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छोटी सी भूल
#8
राहुल ने अपनी उंगलियाँ मम्मी की सलवार के अंदर और गहराई तक घुसा दीं। मम्मी का शरीर एक झटके से तन गया। उनके मुँह से एक लंबी, दबी हुई कराह निकली, जिसे वे अपने होंठ काटकर रोकना चाहती थीं, लेकिन रोक नहीं पाईं।
“आह्ह…” उनकी आवाज़ सिसकी और कराह के बीच खो गई।
राहुल ने धीरे-धीरे उंगलियाँ घुमाईं। मम्मी के घुटने काँपने लगे। उनका शरीर राहुल के नंगे सीने पर और ज़ोर से टिक गया। कुर्ता अभी भी स्तनों के नीचे अटका हुआ था। सलवार नाभि से नीचे खिसकी हुई। पूरा पेट और उससे नीचे का हिस्सा नाइट बल्ब की रोशनी में चमक रहा था।
राहुल ने अपना दूसरा हाथ कुर्ते के अंदर और ऊपर बढ़ाया। उसकी हथेली अब मम्मी के एक स्तन के निचले हिस्से को थामे हुए थी। उसने हल्के से दबाया और उंगलियों से धीरे-धीरे सहलाया।
मम्मी का सिर पीछे की तरफ़ लुढ़क गया। आँखें बंद थीं। होंठ काँप रहे थे। एक आँसू के बाद दूसरा आँसू उनके गाल पर बह रहा था। लेकिन उनके शरीर की प्रतिक्रिया अब सिर्फ़ डर की नहीं रह गई थी। साँसें तेज़ थीं। पेट के निचले हिस्से में हल्के-हल्के संकुचन हो रहे थे।
राहुल ने यह महसूस कर लिया।
उसने मम्मी के कान में फ़ुसफ़ुसाया, “आपका शरीर तो आपसे ज़्यादा ईमानदार है आंटी… मुँह से ‘नहीं’ कह रही हो, लेकिन अंदर… गीली हो चुकी हो।”
मम्मी ने सिर हिलाने की कोशिश की, लेकिन राहुल ने उनके बाल पकड़कर सिर को स्थिर रख दिया। उसने फिर से मम्मी का चेहरा मेरे कमरे की तरफ़ घुमाया।
“आँखें खोलो। उधर देखो।”
मम्मी ने आँखें खोलीं। अँधेरे दरवाज़े की तरफ़। उन्हें कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। वे नहीं जानती थीं कि उनका बेटा वहाँ बैठा है, हाँफता हुआ, अपना हाथ तेज़ी से चलाता हुआ।
राहुल की उंगलियाँ नीचे और तेज़ हो गईं। मम्मी के मुँह से छोटी-छोटी कराहें लगातार निकलने लगीं। वे राहुल की बाँह को इतनी ज़ोर से पकड़े हुए थीं कि उनके नाखून उसकी त्वचा में गड़ गए थे।
“पंकज… आह्ह… जाग… ” मम्मी ने सिसकते हुए कहने की कोशिश की।
राहुल हल्का-सा हँसा। “तो क्या होगा आंटी? तुम्हारा बेटा देख लेगा कि उसकी माँ कितनी… गरम है?”
