा है... उह्ह्ह... मेरी चूत फट जाएगी... आआआह्ह्ह!" मम्मी की सिसकियां अब बेकाबू होकर चीखों में बदल चुकी थीं। उनके सुडौल नितंब अंकल के पेट से बार बार टकरा रहे थे, जिससे 'पटक... पटक...' की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी।
मम्मी का योनि मार्ग अंकल के लंड के घर्षण से बुरी तरह गर्म और सूज गया था। उनके शरीर से निकलने वाला प्राकृतिक चिकना पदार्थ और अंकल के लंड का घर्षण मिलकर एक गंदी और चिपचिपी आवाज़ पैदा कर रहे थे। अंकल ने मम्मी की कमर को कसकर पकड़ लिया और उनकी गति को और भी हिंसक बना दिया। वे अब मम्मी के शरीर के अंदर अपना साम्राज्य स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे।
मै यह सब देखकर पूरी तरह से मदहोश हो चुका था। वह देख रहा था कि कैसे मम्मी का सुडौल शरीर अंकल के हर झटके के साथ कांप रहा है और कैसे उनकी चूत से निकलने वाला तरल पदार्थ बिस्तर की चादर को गीला कर रहा है। कमरे में पसीने, योनि के तरल पदार्थ और वासना की एक भारी गंध भर गई थी।
अंकल की गति अब पूरी तरह से अनियंत्रित और हिंसक हो चुकी थी। वे अब किसी इंसान की तरह नहीं, बल्कि एक भूखे जानवर की तरह मम्मी के शरीर पर टूट पड़े थे। 'पटक... पटक... पटक...' की आवाज़ इतनी तेज़ थी कि ऐसा लग रहा था जैसे कमरे की दीवारें भी उस वासना की गूँज से हिल रही हों। मम्मी का सुडौल शरीर हर प्रहार के साथ बिस्तर पर बुरी तरह टकरा रहा था और उनकी चीखें अब एक बेकाबू संगीत बन चुकी थीं।
"आह्ह्ह... प्रदीप भाई साहब... बस... अब और नहीं... आह्ह्ह्ह! मैं मर जाऊँगी... उह्ह्ह... आह्ह्ह्ह!" मम्मी का गला चीखों से बैठ चुका था, लेकिन उनका शरीर अंकल के लंड की गहराई को महसूस करने के लिए और भी ज़्यादा छटपटा रहा था। उनकी चूत से निकलने वाला गाढ़ा और चिपचिपा तरल पदार्थ अंकल के लंड के साथ मिलकर एक गंदी 'चप चप' की आवाज़ पैदा कर रहा था।
अंकल ने मम्मी की कमर को अपने हाथों से इतनी ज़ोर से जकड़ लिया था कि उनकी उँगलियाँ मम्मी के कोमल मांस में धँस गई थीं। वे अब अपनी पूरी ताकत झोंक रहे थे। "मम्मी... अब... अब मैं निकलने वाला हूँ... अपनी चूत को कस लो... आह्ह्ह्ह!" अंकल दहाड़े। उनका चेहरा पसीने से तर था और उनकी आँखें पूरी तरह से सफेद हो चुकी थीं।
तभी अंकल ने एक आखिरी और सबसे ज़ोरदार प्रहार किया और अपना पूरा वजन मम्मी के ऊपर डाल दिया। "आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!" अंकल के शरीर में एक ज़ोरदार कंपन हुआ और उन्होंने मम्मी की चूत की गहराई में अपना सारा गरम और गाढ़ा वीर्य उगल दिया। मम्मी का शरीर एक ज़ोरदार झटके के साथ धनुष की तरह मुड़ गया और वे अपनी चरम सुख की लहर में बेसुध होकर पीछे की ओर गिर गईं।
अंकल और मम्मी दोनों ही पूरी तरह से चरम सुख की उस लहर में बह गए थे जहाँ शरीर का नियंत्रण खत्म हो जाता है। अंकल ने अपना भारी और पसीने से लथपथ शरीर मम्मी के ऊपर ही टिका दिया। उनकी साँसें अभी भी किसी तेज़ दौड़ के बाद की तरह उखड़ी हुई और भारी थीं। मम्मी का शरीर अभी भी थरथरा रहा था और उनकी आँखें छत को ताक रही थीं, जैसे वे अभी भी उस अकल्पनीय सुख के बाद के शून्य में तैर रही हों।
कमरे में एक भारी सन्नाटा छा गया था, जिसमें सिर्फ दोनों की तेज़ चलती साँसों की आवाज़ आ रही थी। मम्मी के सुडौल शरीर पर अंकल के पसीने और उनके खुद के तरल पदार्थों की एक चिपचिपी परत जम गई थी। अंकल ने धीरे से अपना सिर उठाया और मम्मी के माथे पर एक पसीने से तर चुंबन दिया। "तुम... तुम बहुत लाजवाब हो," अंकल ने बहुत ही धीमी और थकी हुई आवाज़ में फुसफुसाया।
मम्मी ने बहुत मुश्किल से अपनी आँखें खोलीं और अंकल की ओर देखा। उनके चेहरे पर एक अजीब सी संतुष्टि और थकान का मिश्रण था। उन्होंने अपना हाथ धीरे से उठाकर अंकल के गाल पर फेरा। "भाई साहब... आपने तो मुझे तोड़ ही दिया," उन्होंने एक हल्की सी मुस्कान के साथ कहा, जो उनकी आवाज़ में अभी भी कामुकता का हल्का सा अंश छोड़ रही थी।
दोनों का शरीर एक दूसरे से लिपटा हुआ था। अंकल और मम्मी के बीच का वह अंतर अब पूरी तरह मिट चुका था। वे दोनों एक ऐसी दुनिया में पहुँच गए थे जहाँ सिर्फ वासना और उसका परिणाम बचा था। अंकल ने मम्मी को अपनी बाहों में और कस लिया और वे दोनों एक दूसरे की गर्माहट में खो गए।
रवि कमरे के अंधेरे कोने में बिल्कुल जड़वत खड़ा था, उसकी साँसें इतनी तेज़ और भारी थीं कि उसे डर था कहीं उनकी आवाज़ मम्मी तक न पहुँच जाए। उसकी आँखें फटी की फटी रह गई थीं। वह देख रहा था कि कैसे अंकल और मम्मी एक दूसरे में पूरी तरह खोए हुए थे, लेकिन अब अंकल ने कुछ ऐसा किया जिसे देखकर रवि के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
अंकल ने धीरे से मम्मी के शरीर को थोड़ा ऊपर उठाया और खुद उनके शरीर के नीचे झुक गए। रवि ने देखा कि अंकल का चेहरा मम्मी की जाँघों के बीच की उस गीली और लाल पड़ चुकी जगह की ओर बढ़ रहा था। रवि की धड़कनें उसके कानों में हथौड़े की तरह बज रही थीं। जैसे ही अंकल ने अपनी जीभ से मम्मी की चूत के उस संवेदनशील हिस्से को छुआ, रवि के मुँह से एक दबी हुई सिसकी निकली,सीईईईई ahhhhhhhhhhhh।
अंकल अब पूरी तरह से मम्मी की योनि को अपनी जीभ से चाट रहे थे। रवि देख पा रहा था कि कैसे अंकल की जीभ उस गीलेपन और गाढ़े वीर्य के बीच बार बार ऊपर नीचे हो रही थी। 'स्लर्प... स्लर्प...' की वह गंदी और गीली आवाज़ कमरे के सन्नाटे में रवि के कानों में किसी नशीले संगीत की तरह गूँज रही थी। अंकल का मुँह पूरी तरह से मम्मी की चूत के अंदर धँसा हुआ था, और वे बड़े ही बेरहमी और भूख के साथ उसे चूस रहे थे।
