Thread Rating:
  • 3 Vote(s) - 2.33 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
छोटी सी भूल
#11
और उनके सामने खड़ा वह मोटा, डरावना औज़ार।
मेरी बीस साल से शादीशुदा पतिव्रता माँ आज किसी और के बिस्तर की रौनक बनने वाली थी।
राहुल ने धीरे से अपने लंड का दबाव माँ की कमरस से सराबोर योनि पर बनाया। सिर्फ़ सिरे ने अंदर जाना शुरू किया।
मम्मी की आँखें फैल गईं। उनके मुँह से एक तेज़, दबी हुई चीख निकल गई। “आह्ह्ह… नहीं… दर्द… हो रहा है… निकालो…”
राहुल रुका नहीं। वह धीरे-धीरे अंदर धकेलता गया। हर इंच के साथ मम्मी का शरीर तनता जा रहा था। उनके नाखून चादर में गड़ गए। पैर काँप रहे थे। आँसू बह रहे थे।
“नहीं… और मत… मैं फट जाऊँगी… राहुल… प्लीज़…” मम्मी की आवाज़ सिसकी और चीख के बीच खो गई थी।
राहुल ने एक लंबा, धीमा धक्का दिया। आधा अंदर चला गया। मम्मी का शरीर बिस्तर पर उछल पड़ा। उनके मुँह से एक लंबी चीख निकल गई, जिसे उन्होंने तुरंत दबाने की कोशिश की।
फिर राहुल ने दूसरा धक्का दिया—इस बार थोड़ा और ज़ोर से। पूरा अंदर समा गया।
मम्मी की आँखें पीछे की तरफ़ फिर गईं। शरीर एक तेज़ लहर की तरह काँप उठा। “आह्ह्ह्ह…!” उनकी चीख अब रोकने के बावजूद निकल गई।
राहुल रुका। एक पल के लिए अंदर पूरी तरह बैठा रहा। मम्मी के अंदर धड़कन महसूस हो रही थी। फिर उसने बाहर खींचा… और ज़ोर से अंदर धकेला।
धक्का इतना तेज़ था कि मम्मी का पूरा शरीर ऊपर उठ गया। उनके मुँह से एक और तेज़ कराह निकली।
राहुल ने लय पकड़ ली।
धीरे बाहर… और ज़ोर से अंदर।
फिर और ज़ोर से।
फिर और तेज़।
राहुल ने जो चाहा था, उसे आज मिल गया था।
हर धक्के के साथ मम्मी की कराहें निकल रही थीं। उनका शरीर बिस्तर पर धक्कों से हिल रहा था। स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। पेट की मांसपेशियाँ तन रही थीं। आँखें बंद थीं। आँसू लगातार बह रहे थे।
“आह्ह… दर्द… बहुत… राहुल… धीरे… आह्ह्ह…” मम्मी बड़बड़ा रही थीं। लेकिन राहुल की गति बढ़ती जा रही थी। हर धक्का पिछले से ज़्यादा गहरा और ज़्यादा ज़ोर का था।
बिस्तर की चरमराहट, शरीर की टकराहट और मम्मी की दबी हुई चीखें कमरे में गूँज रही थीं। राहुल ने मम्मी के दोनों पैरों को अपने कंधों पर उठा लिया और और गहराई तक ठोकने लगा।
हर स्ट्रोक पर मम्मी का शरीर काँप उठता। उनके मुँह से अब सिर्फ़ टूटी-फूटी कराहें निकल रही थीं। “आह… आह्ह… नहीं… बहुत… ज़ोर… से…”
राहुल पसीने से तर हो चुका था। वह मम्मी को नीचे दबाए हुए लगातार ठोक रहा था—ज़ोरदार, गहरे, बेरहम धक्के। कमरे में मम्मी की कराहें, उनकी चूड़ियों के खनकने और टूटने की आवाज़ें थीं, और राहुल के हर झटके पर मम्मी के पैरों की पायल भी खनक उठती। यह सब मिलकर ऐसा मादक संगीत कमरे में पैदा कर रहा था कि मैंने अपना औज़ार उसी की लय पर हिलाना शुरू कर दिया।
मम्मी की इज़्ज़त, उनकी शादी, उनका बेटा… उनका परिवार—सब कुछ हर धक्के के साथ टूटता जा रहा था।
और मैं दरवाज़े के पास अँधेरे में खड़ा,
हाँफता हुआ,
अपनी माँ को बिस्तर पर कुचले जाते हुए देखता रहा।
पर राहुल को भावनाओं से कोई मतलब नहीं था। उसकी हालत ऐसी थी जैसे किसी भूखे को छप्पन भोग वाली थाली मिल गई हो—और वह थाली थी मेरी संस्कारी माँ, जिसने किसी पर पुरुष का साया भी कभी खुद पर नहीं पड़ने दिया था।
राहुल ने एक लंबा, धीमा धक्का दिया। मम्मी को अंदर तक महसूस हुआ—जैसे कुछ उनके पेट के गहरे हिस्से तक पहुँच गया हो। उनकी आँखें पीछे की तरफ़ फिर गईं।
“आह्ह्ह्हहा…!”
