17-08-2026, 08:55 AM
रामू जी ने अचानक रुही का चेहरा दोनों हाथों में ले लिया।
उनकी आँखों में नशा और हवस दोनों थे। उन्होंने रुही के होठों पर अपने होठ रख दिए—पहले हल्के से, फिर जोर से। जीभ अंदर घुस आई। रुही की आँखें बंद हो गईं। वह उनकी जीभ चूसने लगी, जैसे सिखाई गई हो। रामू का एक हाथ उसके बालों में था, दूसरा नाइटी के अंदर उसकी कमर को कसकर पकड़े हुए। चुम्बन लंबा होता जा रहा था, गीला और गहरा।
जब उन्होंने होंठ अलग किए तो रुही की साँसें उखड़ी हुई थीं। रामू ने प्लेट से एक छोटा सा नमकीन टुकड़ा लिया, अपने मुँह में डाला, थोड़ा चबाया… फिर रुही के मुँह के पास ले गए।
“खोल,” उन्होंने धीरे से कहा।
रुही ने होठ खोले। रामू ने आधा चबाया हुआ नमकीन उसकी जीभ पर रख दिया। उनकी उंगलियाँ भी रुही के मुँह में चली गईं। रुही ने शर्माते हुए चबाया, लेकिन रामू की उंगलियों को चूसना नहीं भूली।
सामने वही नज़ारा था।
सोनिया जामिल की गोद में लगभग बैठी हुई थी। जामिल उसका मुँह चूम रहा था, जीभ अंदर तक डाले हुए। फिर उसने भी स्नैक अपने मुँह में लिया और सोनिया के मुँह में दे दिया। सोनिया ने उसकी उंगलियाँ चूसते हुए निगल लिया। दोनों के बीच कोई संकोच नहीं बचा था।
रुही ने आँखें बड़ी करके उनकी तरफ देखा।
सोनिया की आवाज़ बदल चुकी थी। वह जामिल को अब “जामिल जी” कह रही थी। “आप और लीजिए… जामिल जी।” और जामिल उसे “मैडम” की जगह सिर्फ “सोनिया” कह रहा था। “सोनिया, और करीब आ।”
रुही की हैरानी चेहरे पर साफ थी। सोनिया ने उसकी तरफ देखा और हल्के से मुस्कुराई। आवाज़ में नशा था, लेकिन बात साफ थी।
“क्या देख रही है रुही?” सोनिया ने जामिल के होंठों से होंठ अलग करते हुए कहा। “जिस मर्द के नीचे सारी रात लेटना हो… उसके लिए दिल में खुद-ब-खुद प्यार और इज़्ज़त आने लगती है। दिन में मैं इसे जामिल और ‘तुम’ कहती हूँ, ताकि किसी को शक न हो। लेकिन रात को… रात को ये जामिल जी होते हैं। और मैं इनकी सोनिया।”
जामिल ने सोनिया की नाइटी का एक स्ट्रैप नीचे गिरा दिया। “सही कह रही है ये। रात को इज़्ज़त और हवस दोनों साथ चलते हैं।”
रामू ने रुही को और कस लिया। “सुन लिया तूने? तू भी यही है मेरी। दिन में कुछ भी बन… रात को सिर्फ मेरी।”
फिर दोनों मर्दों के हाथ और बेकाबू हो गए।
रामू के बड़े हाथ रुही की नाइटी के अंदर घुस आए। एक हाथ ने उसके स्तन को जोर से मसला, निपल को उंगलियों के बीच दबाया। दूसरा हाथ उसकी जाँघ के अंदर तक चला गया, पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को दबाने लगा। रुही की कमर उठ गई। मुँह से हल्की सी सिसकारी निकल गई—“आह्ह… रामू जी…”
सामने जामिल ने सोनिया की नाइटी ऊपर कर दी थी। उसके दोनों हाथ सोनिया के नंगे स्तनों को मसल रहे थे। सोनिया की गर्दन पीछे की तरफ झुक गई। वह जामिल के कान में कराह रही थी—“जामिल जी… धीरे… नहीं… जोर से…”
कमरे में अब सिर्फ गाने की धीमी आवाज़ नहीं रह गई थी।
दोनों औरतों की सिसकारियाँ, कराहें, और मर्दों की भारी साँसें कमरे में गूँजने लगीं। रुही बार-बार अपना मुँह रामू के कंधे में छुपा रही थी, लेकिन सिसकारी रुक नहीं रही थी। हर मसाई के साथ उसका शरीर और संवेदनशील होता जा रहा था।
सोनिया की आवाज़ अधिक खुली थी। वह बिना संकोच के जामिल के हाथों के नीचे कराह रही थी।
चारों के बीच की हवा अब पूरी तरह कामुक हो चुकी थी। शराब, रोमांटिक गाने, और एक-दूसरे के सामने खुलते शरीर… सब कुछ मिलकर रात को एक नई दिशा दे रहा था।
रुही ने आँखें बंद कर लीं। रामू के हाथ उसके शरीर को बुरी तरह मसल रहे थे… और वह बस सिसक रही थी।
