19-08-2026, 05:41 AM
मैं बस उस नज़ारे को देखने के लिए बेताब था जो उस रोशनी में घटित होने वाला था।
लगभग पाँच छह मिनट बीत चुके थे। सन्नाटे में घड़ी की टिक टिक भी किसी हथौड़े की तरह सुनाई दे रही थी। तभी अचानक बाथरूम का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई। मैंने अपनी सांसें रोक लीं और दरवाज़े की दरार से बाहर की ओर देखा।
मम्मी बाथरूम से बाहर निकलकर वापस लॉबी में आ रही थीं। उन्हें देखकर मेरी धड़कनें और तेज़ हो गईं। वे बिल्कुल उसी 'नग्न अवस्था' में थीं, जिसमें वे अंकल के साथ शारीरिक मिलन के बाद बाथरूम गई थीं। शायद वे बस थोड़ा तरोताजा होने के लिए या फिर बाथरूम जाने के लिए गई थीं। उनके शरीर पर पानी की कुछ बूंदें अभी भी चमक रही थीं, जो लॉबी की मद्धम रोशनी में उनके बदन को और भी अधिक आकर्षक और कामुक बना रही थीं।
वे अब पहले से कहीं ज़्यादा तरोताजा और खिली खिली लग रही थीं। उनके चेहरे पर एक अजीब सी संतुष्टि और सुकून था, जो केवल गहरी शारीरिक तृप्ति के बाद ही आ सकता है। उनके खुले बाल और उनके शरीर की वह प्राकृतिक चमक देखकर मेरा गला सूखने लगा। वे धीरे धीरे चलकर अंकल के पास पहुँच रही थीं, और उस नग्नता में उनकी हर चाल में एक अलग ही लचक और आकर्षण था। अंधेरे कमरे में लेटा मैं बस अपनी आँखों को दरवाज़े से हटा नहीं पा रहा था, क्योंकि वह नज़ारा इतना तीव्र और उत्तेजक था कि मेरा पूरा शरीर कांपने लगा था।
मम्मी को पूरी तरह से यह विश्वास था कि नींद की गोली का असर होने के कारण मैं गहरी और बेसुध नींद में हूँ। इसी निश्चिंतता ने उन्हें इतना बेखौफ बना दिया था कि उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के अंकल से कहा, "मैं एक बार रवि को देख आती हूँ, वह ठीक से सो रहा है या नहीं।"
अंकल ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "मैं अभी गया था, वह तो बिल्कुल बेखबर है, गहरी नींद में सो रहा है।" लेकिन मम्मी ममतावश , नग्न अवस्था में ही सीधे मेरे कमरे की ओर बढ़ने लगीं। जैसे ही वे कमरे के दरवाज़े के पास पहुँचीं, अंधेरे में भी उनकी उपस्थिति का अहसास होने लगा। उनकी उस नग्न अवस्था में, चलते समय उनके उभरे हुए सीने पर मौजूद उनके दो मस्त और भारी दूध एक बेहद मदहोश कर देने वाली लय में थिरक रहे थे। उस दृश्य के दर्शन मात्र से ही मेरी बेचैनी चरम पर पहुँच गई और दिल की धड़कनें इतनी तेज़ हो गईं कि मुझे लगा कहीं वे मेरी धड़कन न सुन लें।
जैसे ही मुझे उनके कदमों की आहट अपने कमरे के भीतर आती महसूस हुई, मैं बुरी तरह घबरा गया। मुझे डर था कि अगर उन्होंने मुझे जागते हुए देख लिया, तो सारा खेल बिगड़ जाएगा। मैंने तुरंत और बहुत ही फुर्ती से करवट बदल ली और अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं, ताकि वे मेरे चेहरे के भावों या मेरी सांसों की गति से यह अंदाज़ा न लगा सकें कि मैं जाग रहा हूँ। मैं बस एक मरे हुए इंसान की तरह लेटा रहा, जबकि मेरे भीतर भावनाओं और उत्तेजना का एक ज्वालामुखी फट रहा था।
जैसे ही वे मेरे बिस्तर के पास पहुँचीं, कमरे के भीतर उनकी उपस्थिति का अहसास और भी गहरा हो गया। मैंने अपनी आँखें कसकर बंद कर रखी थीं और सांसें रोक ली थीं, लेकिन उनके पास आने से उनके शरीर की गर्माहट और उस कामुक सुगंध का अहसास मुझे अंदर ही अंदर जला रहा था।तभी मम्मी ने आगे बढ़ कर लाइट जला दी।
मम्मी ने बहुत ही स्नेह और ममता के साथ मेरे सिर पर अपना हाथ फेरा। उनके हाथों का स्पर्श इतना कोमल और धीमा था कि मुझे लगा जैसे वे मुझे सहला नहीं रही हैं, बल्कि मेरी नींद को और गहरा करने की कोशिश कर रही हैं। फिर उन्होंने धीरे से मेरे ऊपर पड़े कंबल को व्यवस्थित किया ताकि मुझे ठंड न लगे। इसके बाद, उन्होंने झुककर मेरे गाल पर एक बहुत ही मासूम और कोमल सी 'किस' की।
