17-08-2026, 08:45 AM
दोनों मर्द लव सीटों पर बैठे रहे।
रामू जी ने अपनी टाँगें फैला दी थीं, एक हाथ रुही की कमर पर था। जामिल सामने वाली सीट पर बैठा था, लुंगी में आराम से, सोनिया उसके बिल्कुल पास। टीवी ऑन था। कोई पुराना रोमांटिक गाना धीमी आवाज़ में बज रहा था—“तुम ही हो” वाला ट्रैक। कमरे की रोशनी जानबूझकर कम कर दी गई थी। सिर्फ टेबल लैंप और टीवी की हल्की रोशनी थी।
सोनिया उठी। “चल रुही, मर्दों की सेवा कर। आज रात हम दोनों मेहरबान बनकर रहेंगे।”
रुही भी उठी। दोनों किचन में गईं। सोनिया ने फ्रिज से बीयर की बोतलें और व्हिस्की निकाली। प्लेट में नमकीन, बादाम, और कुछ तले हुए स्नैक्स लगाए। रुही ने गिलास निकाले। हाथ काँप रहे थे।
जब दोनों वापस आईं तो सोनिया ने जामिल के सामने गिलास रखा। “बना अपना पेग।”
जामिल ने व्हिस्की डाली, थोड़ा पानी मिलाया। रामू ने भी अपना गिलास लिया। सोनिया ने भी अपने लिए हल्का पेग बना लिया। फिर तीनों ने रुही की तरफ देखा।
सोनिया बोली, “रुही, तू भी ले ले एक। हल्का सा। आज तो मौका है।”
रुही ने सिर हिलाया। “नहीं… मैंने कभी शराब नहीं पी। मुझे नहीं पीनी।”
रामू ने उसकी कमर सहलाते हुए कहा, “एक घूँट ले ले। कुछ नहीं होगा। आज रात तू फ्री है न।”
जामिल भी मुस्कुराया। “भाभी, एक पेग से कुछ नहीं होता। मैडम भी पहले नहीं पीती थीं।”
रुही ने और सिर झुका लिया। “नहीं रामू जी… सच में नहीं। आप लोग पीजिए। मैं स्नैक्स लगाती हूँ।”
तीनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और हँस दिए। फिर अपने-अपने गिलास उठाने लगे। पहली चुस्की ली। कमरे में शराब की हल्की सी गंध फैल गई। गाना बदल चुका था। अब कोई और धीमा रोमांटिक गाना बज रहा था।
सोनिया ने एक प्लेट स्नैक्स उठाई और जामिल के पास जाकर बैठ गई। उसने अपनी उंगलियों से एक बादाम लिया और जामिल के मुँह के पास ले गई। “खुला मुँह।”
जामिल ने मुँह खोला। सोनिया ने बादाम उसके मुँह में रखा, फिर अपनी उंगली उसके होंठों पर फेर दी। जामिल ने उसकी उंगली हल्के से चूस ली। सोनिया हँसी। “आज तू बहुत भूखा लग रहा है।”
रुही ये देखकर शर्मा गई, लेकिन रामू ने उसे अपनी तरफ खींच लिया। “तू भी आ। मेरे पास बैठ।”
रुही रामू के बिल्कुल पास बैठ गई। रामू ने अपना गिलास एक हाथ में लिया और दूसरे हाथ से रुही को और सटा लिया। रुही ने प्लेट से एक छोटा सा समोसा उठाया और काँपते हाथों से रामू के मुँह तक ले गई।
“खा लो… रामू जी।”
रामू ने समोसा मुँह में लिया, लेकिन रुही की उंगलियों को भी अपने होंठों से छू लिया। फिर धीरे से बोला, “हाथ मत हटा। और खिला।”
रुही की साँसें तेज़ हो गईं। उसने दूसरी चीज़ उठाई और फिर से उनके मुँह में दी। हर बार रामू उसके हाथ को थोड़ा और देर तक अपने होंठों के पास रखते। कभी-कभी उंगली को हल्के से दाँतों से दबा देते।
सामने सोनिया जामिल को खिला रही थी। कभी उसके गाल पर उंगली फेरती, कभी खुद उसके गिलास से एक घूँट ले लेती। जामिल का हाथ सोनिया की जाँघ पर था, नाइटी के अंदर तक।
सोनिया ने रुही की तरफ देखकर कहा, “देख रुही, ऐसे खिलाती हैं अपने मर्द को। थोड़ा और करीब बैठ। शर्मा मत।”
रुही ने और करीब सरक ली। अब उसका शरीर लगभग रामू की छाती से सट चुका था। रामू ने उसका सिर अपने कंधे पर रख लिया। एक हाथ से गिलास पी रहे थे, दूसरे हाथ से रुही की पीठ सहला रहे थे।
“तेरी खुशबू बहुत अच्छी आ रही है आज,” रामू ने कान में कहा। “पूरे शरीर पर लगाई है न?”
