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Thriller बेटे के दोस्त ने आंटी को सम्मोहित(hypnotize) किया....फिर क्या हुआ?
#9
"इस औरत की आँखों में अब कोई अपनी मर्जी बची ही नहीं है," आदित्य ने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आवाज़ में एक अजीब सी उत्तेजना और विस्मय था।

हरीश ने एक कुटिल मुस्कान के साथ उसकी ओर देखा। सम्मोहन की शक्ति ने चैताली के व्यक्तित्व को पूरी तरह से मिटा दिया था। वह अब केवल एक शरीर थी, एक ऐसी मशीन जिसे केवल निर्देशों की प्रतीक्षा थी। चैताली, जो कभी अपने घर की मालकिन और एक गरिमापूर्ण महिला मानी जाती थी, अब पूरी तरह से हरीश के मानसिक नियंत्रण में थी। उसके चेहरे पर एक खालीपन था, लेकिन उसकी आँखों में एक ऐसी आज्ञाकारिता थी जो डरावनी और कामुक दोनों थी।

बिना एक शब्द बोले, बिना किसी हिचकिचाहट के और बिना किसी विरोध के, चैताली धीरे से नीचे झुकी और घुटनों के बल फर्श पर बैठ गई। उसने अपनी नज़रें नीचे झुकाईं और बड़ी नम्रता से हरीश की जींस के सामने खुद को स्थापित किया।

जैसे ही हरीश ने अपनी पैंट नीचे की, उसकी उत्तेजित इंद्रिय चैताली के सामने प्रकट हुई। चैताली ने अपनी दोनों हथेलियों से उसे बड़ी कोमलता से, लेकिन मजबूती से पकड़ा, जैसे वह किसी पवित्र वस्तु को छू रही हो। उसने धीरे से अपनी जीभ बाहर निकाली और उसके सिरे को चखना शुरू किया। वह बहुत धीरे-धीरे, एक लय में उसकी नोक को चाट रही थी, जिससे हरीश के शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई।

"हाँ, बिल्कुल ऐसे ही... बहन की लोड़ी, इसे अच्छी तरह से चाट! अपनी पूरी ताकत लगा दे," हरीश ने उसकी कामुकता को देख कर आदेश दिया। उसने आगे बढ़कर चैताली के घने बालों को अपनी मुट्ठी में जकड़ा और उसे अपनी ओर खींचते हुए, एक झटके के साथ अपना लन्ड उसके गले के गहराई में धकेलना शुरू किया।

"गैग... घ्ररर..."

चैताली के गले से घबराहट भरी आवाज़ें निकलने लगीं। उसका गला पूरी तरह अवरुद्ध हो गया था, और उसका शरीर ऑक्सीजन के लिए तड़प रहा था, लेकिन सम्मोहन की जंजीरें इतनी मजबूत थीं कि वह रुक नहीं पा रही थी। उसने अपने होंठों को सिकोड़ लिया और पूरी ताकत से सक्शन पैदा करना शुरू किया। उसके मुँह से लार की धारें टपक कर लन्ड के निचले हिस्से और उसके अपने ही चेहरे पर फैल रही थीं, जिससे वहाँ एक चिपचिपा, कामुक माहौल बन गया था।

"ओह शिट, क्या जबरदस्त सक्शन है! यकीन नहीं होता कि यह इतनी कुशलता से कर रही है," हरीश ने एक लंबी आह भरी, उसकी आँखें आधे बंद थे। उसने बगल में खड़े अपने दोस्त की ओर इशारा किया, "आदित्य, देख रहा है? देख कैसे यह रंडी मेरे लन्ड को निगल रही है। देख इसकी बेबसी और इसकी भूख!"

आदित्य अपनी जगह पर पत्थर की तरह खड़ा था, लेकिन उसका शरीर उत्तेजना से कांप रहा था। उसका एक हाथ उसकी अपनी जींस के अंदर था, जहाँ वह खुद को पागलों की तरह रगड़ रहा था। वह इस दृश्य से अपनी आँखें नहीं हटा पा रहा था। "भाई, यह तो पागलपन है... यह सचमुच अविश्वसनीय है," उसने लड़खड़ाती आवाज़ में कहा।

हरीश अब पूरी तरह से नियंत्रण में था और उसकी रफ्तार बढ़ती गई। वह अब केवल धकेल नहीं रहा था, बल्कि वह चैताली के मुँह में गहराई से वार कर रहा था। हर धक्के के साथ चैताली का सिर पीछे की ओर झटक रहा था, लेकिन उसके हाथ अभी भी मजबूती से पकड़े हुए थे।

"चूस इसे... और जोर से चूस! मेरी लन्ड की भूखी मिलफ... दिखा की तू कितनी प्यासी है!" हरीश की आवाज़ अब एक आदेश बन चुकी थी।

जैसे-जैसे समय बीत रहा था, हरीश का शरीर तनाव की चरम सीमा पर पहुँच गया। उसकी नसें उभर आई थीं और सांसें तेज हो गई थीं। उसने चैताली के सिर को अपनी पकड़ में और मजबूती से जकड़ लिया। एक आखिरी, बेहद गहरे और शक्तिशाली धक्के के साथ, हरीश का शरीर कांप उठा और उसने अपना सारा वीर्य चैताली के गले और मुँह के अंदर छोड़ दिया।

"आह... गॉड... यस!" वह जोर से चिल्लाया, जैसे उसे दुनिया का सारा सुख मिल गया हो।

चैताली ने एक पल के लिए अपनी आँखें बंद कीं और उस गर्म वीर्य के प्रवाह को महसूस किया। सम्मोहन के प्रभाव के कारण, उसने बिना किसी घृणा के, बल्कि एक कर्तव्य की तरह, सारा वीर्य निगल लिया। इसके बाद, उसने बहुत धीरे से अपने होंठों और जीभ से लन्ड को पूरी तरह साफ किया, ताकि एक बूंद भी शेष न रहे। वह अभी भी उस गहरे सम्मोहन की दुनिया में थी, जहाँ उसके लिए कोई तर्क नहीं था, केवल आज्ञा और पूर्ण समर्पण था।

हरीश ने एक लंबी, गहरी सांस ली और संतुष्टि के साथ अपना लन्ड वापस जींस के अंदर डाला। उसकी उत्तेजना अब शांत हो चुकी थी और वह एक अजीब सी मानसिक शांति महसूस कर रहा था। उसने आदित्य की ओर देखा, जो अभी भी स्तब्ध खड़ा था और अपनी उत्तेजना को शांत करने की कोशिश कर रहा था। दोनों के बीच एक मूक सहमति थी कि उन्होंने आज किसी के आत्मसम्मान को कुचलकर अपनी वासना की तृप्ति की है।
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RE: बेटे के दोस्त ने आंटी को सम्मोहित(hypnotize) किया....फिर क्या हुआ? - by MohdIqbal - 16-08-2026, 04:57 PM



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