उस पल, जब वे मेरे इतने करीब झुकी थीं, उनकी शांत और मद्धम होती सांसें मेरे कान के पास महसूस हो रही थीं। उस नग्न अवस्था में उनके शरीर की वह प्राकृतिक महक और उनकी सांसों की गर्माहट मुझे पागल कर रही थी। मेरा पूरा शरीर उत्तेजना से कांप उठा था, लेकिन मैं हिल भी नहीं सकता था। उस एक पल में, उनकी ममता और उनकी नग्नता का वह संगम मेरे लिए किसी नशें से कम नहीं था।
जब मम्मी को पूरी तरह यकीन हो गया कि मैं गहरी नींद में हूँ और बिल्कुल बेखबर हूँ, तो उन्होंने एक आखिरी बार मेरे सिर पर प्यार से हाथ फेरा। फिर उन्होंने कमरे की लाइट ऑफ कर दी और बिना कोई आहट किए वापस बाहर निकल गईं। कमरे में फिर से वही घना अंधेरा छा गया, लेकिन मेरे भीतर जो हलचल मच गई थी, उसने मुझे सोने नहीं दिया। मैं बस अंधेरे में लेटा हुआ था, उनके उस स्पर्श और उस नज़ारे को अपने दिमाग में बार बार दोहरा रहा था।
मम्मी के जाने के बाद कमरे में फिर से वही गहरा सन्नाटा और अंधेरा छा गया था। लेकिन मेरे भीतर एक ऐसी आग सुलग रही थी जिसे बुझाना शायद नामुमकिन था। उनकी वह नग्नता, उनके शरीर की वह थिरकन, उनके सीने की वह हलचल और फिर वह कोमल स्पर्श इन सबने मेरे दिमाग में एक ऐसा तूफान खड़ा कर दिया था कि मेरा शरीर उत्तेजना से तड़प रहा था। मैं बस अंधेरे में लेटा हुआ था, लेकिन मेरी आँखों के सामने वही सब बार बार घूम रहा था।
अंदर ही अंदर जलते हुए, उस बेचैनी और उत्तेजना के चरम पर पहुँचकर, अब मुझसे और इंतज़ार नहीं हो रहा था मेरा मन उस नज़ारे को फिर से जी भर के देखना चाहता था। अपनी उत्तेजना को काबू में करने के लिए। मैने अपने सख्त हो चुके लंड आपर अपना हाथ चलाना शुरू कर दिया।
खुद को शांत करने के बाद, मैंने
फिर से लॉबी की तरफ नज़र घुमाई। वहाँ का नज़ारा देखकर मेरी साँसें फिर से अटक गईं। लॉबी में कुछ खास अलग तो नहीं दिख रहा था, लेकिन जो दिख रहा था वह बेहद कामुक था। मम्मी और अंकल एक दूसरे के आलिंगन में बंधे हुए थे। वे दोनों एक दूसरे की पीठ को बड़े ही प्यार और उत्तेजना के साथ सहला रहे थे। उनके शरीर की रगड़ और उनके बीच की वह केमिस्ट्री साफ महसूस की जा सकती थी।
तभी अंकल की आवाज़ गूँजी, "मैं अभी आता हूँ, बाथरूम करके ।" अंकल ने बाथरूम से वापस आने के बाद, एक ऐसा काम किया जिसने मेरे होश उड़ा दिए। उन्होंने लॉबी की सारी लाइटें एक साथ जला दीं। अंकल ने मुस्कुराते हुए कहा, "चलो पूरी रोशनी में खेलते हैं।"
मम्मी को लगा कि शायद यह अंकल की कोई नई शरारत या उनकी कोई निजी इच्छा है, लेकिन मुझे तुरंत अंदाज़ा हो गया कि यह कोई साधारण बात नहीं है। मुझे समझ आ गया कि अंकल को पता चल चुका है कि मैं जाग रहा हूँ। वे चाहते थे कि मैं जो भी देखूँ, उसे पूरी स्पष्टता के साथ देखूँ। वे मुझे आने वाले हर पल की बारीकी दिखाना चाहते थे हर एक हरकत, हर एक उभार और हर एक उत्तेजक क्षण को बिना किसी अंधेरे के पर्दे के, बिल्कुल साफ़ और स्पष्ट रूप से। अब लॉबी का हर कोना रोशनी से नहाया हुआ था, और अब जो होने वाला था, उसे देखने के लिए मैं पूरी तरह तैयार था।
रोशनी इतनी तेज़ थी कि अब लॉबी का हर एक दृश्य किसी नग्न सत्य की तरह मेरी आँखों के सामने नाच रहा था। अंकल ने अब कोई ढोंग नहीं किया। उन्होंने मम्मी इस तरह लिटा दिया के उनके दोनों भारी मम्मे उनके सीने से बाहर निकल आए। अंकल ने बिना देर किए अपने मुँह से एक मम्मे को अपने मुँह में भर लिया और उसे ज़ोर ज़ोर से चूसने लगे। मम्मी की चीख निकल गई "आह्ह्ह... उम्ममम..." उनकी कमर हवा में धनुष की तरह तन गई।
अंकल का कड़क और मोटा लंड अब पूरी तरह से बाहर था, जो उत्तेजना से लाल और नसदार हो चुका था। उन्होंने मम्मी के दोनों पैरों को उनके कंधों पर टिका दिया, जिससे उनकी गुलाबी और गीली चूत बिल्कुल साफ़ दिखाई देने लगी। चूत से निकलने वाला चिकना तरल (fluid) रोशनी में चमक रहा था। अंकल ने बिना किसी चेतावनी के अपना लंड मम्मी की चूत के मुँह पर टिकाया और एक ज़ोरदार झटका देकर पूरा अंदर उतार दिया।