यह कहते हुए उसने उंगलियों का दबाव और बढ़ा दिया। मम्मी का शरीर एक तेज़ झटके से काँप उठा। उनके मुँह से एक तेज़ कराह निकली, जिसे उन्होंने तुरंत दबाने की कोशिश की।
मैं अँधेरे में बैठा यह सब देख रहा था। मेरी साँसें अब काबू में नहीं थीं। मेरा हाथ पागलों की तरह चल रहा था। मेरी माँ का नंगा पेट, उनके काँपते स्तनों का निचला हिस्सा, राहुल का हाथ उनके सबसे निजी अंग में घूमता हुआ—सब कुछ मेरे सामने था।
मुझे रोकना चाहिए था।
चीखना चाहिए था।
राहुल को धक्का देकर हटाना चाहिए था।
लेकिन मैं कुछ नहीं कर रहा था।
मैं सिर्फ़ देख रहा था।
और उस देखने में एक गंदी, पागल कर देने वाली उत्तेजना मिल रही थी।
राहुल ने मम्मी को और कसकर अपनी ओर खींच लिया। अब उनका पूरा शरीर उसके नंगे शरीर से चिपक गया था। उसने मम्मी के कान की लौ को फिर से मुँह में ले लिया और धीरे से चूसा।
मम्मी की कराहें अब लगातार निकल रही थीं। शरीर काँप रहा था। पैर लगभग जवाब दे चुके थे। राहुल ही उन्हें थामे हुए था।
“आज रात लंबी है आंटी…” राहुल ने धीरे से कहा। “और पंकज… गहरी नींद में है।”
मैं अँधेरे में बैठा, हाँफता हुआ, अपनी माँ को एक दरिंदे के हाथों में तड़पता हुआ देख रहा था। और उस पल मुझे पता चल गया था—यह रात अब वापस नहीं आने वाली थी।
राहुल की उंगलियाँ अभी भी मम्मी के अंदर थीं, जब उसने अचानक मम्मी को अपनी बाँहों में कस लिया और उन्हें ज़मीन से उठा लिया।
मम्मी ने घबराकर हाथ-पैर पटकने शुरू कर दिए। “नहीं… छोड़ो… कहाँ ले जा रहे हो… राहुल… नहीं!”
लेकिन राहुल उनकी बात पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहा था। वह मम्मी को गोद में उठाए हुए सीधे उनके कमरे की तरफ़ बढ़ गया। मम्मी उसके सीने पर मुक्के बरसा रही थीं, लेकिन उनकी ताक़त उसके सामने कुछ नहीं थी।
मैं अँधेरे में बैठा यह सब देख रहा था। मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। मैं उठना चाहता था। रोकना चाहता था। लेकिन शरीर जैसे जड़ हो गया था। उत्तेजना और डर दोनों ने मुझे कुर्सी से चिपका रखा था।
राहुल ने मम्मी के कमरे का दरवाज़ा लात मारकर खोला और अंदर घुस गया। उसने मम्मी को बिस्तर पर पटक दिया। मम्मी तुरंत उठने की कोशिश करने लगीं, लेकिन राहुल ने उनके दोनों हाथ पकड़कर सिर के ऊपर दबा दिए।
“छोड़ो… प्लीज़… पंकज जाग जाएगा…” मम्मी सिसकते हुए बोलीं। उनकी आँखों में आँसू थे।
राहुल ने उनके ऊपर झुकते हुए कहा, “सो रहा है वह। और अगर जाग भी गया… तो क्या? देख लेगा।”
मम्मी ने सिर इधर-उधर हिलाना शुरू कर दिया। “नहीं… मत करो… मैं तुम्हारी आंटी हूँ…”
राहुल हल्का-सा हँसा। उसने मम्मी के दोनों हाथ एक हाथ से पकड़ रखे और दूसरे हाथ से उनका कुर्ता पूरी तरह ऊपर कर दिया। अब उनके स्तन सिर्फ़ ब्रा में थे। फिर उसने सलवार को और नीचे खींच दिया। नाभि के काफ़ी नीचे तक सब नंगा हो चुका था।
मम्मी हिलने-डुलने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन राहुल का शरीर उनके ऊपर भारी पड़ रहा था।
फिर राहुल ने अपना सिर नीचे झुकाया।
