18-08-2026, 06:37 PM
रुही और सनी की बात थोड़ी और चली।
सनी ने पूछा, “खाना क्या बना है वहाँ? ज्यादा लेट तो नहीं करना?”
रुही ने जितना सामान्य हो सका, उतना जवाब दिया, “नहीं… सादा सा खाना है। जल्दी सो जाएँगे। तू फिकर मत कर… मैं बिलकुल ठीक हूँ।”
सनी कुछ और पूछने ही वाला था कि अचानक सोनिया उठ खड़ी हुई। उसने मुस्कुराते हुए रुही का फोन ले लिया।
“दे मेरे हाथ में,” उसने धीरे से कहा। रुही ने विरोध नहीं किया। शर्म से उसका चेहरा पहले से ही लाल था।
सोनिया ने फोन कान पर रखा और बहुत ही मीठी, नॉर्मल आवाज़ में बोली—
“हेलो सनी! मैं सोनिया बोल रही हूँ। रुही थोड़ी थक गई है ना, इसलिए मैं ले ली फोन।”
सनी की आवाज़ आई, “हाँ सोनिया, सब ठीक है न? रुही मज़े में है?”
सोनिया ने रुही की तरफ देखा। आँखों में शरारत थी। वह मुस्कुराते हुए बोली—
“हाँ-हाँ, बिल्कुल मज़े में है। तुम फिकर मत करो। रुही सही जगह पर बैठी है… अपने मनपसंद बिस्तर पर।” उसने जानबूझकर जोर दिया। “समझे? बहुत सुरक्षित हाथों में है वो।”
रुही की आँखें फटी की फटी रह गईं। उसने सोनिया का हाथ पकड़ने की कोशिश की, लेकिन सोनिया हल्के से हट गई। रामू और जामिल दोनों धीरे-धीरे मुस्कुरा रहे थे।
सनी ने कुछ पूछा, “सुरक्षित हाथों में? मतलब?”
सोनिया ने हल्की सी हँसी के साथ जवाब दिया, “अरे बस यूँ ही कहा। हम दोनों आराम से हैं। रुही को यहाँ बहुत सुकून मिल रहा है। तुम बिज़नेस पर ध्यान दो… तुम्हारी बीवी अच्छे हाथों में है।”
फिर सनी ने कुछ और कहा। सोनिया ने फिर डबल मीनिंग में जवाब दिया—
“हाँ, बहुत अच्छे से देख-भाल हो रही है उसकी। जो चाहिए वो मिल रहा है। तुम बिल्कुल टेंशन मत लो। रात अच्छी बीतेगी यहाँ।”
रुही अब पूरी तरह शर्म से पानी-पानी हो चुकी थी। उसने दोनों हाथों से अपना चेहरा ढक लिया और रामू की छाती में दुबक गई। उसका शरीर काँप रहा था।
सोनिया क्या-क्या बोल रही है…
सनी को कितना समझ आ रहा होगा…
मैं यहाँ बैठी हूँ और ये मेरे पति से ऐसे बातें कर रही है…
सोनिया अभी भी फोन पर थी। आवाज़ में हल्की शरारती मुस्कान साफ झलक रही थी।
“हाँ सनी, ठीक है। मैं रुही को दे देती हूँ। तुम आराम से रहना। बाई।”
उसने फोन रुही की तरफ बढ़ाया, लेकिन रुही ने सिर हिलाया। वह अभी बात करने की स्थिति में नहीं थी। सोनिया ने खुद ही फोन काट दिया।
कमरे में हल्की सी चुप्पी छा गई। फिर सोनिया हँस पड़ी।
“क्या हुआ रुही? इतना शर्म क्यों कर रही है? मैंने तो कुछ गलत नहीं कहा। सब सच ही तो बोला… तू सही जगह पर है, मनपसंद बिस्तर पर, सुरक्षित हाथों में।”
रामू ने रुही के बाल सहलाते हुए कहा, “देखा? तेरी सहेली कितनी अच्छी है। तेरे पति को भी तसल्ली दे दी।”
रुही ने आँखें नहीं खोलीं। शर्म से उसका बुरा हाल था। वह सिर्फ रामू से और ज्यादा चिपक गई। आवाज़ में रोना तैर रहा था—
“बहुत बुरा लगा… इतना मत करो न…”
लेकिन कोई नहीं रुका। माहौल में शर्म, उत्तेजना और एक अजीब सी खुली हुई बेबाकी फैल चुकी थी।
रुही का शर्म से बुरा हाल था।
चेहरा गर्दन तक लाल हो चुका था। आँखों में पानी तैर रहा था। वह धीरे से रामू की गोद से उठ खड़ी हुई। टाँगें थोड़ी काँप रही थीं। उसने दोनों हाथों से अपनी पतली पैंटी को थोड़ा ठीक किया और नज़रें फर्श पर गड़ा दीं।
सोनिया ने तुरंत पूछा, “क्या हुआ रुही? इधर-उधर क्यों देख रही है?”