"आआआह्ह्ह्ह!" मम्मी के गले से एक दर्द भरी लेकिन बेहद कामुक आवाज़ निकली। अंकल अब पागलों की तरह लंड को चूत के अंदर बाहर करने लगे 'चप चप' की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। अंकल का भारी अंडकोष हर झटके के साथ मम्मी की चूत के निचले हिस्से से टकरा रहा था। मम्मी का शरीर झटकों के साथ ऊपर नीचे हो रहा था, उनके मम्मे बेतहाशा हिल रहे थे।
तभी अंकल ने उन्हें पलट दिया और मम्मी को उल्टा कर दिया। अब मम्मी घुटनों के बल थीं और उनका पिछवाड़ा हवा में ऊँचा था। अंकल ने पीछे से उनके नितंबों को ज़ोर से पकड़कर अपने लंड को उनकी चूत में गहराई तक उतारना शुरू किया। दृश्य इतना जंगली था कि मैं अपनी नज़रें हटा नहीं पा रहा था। फिर अंकल ने उन्हें नीचे झुकाया और '69 पोजीशन' में ले आए। मम्मी का मुँह अंकल के लंड पर था और अंकल का मुँह मम्मी की गीली चूत पर।
मम्मी अपनी जीभ से अंकल के लंड को चाट रही थीं और अंकल उनकी चूत के भीतर अपनी उंगलियाँ और जीभ चला रहे थे। हवा में पसीने, कामुक गंध और शरीर के तरल पदार्थों की महक भर गई थी। अंकल का जोश चरम पर था, वे अब मम्मी की चूत को पूरी ताकत से फाड़ देने वाले अंदाज़ में चोद रहे थे।
तभी अंकल ने उन्हें पलट दिया। अब मम्मी घुटनों के बल थीं और उनका मांसल पिछवाड़ा हवा में ऊँचा उठा हुआ था। अंकल ने पीछे से उनके नितंबों को पूरी ताकत से जकड़ लिया और अपने लंड को उनकी चूत के भीतर गहराई तक धंसाना शुरू कर दिया। दृश्य इतना बेकाबू था कि मैं अपनी नज़रें हटा नहीं पा रहा था। इसके तुरंत बाद, अंकल ने उन्हें नीचे झुका दिया।
अंकल का भारी लंड जब पीछे से मम्मी की चूत के अंदर पूरी रफ़्तार से धंस रहा था, तो हर प्रहार के साथ उनके शरीर में एक बिजली सी दौड़ जाती थी। मम्मी के मम्मे ज़मीन की ओर लटक रहे थे और झटकों के कारण पागलों की तरह उछल रहे थे। "आह्ह्ह... भाई साहब... और ज़ोर से... हाँ!" मम्मी की बेकाबू चीखें कमरे की दीवारों से टकरा रही थीं।
अंकल का नियंत्रण अब पूरी तरह खत्म हो चुका था। वे एक जंगली जानवर की तरह मम्मी के शरीर पर टूट पड़े थे। उनकी उंगलियाँ मम्मी के नितंबों में गहराई तक धंस गई थीं, जिससे उनकी त्वचा पर लाल निशान पड़ गए थे। अंकल का लंड अब मम्मी की चूत के अंदर पत्थर जैसा सख्त हो चुका था और वे चरम सीमा के बिल्कुल करीब थे।
"बहनजी... अब और नहीं रुक सकता!" अंकल ने दहाड़ते हुए एक आखिरी, सबसे गहरा और सबसे तेज़ झटका मारा। मम्मी का पूरा शरीर अकड़ गया, उनकी आँखें ऊपर की ओर चढ़ गईं और वे एक तीखी चीख के साथ अपनी चरम सीमा पर पहुँच गईं। उसी पल, अंकल ने अपना सारा गर्म और गाढ़ा वीर्य मम्मी की चूत की गहराई में पूरी ताकत से छोड़ दिया। अंकल का लंड मम्मी के अंदर ही कांप रहा था और वे दोनों पसीने से लथपथ होकर एक दूसरे के शरीर में समाए हुए थे।
दोनों पसीने से लथपथ होकर एक दूसरे से लिपट गए। कमरे में केवल उनकी तेज़ चलती सांसों की आवाज़ आ रही थी। लेकिन अभी खेल खत्म नहीं हुआ था। जैसे ही अंकल ने अपना लंड थोड़ा बाहर निकाला, मम्मी की गीली चूत से वीर्य और योनि का तरल मिलकर बहने लगा। मम्मी ने अपनी गीली और कांपती उंगलियों से अंकल के चेहरे को छुआ और फुसफुसाते हुए कहा, ' नहीं भाई साब... अभी मुझे और चाहिए...'
म्मी की आँखों में वही पुरानी भूख थी। अंकल ने महसूस किया कि उनका लंड फिर से धीरे धीरे सख्त हो रहा है।
यह कल रात से लेकर अभ कल की छठी चोदाइ की शुरुआत होने वाली थी, जो पहले से भी ज़्यादा जंगली और बेकाबू होने वाली थी।
यह सिलसिला अब नियंत्रण से बाहर हो चुका था। पिछली रात से लेकर अब तक सुबह 5:30 बजे की वह दूसरी चोदाइ, फिर दोपहर की वह तड़प, रवि के नींद की गोली खाने के नाटक के दौरान हुई चौथी चोदाइ, और फिर अंकल का वह जानबूझकर लाइट जलाकर मम्मी को चोदना ताकि रवि सब देख सके ये सब अब एक अंतहीन चक्र बन चुके थे।