एरी नज़रें अंकल के सिर और मम्मी के काँपते हुए शरीर पर टिकी थीं। वह देख रहा था कि कैसे अंकल की जीभ मम्मी की चूत के अंदर गहराई तक जा रही थी और फिर बाहर निकलकर उस गीलेपन को पूरी तरह सोख रही थी। मम्मी का शरीर हर बार जब अंकल की जीभ उनके अंदर ज़ोर से प्रहार करती, तो वे बिस्तर पर छटपटा उठतीं, लेकिन अंकल ने अपना काम जारी रखा। मेरा अपना अंग उसकी पैंट में तंग हो चुका था और मैं बस यही चाहता था कि यह नज़ारा कभी खत्म न हो।
रवि की आँखों के सामने जो नज़ारा था, वह किसी पागलपन से कम नहीं था। वह देख रहा था कि कैसे अंकल अब और भी ज़्यादा बेकाबू हो गए थे। अंकल का सिर मम्मी की जाँघों के बीच इस कदर धँसा हुआ था कि उनकी गर्दन के बाल मम्मी के सुडौल नितंबों को छू रहे थे। अंकल की जीभ अब सिर्फ ऊपर नीचे नहीं कर रही थी, बल्कि वे मम्मी के क्लिटोरिस को अपने होंठों के बीच भरकर पूरी ताकत से चूस रहे थे।
'स्लर्प... चप... चप...' की वह गंदी और रसीली आवाज़ अब और भी तेज़ हो गई थी। रवि देख पा रहा था कि कैसे अंकल का मुँह मम्मी की योनि के गीलेपन से पूरी तरह लथपथ हो गया था। जब भी अंकल अपना मुँह पीछे खींचते, तो एक लंबी और चिपचिपी लार की लकीर मम्मी की चूत से निकलकर अंकल के होंठों तक आती थी। मम्मी का शरीर अब नियंत्रण से बाहर हो रहा था। वे अपनी कमर को ऊपर की ओर झटका दे रही थीं, जैसे वे अंकल के मुँह को और गहराई तक अपने अंदर खींचना चाहती हों।
मम्मी के मुँह से अब दबी हुई, कराहती हुई आवाज़ें निकलने लगी थीं। "आह्ह्ह... अंकल... उह्ह्ह..." वे अपनी आँखें मूँदकर और अपना सिर पीछे की ओर झुकाकर उस चरम सुख को महसूस कर रही थी ।मेरी नज़रें अब मम्मी के चेहरे के भावों और अंकल के कामुक तरीके से चूसने की क्रिया पर टिकी थीं। वह देख रहा था कि कैसे अंकल की जीभ बार बार उस गीली और लाल जगह के अंदर धँस रही थी और फिर बाहर निकलकर सारा रस सोख रही थी।
मेरा अपना शरीर पसीने से तर बतर हो चुका था। मेरी पैंट के अंदर मेरा अंग इतना सख्त और दर्दनाक हो गया था कि मुझे लग रहा था वह फट जाएगा। वह बस वहीं खड़ा होकर, साँसें थामे, इस गंदी और रसीली क्रिया को देख रहा था, जहाँ अंकल पूरी तरह से मम्मी के शरीर के रस में डूबे हुए थे।
मेरी आँखों के सामने जो हो रहा था, वह उसकी कल्पनाओं की सीमाओं को तोड़ रहा था। वह देख पा रहा था कि अंकल अब रुकने वाले नहीं थे। अंकल की जीभ की गति अब और भी तेज़ और हिंसक हो गई थी। वे मम्मी की योनि के अंदर अपनी जीभ को किसी मशीन की तरह बार बार अंदर बाहर कर रहे थे। 'स्लर्प... स्लर्प... चप...' की वह रसीली और गंदी आवाज़ अब कमरे की दीवारों से टकराकर रवि के कानों में गूँज रही थी।
मैंने देखा कि मम्मी का शरीर अब पूरी तरह से काँप रहा था। उनकी उँगलियाँ चादर को इतनी ज़ोर से जकड़ चुकी थीं कि उनके नाखून सफेद पड़ गए थे। जब अंकल ने अपनी जीभ से मम्मी के क्लिटोरिस पर ज़ोर से दबाव डाला और उसे अपने मुँह में भरकर ज़ोर से चूसना शुरू किया, तो मम्मी के शरीर में एक ज़ोरदार झटका लगा। "आह्ह्ह्ह... उह्ह्ह... भाई साब... मैं... मैं जा रही हूँ... आह्ह्ह्ह!" मम्मी की आवाज़ में एक बेइंतहा दर्द और सुख का मिश्रण था।
मेरी नज़रें मम्मी के उस हिस्से पर टिकी थीं जहाँ अंकल का चेहरा लगा हुआ था। वह देख पा रहा था कि कैसे मम्मी की चूत से निकलने वाला गाढ़ा और पारदर्शी रस अंकल के चेहरे और उनकी ठुड्डी पर फैल गया था। अंकल ने अब अपनी उँगलियाँ भी मम्मी की योनि के अंदर डाल दी थीं, जिससे वह जगह और भी ज़्यादा फैल गई थी और चूसने की आवाज़ और भी गंदी हो गई थी।
अचानक, मम्मी का पूरा शरीर अकड़ गया। उनकी पीठ बिस्तर से ऊपर उठ गई और वे ज़ोर से कराह उठीं। रवि ने देखा कि कैसे मम्मी का शरीर चरम सुख (orgasm) की लहरों में डूब रहा था। अंकल ने उस समय अपना मुँह और भी ज़ोर से उनकी चूत पर टिका दिया, जैसे वे मम्मी के शरीर से निकलने वाले उस अंतिम रस की एक एक बूंद को अपने मुँह में सोख लेना चाहते हों। रवि का अपना अंग अब इतना सख्त हो गया था कि उसे अपनी पैंट के अंदर असहनीय दर्द महसूस हो रहा था, लेकिन वह अपनी नज़रें उस गंदे और कामुक नज़ारे से हटा नहीं पा रहा था।
मम्मी के चरम सुख की लहरें अभी थमी भी नहीं थीं कि मैंने देखा कि अंकल का संयम अब पूरी तरह टूट चुका था। मम्मी का शरीर अभी भी थरथरा रहा था और उनकी योनि से निकलने वाला रस अंकल के चेहरे को पूरी तरह गीला कर चुका था। मेरी साँसें इतनी तेज़ थीं कि उसे अपने सीने में भारीपन महसूस हो रहा था।
अंकल ने धीरे से अपना सिर मम्मी की जाँघों के बीच से ऊपर उठाया। उनका चेहरा पूरी तरह से मम्मी के शरीर के रस और लार से लथपथ था। रवि ने देखा कि कैसे अंकल की ठुड्डी से मम्मी का गाढ़ा और चिपचिपा रस टपक कर उनके सीने पर गिर रहा था। अंकल की आँखों में एक जंगली चमक थी। उन्होंने मम्मी की आँखों में देखा, जो अब भी आधी खुली और मदहोश थीं।
अंकल ने बिना एक शब्द बोले अपनी पैंट की ज़िप खोली। मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं जब मैंने देखा कि अंकल का विशाल और सख्त अंग बाहर निकला। वह पूरी तरह से नीला और नसें उभरी हुई थी, जो उत्तेजना से पत्थर की तरह सख्त हो चुका था। मैने देखा कि अंकल ने मम्मी के पेट के पास अपना अंग रगड़ना शुरू कर दिया। 'स्लर्प... घिस... घिस...' की वह आवाज़ अब अंकल के अंग और मम्मी की गीली जाँघों के बीच से आ रही थी।
