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छोटी सी भूल
#5
अगले दिन सुबह एक छोटी सी घटना घटी।
मैं नहाने गया तो नल से पानी नहीं आया। बस कुछ बूँदें टपकीं। मम्मी किचन में थीं। उन्होंने भी देखा। दोनों नल बंद थे। छत पर जाकर देखा तो टंकी का पानी लगभग खत्म हो चुका था। और सबसे बड़ी बात—टंकी के नीचे वाला पाइप थोड़ा मुड़ा हुआ और लीक कर रहा था। सफाई के समय शायद ढक्कन उठाते वक्त जोर पड़ने से पाइप की फिटिंग ढीली हो गई थी।
मम्मी ने फोन पर पापा को बताया। पापा ने कहा, “कल सुबह प्लंबर भेज दूँगा। अभी रात है। बर्तनों में पानी भर लो जो बचा है।”
लेकिन सुबह तक पानी और कम हो गया। प्लंबर का कोई अता-पता नहीं। पापा का फोन व्यस्त आ रहा था।
दोपहर तक घर में पानी की किल्लत हो गई। मम्मी परेशान थीं। नहाने का, कपड़े धोने का, खाना बनाने का… सब अटक गया था।
पापा ने कुछ दिन पहले ही घर की छत पर लगी पानी की टंकी की सफाई की बात की थी। टंकी काफी दिनों से साफ नहीं हुई थी। अंदर काई जम गई थी। पानी में गंदी गंध आने लगी थी। लेकिन पापा सुबह ही चले गए थे। मैं कॉलेज में था। मम्मी ने सोचा कि अकेले ही टंकी साफ कर लेंगी।
तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।
मम्मी ने दरवाजा खोला। दरवाजा खुलते ही उनकी साँसें एक पल के लिए थम गईं। सामने राहुल खड़ा था। हाथ में कुछ औजार और एक नया पाइप का टुकड़ा।
“आंटी, अंकल ने मुझे फोन किया। बोला टंकी खराब हो गई है। प्लंबर नहीं मिल रहा।”
यह झूठ था। पापा ने राहुल को फोन नहीं किया था। बातचीत में पापा ने अनजाने में कह दिया होगा कि घर में टंकी खराब हो गई है, प्लंबर नहीं मिल रहा और अंजलि परेशान है। राहुल ने मौका संभाल लिया और पापा से कह दिया कि वह खुद देख लेगा। पापा उस पर अभी भी बहुत भरोसा करते थे।
मम्मी दरवाजे पर खड़ी रहीं। उन्होंने हल्के पीले रंग की साड़ी पहनी हुई थी। पल्लू सिर पर लपेटा हुआ था। पसीने से गला और पीठ चिपक गए थे। ब्लाउज आधी आस्तीन वाला था। बाल जल्दबाजी में बाँधे हुए। चेहरे पर थकान साफ थी।
“नहीं… प्लंबर आ जाएगा,” मम्मी ने कहा।
राहुल ने धीरे से कहा, “आंटी, पानी के बिना कैसे रहेगा? पंकज भाई कॉलेज गए होंगे। आप अकेली परेशान होंगी। बस आधा घंटा लगता है। मैं ठीक कर देता हूँ।”
मम्मी ने एक पल सोचा। घर में पानी नहीं था।
“आंटी, अंकल ने खुद बोला था मुझे। कहा था—राहुल, टंकी वाला काम है। अगर तू अपनी आंटी की मदद कर दे तो अच्छा रहेगा।”
मम्मी ने उस पर भरोसा कर लिया। शायद इसलिए कि पापा अक्सर ऐसी बातें कहते थे—“राहुल अपना ही लड़का है।” उन्होंने सिर हिलाया और उसे अंदर आने दिया।
