17-08-2026, 09:04 AM
रामू जी अब थोड़े नशे में आ चुके थे। आँखें लाल थीं, साँसें भारी, और हाथों में एक अलग तरह की बेकाबू ताकत।
उन्होंने अचानक रुही का चेहरा दोनों हाथों से पकड़ लिया। बड़ी-बड़ी हथेलियाँ उसके गालों के दोनों तरफ दब गईं। अंगूठे उसके होठों के कोनों पर थे। धीरे से लेकिन मजबूती से उन्होंने रुही का मुँह खोल दिया।
रुही की आँखें उत्तेजना की वजह से पहले से बंद थीं। वह समझ नहीं पाई कि रामू क्या करने वाले हैं। उसका मुँह खुला रह गया—होठ काँपते हुए, साँसें तेज़।
रामू ने अपना गिलास उठाया। एक बड़ा सा घूँट शराब का भरा। गला भर गया। फिर उन्होंने झुककर अपना मुँह रुही के खुले मुँह पर रख दिया और पूरी शराब उसके मुँह में उड़ेल दी।
गर्म, तीखी शराब सीधे रुही की जीभ पर गिरी। कुछ तो उसके गले के अंदर चली गई, बाकी मुँह में भर गई। रुही को बिल्कुल उम्मीद नहीं थी। उसकी आँखें अचानक खुल गईं। वह घबरा गई। गला जलने लगा। वह खांसने लगी।
“उँह्ह… खांस… खांस…”
ज्यादातर शराब उसके मुँह से बाहर निकलकर सोफे के साइड पर और उसकी नाइटी पर गिर गई। कुछ बूँदें उसकी ठुड्डी से होती हुई गर्दन पर बहने लगीं। रुही खांसते हुए रामू के हाथों से अपना चेहरा छुड़ाने की कोशिश करने लगी, आँखों में पानी आ गया था।
सामने से जोर की हँसी फूटी।
जामिल जोर-जोर से हँस रहा था। सोनिया भी अपना मुँह ढांककर हँस रही थी।
“अरे बाप रे!” सोनिया हँसते हुए बोली, “रामू भाई, ये क्या कर दिया! बेचारी बुलबुल तो घबरा गई!”
जामिल ने ठहाका लगाया, “भैया, धीरे-धीरे सिखाना चाहिए था! पहली बार में ही पूरा घूँट उतार दिया मुँह में!”
रुही अभी भी खांस रही थी। उसने अपना मुँह हाथों से ढक लिया था। गला जल रहा था, आँखों में पानी था, और शर्म से उसका पूरा चेहरा लाल हो चुका था। नाइटी का ऊपरी हिस्सा गीला हो गया था।
रामू भी हँसने लगे। नशे में उनकी हँसी और भारी लग रही थी। उन्होंने रुही के बाल पीछे किए और उसके गीले होठों को अंगूठे से पोछा।
“इतना घबरा क्यों गई?” उन्होंने हँसते हुए कहा, “थोड़ी शराब पी ली तो कुछ नहीं होता। मेरे मुँह से ली न… और भी मीठी लगनी चाहिए थी।”
रुही ने आँखें उठाईं। आवाज़ में खांसी और शर्म दोनों थीं, “रामू जी… आपने… अचानक… मुझे उम्मीद नहीं थी… गला… जल गया…”
सोनिया अभी भी हँस रही थी। “देखा जामिल! पहली बार में ही रामू भाई ने इसे अपनी तरह की शराब पिला दी। अब तो इसकी आदत पड़ जाएगी।”
जामिल ने सोनिया को अपनी तरफ खींचते हुए कहा, “मैडम… अब सोनिया, तू भी तैयार रह। अगली बार मैं भी ऐसा ही करूँगा।”
रुही ने फिर से अपना चेहरा रामू की छाती में छुपा लिया। शरीर अभी भी काँप रहा था—खांसी से, शर्म से, और अंदर ही अंदर एक अजीब सी उत्तेजना से। रामू के मुँह से आई हुई शराब का स्वाद अभी भी उसकी जीभ पर था।
रामू ने उसके बाल सहलाते हुए धीरे कहा, “अगली बार संभल के पीइयो। आज रात और भी बहुत कुछ मेरे मुँह से लेना पड़ेगा तुझे।”
रुही ने कुछ जवाब नहीं दिया। बस उनकी छाती से सटी रही। गला अभी भी हल्का जल रहा था… और दिल जोर-जोर से धधक रहा था।