मम्मी ने अपनी आँखें खोलीं और अंकल के उस सख्त अंग को देखा। उनके चेहरे पर एक नई तरह की प्यास उभर आई। उन्होंने अपना एक हाथ धीरे से बढ़ाकर अंकल के उस गर्म और तने हुए अंग को सहलाया। मैं यह सब देख रहा था और मुझे महसूस हो रहा था कि उसका अपना अंग अब उसकी पैंट को फाड़कर बाहर निकलने को बेताब है। मै देख रहा था कि कैसे अंकल अब मम्मी के शरीर के ऊपर पूरी तरह हावी हो रहे थे, और कमरे का तापमान उस कामुकता और पसीने की गंध से और भी बढ़ गया था।
एरी साँसें अब पूरी तरह से उखड़ चुकी थीं। मैनेदेखा कि अंकल ने अब और इंतज़ार नहीं किया। उन्होंने मम्मी की दोनों टांगों को अपने कंधों पर उठा लिया, जिससे मम्मी की गुलाबी और रसीली योनि अब पूरी तरह से अंकल के विशाल अंग के सामने खुली हुई थी। मम्मी की चूत अभी भी चरम सुख के बाद से गीली और लाल थी, और उस पर अंकल के लार और उनके रस की चमक साफ़ देखी जा सकती थी।
अंकल ने अपने सख्त और नसदार अंग के सिरे को मम्मी के गीले मुहाने पर टिकाया। अंकल का अंग मम्मी के मांस को हल्का सा दबा रहा था। फिर, एक झटके के साथ, अंकल ने अपना पूरा अंग मम्मी के अंदर धकेल दिया। "आह्ह्ह्ह्ह्ह! उह्ह्ह्ह्ह!" मम्मी के मुँह से एक ऐसी चीख निकली जो दर्द और बेइंतहा सुख का मिला जुला मिश्रण थी। उनका शरीर बिस्तर पर धनुष की तरह तन गया।
'पच... पच... पच...' की वह गंदी और भारी आवाज़ अब पूरे कमरे में गूँजने लगी थी। जैसे ही अंकल ने अपना अंग अंदर बाहर करना शुरू किया, मम्मी की योनि और अंकल के अंग के बीच से निकलने वाला सफ़ेद और पारदर्शी रस चारों तरफ बिखरने लगा। मै अच्छे से देख पा रहा था कि कैसे अंकल का अंग मम्मी के अंदर गहराई तक जा रहा था और फिर बाहर निकलते समय मम्मी की योनि की दीवारों को खींचकर ला रहा था।
अंकल अब पूरी ताकत से और तेज़ी से वार कर रहे थे। उनकी छाती मम्मी के सुडौल स्तनों से बार बार टकरा रही थी। 'थप... थप... थप...' की आवाज़ अब और भी तेज़ हो गई थी। मम्मी का चेहरा अब पूरी तरह से पसीने और वासना से भीगा हुआ था। उनकी आँखें ऊपर की ओर चढ़ गई थीं और वे बस अंकल के इस हिंसक प्रहार को महसूस कर रही थीं। रवि की आँखों के सामने यह नज़ारा किसी ज्वालामुखी के फटने जैसा था कच्चा, गंदा और बेहद उत्तेजक।
अंकल की गति अब नियंत्रण से बाहर हो चुकी थी। वे अब किसी जानवर की तरह मम्मी के शरीर पर टूट पड़े थे। उनके हर वार के साथ मम्मी का शरीर बिस्तर पर पीछे की ओर धकेला जा रहा था। 'पच... पच... पच... चप...' की वह रसीली और गंदी आवाज़ अब कमरे में एक लय बना चुकी थी। मम्मी के सुडौल स्तन अंकल के सीने से टकराकर बुरी तरह हिल रहे थे, और उनके निप्पल अब पूरी तरह से सख्त और लाल हो चुके थे।
"भाई साहब... और... और तेज़... उह्ह्ह्ह... हाँ... वहीं... आह्ह्ह्ह!" मम्मी की आवाज़ अब पूरी तरह से वासना में डूबी हुई थी। वे अब शर्म महसूस नहीं कर रही थीं, वे बस उस जानवर जैसे सुख की भूखी थीं। अंकल ने मम्मी की कमर को अपने हाथों से इतनी ज़ोर से जकड़ लिया था कि उनके उँगलियों के निशान मम्मी की कोमल त्वचा पर साफ़ दिखाई दे रहे थे।
मेरा दिमाग अब काम करना बंद कर चुका था। मै देख रहा था कि कैसे अंकल का अंग मम्मी की योनि के अंदर गहराई तक जा रहा था और बाहर निकलते समय वह हिस्सा पूरी तरह से मम्मी के रस से लथपथ होकर चमक रहा था। मैने देखा कि मम्मी की योनि के चारों ओर का मांस अब अंकल के अंग के घर्षण से सूजन की तरह लाल हो गया था।
अचानक, अंकल ने अपनी गति को और भी हिंसक बना दिया। वे अब मम्मी के ऊपर पूरी तरह से हावी होकर, अपने पूरे शरीर का भार उन पर डालकर वार कर रहे थे। मम्मी का सिर बिस्तर पर बार बार पीछे की ओर टकरा रहा था, लेकिन उन्हें अब सिर्फ उस चरम सुख की तलाश थी। मैने देखा कि अंकल के चेहरे पर भी एक अजीब सी तड़प थी, जैसे वे बस अब अपने भीतर के उस गर्म लावा को मम्मी के शरीर के अंदर छोड़ देना चाहते हों।
अंकल और मम्मी दोनों ही चरम सुख की दहलीज पर थे, लेकिन वे रुकने के मूड में नहीं थे। वे पहले ही कई बार डिस्चार्ज हो चुके थे, लेकिन अब उनकी वासना एक जंगली जानवर की तरह बेकाबू हो चुकी थी। अब वे सिर्फ सुख नहीं, बल्कि एक दूसरे को पूरी तरह से निगल जाने की कोशिश कर रहे थे।
अंकल ने मम्मी की टांगों को अपने कंधों पर इतनी ज़ोर से टिका दिया कि उनके घुटने मुड़ गए। अब अंकल का अंग मम्मी की योनि के अंदर एक मशीन की तरह बिना रुके, बेहद हिंसक और तेज़ गति से धँस रहा था। 'पच... पच... पच... चप!' की वह गंदी और रसीली आवाज़ अब कमरे की दीवारों से टकराकर गूँज रही थी। मम्मी का सुडौल शरीर हर वार के साथ बिस्तर पर बुरी तरह उछल रहा था।
"उह्ह्ह्ह... हाँ भी साब! ऐसे ही... मारो मुझे... तोड़ दो मुझे! आह्ह्ह्ह!" मम्मी की आवाज़ अब पूरी तरह से गंदी और अश्लील हो चुकी थी। वे अब किसी सभ्य महिला की तरह नहीं, बल्कि एक ऐसी औरत की तरह चिल्ला रही थीं जो सिर्फ वासना के लिए बनी है। "आपका अंग... कितना बड़ा और गरम है... मेरे अंदर सब कुछ भर दो... आह्ह्ह्ह!"
अंकल भी अब अपनी पूरी ताकत लगा रहे थे। उनके चेहरे पर पसीना और वासना का पागलपन था। वे मम्मी के कान के पास झुककर गंदी और फूहड़ बातें करने लगे, "देख रही हो इस सुडौल शरीर को? तुम्हारी योनि कितनी तंग और गरम है... मेरा अंग इसमें डूबकर पागल हो रहा है! मैं तुम्हें पूरी तरह बर्बाद कर दूँगा!"
मम्मी ने अंकल के बालों को ज़ोर से खींचते हुए कहा, "हाँ प्रदीप भाई साहब... और तेज़! मुझे अपना सारा गंदा रस मेरे अंदर डाल दो... मुझे गंदा कर दो! आह्ह्ह्ह... मैं मर जाऊँगी इस सुख से!"
