19-08-2026, 12:18 AM
(This post was last modified: 28-08-2026, 11:10 PM by MohdIqbal. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
जब वे अपार्टमेंट पहुंचे, तो हरीश ने उसे अंदर आने का इशारा कीया। लिविंग रूम में पहुंचते ही हरीश सोफे पर पसर गया और चैताली को अपने सामने खड़ा कर दिया।
"अब, मेरी प्यारी रंडी, मेरे लिए एक स्लो स्ट्रिपटीज करो। मैं देखना चाहता हूँ की इस साड़ी के नीचे क्या छिपा है," हरीश ने गंदी भाषा का इस्तेमाल करते हुए आदेश दिया।
चैताली, जो अब केवल एक कठपुतली थी, ने धीरे से अपनी साड़ी का पल्लू कंधे से नीचे गिराया। साड़ी का कपड़ा धीरे-धीरे उसके शरीर से फिसलने लगा। उसने बहुत ही सलीके से, लेकीन धीमी गति से अपनी कमर के पास से साड़ी की तहों को खोलना शुरू कीया। साड़ी का हर मोड़ खुलते ही उसके भारी कूल्हों और पेट की हल्की सी चर्बी झलकने लगी, जो उसे और भी कामुक बना रही थी।
हरीश ने अपनी पैंट की चेन नीचे खिसकाई और उत्तेजित होकर बोला, "और धीरे... मुझे एक-एक इंच देखना है।"
चैताली ने अपनी साड़ी पूरी तरह उतारकर फर्श पर गिरा दी। अब वह केवल अपने ब्लाउज और पेटीकोट में थीं। उसके बूब्स का भारीपन ब्लाउज के कपड़े को पूरी तरह से खींच रहा था।
"अब अपना ब्लाउज उतारो," हरीश ने आदेश दिया।
चैताली ने ब्लाउज की हुक खोली। जैसे ही कपड़ा नीचे गिरा, उसके विशाल 38D मम्मे बाहर आ गए। उसने एक पुरानी, घिसी हुई ब्रा पहनी हुई थी, जिसके फीते उसके कंधों पर गहरे निशान छोड़ रहे थे। ब्रा के कप उसके बूब्स को पूरी तरह से नहीं ढक पा रहे थे, और ऊपर से थोड़ा सा मांस बाहर झांक रहा था।
"अपनी घटिया ब्रा उतारो, चैताली। मुझे तुम्हारे निप्पल्स देखने है," हरीश ने गुर्राते हुए कहा।
चैताली ने धीरे से ब्रा के हुक खोले और उसे उतार फेंका। उसके भारी मम्मे गुरुत्वाकर्षण के कारण थोड़े नीचे की ओर लटके हुए थे, लेकीन उसकी गोलाई और त्वचा की कोमलता अद्भुत थी। उसके गहरे भूरे रंग के निप्पल ठंडक और उत्तेजना के कारण सख्त हो चुके थे।
अंत में, उसने अपने पेटीकोट की डोरी खोली। पेटीकोट धीरे से उसके चौड़े कूल्हों से फिसलकर नीचे गिर गया। अब वह केवल अपनी सफ़ेद सूती पैंटी में थीं, जिसने उसके गुप्तांगों को कसकर जकड़ रखा था।
हरीश का लन्ड उत्तेजना से पूरी तरह तन चुका था।
"अब मेरे पैरों के पास घुटनों के बल बैठो और इस लंड को अपने मुंह में लो," हरीश ने आदेश दिया।
"अब, मेरी प्यारी रंडी, मेरे लिए एक स्लो स्ट्रिपटीज करो। मैं देखना चाहता हूँ की इस साड़ी के नीचे क्या छिपा है," हरीश ने गंदी भाषा का इस्तेमाल करते हुए आदेश दिया।
चैताली, जो अब केवल एक कठपुतली थी, ने धीरे से अपनी साड़ी का पल्लू कंधे से नीचे गिराया। साड़ी का कपड़ा धीरे-धीरे उसके शरीर से फिसलने लगा। उसने बहुत ही सलीके से, लेकीन धीमी गति से अपनी कमर के पास से साड़ी की तहों को खोलना शुरू कीया। साड़ी का हर मोड़ खुलते ही उसके भारी कूल्हों और पेट की हल्की सी चर्बी झलकने लगी, जो उसे और भी कामुक बना रही थी।
हरीश ने अपनी पैंट की चेन नीचे खिसकाई और उत्तेजित होकर बोला, "और धीरे... मुझे एक-एक इंच देखना है।"
चैताली ने अपनी साड़ी पूरी तरह उतारकर फर्श पर गिरा दी। अब वह केवल अपने ब्लाउज और पेटीकोट में थीं। उसके बूब्स का भारीपन ब्लाउज के कपड़े को पूरी तरह से खींच रहा था।
"अब अपना ब्लाउज उतारो," हरीश ने आदेश दिया।
चैताली ने ब्लाउज की हुक खोली। जैसे ही कपड़ा नीचे गिरा, उसके विशाल 38D मम्मे बाहर आ गए। उसने एक पुरानी, घिसी हुई ब्रा पहनी हुई थी, जिसके फीते उसके कंधों पर गहरे निशान छोड़ रहे थे। ब्रा के कप उसके बूब्स को पूरी तरह से नहीं ढक पा रहे थे, और ऊपर से थोड़ा सा मांस बाहर झांक रहा था।
"अपनी घटिया ब्रा उतारो, चैताली। मुझे तुम्हारे निप्पल्स देखने है," हरीश ने गुर्राते हुए कहा।
चैताली ने धीरे से ब्रा के हुक खोले और उसे उतार फेंका। उसके भारी मम्मे गुरुत्वाकर्षण के कारण थोड़े नीचे की ओर लटके हुए थे, लेकीन उसकी गोलाई और त्वचा की कोमलता अद्भुत थी। उसके गहरे भूरे रंग के निप्पल ठंडक और उत्तेजना के कारण सख्त हो चुके थे।
अंत में, उसने अपने पेटीकोट की डोरी खोली। पेटीकोट धीरे से उसके चौड़े कूल्हों से फिसलकर नीचे गिर गया। अब वह केवल अपनी सफ़ेद सूती पैंटी में थीं, जिसने उसके गुप्तांगों को कसकर जकड़ रखा था।
हरीश का लन्ड उत्तेजना से पूरी तरह तन चुका था।
"अब मेरे पैरों के पास घुटनों के बल बैठो और इस लंड को अपने मुंह में लो," हरीश ने आदेश दिया।


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