मम्मी आगे चलीं और राहुल पीछे। सीढ़ियाँ चढ़ते समय उसका ध्यान मम्मी के हिलते मादक नितंबों पर चला गया। उसने एक हल्की सी आह भरी। मम्मी ने चौंककर पीछे देखा। राहुल ने ऐसा मुँह बनाया जैसे बहुत गर्मी के कारण उसने ऐसा किया हो। दोनों छत पर पहुँचे।
धूप तेज थी। छत का फर्श गर्म था। टंकी के नीचे पाइप से पानी की धार धीरे-धीरे रिस रही थी। फर्श गीला और चिकना हो चुका था।
राहुल झुककर काम करने लगा। उसकी शर्ट पीठ से चिपक गई। मम्मी पास खड़ी थीं। कभी-कभी पानी की बाल्टी पकड़तीं, कभी पाइप संभालतीं।
तभी राहुल ने एक अजीब हरकत की। उसने अपनी शर्ट उतारकर एक तरफ रख दी। बनियान में वह टंकी के पास आया। मम्मी की निगाह उसके बाजुओं के मसल्स पर पड़ी। उन्होंने उसकी ओर देखा, लेकिन कुछ कहा नहीं।
एक बार जब राहुल ने जोर से पाइप घुमाया तो पानी का छींटा सीधा मम्मी की साड़ी पर पड़ गया। पतली साड़ी पेट और कमर पर चिपक गई। कपड़ा गीला होकर शरीर से सट गया। गोरी त्वचा की आकृति साफ उभर आई।
मम्मी ने झट से पीछे कदम बढ़ाया। गाल लाल हो गए। उन्होंने पल्लू से गीला हिस्सा ढकने की कोशिश की, लेकिन कपड़ा और चिपक गया।
राहुल की नजर एक पल के लिए वहीं रुक गई। फिर उसने जल्दी से आँखें हटा लीं। आवाज में नमी थी।
“सॉरी आंटी… हाथ फिसल गया।”
मम्मी ने कुछ नहीं कहा। बस दुपट्टा कस लिया और थोड़ा दूर खड़ी हो गईं।
लेकिन राहुल अब पाइप के करीब था। उसने कहा, “आंटी, अंदर वाला कनेक्शन भी देखना पड़ेगा। बाहर से ठीक हो रहा है, लेकिन अंदर से भी ढीला हो सकता है। मैं देखता हूँ।”
टंकी का ढक्कन भारी था। राहुल ने उसे ऐसे उठा लिया जैसे फूल हो। उसने कहा कि वह अंदर जाता है, लेकिन मम्मी ने मना कर दिया और खुद टंकी के अंदर चली गईं। भीगे कपड़े से अंदर की दीवारें साफ करने लगीं। साफ-सफाई के दौरान मम्मी की साड़ी और गीली होने लगी।
राहुल ने पूछा, “आंटी, ये टंकी कितने साल से लगी है?”
“दस-बारह साल हो गए।”
“अंकल ने कभी बदलने की बात नहीं की?”
“नहीं। चल रही है तो ठीक है न।”
“आंटी, आप सब अकेले करती हैं न?”
“हाँ। आदत हो गई है।”
“इसे आदत नहीं, मजबूरी कहते हैं।”
मम्मी चुप हो गईं। उन्होंने टंकी की तरफ ध्यान दिया। लेकिन राहुल की यह बात उनके कानों में रह गई।
ढक्कन वापस लगाते समय राहुल का हाथ मम्मी के हाथ के बहुत पास आया। दोनों की उंगलियाँ एक पल के लिए छू गईं। मम्मी ने झटके से हाथ खींच लिया। राहुल ने कुछ नहीं कहा। बस हल्के से मुस्कुराया।
“आंटी, ढक्कन लग गया। अब पानी भर जाएगा।”
छत पर पानी जमा हो गया था। राहुल ने पानी की तरफ देखा और कुछ सोचकर मम्मी के ठीक पीछे आ गया। बहुत करीब। उसकी साँसें मम्मी की गर्दन पर महसूस हो रही थीं। मम्मी ने घबराकर कंधे मोड़े, लेकिन कुछ कहा नहीं।
तभी राहुल ने पीछे से एक हल्की सी हरकत की। शायद अपना पैर आगे बढ़ाया। अचानक मम्मी का पाँव फिसल गया।
“आह…!”
