17-08-2026, 08:35 AM
थोड़ी देर बाद फिर दरवाज़े पर दस्तक हुई।
रुही ने जल्दी से अपनी काली नाइटी ठीक की और दरवाज़ा खोला। रामू जी खड़े थे—काली टी-शर्ट, जींस, बैग हाथ में। उनकी निगाह जैसे ही रुही पर पड़ी, आँखों में वो परिचित भूख चमक उठी। उन्होंने बिना कुछ कहे रुही की कमर पकड़कर अंदर खींच लिया और गहरे लंबे चुम्बन में खो गए।
“तैयार दिख रही है,” रामू ने होठों से होठ अलग करते हुए धीरे कहा।
इतने में सोनिया सीढ़ियों से नीचे उतरी।
उसने एक गहरी लाल सैटिन नाइटी पहन रखी थी। बहुत पतली। स्तनों की आकृति साफ झलक रही थी, जाँघें लगभग पूरी खुली हुईं। बाल खुले थे, होंठ चमक रहे थे। जामिल उसके पीछे-पीछे आ रहा था, अभी भी बनियान और लुंगी में।
सोनिया ने मुस्कुराते हुए कहा, “आ गए रामू भाई। आपकी बुलबुल तो बहुत देर से बेचैन थी।”
रुही शर्म से लाल हो गई। उसने नज़रें झुका लीं।
चारों लिविंग रूम में आ गए।
एक लव सीट पर रामू बैठे और रुही को अपनी गोद के बिल्कुल पास खींच लिया। रुही का शरीर उनके से सट गया। सामने वाली लव सीट पर सोनिया जामिल के बिल्कुल सटकर बैठ गई। जामिल का एक हाथ उसकी कमर पर था।
थोड़ी देर चुप्पी रही। फिर सोनिया ने बात शुरू की।
“रामू भाई, आज रात घर पूरी तरह हमारा है। कोई आने-जाने वाला नहीं।” उसने जामिल की तरफ देखा। “जामिल मेरे घर का नौकर है… और जब पति-बेटा नहीं होते, तो वो मेरा मर्द भी बन जाता है।”
जामिल ने हल्के से मुस्कुराते हुए सोनिया की जाँघ सहलाई। “मैडम सच कह रही हैं। डेढ़ साल से जब भी मौका मिलता है, मैडम को मैं ही सम्भालता हूँ।”
रुही की साँसें तेज़ हो गईं। वह रामू के कंधे से सटकर बैठी थी, लेकिन शर्म से उसका चेहरा जल रहा था।
रामू ने रुही के बालों में उंगलियाँ फेरते हुए जामिल से कहा, “हमारी भी लगभग वैसी ही कहानी है। ये…” उसने रुही की ठुड्डी हल्के से उठाई, “मेरी बीवी नहीं है। शादीशुदा है। लेकिन दिल से मेरी है। जब भी मौका मिलता है, ये मेरे पास आ जाती है। आज पहली बार पूरी दो रात मिल रही हैं।”
सोनिया ने आँखें मारीं। “रामू भाई साफ-साफ बोलो। ये तुम्हारी रखैल है। तुम्हारी बुलबुल। जो तुम्हारे लंड की दीवानी हो चुकी है।”
रुही ने आँखें बंद कर लीं। “सोनिया… कृपया…”
“क्या कृपया?” सोनिया हँसी। “शर्म क्यों कर रही है? हम चारों यहाँ हैं। जामिल को भी पता चल जाए कि तू कितनी गिरी हुई है अपने ऑटो वाले के प्यार में।”
रामू ने रुही को और अपनी तरफ खींच लिया। उसका बड़ा हाथ रुही की नाइटी के अंदर, कमर पर था। वह जामिल से बोला, “सच कहूँ तो ये पहले बहुत शर्माती थी। अब भी शर्माती है। लेकिन जब बिस्तर पर आती है तो फिर ‘रामू जी’ ‘रामू जी’ करती रहती है। इसकी चूत अब मेरी आदी हो चुकी है।”
जामिल ने सिर हिलाया। “समझ सकता हूँ भैया। मैडम भी पहले बहुत संकोच करती थीं। अब खुद इशारा कर देती हैं कि आज रात रुक जाऊँ।”
सोनिया ने जामिल का हाथ पकड़कर अपनी छाती पर रख दिया। नाइटी के ऊपर से। “और जब रुकता है तो छोड़ता नहीं जल्दी। जैसे तुम्हारी बुलबुल को तुम छोड़ते नहीं होगे।”