अंकल ने मम्मी को बेड पर उल्टा कर दिया। मम्मी का सुडौल पिछवाड़ा अब हवा में था और उनके भारी मम्मे बिस्तर पर दब गए थे। अंकल ने मम्मी की कमर को अपने दोनों हाथों से इतनी ज़ोर से जकड़ लिया कि उनकी उंगलियां मम्मी के मांस में धंस गईं। अंकल ने अपना मोटा, नसों से भरा हुआ लंड मम्मी के गीले छेद के मुहाने पर रखा और एक ही झटके में उसे पूरी गहराई तक अंदर उतार दिया। "आआआह्ह्ह्ह्ह्ह!" मम्मी की चीख पूरे कमरे में गूँज उठी। यह दर्द और बेइंतहा सुख का ऐसा संगम था जिसने मम्मी के दिमाग को सुन्न कर दिया। अंकल अब पागलों की तरह पीछे से प्रहार कर रहे थे, और हर झटके के साथ 'चप चप' की गंदी आवाज़ कमरे के सन्नाटे को चीर रही थी।
कमरे के भीतर की हवा भारी हो चुकी थी। पसीने और वासना की गंध चारों ओर फैली हुई थी। अंकल की आँखों में एक जंगली भूख थी। जैसे ही उन्होंने अपना मोटा, सख्त और गर्म **'लंड'** मम्मी की गीली और तंग **'चूत'** से बाहर निकाला, मम्मी के पूरे शरीर में एक थरथराहट दौड़ गई। लेकिन अंकल रुके नहीं; उन्होंने उस नसों से भरे भारी अंग को मम्मी के **'गुदाद्वार'** के मुहाने पर टिका दिया। मम्मी की साँसें थम गईं। डर और एक अनजाने रोमांच के बीच झूलते हुए वह घबराकर चिल्लाईं, "नहीं भाई... यहाँ नहीं ... नहीं!" डर के मारे उन्होंने अपनी कमर को थोड़ा ऊपर की ओर उठाया, जैसे वह उस अनचाहे प्रवेश को रोकना चाहती हों, और अपनी **'चूत'** को फिर से उस अंग के ऊपर सेट करने की कोशिश कीं ताकि सब कुछ पहले जैसा हो जाए। लेकिन अंकल का इरादा कुछ और ही था। उनके अंदर का जानवर जाग चुका था। उन्होंने एक गहरी और हवस भरी नज़र से मम्मी को देखा और उनके दोनों **'नितंबों'** को अपने मजबूत हाथों से इतनी ज़ोर से पकड़ा कि उनकी उंगलियाँ मांस में धंस गईं। मम्मी के शरीर पर लाल निशान पड़ गए। अंकल ने बिना किसी दया के, अपनी पूरी ताकत और नजाकत के साथ, उस सख्त अंग को धीरे धीरे लेकिन बड़ी मजबूती से मम्मी के संकरे **'गुदाद्वार'** के अंदर धकेलना शुरू कर दिया। "आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!" मम्मी की चीख इतनी तेज़ और दर्दनाक थी कि मेरा शरीर भी थरथरा गया। उनके पीछे वाले छेद का कसाव इतना ज़्यादा था कि अंकल को लगा जैसे उनका लंड किसी गर्म और तंग मांसल गुफा में फंस गया हो। मम्मी का पिछवाड़ा दर्द और बेइंतहा उत्तेजना के मारे बुरी तरह कांप रहा था और उनके मुँह से लगातार दर्द भरी सिसकियां निकल रही थीं।
अंकल ने एक पल के लिए रुककर मम्मी के शरीर को महसूस किया, लेकिन उनकी अपनी कामुकता अब चरम पर थी। उन्होंने मम्मी की कमर को और ज़ोर से पकड़ लिया और धीरे धीरे अपना मोटा लंड पीछे वाले छेद में धंसाना शुरू किया। 'चप... चप... चप...' की गंदी और गीली आवाज़ें अब कमरे में गूँजने लगीं। जैसे जैसे अंकल की गति बढ़ी, मम्मी की सिसकियां अब बेकाबू होकर 'आह्ह्ह... उह्ह्ह... आह्ह्ह' में बदल गईं।
मम्मी का सिर बिस्तर पर पटक रहा था और उनकी आँखें ऊपर की ओर चढ़ गई थीं। "अंकल... आह्ह्ह... बहुत गहरा... बहुत ज़ोर से... आआआह्ह्ह!" वे दर्द और मज़ा दोनों के बीच झूल रही थीं। अंकल अब पागलों की तरह पीछे से प्रहार कर रहे थे। हर झटके के साथ मम्मी का पूरा शरीर आगे की ओर उछल रहा था। अंकल का मोटा लंड मम्मी के गुदा मार्ग की दीवारों को बुरी तरह रगड़ रहा था, जिससे मम्मी का पिछवाड़ा लाल पड़ गया था। कमरे में पसीने, वीर्य और शरीर के तरल पदार्थों की एक भारी और गंदी गंध फैल गई थी। रवि कोने में बैठा अपनी फटी आँखों से यह नज़ारा देख रहा था मम्मी का पिछवाड़ा अंकल के लंड के नीचे दबकर पिचक रहा था और मम्मी की सिसकियां अब एक जानवर की तरह दहाड़ने जैसी लगने लगी थीं।
अंकल की रफ़्तार अब इतनी तेज़ हो गई थी कि उनके लंड के हर प्रहार के साथ मम्मी का पूरा शरीर बिस्तर पर बुरी तरह टकरा रहा था। 'पटक... पटक... पटक...' की आवाज़ और मम्मी के पिछले छेद से निकलने वाली 'चप चप' की गंदी आवाज़ ने पूरे कमरे को वासना के माहौल में डुबो दिया था। मम्मी की सिसकियां अब बेकाबू होकर चीखों में बदल चुकी थीं "आह्ह्ह... अंकल... मेरा पिछवाड़ा फट जाएगा... आह्ह्ह... और ज़ोर से... उह्ह्ह... हाँ... वहीं... वहीं!"