रुही ने धीरे से सिर हिलाया। “हाँ… आपके लिए।”
थोड़ी देर और बीती। तीनों के गिलास आधे हो चुके थे। माहौल और भी भारी, और भी गर्म हो चला था। गाने की आवाज़ धीमी थी, लेकिन रोमांटिक बोल कमरे में तैर रहे थे।
सोनिया अब जामिल की गोद में लगभग बैठ चुकी थी। जामिल उसके बालों में उंगलियाँ फेर रहा था। सोनिया ने रुही से कहा, “बुलबुल, तू भी अपने रामू की गोद में चली जा। इतनी दूर-दूर क्या बैठी है।”
रुही ने रामू की आँखों में देखा। रामू ने कुछ नहीं कहा, बस अपनी टाँगें थोड़ी और फैला दीं। रुही धीरे से उनकी गोद में खिसक गई। रामू का एक हाथ उसकी कमर पर आ गया, नाइटी के अंदर। गरम हथेली उसकी नंगी त्वचा पर थी।
रामू ने गिलास से एक घूँट लिया और फिर रुही की तरफ देखा। “आज रात तू बहुत प्यारी लग रही है। इतनी शर्मीली… और इतनी तैयार।”
रुही ने अपना सिर उनकी छाती पर रख दिया। शर्म से उसका चेहरा जल रहा था, लेकिन शरीर उनके स्पर्श की माँग कर रहा था। उसने फिर से एक बादाम उठाया और रामू के मुँह में दिया। इस बार रामू ने उसकी पूरी उंगली मुँह में ले ली और धीरे-धीरे चूसा।
रुही की आँखें बंद हो गईं।
सामने सोनिया और जामिल भी अब एक-दूसरे से सट चुके थे। बातें कम हो गई थीं। सिर्फ हल्की हँसी, गिलासों की आवाज़, और टीवी से आते रोमांटिक गाने।
चारों के बीच एक अजीब सी, कामुक शांति फैल गई थी।
रात अब正式 शुरू होने वाली थी।
रामू जी ने अपनी टाँगें फैला दी थीं, एक हाथ रुही की कमर पर था। जामिल सामने वाली सीट पर बैठा था, लुंगी में आराम से, सोनिया उसके बिल्कुल पास। टीवी ऑन था। कोई पुराना रोमांटिक गाना धीमी आवाज़ में बज रहा था—“तुम ही हो” वाला ट्रैक। कमरे की रोशनी जानबूझकर कम कर दी गई थी। सिर्फ टेबल लैंप और टीवी की हल्की रोशनी थी।
सोनिया उठी। “चल रुही, मर्दों की सेवा कर। आज रात हम दोनों मेहरबान बनकर रहेंगे।”
रुही भी उठी। दोनों किचन में गईं। सोनिया ने फ्रिज से बीयर की बोतलें और व्हिस्की निकाली। प्लेट में नमकीन, बादाम, और कुछ तले हुए स्नैक्स लगाए। रुही ने गिलास निकाले। हाथ काँप रहे थे।
जब दोनों वापस आईं तो सोनिया ने जामिल के सामने गिलास रखा। “बना अपना पेग।”
जामिल ने व्हिस्की डाली, थोड़ा पानी मिलाया। रामू ने भी अपना गिलास लिया। सोनिया ने भी अपने लिए हल्का पेग बना लिया। फिर तीनों ने रुही की तरफ देखा।
सोनिया बोली, “रुही, तू भी ले ले एक। हल्का सा। आज तो मौका है।”
रुही ने सिर हिलाया। “नहीं… मैंने कभी शराब नहीं पी। मुझे नहीं पीनी।”
रामू ने उसकी कमर सहलाते हुए कहा, “एक घूँट ले ले। कुछ नहीं होगा। आज रात तू फ्री है न।”
जामिल भी मुस्कुराया। “भाभी, एक पेग से कुछ नहीं होता। मैडम भी पहले नहीं पीती थीं।”
रुही ने और सिर झुका लिया। “नहीं रामू जी… सच में नहीं। आप लोग पीजिए। मैं स्नैक्स लगाती हूँ।”
तीनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और हँस दिए। फिर अपने-अपने गिलास उठाने लगे। पहली चुस्की ली। कमरे में शराब की हल्की सी गंध फैल गई। गाना बदल चुका था। अब कोई और धीमा रोमांटिक गाना बज रहा था।