पहले उसने मम्मी के पेट पर एक हल्का-सा चुंबन लिया। फिर नाभि के ठीक ऊपर। मम्मी का शरीर एक झटके से तन गया।
“आह्ह…” उनके मुँह से एक लंबी कराह निकल गई।
“इस ज़ालिम पेट ने मुझे बहुत परेशान किया हुआ है। आज इसे नहीं छोड़ने वाला,” राहुल ने कहा।
और अपनी जीभ निकालकर मम्मी की गहरी नाभि के आसपास धीरे-धीरे चाटा। फिर जीभ को नाभि के गड्ढे में डाल दिया और घुमाया।
मम्मी के मुँह से और तेज़ कराहें निकलने लगीं। “नहीं… वहाँ मत… आह्ह… छोड़ो…”
लेकिन उनकी आवाज़ में अब सिर्फ़ विरोध नहीं रह गया था। कराहों में एक अजीब-सी कमज़ोरी घुल गई थी। शरीर काँप रहा था। पेट की मांसपेशियाँ हल्के-हल्के संकुचित हो रही थीं।
राहुल ने मम्मी के पूरे पेट पर गीले चुंबन लगाने शुरू कर दिए। कभी नाभि के आसपास, कभी थोड़ा ऊपर, कभी पसलियों के नीचे। हर चुंबन पर मम्मी की कराहें निकल रही थीं। वे अब राहुल के बालों को पकड़ने लगी थीं—धकेलने के लिए नहीं, बल्कि सहने के लिए।
मैं अपने कमरे के दरवाज़े से यह सब देख रहा था। मेरी साँसें उखड़ चुकी थीं। मेरा हाथ पागलों की तरह चल रहा था। मेरी माँ बिस्तर पर लेटी हुई थीं, उनका पेट नंगा था, और एक गैर मर्द उनकी नाभि और पेट को चूम-चाट रहा था। मम्मी कराह रही थीं।
राहुल ने अपना चेहरा मम्मी के पेट से उठाया। उसके होंठ चमक रहे थे। उसने मम्मी की आँखों में देखते हुए कहा, “कितनी मीठी हो आंटी… नाभि तक।”
फिर उसने फिर से सिर झुकाया और मम्मी की नाभि को ज़ोर से चूसने लगा।
मम्मी का शरीर एक तेज़ लहर की तरह काँप उठा। उनके मुँह से एक लंबी, दबी हुई चीख निकल गई, जिसे उन्होंने तुरंत अपने हाथ से दबा लिया।
और मैं अँधेरे में खड़ा, हाँफता हुआ, अपनी माँ को बिस्तर पर तड़पता हुआ देखता रहा।
राहुल मम्मी के पेट और नाभि को चूमता रहा। उसकी जीभ नाभि के गड्ढे में घूम रही थी, कभी हल्के से चाटती, कभी ज़ोर से चूसती। मम्मी बिस्तर पर कराह रही थीं। उनके हाथ कभी राहुल के बाल पकड़ते, कभी चादर को मरोड़ते। शरीर लगातार काँप रहा था।
“आह्ह… बस करो… राहुल… मत करो…” उनकी आवाज़ अब पूरी तरह टूटी हुई थी। कराहें और सिसकियाँ एक-दूसरे में घुल गई थीं।
राहुल ने अचानक सिर उठाया। उसके होंठ मम्मी के पेट की चमक से गीले थे। उसने मम्मी की आँखों में देखा और फिर दोनों हाथ उनके ब्रा के पीछे ले गया।
मम्मी ने समझते ही आँखें फाड़ दीं। “नहीं… वो मत… प्लीज़…”
लेकिन राहुल ने एक झटके में ब्रा का हुक खोल दिया। ब्रा ढीली पड़ गई। उसने दोनों हाथों से उसे खींचकर मम्मी के हाथों से ऊपर की तरफ़ सरका दिया और एक तरफ़ फेंक दिया।
अब मम्मी के दोनों स्तन पूरी तरह नंगे थे। गोरे, मुलायम, और उत्तेजना से हल्के तने हुए। नाइट बल्ब की रोशनी में उनकी नोकें साफ़ चमक रही थीं।
मम्मी ने तुरंत दोनों हाथों से अपने स्तन ढँकने की कोशिश की, लेकिन राहुल ने उनके हाथ पकड़कर सिर के दोनों तरफ़ दबा दिए।
“इतने छुपाए क्यों रखती हो आंटी…” उसने धीरे से कहा।
फिर उसने सिर झुकाया और बिना किसी चेतावनी के मम्मी के एक स्तन की नोक को मुँह में भर लिया।
मम्मी के मुँह से एक तेज़ कराह निकल गई। “आह्ह्ह…!”