राहुल ने दूसरा धक्का दिया—इस बार और ज़ोर से। मम्मी को साफ़ अहसास हुआ कि वह उनकी नाभि के ठीक नीचे, गर्भाशय के पास छू रहा है। एक गहरी, भारी-भरपूर अनुभूति ने उनके पेट के अंदर तक झटका दिया।
“आहाаааааа…!” मम्मी की चीख निकल गई। आँसू तेज़ी से बहने लगे।
राहुल रुका। एक पल के लिए अंदर पूरी तरह बैठा रहा। मम्मी के अंदर धड़कन महसूस हो रही थी। फिर उसने बाहर खींचा… और ज़ोर से अंदर धकेला।
धक्का इतना गहरा था कि मम्मी को लगा जैसे उनकी नाभि के पीछे तक जा रहा हो। पेट में एक तेज़ दबाव महसूस हुआ। उनका शरीर बिस्तर पर उछल पड़ा।
“आह्ह्ह्हहा आहाаааа…!”
राहुल ने लय बनाए रखी।
धीरे बाहर… और ज़ोर से अंदर।
हर धक्के के साथ मम्मी की आँखों से आँसू बह रहे थे। राहुल उनके अंदर तक गहराई में पहुँच रहा था। नाभि के नीचे एक गहरी, धड़कती हुई संवेदना फैल रही थी।
“आह्ह… आहाаа… दर्द… बहुत अंदर… आह्ह्ह्हहा…!” मम्मी हर धक्के पर चीख रही थीं। आवाज़ अब दब नहीं पा रही थी। शरीर राहुल के धक्कों से हिल रहा था। स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। पेट की मांसपेशियाँ तनकर नाभि के आसपास सिकुड़ रही थीं।
राहुल ने मम्मी के दोनों पैरों को अपने कंधों पर उठा लिया और और गहराई तक ठोकने लगा। अब हर झटके से राहुल का लंड मम्मी के गर्भाशय के मुहाने पर दस्तक दे रहा था। मम्मी को साफ़ महसूस हो रहा था।
“आहाаааа आहाаа… नहीं… इतना अंदर… आह्ह्ह्हहा…!”
मम्मी के आँसू अब रोकने से बाहर हो चुके थे। हर धक्के के साथ वे ज़ोर-ज़ोर से सिसक रही थीं और चीख रही थीं। शरीर बेकाबू हो चुका था। कमर अपने-आप उठ रही थी, जैसे दर्द के बावजूद शरीर प्रतिक्रिया दे रहा हो।
राहुल पसीने से तर था। वह लगातार, गहरे और ज़ोरदार धक्के दे रहा था। हर स्ट्रोक मम्मी की नाभि तक पहुँच रहा था। गर्भ में बार-बार टकराहट हो रही थी। मम्मी की चीखें एक के बाद एक निकल रही थीं—
“आह्ह्ह्हहा… आहाаааа… आहाаа…!”