अंकल की गति अब इतनी तेज़ हो गई थी कि उनके शरीर का मांस मम्मी के मांस से टकराकर लाल पड़ गया था। अचानक, अंकल का शरीर एक ज़ोरदार झटके के साथ अकड़ गया। वे मम्मी के शरीर के भीतर गहराई तक धँस गए और एक भयानक गर्जना के साथ अपना सारा गाढ़ा और गर्म वीर्य मम्मी की गर्भाशय की गहराई में छोड़ दिया।
उसी पल मम्मी का शरीर भी थरथराने लगा। उनकी योनि की मांसपेशियाँ अंकल के अंग को इतनी ज़ोर से जकड़ लिया कि अंकल की चीख निकल गई। मम्मी का डिस्चार्ज भी उनके शरीर से एक फव्वारे की तरह निकलकर बिस्तर को पूरी तरह भिगोने लगा। दोनों एक दूसरे से लिपटकर, पसीने और वीर्य में लथपथ लेट गए।
कमरे में व्याप्त वह भारी और गंदी गंध अब और भी तीव्र हो गई थी। अंकल का अंग अभी भी मम्मी की योनि के भीतर गहराई तक धँसा हुआ था, जहाँ वे दोनों एक दूसरे के चरम सुख के अवशेषों को महसूस कर रहे थे। मम्मी का शरीर अभी भी छोटे छोटे झटकों के साथ काँप रहा था, और उनके जननांगों से निकलने वाला तरल पदार्थ अंकल के अंग के साथ मिलकर बिस्तर की चादर पर एक बड़ा सा गीला धब्बा बना रहा था।
दोनों की साँसें अब धीरे धीरे सामान्य होने लगी थीं, लेकिन उनके बीच का तनाव और वासना की वह गूँज अभी भी हवा में तैर रही थी। अंकल ने धीरे से अपना शरीर मम्मी के ऊपर से हटाया, जिससे एक 'चप' की आवाज़ के साथ उनका अंग मम्मी के गीले और सूजे हुए द्वार से बाहर निकला। मम्मी ने अपनी आँखें खोलीं, जो अभी भी धुंधली और कामुकता से भरी थीं। उन्होंने एक गहरी और थकी हुई आह भरी और अपने बिखरे हुए बालों को पीछे किया।
कमरे में पसरा सन्नाटा अब केवल उनकी भारी साँसों और शरीर से टपकते पसीने की बूंदों की आवाज़ से टूट रहा था। वह दृश्य पूरी तरह से कच्चा, अनफ़िल्टर्ड और वासना से लथपथ था एक ऐसा अंत जो किसी भी मर्यादा को तोड़ चुका था।
उस भीषण और जंगली समागम के बाद, कमरे में एक भारी और मदहोश कर देने वाली शांति छा गई थी। मम्मी पूरी तरह से थककर चूर हो चुकी थीं। उनका शरीर पसीने से भीगा हुआ था और उनकी साँसें अभी भी उखड़ी हुई थीं। वे बेड के बीचों बीच बेसुध सी पड़ी थीं, जैसे किसी गहरे समुद्र में डूब गई हों। उनके चेहरे पर एक अजीब सा सुकून और थकावट का मिला जुला भाव था।
अंकल उनके बिल्कुल बगल में थे। उनका भारी शरीर मम्मी के शरीर से सटा हुआ था। उन्होंने एक हाथ मम्मी की कमर पर रखा हुआ था, जैसे सोते हुए भी वे उन्हें अपनी गिरफ्त में रखना चाहते हों। उनके शरीर की गर्मी मम्मी के ठंडे पड़ते शरीर को गर्माहट दे रही थी। अंकल की गहरी और भारी साँसें मम्मी के कंधे से टकरा रही थीं।
और मैं? मैं वहीं अंधेरे के एक कोने में, कम्बल के नीचे सिमटा हुआ था। मेरी आँखें खुली थीं, लेकिन मेरा शरीर सुन्न पड़ चुका था। जो मैंने देखा था, उसने मेरे दिमाग के सारे न्यूरॉन्स को झकझोर कर रख दिया था। मैं बस उन तीनों को एक साथ देख रहा था मम्मी का वो बेसुध शरीर, अंकल की वो भारी मौजूदगी, और उनके बीच का वो अनकहा संबंध।
कमरे में केवल उनकी साँसों की आवाज़ आ रही थी। मम्मी का शरीर बीच बीच में हल्का सा काँप जाता, शायद उस चरम सुख की यादों की वजह से जो उन्होंने अभी अभी महसूस किया था। अंकल और मम्मी एक दूसरे की गर्मी में लिपटे हुए थे, और मैं उस दृश्य का मूक गवाह बनकर बस उनकी लयबद्ध साँसों को सुन रहा था। उस पल में, हम तीनों एक ही धुन में थे, एक ही गहरी नींद की आगोश में समाने की कोशिश कर रहे थे।
*** वह सब कुछ जो मेरी आँखों के सामने हुआ था था, वह किसी फिल्म की तरह मेरे दिमाग में तेज़ी से चल रहा था। उन दृश्यों की तीव्रता, वह शोर, वह वासना और वह सब कुछ इतना गहरा और वास्तविक था कि मेरा दिमाग उस पर काबू नहीं रख पा रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे मैं किसी सपने और हकीकत के बीच की धुंधली रेखा पर खड़ा हूँ। वह सब कुछ एक फिल्म की तरह मेरी आँखों के सामने घूम रहा था हर एक हरकत, हर एक आवाज़ और वह सब कुछ जो मेरी कल्पनाओं से भी परे था।
उसी मानसिक उथल पुथल और उन दृश्यों के भारीपन के बीच, धीरे धीरे मेरी चेतना कम होने लगी। मेरी पलकें भारी होने लगीं और वह सब कुछ जो मेरे दिमाग में चल रहा था, धुंधला पड़ता गया। जैसे किसी ने मुझे गहरी नींद की आगोश में खींच लिया हो। मुझे पता ही नहीं चला कि कब वह फिल्म की तरह चलता हुआ नज़ारा मेरे दिमाग से ओझल हुआ और कब मैं नींद के उस गहरे और काले अंधेरे में समा गया। मेरा शरीर ढीला पड़ता गया और मैं पूरी तरह से बेसुध होकर नींद की गोद में जा गिरा।
***
मम्मी का शरीर एक ज़ोरदार झटके के साथ धनुष की तरह मुड़ गया। उनके मुँह से एक लंबी और बेजान सिसकी निकली "उह्ह्ह्ह... आह्ह्ह्ह..."। उनके पिछले छेद के अंदर अंकल का गरम और गाढ़ा वीर्य तेज़ी से भर रहा था। मम्मी को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे उनके अंदर कोई गर्म लावा बह रहा हो। वे दर्द और बेइंतहा सुख के उस चरम पर थीं जहाँ दिमाग काम करना बंद कर देता है।
अंकल ने अपना लंड बाहर निकाला, जिससे एक गंदी 'पॉप' की आवाज़ आई। मम्मी के पिछले छेद से सफेद और गाढ़ा वीर्य एक धार की तरह बाहर बहने लगा और उनके सुडौल नितंबों के बीच से फिसलकर चादर को गंदा करने लगा। मम्मी बिस्तर पर बेसुध सी पड़ी थीं, उनकी आँखें आधी खुली थीं और साँसें अभी भी तेज़ चल रही थीं। उनका पिछवाड़ा अभी भी उस गहरे प्रहार के कारण कांप रहा था।
कमरे में सन्नाटा छा गया था, बस दोनों की भारी साँसों की आवाज़ आ रही थी। रवि, जो अब तक स्तब्ध होकर यह सब देख रहा था, अपनी फटी आँखों से मम्मी के उस गंदे और वीर्य से लथपथ पिछले हिस्से को देख रहा था। लेकिन यह अंत नहीं था। अंकल ने मम्मी के कांपते हुए शरीर को देखा और उनकी आँखों में फिर से वही वासना जाग उठी। उन्होंने मम्मी के कान के पास झुककर फुसफुसाया, "अभी तो सिर्फ शुरुआत हुई है, अब तुम्हारी चूत की बारी है।"
अंकल की आवाज़ में जो भारीपन और वासना थी, उसने मम्मी के शरीर में एक नई लहर दौड़ा दी। मम्मी ने अपनी धुंधली आँखों से अंकल की ओर देखा, उनके चेहरे पर अभी भी चरम सुख की थकावट और उत्तेजना के निशान थे। "भाई साब... आप... आह्ह्ह..." मम्मी की आवाज़ लड़खड़ा रही थी, लेकिन उनकी आँखों में भी अब एक गंदी प्यास झलक रही थी।