राहुल ने बेरहमी से चूसना शुरू कर दिया। दाँतों से हल्के-हल्के काटते हुए, जीभ से नोक को दबाते हुए, ज़ोर-ज़ोर से खींचते हुए। मम्मी का शरीर बिस्तर पर उछलने लगा। वे राहुल के सिर को धकेलने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन उनकी उंगलियाँ उल्टे उसके बालों में फँस गईं।
“नहीं… दर्द… हो रहा है… छोड़ो…” मम्मी सिसकते हुए बोलीं, लेकिन राहुल रुका नहीं।
वह एक स्तन को ज़ोर-ज़ोर से चूसता रहा, फिर दूसरे पर चला गया। वहाँ भी वही बेरहमी। नोक को दाँतों के बीच दबाकर खींचना, जीभ से घुमाना, ज़ोर से चूसना। मम्मी की कराहें अब कमरे में गूँज रही थीं। वे अपने होंठ काट-काट कर आवाज़ दबाने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन आवाज़ रुक नहीं रही थी।
राहुल ने एक स्तन को मुँह से छोड़ा। नोक गीली और लाल हो चुकी थी। उसने तुरंत दूसरे स्तन को फिर से मुँह में ले लिया और पहले से भी ज़्यादा ज़ोर से चूसने लगा।
मम्मी का शरीर एक तेज़ लहर की तरह काँप उठा। उनके मुँह से एक लंबी, दबी हुई चीख निकल गई। आँखों से आँसू बह रहे थे। पैर बेकाबू हो रहे थे।
मैं दरवाज़े के पास अँधेरे में खड़ा यह सब देख रहा था। मेरी साँसें पूरी तरह उखड़ चुकी थीं। मेरा हाथ पागलों की तरह चल रहा था। मेरी माँ बिस्तर पर नंगी पड़ी थीं, उनके स्तन एक गैर मर्द के मुँह में थे, और वह उन्हें बेरहमी से चूस रहा था। मम्मी कराह रही थीं। तड़प रही थीं।
और मैं…
मैं सिर्फ़ देख रहा था।
और उस देखने में डूबता जा रहा था।
राहुल अभी भी मम्मी के स्तनों को बेरहमी से चूस रहा था। एक नोक उसके मुँह में थी, दूसरी उसके हाथ में मसली जा रही थी। मम्मी बिस्तर पर कराह रही थीं। शरीर काँप रहा था। आँखें बंद थीं। आँसू बह रहे थे।
अचानक राहुल ने स्तन को मुँह से छोड़ा। दोनों नोकें अब गीली, लाल और सूजी हुई थीं। उसने मम्मी की आँखों में देखा—उनमें डर और थकान दोनों थे—फिर अपना शरीर थोड़ा नीचे खिसकाया।
मम्मी ने तुरंत समझ लिया। उन्होंने पैर जोड़कर बंद करने की कोशिश की। “नहीं… राहुल… वो मत… प्लीज़ छोड़ो…”
लेकिन राहुल ने उनके दोनों घुटनों को पकड़कर ज़ोर से अलग कर दिया। मम्मी की सलवार पहले से ही नाभि से तीन इंच नीचे खिसकी हुई थी। राहुल ने दोनों हाथों से उसे पकड़ा और एक झटके में नीचे की तरफ़ खींच दिया।
सलवार मम्मी की जाँघों से सरकती हुई उनके घुटनों तक आ गई। राहुल ने फिर से ज़ोर लगाया। सलवार पूरी तरह निकलकर उनके पैरों से बाहर हो गई और बिस्तर के किनारे गिर पड़ी।
अब मम्मी सिर्फ़ अपनी घरेलू सफ़ेद पैंटी में थीं। ब्रा पहले ही उतार दी गई थी। नीचे सलवार गायब। उनका जाँघों का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह नंगा था। पैंटी पतली थी और शरीर से सटी हुई।