मम्मी का सुडौल पिछवाड़ा अंकल के भारी प्रहारों के नीचे बुरी तरह लाल हो चुका था और हर झटके के साथ उनका मांस थरथरा रहा था। अंकल ने मम्मी के दोनों जांघों को और ज़ोर से पकड़कर ऊपर की ओर खींच लिया ताकि उनका लंड और भी गहराई तक मम्मी की गुदा की दीवारों को चीर सके। अंकल का चेहरा पसीने से तर बतर था और उनकी आँखें जुनून से लाल हो गई थीं। वे अब जानवर की तरह मम्मी के शरीर पर टूट पड़े थे।
तभी अंकल ने मम्मी के बालों को पीछे से ज़ोर से पकड़ा और उनका सिर पीछे की ओर खींच दिया। मम्मी का चेहरा दर्द और चरम सुख के मिश्रण से विकृत हो गया था। "अब बस... मैं निकलने वाला हूँ... बहनजी... आह्ह्ह!" अंकल दहाड़े। मम्मी ने भी अपनी कमर को पीछे की ओर झटका दिया, जैसे वे अंकल के लंड को अपने अंदर और भी गहराई तक खींचना चाहती हों। "हाँ भाई साब... मेरे छेद में... अपना सारा गरम वीर्य भर दो... आआआह्ह्ह्ह्ह!" मम्मी की यह गंदी और कामुक मांग सुनकर अंकल का संयम टूट गया और उन्होंने अपनी पूरी ताकत के साथ आखिरी और सबसे ज़ोरदार प्रहार करना शुरू कर दिया।
लगभग पाँच छह मिनट बीत चुके थे। सन्नाटे में घड़ी की टिक टिक भी किसी हथौड़े की तरह सुनाई दे रही थी। तभी अचानक बाथरूम का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई। मैंने अपनी सांसें रोक लीं और दरवाज़े की दरार से बाहर की ओर देखा।
मम्मी बाथरूम से बाहर निकलकर वापस लॉबी में आ रही थीं। उन्हें देखकर मेरी धड़कनें और तेज़ हो गईं। वे बिल्कुल उसी 'नग्न अवस्था' में थीं, जिसमें वे अंकल के साथ शारीरिक मिलन के बाद बाथरूम गई थीं। शायद वे बस थोड़ा तरोताजा होने के लिए या फिर बाथरूम जाने के लिए गई थीं। उनके शरीर पर पानी की कुछ बूंदें अभी भी चमक रही थीं, जो लॉबी की मद्धम रोशनी में उनके बदन को और भी अधिक आकर्षक और कामुक बना रही थीं।
वे अब पहले से कहीं ज़्यादा तरोताजा और खिली खिली लग रही थीं। उनके चेहरे पर एक अजीब सी संतुष्टि और सुकून था, जो केवल गहरी शारीरिक तृप्ति के बाद ही आ सकता है। उनके खुले बाल और उनके शरीर की वह प्राकृतिक चमक देखकर मेरा गला सूखने लगा। वे धीरे धीरे चलकर अंकल के पास पहुँच रही थीं, और उस नग्नता में उनकी हर चाल में एक अलग ही लचक और आकर्षण था। अंधेरे कमरे में लेटा मैं बस अपनी आँखों को दरवाज़े से हटा नहीं पा रहा था, क्योंकि वह नज़ारा इतना तीव्र और उत्तेजक था कि मेरा पूरा शरीर कांपने लगा था।
मम्मी को पूरी तरह से यह विश्वास था कि नींद की गोली का असर होने के कारण मैं गहरी और बेसुध नींद में हूँ। इसी निश्चिंतता ने उन्हें इतना बेखौफ बना दिया था कि उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के अंकल से कहा, "मैं एक बार रवि को देख आती हूँ, वह ठीक से सो रहा है या नहीं।"
अंकल ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "मैं अभी गया था, वह तो बिल्कुल बेखबर है, गहरी नींद में सो रहा है।" लेकिन मम्मी ममतावश , नग्न अवस्था में ही सीधे मेरे कमरे की ओर बढ़ने लगीं। जैसे ही वे कमरे के दरवाज़े के पास पहुँचीं, अंधेरे में भी उनकी उपस्थिति का अहसास होने लगा। उनकी उस नग्न अवस्था में, चलते समय उनके उभरे हुए सीने पर मौजूद उनके दो मस्त और भारी दूध एक बेहद मदहोश कर देने वाली लय में थिरक रहे थे। उस दृश्य के दर्शन मात्र से ही मेरी बेचैनी चरम पर पहुँच गई और दिल की धड़कनें इतनी तेज़ हो गईं कि मुझे लगा कहीं वे मेरी धड़कन न सुन लें।
जैसे ही मुझे उनके कदमों की आहट अपने कमरे के भीतर आती महसूस हुई, मैं बुरी तरह घबरा गया। मुझे डर था कि अगर उन्होंने मुझे जागते हुए देख लिया, तो सारा खेल बिगड़ जाएगा। मैंने तुरंत और बहुत ही फुर्ती से करवट बदल ली और अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं, ताकि वे मेरे चेहरे के भावों या मेरी सांसों की गति से यह अंदाज़ा न लगा सकें कि मैं जाग रहा हूँ। मैं बस एक मरे हुए इंसान की तरह लेटा रहा, जबकि मेरे भीतर भावनाओं और उत्तेजना का एक ज्वालामुखी फट रहा था।
जैसे ही वे मेरे बिस्तर के पास पहुँचीं, कमरे के भीतर उनकी उपस्थिति का अहसास और भी गहरा हो गया। मैंने अपनी आँखें कसकर बंद कर रखी थीं और सांसें रोक ली थीं, लेकिन उनके पास आने से उनके शरीर की गर्माहट और उस कामुक सुगंध का अहसास मुझे अंदर ही अंदर जला रहा था।तभी मम्मी ने आगे बढ़ कर लाइट जला दी।