उन्होंने अचानक रुही का चेहरा दोनों हाथों से पकड़ लिया। बड़ी-बड़ी हथेलियाँ उसके गालों के दोनों तरफ दब गईं। अंगूठे उसके होठों के कोनों पर थे। धीरे से लेकिन मजबूती से उन्होंने रुही का मुँह खोल दिया।
रुही की आँखें उत्तेजना की वजह से पहले से बंद थीं। वह समझ नहीं पाई कि रामू क्या करने वाले हैं। उसका मुँह खुला रह गया—होठ काँपते हुए, साँसें तेज़।
रामू ने अपना गिलास उठाया। एक बड़ा सा घूँट शराब का भरा। गला भर गया। फिर उन्होंने झुककर अपना मुँह रुही के खुले मुँह पर रख दिया और पूरी शराब उसके मुँह में उड़ेल दी।
गर्म, तीखी शराब सीधे रुही की जीभ पर गिरी। कुछ तो उसके गले के अंदर चली गई, बाकी मुँह में भर गई। रुही को बिल्कुल उम्मीद नहीं थी। उसकी आँखें अचानक खुल गईं। वह घबरा गई। गला जलने लगा। वह खांसने लगी।
“उँह्ह… खांस… खांस…”
ज्यादातर शराब उसके मुँह से बाहर निकलकर सोफे के साइड पर और उसकी नाइटी पर गिर गई। कुछ बूँदें उसकी ठुड्डी से होती हुई गर्दन पर बहने लगीं। रुही खांसते हुए रामू के हाथों से अपना चेहरा छुड़ाने की कोशिश करने लगी, आँखों में पानी आ गया था।
सामने से जोर की हँसी फूटी।
जामिल जोर-जोर से हँस रहा था। सोनिया भी अपना मुँह ढांककर हँस रही थी।
“अरे बाप रे!” सोनिया हँसते हुए बोली, “रामू भाई, ये क्या कर दिया! बेचारी बुलबुल तो घबरा गई!”
जामिल ने ठहाका लगाया, “भैया, धीरे-धीरे सिखाना चाहिए था! पहली बार में ही पूरा घूँट उतार दिया मुँह में!”
रुही अभी भी खांस रही थी। उसने अपना मुँह हाथों से ढक लिया था। गला जल रहा था, आँखों में पानी था, और शर्म से उसका पूरा चेहरा लाल हो चुका था। नाइटी का ऊपरी हिस्सा गीला हो गया था।
रामू भी हँसने लगे। नशे में उनकी हँसी और भारी लग रही थी। उन्होंने रुही के बाल पीछे किए और उसके गीले होठों को अंगूठे से पोछा।
“इतना घबरा क्यों गई?” उन्होंने हँसते हुए कहा, “थोड़ी शराब पी ली तो कुछ नहीं होता। मेरे मुँह से ली न… और भी मीठी लगनी चाहिए थी।”
रुही ने आँखें उठाईं। आवाज़ में खांसी और शर्म दोनों थीं, “रामू जी… आपने… अचानक… मुझे उम्मीद नहीं थी… गला… जल गया…”
सोनिया अभी भी हँस रही थी। “देखा जामिल! पहली बार में ही रामू भाई ने इसे अपनी तरह की शराब पिला दी। अब तो इसकी आदत पड़ जाएगी।”
जामिल ने सोनिया को अपनी तरफ खींचते हुए कहा, “मैडम… अब सोनिया, तू भी तैयार रह। अगली बार मैं भी ऐसा ही करूँगा।”
रुही ने फिर से अपना चेहरा रामू की छाती में छुपा लिया। शरीर अभी भी काँप रहा था—खांसी से, शर्म से, और अंदर ही अंदर एक अजीब सी उत्तेजना से। रामू के मुँह से आई हुई शराब का स्वाद अभी भी उसकी जीभ पर था।
रामू ने उसके बाल सहलाते हुए धीरे कहा, “अगली बार संभल के पीइयो। आज रात और भी बहुत कुछ मेरे मुँह से लेना पड़ेगा तुझे।”
रुही ने कुछ जवाब नहीं दिया। बस उनकी छाती से सटी रही। गला अभी भी हल्का जल रहा था… और दिल जोर-जोर से धधक रहा था।


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