रुही ने और नीचे मुँह किया। आवाज़ बहुत धीमी और शर्माई हुई निकली—
“मैं… मुझे… शू-शू जाना है…”
जैसे ही उसने यह कहा, कमरे में हँसी फूट पड़ी।
सोनिया जोर से हँसने लगी। जामिल भी ठहाका लगा रहा था। रामू ने भी मुस्कुराते हुए सिर हिलाया।
जामिल ने हँसते हुए कहा, “रामू भाई, जाओ… बेचारी को पेशाब करवा के ले आओ। अकेली से नहीं होगा शायद।”
रामू ने रुही की तरफ देखा। आँखों में नशा और मज़ाक दोनों थे। उन्होंने धीरे से कहा—
“मैं बेचारी के नीचे उंगली देकर पेशाब करवाऊँ क्या?”
सोनिया और जोर से हँसी। उसने ताली बजाते हुए कहा, “हाँ हाँ! बेचारी इतनी नाज़ुक कली होगी कि पेशाब भी खुद से नहीं निकलता होगा। रामू भाई, मदद कर दो इसकी!”
तीनों की हँसी से पूरा कमरा गूँज रहा था।
रुही की हालत और खराब हो गई। शर्म से उसने दोनों हाथों से अपना चेहरा ढक लिया और दोबारा रामू से जाकर लिपट गई। उनकी छाती में मुँह छुपा लिया। शरीर काँप रहा था।
“मत हँसो… प्लीज…” उसकी आवाज़ में रोना तैर रहा था।
रामू ने उसकी कमर पकड़ी और एक झटके में उसे गोद में उठा लिया। रुही ने डर और शर्म से उनके गले में दोनों बाँहें डाल दीं और कसकर चिपक गई। उसका चेहरा उनकी गर्दन में छुपा था।
रामू ने हँसते हुए कहा, “चल… तेरे को मूत करवा लाता हूँ। इतनी शर्मा मत। सब देख रहे हैं तो क्या हुआ।”
सोनिया पीछे से चिल्लाती हुई बोली, “रामू भाई, संभाल के ले जाना! बेचारी का हाथ छोड़ मत देना… कहीं गिर न जाए!”
जामिल ने भी कहा, “हाँ भैया, नाज़ुक कली है। संभल के।”
रामू रुही को गोद में उठाए हुए बाथरूम की तरफ चल पड़े। रुही उनके गले से चिपकी हुई थी। आँखें बंद थीं। शर्म के मारे वह कुछ बोल नहीं पा रही थी। हर कदम के साथ सोनिया और जामिल की हँसी पीछे सुनाई दे रही थी।
रामू ने उसके कान में धीरे कहा, “इतना मत शरमा। मैं हूँ न। मूत भी मैं ही करवाऊँगा तुझे।”
रुही ने और कसकर उनके गले में मुँह छुपा लिया। अब वह सिर्फ उनकी बाँहों में थी… और बाथरूम का दरवाज़ा करीब आ रहा था।
सनी ने पूछा, “खाना क्या बना है वहाँ? ज्यादा लेट तो नहीं करना?”