मम्मी ने बहुत ही स्नेह और ममता के साथ मेरे सिर पर अपना हाथ फेरा। उनके हाथों का स्पर्श इतना कोमल और धीमा था कि मुझे लगा जैसे वे मुझे सहला नहीं रही हैं, बल्कि मेरी नींद को और गहरा करने की कोशिश कर रही हैं। फिर उन्होंने धीरे से मेरे ऊपर पड़े कंबल को व्यवस्थित किया ताकि मुझे ठंड न लगे। इसके बाद, उन्होंने झुककर मेरे गाल पर एक बहुत ही मासूम और कोमल सी 'किस' की।
उस पल, जब वे मेरे इतने करीब झुकी थीं, उनकी शांत और मद्धम होती सांसें मेरे कान के पास महसूस हो रही थीं। उस नग्न अवस्था में उनके शरीर की वह प्राकृतिक महक और उनकी सांसों की गर्माहट मुझे पागल कर रही थी। मेरा पूरा शरीर उत्तेजना से कांप उठा था, लेकिन मैं हिल भी नहीं सकता था। उस एक पल में, उनकी ममता और उनकी नग्नता का वह संगम मेरे लिए किसी नशें से कम नहीं था।
जब मम्मी को पूरी तरह यकीन हो गया कि मैं गहरी नींद में हूँ और बिल्कुल बेखबर हूँ, तो उन्होंने एक आखिरी बार मेरे सिर पर प्यार से हाथ फेरा। फिर उन्होंने कमरे की लाइट ऑफ कर दी और बिना कोई आहट किए वापस बाहर निकल गईं। कमरे में फिर से वही घना अंधेरा छा गया, लेकिन मेरे भीतर जो हलचल मच गई थी, उसने मुझे सोने नहीं दिया। मैं बस अंधेरे में लेटा हुआ था, उनके उस स्पर्श और उस नज़ारे को अपने दिमाग में बार बार दोहरा रहा था।
मम्मी के जाने के बाद कमरे में फिर से वही गहरा सन्नाटा और अंधेरा छा गया था। लेकिन मेरे भीतर एक ऐसी आग सुलग रही थी जिसे बुझाना शायद नामुमकिन था। उनकी वह नग्नता, उनके शरीर की वह थिरकन, उनके सीने की वह हलचल और फिर वह कोमल स्पर्श इन सबने मेरे दिमाग में एक ऐसा तूफान खड़ा कर दिया था कि मेरा शरीर उत्तेजना से तड़प रहा था। मैं बस अंधेरे में लेटा हुआ था, लेकिन मेरी आँखों के सामने वही सब बार बार घूम रहा था।
अंदर ही अंदर जलते हुए, उस बेचैनी और उत्तेजना के चरम पर पहुँचकर, अब मुझसे और इंतज़ार नहीं हो रहा था मेरा मन उस नज़ारे को फिर से जी भर के देखना चाहता था। अपनी उत्तेजना को काबू में करने के लिए। मैने अपने सख्त हो चुके लंड आपर अपना हाथ चलाना शुरू कर दिया।
खुद को शांत करने के बाद, मैंने
फिर से लॉबी की तरफ नज़र घुमाई। वहाँ का नज़ारा देखकर मेरी साँसें फिर से अटक गईं। लॉबी में कुछ खास अलग तो नहीं दिख रहा था, लेकिन जो दिख रहा था वह बेहद कामुक था। मम्मी और अंकल एक दूसरे के आलिंगन में बंधे हुए थे। वे दोनों एक दूसरे की पीठ को बड़े ही प्यार और उत्तेजना के साथ सहला रहे थे। उनके शरीर की रगड़ और उनके बीच की वह केमिस्ट्री साफ महसूस की जा सकती थी।
तभी अंकल की आवाज़ गूँजी, "मैं अभी आता हूँ, बाथरूम करके ।" अंकल ने बाथरूम से वापस आने के बाद, एक ऐसा काम किया जिसने मेरे होश उड़ा दिए। उन्होंने लॉबी की सारी लाइटें एक साथ जला दीं। अंकल ने मुस्कुराते हुए कहा, "चलो पूरी रोशनी में खेलते हैं।"
मम्मी को लगा कि शायद यह अंकल की कोई नई शरारत या उनकी कोई निजी इच्छा है, लेकिन मुझे तुरंत अंदाज़ा हो गया कि यह कोई साधारण बात नहीं है। मुझे समझ आ गया कि अंकल को पता चल चुका है कि मैं जाग रहा हूँ। वे चाहते थे कि मैं जो भी देखूँ, उसे पूरी स्पष्टता के साथ देखूँ। वे मुझे आने वाले हर पल की बारीकी दिखाना चाहते थे हर एक हरकत, हर एक उभार और हर एक उत्तेजक क्षण को बिना किसी अंधेरे के पर्दे के, बिल्कुल साफ़ और स्पष्ट रूप से। अब लॉबी का हर कोना रोशनी से नहाया हुआ था, और अब जो होने वाला था, उसे देखने के लिए मैं पूरी तरह तैयार था।
रोशनी इतनी तेज़ थी कि अब लॉबी का हर एक दृश्य किसी नग्न सत्य की तरह मेरी आँखों के सामने नाच रहा था। अंकल ने अब कोई ढोंग नहीं किया। उन्होंने मम्मी इस तरह लिटा दिया के उनके दोनों भारी मम्मे उनके सीने से बाहर निकल आए। अंकल ने बिना देर किए अपने मुँह से एक मम्मे को अपने मुँह में भर लिया और उसे ज़ोर ज़ोर से चूसने लगे। मम्मी की चीख निकल गई "आह्ह्ह... उम्ममम..." उनकी कमर हवा में धनुष की तरह तन गई।
अंकल का कड़क और मोटा लंड अब पूरी तरह से बाहर था, जो उत्तेजना से लाल और नसदार हो चुका था। उन्होंने मम्मी के दोनों पैरों को उनके कंधों पर टिका दिया, जिससे उनकी गुलाबी और गीली चूत बिल्कुल साफ़ दिखाई देने लगी। चूत से निकलने वाला चिकना तरल (fluid) रोशनी में चमक रहा था। अंकल ने बिना किसी चेतावनी के अपना लंड मम्मी की चूत के मुँह पर टिकाया और एक ज़ोरदार झटका देकर पूरा अंदर उतार दिया।
"आआआह्ह्ह्ह!" मम्मी के गले से एक दर्द भरी लेकिन बेहद कामुक आवाज़ निकली। अंकल अब पागलों की तरह लंड को चूत के अंदर बाहर करने लगे 'चप चप' की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। अंकल का भारी अंडकोष हर झटके के साथ मम्मी की चूत के निचले हिस्से से टकरा रहा था। मम्मी का शरीर झटकों के साथ ऊपर नीचे हो रहा था, उनके मम्मे बेतहाशा हिल रहे थे।