रुही की हालत खराब हो रही थी। शर्म और उत्तेजना दोनों से शरीर काँप रहा था। उसने रामू के कान में धीरे से कहा, “रामू जी… बहुत शर्म आ रही है… ऐसे मत बात करो…”
रामू ने उसके गाल पर चुम्बन लिया। “शर्म क्यों? आज रात सब सच बोल रहे हैं। तू मेरी है। ये दोनों भी जान लें।”
सोनिया ने रुही की तरफ देखकर कहा, “रुही, सिर उठा। इतनी शर्म मत कर। तू सोचती थी कि सिर्फ तू ही किसी और के नीचे जाती है? मैं भी जाती हूँ। और मज़ा भी लेती हूँ। आज रात तू भी खुलकर ले। कोई जज नहीं कर रहा यहाँ।”
जामिल ने रामू से पूछा, “भैया, दो रात पूरे कैसे गुजारोगे? मैडम तो कभी-कभी सुबह तक नहीं छोड़तीं।”
रामू ने रुही को अपनी गोद में लगभग खींच लिया। रुही का एक पैर उसके पैरों पर आ गया। “गुजार लेंगे। इसकी भूख भी कम नहीं है। बस पहले शर्माती है, फिर खुद माँगने लगती है।”
रुही ने अपना चेहरा रामू की छाती में छुपा लिया। आवाज़ बहुत धीमी थी, “रामू जी… बस करो…”
सोनिया जोर से हँसी। “देख जामिल, बुलबुल कितनी लाल हो गई है। अभी तो बस बातें हो रही हैं। रात को क्या होगा जब रामू भाई इसे नाइटी से बाहर निकालेंगे।”
चारों के बीच हवा भारी हो चुकी थी।
लव सीट पर रामू का हाथ अब रुही की जाँघ पर था। सामने सोनिया जामिल के बिल्कुल सट चुकी थी। बातें जारी थीं—खुली, गंदी, ईमानदार। और रुही हर शब्द के साथ और ज्यादा शर्म से जल रही थी… और अंदर ही अंदर और ज्यादा गीली भी।
रुही ने जल्दी से अपनी काली नाइटी ठीक की और दरवाज़ा खोला। रामू जी खड़े थे—काली टी-शर्ट, जींस, बैग हाथ में। उनकी निगाह जैसे ही रुही पर पड़ी, आँखों में वो परिचित भूख चमक उठी। उन्होंने बिना कुछ कहे रुही की कमर पकड़कर अंदर खींच लिया और गहरे लंबे चुम्बन में खो गए।
“तैयार दिख रही है,” रामू ने होठों से होठ अलग करते हुए धीरे कहा।
इतने में सोनिया सीढ़ियों से नीचे उतरी।
उसने एक गहरी लाल सैटिन नाइटी पहन रखी थी। बहुत पतली। स्तनों की आकृति साफ झलक रही थी, जाँघें लगभग पूरी खुली हुईं। बाल खुले थे, होंठ चमक रहे थे। जामिल उसके पीछे-पीछे आ रहा था, अभी भी बनियान और लुंगी में।
सोनिया ने मुस्कुराते हुए कहा, “आ गए रामू भाई। आपकी बुलबुल तो बहुत देर से बेचैन थी।”
रुही शर्म से लाल हो गई। उसने नज़रें झुका लीं।
चारों लिविंग रूम में आ गए।
एक लव सीट पर रामू बैठे और रुही को अपनी गोद के बिल्कुल पास खींच लिया। रुही का शरीर उनके से सट गया। सामने वाली लव सीट पर सोनिया जामिल के बिल्कुल सटकर बैठ गई। जामिल का एक हाथ उसकी कमर पर था।
थोड़ी देर चुप्पी रही। फिर सोनिया ने बात शुरू की।
“रामू भाई, आज रात घर पूरी तरह हमारा है। कोई आने-जाने वाला नहीं।” उसने जामिल की तरफ देखा। “जामिल मेरे घर का नौकर है… और जब पति-बेटा नहीं होते, तो वो मेरा मर्द भी बन जाता है।”
जामिल ने हल्के से मुस्कुराते हुए सोनिया की जाँघ सहलाई। “मैडम सच कह रही हैं। डेढ़ साल से जब भी मौका मिलता है, मैडम को मैं ही सम्भालता हूँ।”