अंकल ने बिना एक पल गंवाए मम्मी के गीले और चिपचिपे शरीर पर अपना हाथ फेरा। उन्होंने मम्मी के दोनों पैरों को और ज़ोर से फैलाया और उनके सुडौल नितंबों को अपने हाथों में भरकर अलग कर दिया। अब मम्मी का सामने वाला हिस्सा उनकी भीगी हुई और लाल पड़ चुकी चूत पूरी तरह से अंकल के सामने खुली हुई थी। 'चप... चप...' की आवाज़ तब आई जब अंकल की उँगलियाँ मम्मी की गीली योनि के बीच रगड़ने लगीं।
"उह्ह्ह... भाई साहब... वहाँ नहीं... आह्ह्ह... हाँ... वहीं..." मम्मी की सिसकियां फिर से कमरे में गूँजने लगीं। उनकी चूत अंकल के स्पर्श से और भी ज़्यादा गीली हो रही थी। अंकल ने अपना हाथ नीचे किया और मम्मी की चूत के छेद को उँगलियों से टटोलना शुरू किया। वे देख रहे थे कि कैसे मम्मी का शरीर हर स्पर्श पर कांप रहा है।
रवि भी अब अपनी जगह से हिल नहीं पा रहा था। वह देख रहा था कि कैसे अंकल अब मम्मी के सामने वाले हिस्से पर हमला करने की तैयारी कर रहे हैं। अंकल ने अपना हाथ अपनी पैंट के अंदर डाला और अपना फिर से खड़ा हुआ, मोटा और पसीने से लथपथ लंड बाहर निकाला। वह अब पहले से भी ज़्यादा बड़ा और सख्त लग रहा था। अंकल ने मम्मी की जांघों को अपने कंधों पर टिकाया और अपना लंड मम्मी की गीली चूत के मुहाने पर टिका दिया। "अब देखो तुम्हारी चूत कैसे मेरा लंड सोखती है," अंकल ने गुर्राते हुए कहा
अंकल ने बिना किसी चेतावनी के अपना मोटा और सख्त लंड मम्मी की गीली चूत के छेद पर ज़ोर से टिकाया और एक ही झटके में उसे पूरा अंदर तक धकेल दिया। "आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!" मम्मी के मुँह से एक ऐसी चीख निकली जो दर्द और बेइंतहा कामुकता का मिश्रण थी। उनकी आँखें पूरी तरह से ऊपर चढ़ गईं और शरीर में एक ज़ोरदार झटका लगा। उनका योनि मार्ग अंकल के भारी लंड के दबाव से पूरी तरह से फैल गया था।
'चप... चप... चप...' की गंदी और गीली आवाज़ें अब और भी तेज़ हो गईं। अंकल अब पागलों की तरह मम्मी की चूत में अपने लंड को अंदर बाहर करने लगे। हर प्रहार के साथ मम्मी का शरीर बिस्तर पर बुरी तरह उछल रहा था। "भाई साहब... आह्ह्ह... बहुत बड़ा है... उह्ह्ह... मेरी चूत फट जाएगी... आआआह्ह्ह!" मम्मी की सिसकियां अब बेकाबू होकर चीखों में बदल चुकी थीं। उनके सुडौल नितंब अंकल के पेट से बार बार टकरा रहे थे, जिससे 'पटक... पटक...' की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी।
मम्मी का योनि मार्ग अंकल के लंड के घर्षण से बुरी तरह गर्म और सूज गया था। उनके शरीर से निकलने वाला प्राकृतिक चिकना पदार्थ और अंकल के लंड का घर्षण मिलकर एक गंदी और चिपचिपी आवाज़ पैदा कर रहे थे। अंकल ने मम्मी की कमर को कसकर पकड़ लिया और उनकी गति को और भी हिंसक बना दिया। वे अब मम्मी के शरीर के अंदर अपना साम्राज्य स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे।
मै यह सब देखकर पूरी तरह से मदहोश हो चुका था। वह देख रहा था कि कैसे मम्मी का सुडौल शरीर अंकल के हर झटके के साथ कांप रहा है और कैसे उनकी चूत से निकलने वाला तरल पदार्थ बिस्तर की चादर को गीला कर रहा है। कमरे में पसीने, योनि के तरल पदार्थ और वासना की एक भारी गंध भर गई थी।
अंकल की गति अब पूरी तरह से अनियंत्रित और हिंसक हो चुकी थी। वे अब किसी इंसान की तरह नहीं, बल्कि एक भूखे जानवर की तरह मम्मी के शरीर पर टूट पड़े थे। 'पटक... पटक... पटक...' की आवाज़ इतनी तेज़ थी कि ऐसा लग रहा था जैसे कमरे की दीवारें भी उस वासना की गूँज से हिल रही हों। मम्मी का सुडौल शरीर हर प्रहार के साथ बिस्तर पर बुरी तरह टकरा रहा था और उनकी चीखें अब एक बेकाबू संगीत बन चुकी थीं।
"आह्ह्ह... प्रदीप भाई साहब... बस... अब और नहीं... आह्ह्ह्ह! मैं मर जाऊँगी... उह्ह्ह... आह्ह्ह्ह!" मम्मी का गला चीखों से बैठ चुका था, लेकिन उनका शरीर अंकल के लंड की गहराई को महसूस करने के लिए और भी ज़्यादा छटपटा रहा था। उनकी चूत से निकलने वाला गाढ़ा और चिपचिपा तरल पदार्थ अंकल के लंड के साथ मिलकर एक गंदी 'चप चप' की आवाज़ पैदा कर रहा था।
अंकल ने मम्मी की कमर को अपने हाथों से इतनी ज़ोर से जकड़ लिया था कि उनकी उँगलियाँ मम्मी के कोमल मांस में धँस गई थीं। वे अब अपनी पूरी ताकत झोंक रहे थे। "मम्मी... अब... अब मैं निकलने वाला हूँ... अपनी चूत को कस लो... आह्ह्ह्ह!" अंकल दहाड़े। उनका चेहरा पसीने से तर था और उनकी आँखें पूरी तरह से सफेद हो चुकी थीं।
तभी अंकल ने एक आखिरी और सबसे ज़ोरदार प्रहार किया और अपना पूरा वजन मम्मी के ऊपर डाल दिया। "आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!" अंकल के शरीर में एक ज़ोरदार कंपन हुआ और उन्होंने मम्मी की चूत की गहराई में अपना सारा गरम और गाढ़ा वीर्य उगल दिया। मम्मी का शरीर एक ज़ोरदार झटके के साथ धनुष की तरह मुड़ गया और वे अपनी चरम सुख की लहर में बेसुध होकर पीछे की ओर गिर गईं।
अंकल और मम्मी दोनों ही पूरी तरह से चरम सुख की उस लहर में बह गए थे जहाँ शरीर का नियंत्रण खत्म हो जाता है। अंकल ने अपना भारी और पसीने से लथपथ शरीर मम्मी के ऊपर ही टिका दिया। उनकी साँसें अभी भी किसी तेज़ दौड़ के बाद की तरह उखड़ी हुई और भारी थीं। मम्मी का शरीर अभी भी थरथरा रहा था और उनकी आँखें छत को ताक रही थीं, जैसे वे अभी भी उस अकल्पनीय सुख के बाद के शून्य में तैर रही हों।
कमरे में एक भारी सन्नाटा छा गया था, जिसमें सिर्फ दोनों की तेज़ चलती साँसों की आवाज़ आ रही थी। मम्मी के सुडौल शरीर पर अंकल के पसीने और उनके खुद के तरल पदार्थों की एक चिपचिपी परत जम गई थी। अंकल ने धीरे से अपना सिर उठाया और मम्मी के माथे पर एक पसीने से तर चुंबन दिया। "तुम... तुम बहुत लाजवाब हो," अंकल ने बहुत ही धीमी और थकी हुई आवाज़ में फुसफुसाया।
मम्मी ने बहुत मुश्किल से अपनी आँखें खोलीं और अंकल की ओर देखा। उनके चेहरे पर एक अजीब सी संतुष्टि और थकान का मिश्रण था। उन्होंने अपना हाथ धीरे से उठाकर अंकल के गाल पर फेरा। "भाई साहब... आपने तो मुझे तोड़ ही दिया," उन्होंने एक हल्की सी मुस्कान के साथ कहा, जो उनकी आवाज़ में अभी भी कामुकता का हल्का सा अंश छोड़ रही थी।