बिस्तर चरमरा रहा था। शरीर की टकराहट की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। मम्मी की इज़्ज़त हर गहरे धक्के के साथ टूटती जा रही थी।
राहुल की तेज़ और गहरी ठोकरें अचानक धीमी पड़ गईं।
वह अंदर तक समाया हुआ था, लेकिन अब धक्के रोक दिए। मम्मी हाँफ रही थीं। आँखें आँसुओं से भरी थीं। शरीर अभी भी काँप रहा था। हर साँस के साथ उनकी नाभि के नीचे वह भारी अहसास धड़क रहा था।
राहुल ने धीरे से बाहर खींचा—लगभग किनारे तक—फिर बहुत धीरे-धीरे फिर से अंदर धकेला। इस बार कोई ज़ोर नहीं था। बस एक लंबा, धीमा, पूरा भराव।
मम्मी के मुँह से एक लंबी, काँपती हुई कराह निकल गई। “आह्ह्ह…”
राहुल ने वही गति दोहराई। धीरे बाहर… और और धीरे अंदर। हर बार पूरा अंदर तक जाता, नाभि के पीछे तक छूता, फिर रुककर वहीं दबाए रखता। मम्मी का पेट हर बार हल्के से फूलता और सिकुड़ता। उनकी आँखें बंद थीं। होंठ काँप रहे थे।
“अब धीरे…” राहुल ने फ़ुसफ़ुसाते हुए कहा। आवाज़ में वह बेरहमी कम हो गई थी, जगह एक गंदी नमी ने ले ली थी। “महसूस करो आंटी… कितना गहरा बैठता है।”
वह अंदर तक गया और वहीं रुक गया। अपना शरीर मम्मी के शरीर से सटाए हुए छोटे-छोटे गोलाकार आंदोलन करने लगा। मर्दानगी उनके गर्भ के मुहाने पर धीरे-धीरे घूम रही थी। मम्मी की कराहें अब तेज़ चीखों से बदलकर लंबी, सिसकती हुई आवाज़ों में बदल गई थीं।
“आह्ह… अह्ह… क्या… कर रहे हो…” उनकी आवाज़ में अब सिर्फ़ दर्द नहीं रह गया था। कुछ और भी घुल गया था।
राहुल ने एक हाथ से मम्मी का स्तन पकड़ा और नोक को उंगलियों के बीच धीरे-धीरे मसलने लगा। दूसरा हाथ उनकी नाभि पर रखा और हल्के दबाव के साथ सहलाने लगा। नीचे उसका घर्षण लगातार, धीमा और गहरा बना हुआ था।
मम्मी का शरीर अब अलग तरह से प्रतिक्रिया दे रहा था। कमर हल्के-हल्के उठने लगी थी। साँसें भारी थीं। पेट की मांसपेशियाँ बार-बार सिकुड़ रही थीं। आँसू अभी भी बह रहे थे, लेकिन कराहों में एक अजीब-सी मिठास आ गई थी।
राहुल ने अपना चेहरा उनके कान के पास लाया। “बोलो आंटी… कैसा लग रहा है अंदर?”