तभी अंकल ने उन्हें पलट दिया और मम्मी को उल्टा कर दिया। अब मम्मी घुटनों के बल थीं और उनका पिछवाड़ा हवा में ऊँचा था। अंकल ने पीछे से उनके नितंबों को ज़ोर से पकड़कर अपने लंड को उनकी चूत में गहराई तक उतारना शुरू किया। दृश्य इतना जंगली था कि मैं अपनी नज़रें हटा नहीं पा रहा था। फिर अंकल ने उन्हें नीचे झुकाया और '69 पोजीशन' में ले आए। मम्मी का मुँह अंकल के लंड पर था और अंकल का मुँह मम्मी की गीली चूत पर।
मम्मी अपनी जीभ से अंकल के लंड को चाट रही थीं और अंकल उनकी चूत के भीतर अपनी उंगलियाँ और जीभ चला रहे थे। हवा में पसीने, कामुक गंध और शरीर के तरल पदार्थों की महक भर गई थी। अंकल का जोश चरम पर था, वे अब मम्मी की चूत को पूरी ताकत से फाड़ देने वाले अंदाज़ में चोद रहे थे।
तभी अंकल ने उन्हें पलट दिया। अब मम्मी घुटनों के बल थीं और उनका मांसल पिछवाड़ा हवा में ऊँचा उठा हुआ था। अंकल ने पीछे से उनके नितंबों को पूरी ताकत से जकड़ लिया और अपने लंड को उनकी चूत के भीतर गहराई तक धंसाना शुरू कर दिया। दृश्य इतना बेकाबू था कि मैं अपनी नज़रें हटा नहीं पा रहा था। इसके तुरंत बाद, अंकल ने उन्हें नीचे झुका दिया।
अंकल का भारी लंड जब पीछे से मम्मी की चूत के अंदर पूरी रफ़्तार से धंस रहा था, तो हर प्रहार के साथ उनके शरीर में एक बिजली सी दौड़ जाती थी। मम्मी के मम्मे ज़मीन की ओर लटक रहे थे और झटकों के कारण पागलों की तरह उछल रहे थे। "आह्ह्ह... भाई साहब... और ज़ोर से... हाँ!" मम्मी की बेकाबू चीखें कमरे की दीवारों से टकरा रही थीं।
अंकल का नियंत्रण अब पूरी तरह खत्म हो चुका था। वे एक जंगली जानवर की तरह मम्मी के शरीर पर टूट पड़े थे। उनकी उंगलियाँ मम्मी के नितंबों में गहराई तक धंस गई थीं, जिससे उनकी त्वचा पर लाल निशान पड़ गए थे। अंकल का लंड अब मम्मी की चूत के अंदर पत्थर जैसा सख्त हो चुका था और वे चरम सीमा के बिल्कुल करीब थे।
"बहनजी... अब और नहीं रुक सकता!" अंकल ने दहाड़ते हुए एक आखिरी, सबसे गहरा और सबसे तेज़ झटका मारा। मम्मी का पूरा शरीर अकड़ गया, उनकी आँखें ऊपर की ओर चढ़ गईं और वे एक तीखी चीख के साथ अपनी चरम सीमा पर पहुँच गईं। उसी पल, अंकल ने अपना सारा गर्म और गाढ़ा वीर्य मम्मी की चूत की गहराई में पूरी ताकत से छोड़ दिया। अंकल का लंड मम्मी के अंदर ही कांप रहा था और वे दोनों पसीने से लथपथ होकर एक दूसरे के शरीर में समाए हुए थे।
दोनों पसीने से लथपथ होकर एक दूसरे से लिपट गए। कमरे में केवल उनकी तेज़ चलती सांसों की आवाज़ आ रही थी। लेकिन अभी खेल खत्म नहीं हुआ था। जैसे ही अंकल ने अपना लंड थोड़ा बाहर निकाला, मम्मी की गीली चूत से वीर्य और योनि का तरल मिलकर बहने लगा। मम्मी ने अपनी गीली और कांपती उंगलियों से अंकल के चेहरे को छुआ और फुसफुसाते हुए कहा, ' नहीं भाई साब... अभी मुझे और चाहिए...'
म्मी की आँखों में वही पुरानी भूख थी। अंकल ने महसूस किया कि उनका लंड फिर से धीरे धीरे सख्त हो रहा है।
यह कल रात से लेकर अभ कल की छठी चोदाइ की शुरुआत होने वाली थी, जो पहले से भी ज़्यादा जंगली और बेकाबू होने वाली थी।
यह सिलसिला अब नियंत्रण से बाहर हो चुका था। पिछली रात से लेकर अब तक सुबह 5:30 बजे की वह दूसरी चोदाइ, फिर दोपहर की वह तड़प, रवि के नींद की गोली खाने के नाटक के दौरान हुई चौथी चोदाइ, और फिर अंकल का वह जानबूझकर लाइट जलाकर मम्मी को चोदना ताकि रवि सब देख सके ये सब अब एक अंतहीन चक्र बन चुके थे।
अंकल ने मम्मी को बेड पर उल्टा कर दिया। मम्मी का सुडौल पिछवाड़ा अब हवा में था और उनके भारी मम्मे बिस्तर पर दब गए थे। अंकल ने मम्मी की कमर को अपने दोनों हाथों से इतनी ज़ोर से जकड़ लिया कि उनकी उंगलियां मम्मी के मांस में धंस गईं। अंकल ने अपना मोटा, नसों से भरा हुआ लंड मम्मी के गीले छेद के मुहाने पर रखा और एक ही झटके में उसे पूरी गहराई तक अंदर उतार दिया। "आआआह्ह्ह्ह्ह्ह!" मम्मी की चीख पूरे कमरे में गूँज उठी। यह दर्द और बेइंतहा सुख का ऐसा संगम था जिसने मम्मी के दिमाग को सुन्न कर दिया। अंकल अब पागलों की तरह पीछे से प्रहार कर रहे थे, और हर झटके के साथ 'चप चप' की गंदी आवाज़ कमरे के सन्नाटे को चीर रही थी।