उनकी आँखों में नशा और हवस दोनों थे। उन्होंने रुही के होठों पर अपने होठ रख दिए—पहले हल्के से, फिर जोर से। जीभ अंदर घुस आई। रुही की आँखें बंद हो गईं। वह उनकी जीभ चूसने लगी, जैसे सिखाई गई हो। रामू का एक हाथ उसके बालों में था, दूसरा नाइटी के अंदर उसकी कमर को कसकर पकड़े हुए। चुम्बन लंबा होता जा रहा था, गीला और गहरा।
जब उन्होंने होंठ अलग किए तो रुही की साँसें उखड़ी हुई थीं। रामू ने प्लेट से एक छोटा सा नमकीन टुकड़ा लिया, अपने मुँह में डाला, थोड़ा चबाया… फिर रुही के मुँह के पास ले गए।
“खोल,” उन्होंने धीरे से कहा।
रुही ने होठ खोले। रामू ने आधा चबाया हुआ नमकीन उसकी जीभ पर रख दिया। उनकी उंगलियाँ भी रुही के मुँह में चली गईं। रुही ने शर्माते हुए चबाया, लेकिन रामू की उंगलियों को चूसना नहीं भूली।
सामने वही नज़ारा था।
सोनिया जामिल की गोद में लगभग बैठी हुई थी। जामिल उसका मुँह चूम रहा था, जीभ अंदर तक डाले हुए। फिर उसने भी स्नैक अपने मुँह में लिया और सोनिया के मुँह में दे दिया। सोनिया ने उसकी उंगलियाँ चूसते हुए निगल लिया। दोनों के बीच कोई संकोच नहीं बचा था।
रुही ने आँखें बड़ी करके उनकी तरफ देखा।
सोनिया की आवाज़ बदल चुकी थी। वह जामिल को अब “जामिल जी” कह रही थी। “आप और लीजिए… जामिल जी।” और जामिल उसे “मैडम” की जगह सिर्फ “सोनिया” कह रहा था। “सोनिया, और करीब आ।”
रुही की हैरानी चेहरे पर साफ थी। सोनिया ने उसकी तरफ देखा और हल्के से मुस्कुराई। आवाज़ में नशा था, लेकिन बात साफ थी।
“क्या देख रही है रुही?” सोनिया ने जामिल के होंठों से होंठ अलग करते हुए कहा। “जिस मर्द के नीचे सारी रात लेटना हो… उसके लिए दिल में खुद-ब-खुद प्यार और इज़्ज़त आने लगती है। दिन में मैं इसे जामिल और ‘तुम’ कहती हूँ, ताकि किसी को शक न हो। लेकिन रात को… रात को ये जामिल जी होते हैं। और मैं इनकी सोनिया।”
जामिल ने सोनिया की नाइटी का एक स्ट्रैप नीचे गिरा दिया। “सही कह रही है ये। रात को इज़्ज़त और हवस दोनों साथ चलते हैं।”
रामू ने रुही को और कस लिया। “सुन लिया तूने? तू भी यही है मेरी। दिन में कुछ भी बन… रात को सिर्फ मेरी।”
फिर दोनों मर्दों के हाथ और बेकाबू हो गए।
रामू के बड़े हाथ रुही की नाइटी के अंदर घुस आए। एक हाथ ने उसके स्तन को जोर से मसला, निपल को उंगलियों के बीच दबाया। दूसरा हाथ उसकी जाँघ के अंदर तक चला गया, पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को दबाने लगा। रुही की कमर उठ गई। मुँह से हल्की सी सिसकारी निकल गई—“आह्ह… रामू जी…”
सामने जामिल ने सोनिया की नाइटी ऊपर कर दी थी। उसके दोनों हाथ सोनिया के नंगे स्तनों को मसल रहे थे। सोनिया की गर्दन पीछे की तरफ झुक गई। वह जामिल के कान में कराह रही थी—“जामिल जी… धीरे… नहीं… जोर से…”
कमरे में अब सिर्फ गाने की धीमी आवाज़ नहीं रह गई थी।
दोनों औरतों की सिसकारियाँ, कराहें, और मर्दों की भारी साँसें कमरे में गूँजने लगीं। रुही बार-बार अपना मुँह रामू के कंधे में छुपा रही थी, लेकिन सिसकारी रुक नहीं रही थी। हर मसाई के साथ उसका शरीर और संवेदनशील होता जा रहा था।
सोनिया की आवाज़ अधिक खुली थी। वह बिना संकोच के जामिल के हाथों के नीचे कराह रही थी।
चारों के बीच की हवा अब पूरी तरह कामुक हो चुकी थी। शराब, रोमांटिक गाने, और एक-दूसरे के सामने खुलते शरीर… सब कुछ मिलकर रात को एक नई दिशा दे रहा था।
रुही ने आँखें बंद कर लीं। रामू के हाथ उसके शरीर को बुरी तरह मसल रहे थे… और वह बस सिसक रही थी।


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