मम्मी ने सिर हिलाने की कोशिश की, लेकिन जवाब में सिर्फ़ एक लंबी कराह निकली। “आह्ह्ह… बहुत… अंदर…”
राहुल मुस्कुराया। उसने गति को और धीमा कर दिया—इतना धीमा कि हर इंच साफ़ महसूस हो रहा था। पूरा बाहर निकालता, सिरे से सहलाता, फिर धीरे-धीरे फिर से भर देता। हर बार नाभि के पीछे तक जाता और वहाँ रुककर दबाता।
मम्मी के नाखून अब उसकी पीठ में गड़ रहे थे। पैर उसके कमर के आसपास लिपटने लगे थे। शरीर अपने-आप उसके धीमे आंदोलनों का जवाब दे रहा था।
“आह्ह… अह्हह… राहुल…” उनका नाम उनके मुँह से निकल गया। आवाज़ में विरोध कमज़ोर पड़ चुका था।
राहुल ने दोनों स्तनों को हाथों में ले लिया और नोकों को उंगलियों से धीरे-धीरे मसलते हुए नीचे अपना धीमा, गहरा खेल जारी रखा। मम्मी की कराहें अब एक लय में आ गई थीं—हर भराव के साथ एक लंबी, काँपती हुई आवाज़।
और मैं अँधेरे में खड़ा,
यह धीमा, गंदा, इरोटीक खेल देखता रहा।
मेरी माँ बिस्तर पर तड़प रही थीं…
और इस बार उनकी कराहें सिर्फ़ दर्द की नहीं रह गई थीं।
अचानक राहुल ने मम्मी के कान के पास होंठ लाते हुए धीरे से पूछा—
“आंटी… अंकल का कितना है?”
मम्मी की आँखें अचानक खुल गईं। उन्होंने उसकी तरफ़ देखा। आवाज़ में घबराहट और शर्म दोनों थीं। “क्या…?”
राहुल ने एक गहरा, धीमा धक्का दिया और अंदर तक दबाए रखते हुए दोबारा पूछा। “अंकल का… कितना बड़ा है? इतना?” उसने थोड़ा और अंदर दबाया। “या इससे कम?”
मम्मी ने सिर घुमा लिया। आँसू फिर से बहने लगे। “मत पूछो… राहुल… मत…”
राहुल हल्का-सा हँसा। उसने गति को और धीमा कर दिया—इतना धीमा कि हर इंच साफ़ महसूस हो रहा था। “बोलो न आंटी। अंकल इतनी देर बाहर रहते हैं… रात में कितना देते होंगे आपको?”
मम्मी चुप रहीं। सिर्फ़ कराहें निकल रही थीं।
राहुल ने एक हाथ से उनका चेहरा अपनी तरफ़ घुमाया। “मुझसे छोटा है न? बोलो।”
मम्मी की आँखें काँप रही थीं। उन्होंने बहुत धीमी आवाज़ में, सिसकते हुए कहा, “हाँ…”
राहुल की मुस्कान और गंदी हो गई। उसने ज़ोर से एक गहरा धक्का दिया। मम्मी की कराह निकल गई।
“तो फिर आज सही मर्द से मिल रही हो आंटी,” उसने फ़ुसफ़ुसाते हुए कहा और फिर से अपना धीमा, गहरा खेल जारी रखा।
मम्मी ने आँखें बंद कर लीं। आँसू बह रहे थे। लेकिन उनका शरीर राहुल के हर भराव पर प्रतिक्रिया दे रहा था।
और मैं अँधेरे में खड़ा,
यह सब सुन और देख रहा था।
मम्मी की साँसें अचानक बहुत तेज़ हो गईं। पेट की मांसपेशियाँ बार-बार ज़ोर से सिकुड़ने लगीं। पैर राहुल की कमर के आसपास कस गए। नाखून उसकी पीठ में गड़ गए।
“नहीं… रुक… कुछ… हो रहा है… आह्ह्ह…” मम्मी ने सिर ज़ोर-ज़ोर से हिलाना शुरू कर दिया। आँखें बंद थीं। होंठ काँप रहे थे।
राहुल ने गति को थोड़ा तेज़ कर दिया—अभी भी गहरा, लेकिन अब ज़्यादा दबाव के साथ। हर धक्का सीधे उनके सबसे संवेदनशील बिंदु पर जा रहा था।
मम्मी का शरीर अचानक तन गया। उनकी कमर बिस्तर से उठ गई। मुँह खुला का खुला रह गया।
“आह्ह्ह्हहा… आहाаааа…!”