दोनों का शरीर एक दूसरे से लिपटा हुआ था। अंकल और मम्मी के बीच का वह अंतर अब पूरी तरह मिट चुका था। वे दोनों एक ऐसी दुनिया में पहुँच गए थे जहाँ सिर्फ वासना और उसका परिणाम बचा था। अंकल ने मम्मी को अपनी बाहों में और कस लिया और वे दोनों एक दूसरे की गर्माहट में खो गए।
रवि कमरे के अंधेरे कोने में बिल्कुल जड़वत खड़ा था, उसकी साँसें इतनी तेज़ और भारी थीं कि उसे डर था कहीं उनकी आवाज़ मम्मी तक न पहुँच जाए। उसकी आँखें फटी की फटी रह गई थीं। वह देख रहा था कि कैसे अंकल और मम्मी एक दूसरे में पूरी तरह खोए हुए थे, लेकिन अब अंकल ने कुछ ऐसा किया जिसे देखकर रवि के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
अंकल ने धीरे से मम्मी के शरीर को थोड़ा ऊपर उठाया और खुद उनके शरीर के नीचे झुक गए। रवि ने देखा कि अंकल का चेहरा मम्मी की जाँघों के बीच की उस गीली और लाल पड़ चुकी जगह की ओर बढ़ रहा था। रवि की धड़कनें उसके कानों में हथौड़े की तरह बज रही थीं। जैसे ही अंकल ने अपनी जीभ से मम्मी की चूत के उस संवेदनशील हिस्से को छुआ, रवि के मुँह से एक दबी हुई सिसकी निकली,सीईईईई ahhhhhhhhhhhh।
अंकल अब पूरी तरह से मम्मी की योनि को अपनी जीभ से चाट रहे थे। रवि देख पा रहा था कि कैसे अंकल की जीभ उस गीलेपन और गाढ़े वीर्य के बीच बार बार ऊपर नीचे हो रही थी। 'स्लर्प... स्लर्प...' की वह गंदी और गीली आवाज़ कमरे के सन्नाटे में रवि के कानों में किसी नशीले संगीत की तरह गूँज रही थी। अंकल का मुँह पूरी तरह से मम्मी की चूत के अंदर धँसा हुआ था, और वे बड़े ही बेरहमी और भूख के साथ उसे चूस रहे थे।
एरी नज़रें अंकल के सिर और मम्मी के काँपते हुए शरीर पर टिकी थीं। वह देख रहा था कि कैसे अंकल की जीभ मम्मी की चूत के अंदर गहराई तक जा रही थी और फिर बाहर निकलकर उस गीलेपन को पूरी तरह सोख रही थी। मम्मी का शरीर हर बार जब अंकल की जीभ उनके अंदर ज़ोर से प्रहार करती, तो वे बिस्तर पर छटपटा उठतीं, लेकिन अंकल ने अपना काम जारी रखा। मेरा अपना अंग उसकी पैंट में तंग हो चुका था और मैं बस यही चाहता था कि यह नज़ारा कभी खत्म न हो।
रवि की आँखों के सामने जो नज़ारा था, वह किसी पागलपन से कम नहीं था। वह देख रहा था कि कैसे अंकल अब और भी ज़्यादा बेकाबू हो गए थे। अंकल का सिर मम्मी की जाँघों के बीच इस कदर धँसा हुआ था कि उनकी गर्दन के बाल मम्मी के सुडौल नितंबों को छू रहे थे। अंकल की जीभ अब सिर्फ ऊपर नीचे नहीं कर रही थी, बल्कि वे मम्मी के क्लिटोरिस को अपने होंठों के बीच भरकर पूरी ताकत से चूस रहे थे।
'स्लर्प... चप... चप...' की वह गंदी और रसीली आवाज़ अब और भी तेज़ हो गई थी। रवि देख पा रहा था कि कैसे अंकल का मुँह मम्मी की योनि के गीलेपन से पूरी तरह लथपथ हो गया था। जब भी अंकल अपना मुँह पीछे खींचते, तो एक लंबी और चिपचिपी लार की लकीर मम्मी की चूत से निकलकर अंकल के होंठों तक आती थी। मम्मी का शरीर अब नियंत्रण से बाहर हो रहा था। वे अपनी कमर को ऊपर की ओर झटका दे रही थीं, जैसे वे अंकल के मुँह को और गहराई तक अपने अंदर खींचना चाहती हों।
मम्मी के मुँह से अब दबी हुई, कराहती हुई आवाज़ें निकलने लगी थीं। "आह्ह्ह... अंकल... उह्ह्ह..." वे अपनी आँखें मूँदकर और अपना सिर पीछे की ओर झुकाकर उस चरम सुख को महसूस कर रही थी ।मेरी नज़रें अब मम्मी के चेहरे के भावों और अंकल के कामुक तरीके से चूसने की क्रिया पर टिकी थीं। वह देख रहा था कि कैसे अंकल की जीभ बार बार उस गीली और लाल जगह के अंदर धँस रही थी और फिर बाहर निकलकर सारा रस सोख रही थी।
मेरा अपना शरीर पसीने से तर बतर हो चुका था। मेरी पैंट के अंदर मेरा अंग इतना सख्त और दर्दनाक हो गया था कि मुझे लग रहा था वह फट जाएगा। वह बस वहीं खड़ा होकर, साँसें थामे, इस गंदी और रसीली क्रिया को देख रहा था, जहाँ अंकल पूरी तरह से मम्मी के शरीर के रस में डूबे हुए थे।
मेरी आँखों के सामने जो हो रहा था, वह उसकी कल्पनाओं की सीमाओं को तोड़ रहा था। वह देख पा रहा था कि अंकल अब रुकने वाले नहीं थे। अंकल की जीभ की गति अब और भी तेज़ और हिंसक हो गई थी। वे मम्मी की योनि के अंदर अपनी जीभ को किसी मशीन की तरह बार बार अंदर बाहर कर रहे थे। 'स्लर्प... स्लर्प... चप...' की वह रसीली और गंदी आवाज़ अब कमरे की दीवारों से टकराकर रवि के कानों में गूँज रही थी।
मैंने देखा कि मम्मी का शरीर अब पूरी तरह से काँप रहा था। उनकी उँगलियाँ चादर को इतनी ज़ोर से जकड़ चुकी थीं कि उनके नाखून सफेद पड़ गए थे। जब अंकल ने अपनी जीभ से मम्मी के क्लिटोरिस पर ज़ोर से दबाव डाला और उसे अपने मुँह में भरकर ज़ोर से चूसना शुरू किया, तो मम्मी के शरीर में एक ज़ोरदार झटका लगा। "आह्ह्ह्ह... उह्ह्ह... भाई साब... मैं... मैं जा रही हूँ... आह्ह्ह्ह!" मम्मी की आवाज़ में एक बेइंतहा दर्द और सुख का मिश्रण था।
मेरी नज़रें मम्मी के उस हिस्से पर टिकी थीं जहाँ अंकल का चेहरा लगा हुआ था। वह देख पा रहा था कि कैसे मम्मी की चूत से निकलने वाला गाढ़ा और पारदर्शी रस अंकल के चेहरे और उनकी ठुड्डी पर फैल गया था। अंकल ने अब अपनी उँगलियाँ भी मम्मी की योनि के अंदर डाल दी थीं, जिससे वह जगह और भी ज़्यादा फैल गई थी और चूसने की आवाज़ और भी गंदी हो गई थी।
अचानक, मम्मी का पूरा शरीर अकड़ गया। उनकी पीठ बिस्तर से ऊपर उठ गई और वे ज़ोर से कराह उठीं। रवि ने देखा कि कैसे मम्मी का शरीर चरम सुख (orgasm) की लहरों में डूब रहा था। अंकल ने उस समय अपना मुँह और भी ज़ोर से उनकी चूत पर टिका दिया, जैसे वे मम्मी के शरीर से निकलने वाले उस अंतिम रस की एक एक बूंद को अपने मुँह में सोख लेना चाहते हों। रवि का अपना अंग अब इतना सख्त हो गया था कि उसे अपनी पैंट के अंदर असहनीय दर्द महसूस हो रहा था, लेकिन वह अपनी नज़रें उस गंदे और कामुक नज़ारे से हटा नहीं पा रहा था।