मम्मी ने तुरंत दोनों हाथों से अपने नीचे के हिस्से को ढँकने की कोशिश की। “नहीं… प्लीज़… छोड़ो मुझे… पंकज…”
राहुल ने उनके हाथ पकड़कर फिर से सिर के ऊपर दबा दिए। उसकी नज़रें मम्मी के नंगे पेट से होती हुई पैंटी पर ठहर गईं। उसने एक हाथ से मम्मी की जाँघ के अंदरूनी हिस्से को सहलाया और धीरे से कहा—
“अब कुछ नहीं बचा आंटी…”
मम्मी की साँसें तेज़ हो गईं। वे सिर इधर-उधर हिला रही थीं। आँसू बह रहे थे। शरीर काँप रहा था।
राहुल ने अपना सिर फिर से उनके पेट पर रखा। पहले नाभि को चूसा, फिर जीभ से नीचे की तरफ़ बढ़ने लगा—पैंटी की किनारी तक।
मम्मी के मुँह से एक लंबी, दबी हुई कराह निकल गई। “आह्ह्ह… नहीं…”
और मैं दरवाज़े के पास अँधेरे में खड़ा, हाँफता हुआ, देखता रहा।
राहुल की जीभ मम्मी की नाभि से नीचे सरक रही थी। वह पैंटी की किनारी तक पहुँच चुका था। जीभ से कपड़े के ऊपर हल्के-हल्के चाट रहा था। मम्मी का शरीर हर स्पर्श पर काँप उठता। वे बिस्तर पर कराह रही थीं। दोनों हाथ अभी भी राहुल ने सिर के ऊपर दबा रखे थे।
“नहीं… वहाँ मत… राहुल… छोड़ो…” मम्मी की आवाज़ सिसकी भरी थी। पैर बेकाबू हो रहे थे। वे घुटने जोड़ने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन राहुल ने अपने शरीर से उन्हें अलग किए रखा था।
राहुल ने अपना चेहरा उठाया। उसके होंठ गीले थे। उसने मम्मी की आँखों में देखा और फिर एक हाथ से उनकी पैंटी की इलास्टिक पकड़ ली।
मम्मी की आँखें फैल गईं। “नहीं… वो मत उतारो… प्लीज़… मैं तुम्हारी आंटी हूँ…”
राहुल ने जवाब नहीं दिया। उसने पैंटी को धीरे-धीरे नीचे खींचना शुरू कर दिया। पहले एक तरफ़, फिर दूसरी तरफ़। मम्मी ने कमर ऊँची करके रोकने की कोशिश की, लेकिन राहुल ने उनका पेट दबाए रखा। पैंटी जाँघों तक आ गई।
अब मम्मी का सबसे निजी हिस्सा लगभग खुल चुका था। राहुल ने पैंटी को और नीचे खींचकर उनके घुटनों तक ला दिया। फिर एक झटके में पूरी तरह उतारकर फेंक दिया।
मम्मी अब पूरी तरह नंगी थीं।
सब कुछ बेपर्दा। गोरा शरीर नाइट बल्ब की रोशनी में काँप रहा था।
मम्मी ने आँखें कसकर बंद कर लीं। आँसू बह रहे थे। वे सिर घुमाए हुए थीं, जैसे यह सब न देखना चाहती हों। उनके होंठ काँप रहे थे। “पंकज… ने अगर देख लिया तो… मैं मर जाऊँगी…”
राहुल ने उनके नंगे शरीर को अपनी आँखों से नोंचा। फिर उसने दोनों हाथों से मम्मी की जाँघों को और फैला दिया। अपना सिर उनके पेट पर रखा और नाभि को ज़ोर से चूसने लगा। साथ ही एक हाथ नीचे की तरफ़ बढ़ गया।
मम्मी का शरीर एक तेज़ झटके से उछल पड़ा। उनके मुँह से एक लंबी, दबी हुई चीख निकल गई। “आह्ह्ह… नहीं… प्लीज़…”
राहुल की उंगलियाँ अब उनके सबसे संवेदनशील हिस्से पर थीं। वह धीरे-धीरे सहला रहा था, कभी हल्के दबाव के साथ, कभी गोलाकार गति में। मम्मी के पैर काँप रहे थे। कमर बार-बार बिस्तर से उठ रही थी। कराहें अब रुक नहीं रही थीं।