एक लंबी, तेज़ चीख उनके गले से फूट निकली। पूरा शरीर ज़ोर-ज़ोर से काँपने लगा। अंदर वाली दीवारें राहुल की मर्दानगी को बार-बार जकड़ रही थीं। पेट की मांसपेशियाँ नाभि के नीचे तेज़ी से संकुचित हो रही थीं। पैर बेकाबू हो गए। आँसू ज़ोर से बहने लगे।
राहुल ने उन्हें कसकर पकड़े रखा और उसी गहराई पर छोटे-छोटे धक्के देते हुए उनका ऑर्गैज़्म निकलवाता रहा। मम्मी की चीखें अब सिसकियों में बदल गई थीं। शरीर एक के बाद एक लहरों में काँप रहा था। वे राहुल के कंधे में मुँह छुपाकर ज़ोर-ज़ोर से काँप रही थीं।
कई लंबे पल तक यह सिलसिला चला। फिर धीरे-धीरे मम्मी का शरीर ढीला पड़ने लगा। साँसें हाँफने लगीं। आँखें आँसुओं से भरी हुई थीं। पूरे शरीर में कमज़ोरी छा गई थी।
राहुल अभी भी अंदर था। उसने मम्मी के कान के पास फ़ुसफ़ुसाया, “हो गया आंटी… पहली बार सही मर्द से चुदी हो।”
मम्मी कुछ नहीं बोल पाईं। सिर्फ़ सिसक रही थीं। शरीर अभी भी हल्के-हल्के काँप रहा था।
और मैं दरवाज़े के पास अँधेरे में खड़ा,
यह सब देखता रहा—
मेरी माँ का शरीर एक गैर मर्द के नीचे काँपता हुआ,
उनका ऑर्गैज़्म,
उनकी टूटी हुई कराहें।
राहुल की गति फिर से बदल गई। मम्मी अभी भी ऑर्गैज़्म की कमज़ोरी में काँप रही थीं कि उसने अचानक गहरे और तेज़ धक्के शुरू कर दिए।
मम्मी की आँखें फैल गईं। उन्होंने तुरंत समझ लिया।
“नहीं… राहुल… अंदर मत… करना… बाहर निकालो… प्लीज़… अंदर मत छोड़ना…” वे घबराकर बोलने लगीं। हाथों से उसकी छाती धकेलने की कोशिश करने लगीं। “बाहर निकाल… राहुल… मत… मैं गर्भ… आहाаааа… नहीं…”
राहुल ने उनके हाथ पकड़कर सिर के ऊपर दबा दिए। उसकी साँसें तेज़ हो चुकी थीं। धक्के और गहरे हो गए।
“जिस खेत में इतना हल चलाया है, उसमें अपना बीज डालना तो बनता ही है न मेरी आंटी जी…” उसने दाँतों के बीच से कहा।
“नहीं… मत… राहुल… मेरी बात सुनो… अंदर मत… पंकज के पापा… नहीं…” मम्मी सिसक-सिसक कर बोल रही थीं। शरीर हिलाने की पूरी कोशिश कर रही थीं, लेकिन राहुल का वजन उन पर भारी था।
राहुल के शरीर में अचानक एक तेज़ तनाव दौड़ गया। उसने मम्मी की कमर को दोनों हाथों से कसकर पकड़ा और एक लंबा, गहरा धक्का देकर अंदर तक समा गया।
फिर वह रुक गया।
मम्मी को साफ़ महसूस हुआ—गर्म, गाढ़ा तरल उनके गर्भाशय के सबसे गहरे हिस्से में छूट रहा है। एक स्पर्ट… फिर दूसरा… फिर तीसरा। ज़ोर-ज़ोर के झटके के साथ राहुल का वीर्य उनकी कोख में भरता जा रहा था।
“आह्ह… नहीं… निकालो… प्लीज़!” मम्मी चीख उठीं। वे और ज़ोर से छटपटाने लगीं, लेकिन राहुल ने उन्हें दबाए रखा। उसके शरीर के झटके जारी थे। एक के बाद एक गर्म लहरें मम्मी के गर्भ में उतर रही थीं।
राहुल की साँसें हाँफने लगीं। वह मम्मी के ऊपर गिरा हुआ था। अंदर अभी भी धड़क रहा था। आखिरी कुछ स्पर्ट भी उनके सबसे गहरे हिस्से में छोड़ चुका था।
मम्मी की आँखों से आँसू बह रहे थे। वे सिसक रही थीं। “क्या कर दिया तुमने… अंदर… मैं क्या करूँगी अब…”
राहुल ने उनका चेहरा अपनी तरफ़ घुमाया। पसीने से तर चेहरे पर एक थकी हुई, संतुष्ट मुस्कान थी। उसने धीरे से कहा—
“अब शायद… छोटा भाई या बहन हो जाए पंकज का।”
उसकी बात सुनते ही मेरे दिमाग में बिजली-सी कौंध गई।
वह दिन… मम्मी के कीर्तन पर जाने के बाद…
जब राहुल ने मुझसे पूछा था—
“पंकज, तुम्हारा कोई छोटा भाई-बहन नहीं है?”