सोनिया ने एक प्लेट स्नैक्स उठाई और जामिल के पास जाकर बैठ गई। उसने अपनी उंगलियों से एक बादाम लिया और जामिल के मुँह के पास ले गई। “खुला मुँह।”
जामिल ने मुँह खोला। सोनिया ने बादाम उसके मुँह में रखा, फिर अपनी उंगली उसके होंठों पर फेर दी। जामिल ने उसकी उंगली हल्के से चूस ली। सोनिया हँसी। “आज तू बहुत भूखा लग रहा है।”
रुही ये देखकर शर्मा गई, लेकिन रामू ने उसे अपनी तरफ खींच लिया। “तू भी आ। मेरे पास बैठ।”
रुही रामू के बिल्कुल पास बैठ गई। रामू ने अपना गिलास एक हाथ में लिया और दूसरे हाथ से रुही को और सटा लिया। रुही ने प्लेट से एक छोटा सा समोसा उठाया और काँपते हाथों से रामू के मुँह तक ले गई।
“खा लो… रामू जी।”
रामू ने समोसा मुँह में लिया, लेकिन रुही की उंगलियों को भी अपने होंठों से छू लिया। फिर धीरे से बोला, “हाथ मत हटा। और खिला।”
रुही की साँसें तेज़ हो गईं। उसने दूसरी चीज़ उठाई और फिर से उनके मुँह में दी। हर बार रामू उसके हाथ को थोड़ा और देर तक अपने होंठों के पास रखते। कभी-कभी उंगली को हल्के से दाँतों से दबा देते।
सामने सोनिया जामिल को खिला रही थी। कभी उसके गाल पर उंगली फेरती, कभी खुद उसके गिलास से एक घूँट ले लेती। जामिल का हाथ सोनिया की जाँघ पर था, नाइटी के अंदर तक।
सोनिया ने रुही की तरफ देखकर कहा, “देख रुही, ऐसे खिलाती हैं अपने मर्द को। थोड़ा और करीब बैठ। शर्मा मत।”
रुही ने और करीब सरक ली। अब उसका शरीर लगभग रामू की छाती से सट चुका था। रामू ने उसका सिर अपने कंधे पर रख लिया। एक हाथ से गिलास पी रहे थे, दूसरे हाथ से रुही की पीठ सहला रहे थे।
“तेरी खुशबू बहुत अच्छी आ रही है आज,” रामू ने कान में कहा। “पूरे शरीर पर लगाई है न?”
रुही ने धीरे से सिर हिलाया। “हाँ… आपके लिए।”
थोड़ी देर और बीती। तीनों के गिलास आधे हो चुके थे। माहौल और भी भारी, और भी गर्म हो चला था। गाने की आवाज़ धीमी थी, लेकिन रोमांटिक बोल कमरे में तैर रहे थे।
सोनिया अब जामिल की गोद में लगभग बैठ चुकी थी। जामिल उसके बालों में उंगलियाँ फेर रहा था। सोनिया ने रुही से कहा, “बुलबुल, तू भी अपने रामू की गोद में चली जा। इतनी दूर-दूर क्या बैठी है।”
रुही ने रामू की आँखों में देखा। रामू ने कुछ नहीं कहा, बस अपनी टाँगें थोड़ी और फैला दीं। रुही धीरे से उनकी गोद में खिसक गई। रामू का एक हाथ उसकी कमर पर आ गया, नाइटी के अंदर। गरम हथेली उसकी नंगी त्वचा पर थी।
रामू ने गिलास से एक घूँट लिया और फिर रुही की तरफ देखा। “आज रात तू बहुत प्यारी लग रही है। इतनी शर्मीली… और इतनी तैयार।”
रुही ने अपना सिर उनकी छाती पर रख दिया। शर्म से उसका चेहरा जल रहा था, लेकिन शरीर उनके स्पर्श की माँग कर रहा था। उसने फिर से एक बादाम उठाया और रामू के मुँह में दिया। इस बार रामू ने उसकी पूरी उंगली मुँह में ले ली और धीरे-धीरे चूसा।
रुही की आँखें बंद हो गईं।
सामने सोनिया और जामिल भी अब एक-दूसरे से सट चुके थे। बातें कम हो गई थीं। सिर्फ हल्की हँसी, गिलासों की आवाज़, और टीवी से आते रोमांटिक गाने।
चारों के बीच एक अजीब सी, कामुक शांति फैल गई थी।
रात अब正式 शुरू होने वाली थी।


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)