“शरीर तो आपका तैयार है आंटी…” राहुल ने फ़ुसफ़ुसाते हुए कहा। “मुँह से नहीं कह रही हो, लेकिन यहाँ… सब पता चल रहा है।”
मम्मी ने सिर ज़ोर-ज़ोर से हिलाया। “नहीं… छोड़ो मुझे… मैं नहीं चाहती…”
लेकिन उनका शरीर कुछ और कह रहा था। साँसें पूरी तरह बिखर चुकी थीं। पेट के निचले हिस्से में बार-बार संकुचन हो रहे थे। राहुल की उंगलियों के हर आंदोलन पर उनकी कराहें निकल रही थीं।
मैं दरवाज़े के पास अँधेरे में खड़ा यह सब देख रहा था। मेरी माँ पूरी तरह नंगी बिस्तर पर पड़ी थीं। एक गैर मर्द उनकी नाभि चूस रहा था और उसका हाथ उनके सबसे निजी अंग पर था। मम्मी कराह रही थीं। तड़प रही थीं।
मेरा हाथ पागलों की तरह चल रहा था। उत्तेजना इतनी तेज़ हो गई थी कि आँखों के आगे अँधेरा छा रहा था।
राहुल ने मम्मी की एक जाँघ को और ऊपर उठाया। अपना चेहरा और नीचे ले गया। फिर उसने जीभ निकालकर सीधे उनके संवेदनशील हिस्से पर लगा दी।
मम्मी के मुँह से एक तेज़, लंबी चीख निकल गई, जिसे उन्होंने तुरंत अपने हाथ से दबाने की कोशिश की। शरीर बिस्तर पर उछलने लगा। पैर राहुल के कंधों पर जाकर अटक गए।
और मैं…
अँधेरे में खड़ा, हाँफता हुआ, सब कुछ देखता रहा।
वह धीरे-धीरे चाट रहा था, कभी ज़ोर से चूसता, कभी सिर्फ़ नोक से छूता। मम्मी का शरीर बिस्तर पर बेकाबू हो रहा था। उनकी कमर बार-बार उठ रही थी। दोनों पैर राहुल के कंधों पर कस गए थे।
“आह्ह्ह… नहीं… निकालो… राहुल… बस करो…” मम्मी की आवाज़ अब पूरी तरह टूट चुकी थी। कराहें और सिसकियाँ एक साथ निकल रही थीं। आँखें बंद थीं। आँसू गालों पर बह रहे थे। वे राहुल के बाल पकड़-पकड़ कर धकेलने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन हाथों में ताक़त नहीं बची थी।
राहुल रुका नहीं। उसने दोनों हाथों से मम्मी की जाँघों को और फैला दिया और अपनी जीभ और गहराई तक ले गया। मम्मी के मुँह से एक तेज़ चीख निकल गई। शरीर एक लंबी लहर की तरह काँप उठा। उनके नाखून राहुल की खोपड़ी में गड़ गए।
“प्लीज़… अब नहीं… मैं मर जाऊँगी…” मम्मी सिसकते हुए बोलीं। पेट बार-बार तन रहा था। साँसें इतनी तेज़ थीं कि सीना तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रहा था।
राहुल ने अचानक जीभ हटाई। मम्मी ने राहत की साँस ली, लेकिन अगले ही पल उसने अपनी दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं।
मम्मी का शरीर बिस्तर से उछल पड़ा। “आह्ह्ह्ह…!” उनकी चीख इस बार और तेज़ थी। राहुल ने उंगलियाँ अंदर-बाहर चलानी शुरू कर दीं—धीमी, गहरी, और लगातार। साथ ही अपना मुँह फिर से उनके संवेदनशील हिस्से पर लगा दिया। जीभ और उंगलियाँ एक साथ काम कर रही थीं।
मम्मी अब बिल्कुल बेकाबू हो चुकी थीं। उनके पैर काँप रहे थे। कमर अपने-आप राहुल के मुँह की तरफ़ उठ रही थी। कराहें एक के बाद एक निकल रही थीं। वे अपना मुँह हाथ से बंद किए हुए थीं ताकि आवाज़ बाहर न जाए, लेकिन आवाज़ रुक नहीं रही थी।