अब समझ में आ रहा था।
वह सिर्फ़ एक सवाल नहीं था।
वह एक इरादा था।
और आज रात…
उसने वह इरादा मेरे घर में, मेरी माँ की कोख में पूरा कर दिया था।
मैं अँधेरे में खड़ा,
यह सब देखता रहा।
मेरी माँ बिस्तर पर नंगी पड़ी थीं।
उसकी कोख में एक हवसी दरिंदे ने अपना बीज डाल दिया था, जिसे किसी के घर की मान-मर्यादा या किसी के परिवार की ख़ुशियों का कोई ख़याल नहीं था। उसे अपनी गंदी हवस का खेल खेलना था—और उस रात उसका खिलौना मेरी माँ अंजलि थी।
और राहुल… मुस्कुरा रहा था।
[+] 1 user Likes ripsin183's post
Like Reply


Messages In This Thread
छोटी सी भूल - by ripsin183 - 08-08-2026, 08:05 PM
RE: छोटी सी भूल - by Uvaaaa - 10-08-2026, 02:06 PM
RE: छोटी सी भूल - by Loveakb18 - 16-08-2026, 08:10 AM
RE: छोटी सी भूल - by Loveakb18 - 16-08-2026, 08:10 AM
RE: छोटी सी भूल - by ripsin183 - 16-08-2026, 02:44 PM
RE: छोटी सी भूल - by Loveakb18 - 16-08-2026, 10:11 PM
RE: छोटी सी भूल - by ripsin183 - 17-08-2026, 03:55 PM
RE: छोटी सी भूल - by ripsin183 - 18-08-2026, 09:58 AM
RE: छोटी सी भूल - by Tejas_8448 - 18-08-2026, 12:48 PM
RE: छोटी सी भूल - by Asli lund - 18-08-2026, 01:43 PM
RE: छोटी सी भूल - by ripsin183 - 18-08-2026, 02:10 PM
RE: छोटी सी भूल - by Asli lund - 18-08-2026, 05:55 PM
RE: छोटी सी भूल - by ripsin183 - 18-08-2026, 09:13 PM
RE: छोटी सी भूल - by Loveakb18 - 18-08-2026, 09:39 PM
RE: छोटी सी भूल - by saya - 18-08-2026, 10:58 PM
RE: छोटी सी भूल - by sdd2686 - 22-08-2026, 02:38 PM
RE: छोटी सी भूल - by Loveakb18 - 22-08-2026, 07:06 PM
RE: छोटी सी भूल - by Uvaaaa - 23-08-2026, 10:54 AM
RE: छोटी सी भूल - by ripsin183 - 25-08-2026, 05:40 PM
RE: छोटी सी भूल - by saya - 25-08-2026, 08:23 PM
RE: छोटी सी भूल - by KkkNad - 28-08-2026, 10:08 AM
RE: छोटी सी भूल - by KkkNad - 28-08-2026, 10:09 AM



Users browsing this thread: 1 Guest(s)