रुही ने जितना सामान्य हो सका, उतना जवाब दिया, “नहीं… सादा सा खाना है। जल्दी सो जाएँगे। तू फिकर मत कर… मैं बिलकुल ठीक हूँ।”
सनी कुछ और पूछने ही वाला था कि अचानक सोनिया उठ खड़ी हुई। उसने मुस्कुराते हुए रुही का फोन ले लिया।
“दे मेरे हाथ में,” उसने धीरे से कहा। रुही ने विरोध नहीं किया। शर्म से उसका चेहरा पहले से ही लाल था।
सोनिया ने फोन कान पर रखा और बहुत ही मीठी, नॉर्मल आवाज़ में बोली—
“हेलो सनी! मैं सोनिया बोल रही हूँ। रुही थोड़ी थक गई है ना, इसलिए मैं ले ली फोन।”
सनी की आवाज़ आई, “हाँ सोनिया, सब ठीक है न? रुही मज़े में है?”
सोनिया ने रुही की तरफ देखा। आँखों में शरारत थी। वह मुस्कुराते हुए बोली—
“हाँ-हाँ, बिल्कुल मज़े में है। तुम फिकर मत करो। रुही सही जगह पर बैठी है… अपने मनपसंद बिस्तर पर।” उसने जानबूझकर जोर दिया। “समझे? बहुत सुरक्षित हाथों में है वो।”
रुही की आँखें फटी की फटी रह गईं। उसने सोनिया का हाथ पकड़ने की कोशिश की, लेकिन सोनिया हल्के से हट गई। रामू और जामिल दोनों धीरे-धीरे मुस्कुरा रहे थे।
सनी ने कुछ पूछा, “सुरक्षित हाथों में? मतलब?”
सोनिया ने हल्की सी हँसी के साथ जवाब दिया, “अरे बस यूँ ही कहा। हम दोनों आराम से हैं। रुही को यहाँ बहुत सुकून मिल रहा है। तुम बिज़नेस पर ध्यान दो… तुम्हारी बीवी अच्छे हाथों में है।”
फिर सनी ने कुछ और कहा। सोनिया ने फिर डबल मीनिंग में जवाब दिया—
“हाँ, बहुत अच्छे से देख-भाल हो रही है उसकी। जो चाहिए वो मिल रहा है। तुम बिल्कुल टेंशन मत लो। रात अच्छी बीतेगी यहाँ।”
रुही अब पूरी तरह शर्म से पानी-पानी हो चुकी थी। उसने दोनों हाथों से अपना चेहरा ढक लिया और रामू की छाती में दुबक गई। उसका शरीर काँप रहा था।
सोनिया क्या-क्या बोल रही है…
सनी को कितना समझ आ रहा होगा…
मैं यहाँ बैठी हूँ और ये मेरे पति से ऐसे बातें कर रही है…
सोनिया अभी भी फोन पर थी। आवाज़ में हल्की शरारती मुस्कान साफ झलक रही थी।
“हाँ सनी, ठीक है। मैं रुही को दे देती हूँ। तुम आराम से रहना। बाई।”
उसने फोन रुही की तरफ बढ़ाया, लेकिन रुही ने सिर हिलाया। वह अभी बात करने की स्थिति में नहीं थी। सोनिया ने खुद ही फोन काट दिया।
कमरे में हल्की सी चुप्पी छा गई। फिर सोनिया हँस पड़ी।
“क्या हुआ रुही? इतना शर्म क्यों कर रही है? मैंने तो कुछ गलत नहीं कहा। सब सच ही तो बोला… तू सही जगह पर है, मनपसंद बिस्तर पर, सुरक्षित हाथों में।”
रामू ने रुही के बाल सहलाते हुए कहा, “देखा? तेरी सहेली कितनी अच्छी है। तेरे पति को भी तसल्ली दे दी।”
रुही ने आँखें नहीं खोलीं। शर्म से उसका बुरा हाल था। वह सिर्फ रामू से और ज्यादा चिपक गई। आवाज़ में रोना तैर रहा था—
“बहुत बुरा लगा… इतना मत करो न…”
लेकिन कोई नहीं रुका। माहौल में शर्म, उत्तेजना और एक अजीब सी खुली हुई बेबाकी फैल चुकी थी।
रुही का शर्म से बुरा हाल था।
चेहरा गर्दन तक लाल हो चुका था। आँखों में पानी तैर रहा था। वह धीरे से रामू की गोद से उठ खड़ी हुई। टाँगें थोड़ी काँप रही थीं। उसने दोनों हाथों से अपनी पतली पैंटी को थोड़ा ठीक किया और नज़रें फर्श पर गड़ा दीं।
सोनिया ने तुरंत पूछा, “क्या हुआ रुही? इधर-उधर क्यों देख रही है?”