“देखिए आंटी, जो आप अपनी ज़ुबान से नहीं कहतीं, वह आपका शरीर कह रहा है।”
मम्मी ने सिर ज़ोर-ज़ोर से हिलाया। आँसू बह रहे थे। “नहीं… पंकज… छोड़ दो मुझे… प्लीज़…”
राहुल की उंगलियाँ और तेज़ हो गईं। उसने एक तीसरी उंगली भी जोड़ दी। मम्मी का शरीर एक तेज़ झटके से तन गया। उनके मुँह से एक लंबी, दबी हुई चीख निकल गई। पैर राहुल के कंधों पर इतने ज़ोर से कस गए कि उसके कंधे दब गए।
मम्मी कराह रही थीं, तड़प रही थीं, और उनका शरीर उनके नियंत्रण से बाहर जा चुका था।
मेरा हाथ पागलों की तरह चल रहा था। उत्तेजना अब दर्द में बदलने वाली थी। आँखों के आगे अँधेरा छा रहा था। साँसें नहीं चल रही थीं।
राहुल ने अचानक उंगलियाँ निकाल लीं। मम्मी ने फिर से राहत की साँस ली, लेकिन वह सिर्फ़ एक पल की थी।
राहुल अपने घुटनों के बल बैठ गया। उसने अपनी पैंट के बटन खोले और उसे नीचे सरका दिया। उसकी मर्दानगी बाहर आ गई—सख्त, मोटी और पूरी तरह तैयार।
मम्मी की आँखें फैल गईं। उन्होंने सिर इधर-उधर हिलाना शुरू कर दिया। “नहीं… वो मत… राहुल… मैं तुम्हारी आंटी हूँ… प्लीज़… मत करो…”
राहुल ने मम्मी की दोनों जाँघों को पकड़कर और फैला दिया। अपना शरीर उनके ऊपर ले आया। उसकी नोक अब मम्मी के संवेदनशील हिस्से को छू रही थी।
“अब कुछ नहीं बचेगा आंटी,” उसने धीरे से कहा।
मम्मी चीखने वाली थीं—
और मैं अँधेरे में खड़ा, हाँफता हुआ, देखता रहा।
राहुल की नोक मम्मी के संवेदनशील हिस्से को छू रही थी। वह अपने शरीर को आगे बढ़ाने ही वाला था कि मम्मी ने आँखें फाड़कर उसे देखा। आँसुओं से भरी आँखों में अब सिर्फ़ डर था।
“नहीं… राहुल… मत करो…” उनकी आवाज़ टूटी हुई थी। “मैं शादीशुदा हूँ… तुम्हारी आंटी हूँ… एक बच्चा है मेरा… प्लीज़… छोड़ दो मुझे…”
राहुल रुका नहीं। उसने मम्मी की जाँघों को और कसकर पकड़ रखा था।
मम्मी ने सिर ज़ोर-ज़ोर से हिलाना शुरू कर दिया। आँसू बह रहे थे। “मैं… तुम्हारी माँ जैसी… मत करो यह पाप… मेरी इज़्ज़त मत लूटो… मैं कहीं मुँह दिखाने के लायक नहीं रहूँगी… प्लीज़ राहुल… मैं गिड़गिड़ाती हूँ… छोड़ दो…”
उनकी आवाज़ में सिसकियाँ घुल गई थीं। “मेरा पति है… मेरा बेटा है… मैं एक माँ हूँ… तुम ऐसा कैसे कर सकते हो… मैं तुम्हारी आंटी हूँ… रहम करो…”
राहुल ने मम्मी के मुँह पर अपना एक हाथ रख दिया। उनकी बातें दब गईं। सिर्फ़ सिसकियाँ और अटकती साँसें रह गईं।
“बहुत बोल चुकी आंटी,” राहुल ने धीरे से कहा। आवाज़ में कोई नर्मी नहीं थी। “अब बस।”
उसने अपना शरीर और आगे बढ़ाया।
मम्मी के आँसू और तेज़ी से बहने लगे। वे राहुल के हाथ के नीचे से कुछ बोलने की कोशिश कर रही थीं—शायद फिर से “नहीं”, शायद “पंकज”, शायद “छोड़ो”—लेकिन आवाज़ बाहर नहीं आ रही थी।