कमरे के भीतर की हवा भारी हो चुकी थी। पसीने और वासना की गंध चारों ओर फैली हुई थी। अंकल की आँखों में एक जंगली भूख थी। जैसे ही उन्होंने अपना मोटा, सख्त और गर्म **'लंड'** मम्मी की गीली और तंग **'चूत'** से बाहर निकाला, मम्मी के पूरे शरीर में एक थरथराहट दौड़ गई। लेकिन अंकल रुके नहीं; उन्होंने उस नसों से भरे भारी अंग को मम्मी के **'गुदाद्वार'** के मुहाने पर टिका दिया। मम्मी की साँसें थम गईं। डर और एक अनजाने रोमांच के बीच झूलते हुए वह घबराकर चिल्लाईं, "नहीं भाई... यहाँ नहीं ... नहीं!" डर के मारे उन्होंने अपनी कमर को थोड़ा ऊपर की ओर उठाया, जैसे वह उस अनचाहे प्रवेश को रोकना चाहती हों, और अपनी **'चूत'** को फिर से उस अंग के ऊपर सेट करने की कोशिश कीं ताकि सब कुछ पहले जैसा हो जाए। लेकिन अंकल का इरादा कुछ और ही था। उनके अंदर का जानवर जाग चुका था। उन्होंने एक गहरी और हवस भरी नज़र से मम्मी को देखा और उनके दोनों **'नितंबों'** को अपने मजबूत हाथों से इतनी ज़ोर से पकड़ा कि उनकी उंगलियाँ मांस में धंस गईं। मम्मी के शरीर पर लाल निशान पड़ गए। अंकल ने बिना किसी दया के, अपनी पूरी ताकत और नजाकत के साथ, उस सख्त अंग को धीरे धीरे लेकिन बड़ी मजबूती से मम्मी के संकरे **'गुदाद्वार'** के अंदर धकेलना शुरू कर दिया। "आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!" मम्मी की चीख इतनी तेज़ और दर्दनाक थी कि मेरा शरीर भी थरथरा गया। उनके पीछे वाले छेद का कसाव इतना ज़्यादा था कि अंकल को लगा जैसे उनका लंड किसी गर्म और तंग मांसल गुफा में फंस गया हो। मम्मी का पिछवाड़ा दर्द और बेइंतहा उत्तेजना के मारे बुरी तरह कांप रहा था और उनके मुँह से लगातार दर्द भरी सिसकियां निकल रही थीं।
अंकल ने एक पल के लिए रुककर मम्मी के शरीर को महसूस किया, लेकिन उनकी अपनी कामुकता अब चरम पर थी। उन्होंने मम्मी की कमर को और ज़ोर से पकड़ लिया और धीरे धीरे अपना मोटा लंड पीछे वाले छेद में धंसाना शुरू किया। 'चप... चप... चप...' की गंदी और गीली आवाज़ें अब कमरे में गूँजने लगीं। जैसे जैसे अंकल की गति बढ़ी, मम्मी की सिसकियां अब बेकाबू होकर 'आह्ह्ह... उह्ह्ह... आह्ह्ह' में बदल गईं।
मम्मी का सिर बिस्तर पर पटक रहा था और उनकी आँखें ऊपर की ओर चढ़ गई थीं। "अंकल... आह्ह्ह... बहुत गहरा... बहुत ज़ोर से... आआआह्ह्ह!" वे दर्द और मज़ा दोनों के बीच झूल रही थीं। अंकल अब पागलों की तरह पीछे से प्रहार कर रहे थे। हर झटके के साथ मम्मी का पूरा शरीर आगे की ओर उछल रहा था। अंकल का मोटा लंड मम्मी के गुदा मार्ग की दीवारों को बुरी तरह रगड़ रहा था, जिससे मम्मी का पिछवाड़ा लाल पड़ गया था। कमरे में पसीने, वीर्य और शरीर के तरल पदार्थों की एक भारी और गंदी गंध फैल गई थी। रवि कोने में बैठा अपनी फटी आँखों से यह नज़ारा देख रहा था मम्मी का पिछवाड़ा अंकल के लंड के नीचे दबकर पिचक रहा था और मम्मी की सिसकियां अब एक जानवर की तरह दहाड़ने जैसी लगने लगी थीं।
अंकल की रफ़्तार अब इतनी तेज़ हो गई थी कि उनके लंड के हर प्रहार के साथ मम्मी का पूरा शरीर बिस्तर पर बुरी तरह टकरा रहा था। 'पटक... पटक... पटक...' की आवाज़ और मम्मी के पिछले छेद से निकलने वाली 'चप चप' की गंदी आवाज़ ने पूरे कमरे को वासना के माहौल में डुबो दिया था। मम्मी की सिसकियां अब बेकाबू होकर चीखों में बदल चुकी थीं "आह्ह्ह... अंकल... मेरा पिछवाड़ा फट जाएगा... आह्ह्ह... और ज़ोर से... उह्ह्ह... हाँ... वहीं... वहीं!"
मम्मी का सुडौल पिछवाड़ा अंकल के भारी प्रहारों के नीचे बुरी तरह लाल हो चुका था और हर झटके के साथ उनका मांस थरथरा रहा था। अंकल ने मम्मी के दोनों जांघों को और ज़ोर से पकड़कर ऊपर की ओर खींच लिया ताकि उनका लंड और भी गहराई तक मम्मी की गुदा की दीवारों को चीर सके। अंकल का चेहरा पसीने से तर बतर था और उनकी आँखें जुनून से लाल हो गई थीं। वे अब जानवर की तरह मम्मी के शरीर पर टूट पड़े थे।
तभी अंकल ने मम्मी के बालों को पीछे से ज़ोर से पकड़ा और उनका सिर पीछे की ओर खींच दिया। मम्मी का चेहरा दर्द और चरम सुख के मिश्रण से विकृत हो गया था। "अब बस... मैं निकलने वाला हूँ... बहनजी... आह्ह्ह!" अंकल दहाड़े। मम्मी ने भी अपनी कमर को पीछे की ओर झटका दिया, जैसे वे अंकल के लंड को अपने अंदर और भी गहराई तक खींचना चाहती हों। "हाँ भाई साब... मेरे छेद में... अपना सारा गरम वीर्य भर दो... आआआह्ह्ह्ह्ह!" मम्मी की यह गंदी और कामुक मांग सुनकर अंकल का संयम टूट गया और उन्होंने अपनी पूरी ताकत के साथ आखिरी और सबसे ज़ोरदार प्रहार करना शुरू कर दिया।


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