रुही ने और नीचे मुँह किया। आवाज़ बहुत धीमी और शर्माई हुई निकली—
“मैं… मुझे… शू-शू जाना है…”
जैसे ही उसने यह कहा, कमरे में हँसी फूट पड़ी।
सोनिया जोर से हँसने लगी। जामिल भी ठहाका लगा रहा था। रामू ने भी मुस्कुराते हुए सिर हिलाया।
जामिल ने हँसते हुए कहा, “रामू भाई, जाओ… बेचारी को पेशाब करवा के ले आओ। अकेली से नहीं होगा शायद।”
रामू ने रुही की तरफ देखा। आँखों में नशा और मज़ाक दोनों थे। उन्होंने धीरे से कहा—
“मैं बेचारी के नीचे उंगली देकर पेशाब करवाऊँ क्या?”
सोनिया और जोर से हँसी। उसने ताली बजाते हुए कहा, “हाँ हाँ! बेचारी इतनी नाज़ुक कली होगी कि पेशाब भी खुद से नहीं निकलता होगा। रामू भाई, मदद कर दो इसकी!”
तीनों की हँसी से पूरा कमरा गूँज रहा था।
रुही की हालत और खराब हो गई। शर्म से उसने दोनों हाथों से अपना चेहरा ढक लिया और दोबारा रामू से जाकर लिपट गई। उनकी छाती में मुँह छुपा लिया। शरीर काँप रहा था।
“मत हँसो… प्लीज…” उसकी आवाज़ में रोना तैर रहा था।
रामू ने उसकी कमर पकड़ी और एक झटके में उसे गोद में उठा लिया। रुही ने डर और शर्म से उनके गले में दोनों बाँहें डाल दीं और कसकर चिपक गई। उसका चेहरा उनकी गर्दन में छुपा था।
रामू ने हँसते हुए कहा, “चल… तेरे को मूत करवा लाता हूँ। इतनी शर्मा मत। सब देख रहे हैं तो क्या हुआ।”
सोनिया पीछे से चिल्लाती हुई बोली, “रामू भाई, संभाल के ले जाना! बेचारी का हाथ छोड़ मत देना… कहीं गिर न जाए!”
जामिल ने भी कहा, “हाँ भैया, नाज़ुक कली है। संभल के।”
रामू रुही को गोद में उठाए हुए बाथरूम की तरफ चल पड़े। रुही उनके गले से चिपकी हुई थी। आँखें बंद थीं। शर्म के मारे वह कुछ बोल नहीं पा रही थी। हर कदम के साथ सोनिया और जामिल की हँसी पीछे सुनाई दे रही थी।
रामू ने उसके कान में धीरे कहा, “इतना मत शरमा। मैं हूँ न। मूत भी मैं ही करवाऊँगा तुझे।”
रुही ने और कसकर उनके गले में मुँह छुपा लिया। अब वह सिर्फ उनकी बाँहों में थी… और बाथरूम का दरवाज़ा करीब आ रहा था।


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