उनका शरीर काँप रहा था। पैर बेकाबू थे। आँखें कभी बंद हो रही थीं, कभी खुल रही थीं।
तभी राहुल का औज़ार मम्मी की नज़रों में आया।
मम्मी की आँखें फैल गईं। कम से कम आठ इंच लंबा, मोटा, सख्त—जैसे कोई लोहे की रॉड हो। उनके मुँह से एक दबी हुई चीख निकल गई। वे डर से पीछे हटने की कोशिश करने लगीं, लेकिन राहुल ने उनकी जाँघें पकड़ रखी थीं।
“नहीं… यह… यह क्या है… राहुल… मत… मैं मर जाऊँगी…” मम्मी की आवाज़ में खौफ़ साफ़ था। आँखें फटी हुई थीं। वे राहुल की मर्दानगी को देखकर बुरी तरह काँप रही थीं।
“इतना बड़ा… मत करो… प्लीज़… छोड़ दो…” वे सिर ज़ोर-ज़ोर से हिला रही थीं। आँसू बह रहे थे। “मैं सह नहीं पाऊँगी… राहुल… रहम करो… मैं तुम्हारी आंटी हूँ…”
राहुल ने मम्मी की जाँघों को और फैला दिया। अपना मोटा औज़ार उनकी कलियों-सी कोमल चूत की फाँकों पर रखा। सिर्फ़ छूने से ही मम्मी का शरीर तन गया।
“अब देखो आंटी,” राहुल ने धीरे से कहा। “स्वर्ग की सैर करने को तैयार हो क्या?”
मम्मी की आँखें आतंक से भरी हुई थीं। वे कुछ और बोलना चाहती थीं, लेकिन गले से सिर्फ़ सिसकियाँ निकल रही थीं।
और मैं अँधेरे में खड़ा, यह दृश्य देख रहा था—
मेरी माँ बिस्तर पर नंगी, डरी हुई,
और उनके सामने खड़ा वह मोटा, डरावना औज़ार।
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छोटी सी भूल - by ripsin183 - 08-08-2026, 08:05 PM
RE: छोटी सी भूल - by Uvaaaa - 10-08-2026, 02:06 PM
RE: छोटी सी भूल - by Loveakb18 - 16-08-2026, 08:10 AM
RE: छोटी सी भूल - by Loveakb18 - 16-08-2026, 08:10 AM
RE: छोटी सी भूल - by ripsin183 - 16-08-2026, 02:44 PM
RE: छोटी सी भूल - by Loveakb18 - 16-08-2026, 10:11 PM
RE: छोटी सी भूल - by ripsin183 - 17-08-2026, 03:55 PM
RE: छोटी सी भूल - by ripsin183 - 18-08-2026, 09:58 AM
RE: छोटी सी भूल - by Tejas_8448 - 18-08-2026, 12:48 PM
RE: छोटी सी भूल - by Asli lund - 18-08-2026, 01:43 PM
RE: छोटी सी भूल - by ripsin183 - 18-08-2026, 02:10 PM
RE: छोटी सी भूल - by Asli lund - 18-08-2026, 05:55 PM
RE: छोटी सी भूल - by ripsin183 - 18-08-2026, 09:13 PM
RE: छोटी सी भूल - by Loveakb18 - 18-08-2026, 09:39 PM
RE: छोटी सी भूल - by saya - 18-08-2026, 10:58 PM
RE: छोटी सी भूल - by sdd2686 - 22-08-2026, 02:38 PM
RE: छोटी सी भूल - by Loveakb18 - 22-08-2026, 07:06 PM
RE: छोटी सी भूल - by Uvaaaa - 23-08-2026, 10:54 AM
RE: छोटी सी भूल - by ripsin183 - 25-08-2026, 05:40 PM
RE: छोटी सी भूल - by saya - 25-08-2026, 08:23 PM
RE: छोटी सी भूल - by KkkNad - 28-08-2026, 10:08 AM
RE: छोटी सी भूल - by KkkNad - 28-08-2026, 10:09 AM



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