मम्मी के चरम सुख की लहरें अभी थमी भी नहीं थीं कि मैंने देखा कि अंकल का संयम अब पूरी तरह टूट चुका था। मम्मी का शरीर अभी भी थरथरा रहा था और उनकी योनि से निकलने वाला रस अंकल के चेहरे को पूरी तरह गीला कर चुका था। मेरी साँसें इतनी तेज़ थीं कि उसे अपने सीने में भारीपन महसूस हो रहा था।
अंकल ने धीरे से अपना सिर मम्मी की जाँघों के बीच से ऊपर उठाया। उनका चेहरा पूरी तरह से मम्मी के शरीर के रस और लार से लथपथ था। रवि ने देखा कि कैसे अंकल की ठुड्डी से मम्मी का गाढ़ा और चिपचिपा रस टपक कर उनके सीने पर गिर रहा था। अंकल की आँखों में एक जंगली चमक थी। उन्होंने मम्मी की आँखों में देखा, जो अब भी आधी खुली और मदहोश थीं।
अंकल ने बिना एक शब्द बोले अपनी पैंट की ज़िप खोली। मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं जब मैंने देखा कि अंकल का विशाल और सख्त अंग बाहर निकला। वह पूरी तरह से नीला और नसें उभरी हुई थी, जो उत्तेजना से पत्थर की तरह सख्त हो चुका था। मैने देखा कि अंकल ने मम्मी के पेट के पास अपना अंग रगड़ना शुरू कर दिया। 'स्लर्प... घिस... घिस...' की वह आवाज़ अब अंकल के अंग और मम्मी की गीली जाँघों के बीच से आ रही थी।
मम्मी ने अपनी आँखें खोलीं और अंकल के उस सख्त अंग को देखा। उनके चेहरे पर एक नई तरह की प्यास उभर आई। उन्होंने अपना एक हाथ धीरे से बढ़ाकर अंकल के उस गर्म और तने हुए अंग को सहलाया। मैं यह सब देख रहा था और मुझे महसूस हो रहा था कि उसका अपना अंग अब उसकी पैंट को फाड़कर बाहर निकलने को बेताब है। मै देख रहा था कि कैसे अंकल अब मम्मी के शरीर के ऊपर पूरी तरह हावी हो रहे थे, और कमरे का तापमान उस कामुकता और पसीने की गंध से और भी बढ़ गया था।
एरी साँसें अब पूरी तरह से उखड़ चुकी थीं। मैनेदेखा कि अंकल ने अब और इंतज़ार नहीं किया। उन्होंने मम्मी की दोनों टांगों को अपने कंधों पर उठा लिया, जिससे मम्मी की गुलाबी और रसीली योनि अब पूरी तरह से अंकल के विशाल अंग के सामने खुली हुई थी। मम्मी की चूत अभी भी चरम सुख के बाद से गीली और लाल थी, और उस पर अंकल के लार और उनके रस की चमक साफ़ देखी जा सकती थी।
अंकल ने अपने सख्त और नसदार अंग के सिरे को मम्मी के गीले मुहाने पर टिकाया। अंकल का अंग मम्मी के मांस को हल्का सा दबा रहा था। फिर, एक झटके के साथ, अंकल ने अपना पूरा अंग मम्मी के अंदर धकेल दिया। "आह्ह्ह्ह्ह्ह! उह्ह्ह्ह्ह!" मम्मी के मुँह से एक ऐसी चीख निकली जो दर्द और बेइंतहा सुख का मिला जुला मिश्रण थी। उनका शरीर बिस्तर पर धनुष की तरह तन गया।
'पच... पच... पच...' की वह गंदी और भारी आवाज़ अब पूरे कमरे में गूँजने लगी थी। जैसे ही अंकल ने अपना अंग अंदर बाहर करना शुरू किया, मम्मी की योनि और अंकल के अंग के बीच से निकलने वाला सफ़ेद और पारदर्शी रस चारों तरफ बिखरने लगा। मै अच्छे से देख पा रहा था कि कैसे अंकल का अंग मम्मी के अंदर गहराई तक जा रहा था और फिर बाहर निकलते समय मम्मी की योनि की दीवारों को खींचकर ला रहा था।
अंकल अब पूरी ताकत से और तेज़ी से वार कर रहे थे। उनकी छाती मम्मी के सुडौल स्तनों से बार बार टकरा रही थी। 'थप... थप... थप...' की आवाज़ अब और भी तेज़ हो गई थी। मम्मी का चेहरा अब पूरी तरह से पसीने और वासना से भीगा हुआ था। उनकी आँखें ऊपर की ओर चढ़ गई थीं और वे बस अंकल के इस हिंसक प्रहार को महसूस कर रही थीं। रवि की आँखों के सामने यह नज़ारा किसी ज्वालामुखी के फटने जैसा था कच्चा, गंदा और बेहद उत्तेजक।
अंकल की गति अब नियंत्रण से बाहर हो चुकी थी। वे अब किसी जानवर की तरह मम्मी के शरीर पर टूट पड़े थे। उनके हर वार के साथ मम्मी का शरीर बिस्तर पर पीछे की ओर धकेला जा रहा था। 'पच... पच... पच... चप...' की वह रसीली और गंदी आवाज़ अब कमरे में एक लय बना चुकी थी। मम्मी के सुडौल स्तन अंकल के सीने से टकराकर बुरी तरह हिल रहे थे, और उनके निप्पल अब पूरी तरह से सख्त और लाल हो चुके थे।
"भाई साहब... और... और तेज़... उह्ह्ह्ह... हाँ... वहीं... आह्ह्ह्ह!" मम्मी की आवाज़ अब पूरी तरह से वासना में डूबी हुई थी। वे अब शर्म महसूस नहीं कर रही थीं, वे बस उस जानवर जैसे सुख की भूखी थीं। अंकल ने मम्मी की कमर को अपने हाथों से इतनी ज़ोर से जकड़ लिया था कि उनके उँगलियों के निशान मम्मी की कोमल त्वचा पर साफ़ दिखाई दे रहे थे।
मेरा दिमाग अब काम करना बंद कर चुका था। मै देख रहा था कि कैसे अंकल का अंग मम्मी की योनि के अंदर गहराई तक जा रहा था और बाहर निकलते समय वह हिस्सा पूरी तरह से मम्मी के रस से लथपथ होकर चमक रहा था। मैने देखा कि मम्मी की योनि के चारों ओर का मांस अब अंकल के अंग के घर्षण से सूजन की तरह लाल हो गया था।
अचानक, अंकल ने अपनी गति को और भी हिंसक बना दिया। वे अब मम्मी के ऊपर पूरी तरह से हावी होकर, अपने पूरे शरीर का भार उन पर डालकर वार कर रहे थे। मम्मी का सिर बिस्तर पर बार बार पीछे की ओर टकरा रहा था, लेकिन उन्हें अब सिर्फ उस चरम सुख की तलाश थी। मैने देखा कि अंकल के चेहरे पर भी एक अजीब सी तड़प थी, जैसे वे बस अब अपने भीतर के उस गर्म लावा को मम्मी के शरीर के अंदर छोड़ देना चाहते हों।
अंकल और मम्मी दोनों ही चरम सुख की दहलीज पर थे, लेकिन वे रुकने के मूड में नहीं थे। वे पहले ही कई बार डिस्चार्ज हो चुके थे, लेकिन अब उनकी वासना एक जंगली जानवर की तरह बेकाबू हो चुकी थी। अब वे सिर्फ सुख नहीं, बल्कि एक दूसरे को पूरी तरह से निगल जाने की कोशिश कर रहे थे।
अंकल ने मम्मी की टांगों को अपने कंधों पर इतनी ज़ोर से टिका दिया कि उनके घुटने मुड़ गए। अब अंकल का अंग मम्मी की योनि के अंदर एक मशीन की तरह बिना रुके, बेहद हिंसक और तेज़ गति से धँस रहा था। 'पच... पच... पच... चप!' की वह गंदी और रसीली आवाज़ अब कमरे की दीवारों से टकराकर गूँज रही थी। मम्मी का सुडौल शरीर हर वार के साथ बिस्तर पर बुरी तरह उछल रहा था।
"उह्ह्ह्ह... हाँ भी साब! ऐसे ही... मारो मुझे... तोड़ दो मुझे! आह्ह्ह्ह!" मम्मी की आवाज़ अब पूरी तरह से गंदी और अश्लील हो चुकी थी। वे अब किसी सभ्य महिला की तरह नहीं, बल्कि एक ऐसी औरत की तरह चिल्ला रही थीं जो सिर्फ वासना के लिए बनी है। "आपका अंग... कितना बड़ा और गरम है... मेरे अंदर सब कुछ भर दो... आह्ह्ह्ह!"