रुही की साँसें तेज़ हो गईं। वह रामू के कंधे से सटकर बैठी थी, लेकिन शर्म से उसका चेहरा जल रहा था।
रामू ने रुही के बालों में उंगलियाँ फेरते हुए जामिल से कहा, “हमारी भी लगभग वैसी ही कहानी है। ये…” उसने रुही की ठुड्डी हल्के से उठाई, “मेरी बीवी नहीं है। शादीशुदा है। लेकिन दिल से मेरी है। जब भी मौका मिलता है, ये मेरे पास आ जाती है। आज पहली बार पूरी दो रात मिल रही हैं।”
सोनिया ने आँखें मारीं। “रामू भाई साफ-साफ बोलो। ये तुम्हारी रखैल है। तुम्हारी बुलबुल। जो तुम्हारे लंड की दीवानी हो चुकी है।”
रुही ने आँखें बंद कर लीं। “सोनिया… कृपया…”
“क्या कृपया?” सोनिया हँसी। “शर्म क्यों कर रही है? हम चारों यहाँ हैं। जामिल को भी पता चल जाए कि तू कितनी गिरी हुई है अपने ऑटो वाले के प्यार में।”
रामू ने रुही को और अपनी तरफ खींच लिया। उसका बड़ा हाथ रुही की नाइटी के अंदर, कमर पर था। वह जामिल से बोला, “सच कहूँ तो ये पहले बहुत शर्माती थी। अब भी शर्माती है। लेकिन जब बिस्तर पर आती है तो फिर ‘रामू जी’ ‘रामू जी’ करती रहती है। इसकी चूत अब मेरी आदी हो चुकी है।”
जामिल ने सिर हिलाया। “समझ सकता हूँ भैया। मैडम भी पहले बहुत संकोच करती थीं। अब खुद इशारा कर देती हैं कि आज रात रुक जाऊँ।”
सोनिया ने जामिल का हाथ पकड़कर अपनी छाती पर रख दिया। नाइटी के ऊपर से। “और जब रुकता है तो छोड़ता नहीं जल्दी। जैसे तुम्हारी बुलबुल को तुम छोड़ते नहीं होगे।”
रुही की हालत खराब हो रही थी। शर्म और उत्तेजना दोनों से शरीर काँप रहा था। उसने रामू के कान में धीरे से कहा, “रामू जी… बहुत शर्म आ रही है… ऐसे मत बात करो…”
रामू ने उसके गाल पर चुम्बन लिया। “शर्म क्यों? आज रात सब सच बोल रहे हैं। तू मेरी है। ये दोनों भी जान लें।”
सोनिया ने रुही की तरफ देखकर कहा, “रुही, सिर उठा। इतनी शर्म मत कर। तू सोचती थी कि सिर्फ तू ही किसी और के नीचे जाती है? मैं भी जाती हूँ। और मज़ा भी लेती हूँ। आज रात तू भी खुलकर ले। कोई जज नहीं कर रहा यहाँ।”
जामिल ने रामू से पूछा, “भैया, दो रात पूरे कैसे गुजारोगे? मैडम तो कभी-कभी सुबह तक नहीं छोड़तीं।”
रामू ने रुही को अपनी गोद में लगभग खींच लिया। रुही का एक पैर उसके पैरों पर आ गया। “गुजार लेंगे। इसकी भूख भी कम नहीं है। बस पहले शर्माती है, फिर खुद माँगने लगती है।”
रुही ने अपना चेहरा रामू की छाती में छुपा लिया। आवाज़ बहुत धीमी थी, “रामू जी… बस करो…”
सोनिया जोर से हँसी। “देख जामिल, बुलबुल कितनी लाल हो गई है। अभी तो बस बातें हो रही हैं। रात को क्या होगा जब रामू भाई इसे नाइटी से बाहर निकालेंगे।”
चारों के बीच हवा भारी हो चुकी थी।
लव सीट पर रामू का हाथ अब रुही की जाँघ पर था। सामने सोनिया जामिल के बिल्कुल सट चुकी थी। बातें जारी थीं—खुली, गंदी, ईमानदार। और रुही हर शब्द के साथ और ज्यादा शर्म से जल रही थी… और अंदर ही अंदर और ज्यादा गीली भी।


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