अंकल भी अब अपनी पूरी ताकत लगा रहे थे। उनके चेहरे पर पसीना और वासना का पागलपन था। वे मम्मी के कान के पास झुककर गंदी और फूहड़ बातें करने लगे, "देख रही हो इस सुडौल शरीर को? तुम्हारी योनि कितनी तंग और गरम है... मेरा अंग इसमें डूबकर पागल हो रहा है! मैं तुम्हें पूरी तरह बर्बाद कर दूँगा!"
मम्मी ने अंकल के बालों को ज़ोर से खींचते हुए कहा, "हाँ प्रदीप भाई साहब... और तेज़! मुझे अपना सारा गंदा रस मेरे अंदर डाल दो... मुझे गंदा कर दो! आह्ह्ह्ह... मैं मर जाऊँगी इस सुख से!"
अंकल की गति अब इतनी तेज़ हो गई थी कि उनके शरीर का मांस मम्मी के मांस से टकराकर लाल पड़ गया था। अचानक, अंकल का शरीर एक ज़ोरदार झटके के साथ अकड़ गया। वे मम्मी के शरीर के भीतर गहराई तक धँस गए और एक भयानक गर्जना के साथ अपना सारा गाढ़ा और गर्म वीर्य मम्मी की गर्भाशय की गहराई में छोड़ दिया।
उसी पल मम्मी का शरीर भी थरथराने लगा। उनकी योनि की मांसपेशियाँ अंकल के अंग को इतनी ज़ोर से जकड़ लिया कि अंकल की चीख निकल गई। मम्मी का डिस्चार्ज भी उनके शरीर से एक फव्वारे की तरह निकलकर बिस्तर को पूरी तरह भिगोने लगा। दोनों एक दूसरे से लिपटकर, पसीने और वीर्य में लथपथ लेट गए।
कमरे में व्याप्त वह भारी और गंदी गंध अब और भी तीव्र हो गई थी। अंकल का अंग अभी भी मम्मी की योनि के भीतर गहराई तक धँसा हुआ था, जहाँ वे दोनों एक दूसरे के चरम सुख के अवशेषों को महसूस कर रहे थे। मम्मी का शरीर अभी भी छोटे छोटे झटकों के साथ काँप रहा था, और उनके जननांगों से निकलने वाला तरल पदार्थ अंकल के अंग के साथ मिलकर बिस्तर की चादर पर एक बड़ा सा गीला धब्बा बना रहा था।
दोनों की साँसें अब धीरे धीरे सामान्य होने लगी थीं, लेकिन उनके बीच का तनाव और वासना की वह गूँज अभी भी हवा में तैर रही थी। अंकल ने धीरे से अपना शरीर मम्मी के ऊपर से हटाया, जिससे एक 'चप' की आवाज़ के साथ उनका अंग मम्मी के गीले और सूजे हुए द्वार से बाहर निकला। मम्मी ने अपनी आँखें खोलीं, जो अभी भी धुंधली और कामुकता से भरी थीं। उन्होंने एक गहरी और थकी हुई आह भरी और अपने बिखरे हुए बालों को पीछे किया।
कमरे में पसरा सन्नाटा अब केवल उनकी भारी साँसों और शरीर से टपकते पसीने की बूंदों की आवाज़ से टूट रहा था। वह दृश्य पूरी तरह से कच्चा, अनफ़िल्टर्ड और वासना से लथपथ था एक ऐसा अंत जो किसी भी मर्यादा को तोड़ चुका था।
उस भीषण और जंगली समागम के बाद, कमरे में एक भारी और मदहोश कर देने वाली शांति छा गई थी। मम्मी पूरी तरह से थककर चूर हो चुकी थीं। उनका शरीर पसीने से भीगा हुआ था और उनकी साँसें अभी भी उखड़ी हुई थीं। वे बेड के बीचों बीच बेसुध सी पड़ी थीं, जैसे किसी गहरे समुद्र में डूब गई हों। उनके चेहरे पर एक अजीब सा सुकून और थकावट का मिला जुला भाव था।
अंकल उनके बिल्कुल बगल में थे। उनका भारी शरीर मम्मी के शरीर से सटा हुआ था। उन्होंने एक हाथ मम्मी की कमर पर रखा हुआ था, जैसे सोते हुए भी वे उन्हें अपनी गिरफ्त में रखना चाहते हों। उनके शरीर की गर्मी मम्मी के ठंडे पड़ते शरीर को गर्माहट दे रही थी। अंकल की गहरी और भारी साँसें मम्मी के कंधे से टकरा रही थीं।
और मैं? मैं वहीं अंधेरे के एक कोने में, कम्बल के नीचे सिमटा हुआ था। मेरी आँखें खुली थीं, लेकिन मेरा शरीर सुन्न पड़ चुका था। जो मैंने देखा था, उसने मेरे दिमाग के सारे न्यूरॉन्स को झकझोर कर रख दिया था। मैं बस उन तीनों को एक साथ देख रहा था मम्मी का वो बेसुध शरीर, अंकल की वो भारी मौजूदगी, और उनके बीच का वो अनकहा संबंध।
कमरे में केवल उनकी साँसों की आवाज़ आ रही थी। मम्मी का शरीर बीच बीच में हल्का सा काँप जाता, शायद उस चरम सुख की यादों की वजह से जो उन्होंने अभी अभी महसूस किया था। अंकल और मम्मी एक दूसरे की गर्मी में लिपटे हुए थे, और मैं उस दृश्य का मूक गवाह बनकर बस उनकी लयबद्ध साँसों को सुन रहा था। उस पल में, हम तीनों एक ही धुन में थे, एक ही गहरी नींद की आगोश में समाने की कोशिश कर रहे थे।
*** वह सब कुछ जो मेरी आँखों के सामने हुआ था था, वह किसी फिल्म की तरह मेरे दिमाग में तेज़ी से चल रहा था। उन दृश्यों की तीव्रता, वह शोर, वह वासना और वह सब कुछ इतना गहरा और वास्तविक था कि मेरा दिमाग उस पर काबू नहीं रख पा रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे मैं किसी सपने और हकीकत के बीच की धुंधली रेखा पर खड़ा हूँ। वह सब कुछ एक फिल्म की तरह मेरी आँखों के सामने घूम रहा था हर एक हरकत, हर एक आवाज़ और वह सब कुछ जो मेरी कल्पनाओं से भी परे था।
उसी मानसिक उथल पुथल और उन दृश्यों के भारीपन के बीच, धीरे धीरे मेरी चेतना कम होने लगी। मेरी पलकें भारी होने लगीं और वह सब कुछ जो मेरे दिमाग में चल रहा था, धुंधला पड़ता गया। जैसे किसी ने मुझे गहरी नींद की आगोश में खींच लिया हो। मुझे पता ही नहीं चला कि कब वह फिल्म की तरह चलता हुआ नज़ारा मेरे दिमाग से ओझल हुआ और कब मैं नींद के उस गहरे और काले अंधेरे में समा गया। मेरा शरीर ढीला पड़ता गया और मैं पूरी तरह से बेसुध होकर नींद की गोद में जा गिरा।
***


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