वे संतुलन खो बैठीं। शरीर पीछे की तरफ झुकने लगा। गिरने ही वाली थीं कि राहुल ने तेजी से हाथ बढ़ाया।
उसने उन्हें उनकी नंगी कमर से पकड़ लिया।
दोनों हथेलियाँ सीधी उनकी चिकनी त्वचा पर चिपक गईं। उंगलियाँ कमर के गोल हिस्से पर दब गईं। एक पल के लिए पूरी हथेली उनकी नंगी कमर को थामे हुए थी—गर्म, मुलायम, और पूरी तरह बेपर्दा।
मम्मी का शरीर राहुल की छाती से सट गया। उनकी साँस अटक गई। राहुल के हाथ उनकी कमर पर और कस गए, जैसे संभालने के बहाने उन्हें और करीब खींच रहा हो।
“सावधान आंटी…” उसकी आवाज कानों के पास थी, साँसें भारी। “फिसल गईं थीं।”
मम्मी ने तुरंत अपने को छुड़ाने की कोशिश की। गाल लाल हो चुके थे। साँसें तेज चल रही थीं।
लेकिन उसी पल राहुल ने एक और हरकत की।
अचानक उसने आगे से एक हल्का सा झटका दिया—जैसे संतुलन बनाने के बहाने। झटके से साड़ी और पेटीकोट नीचे की तरफ खिंच गई। साड़ी नाभि से तीन इंच नीचे आ गई। मौके का फायदा उठाते हुए उसका दूसरा हाथ तेजी से आगे बढ़ गया।
बहाने से उसकी हथेली सीधी मम्मी के नरम, चिकने, मुलायम पेट पर चिपक गई।
उंगलियाँ धीरे से नाभि के गड्ढे पर रुक गईं। गर्म, चिकनी त्वचा। हल्के पसीने से चमकती हुई। नाभि गहरी और नरम थी। राहुल की उंगलियाँ एक पल के लिए वहाँ दब गईं। फिर उसने एक उंगली नाभि के अंदर हल्के से घुसा दी।
मम्मी की आँखें चढ़ने लगीं। शरीर सख्त हो गया।
“क्या कर रहे हो…!” आवाज में घबराहट और शर्म दोनों थे।
राहुल ने हाथ नहीं हटाया तुरंत। उसकी हथेली अभी भी उनके पेट पर टिकी हुई थी। उंगली नाभि के अंदर हल्के दबाव के साथ रुकी रही—बस एक सेकंड के लिए। फिर उसने धीरे से हाथ खींचा।
मम्मी ने खुद पर काबू करते हुए खुद को राहुल से छुड़ाया।
“सॉरी आंटी… संभाल रहा था। आप गिर जातीं तो…” आवाज नरम थी, लेकिन साँसें भारी चल रही थीं। आँखों में वही प्यासी चमक थी।
मम्मी ने झटके से उसके हाथ धकेल दिए और पीछे हट गईं। साड़ी का पल्लू जल्दी से पेट पर लपेट लिया। गाल लाल हो चुके थे। पेट और नाभि पर अभी भी उसके हाथ और उंगली का गर्म अहसास बाकी था—जैसे कोई निशान छूट गया हो।
वे दोनों कुछ पल चुपचाप खड़े रहे। छत पर सिर्फ पानी की टप-टप की आवाज थी।
मम्मी ने आँखें नहीं मिलाईं। बस तेजी से पल्लू कस लिया और बोलीं, “काम खत्म हो गया। नीचे जाओ।”
राहुल ने सिर हिलाया। मुस्कान धीमी थी।
“जैसी आंटी की मर्जी।”
राहुल ने औजार समेटे और नीचे जाने लगा। लेकिन जब वह मुड़ा, तो उसकी नजर एक बार फिर मम्मी के पेट की तरफ गई—जहाँ कुछ पल पहले उसकी हथेली थी।
पानी फिर से आने लगा था। जाते समय वह थोड़ा रुक गया। आवाज धीमी थी।
“आंटी… दोबारा से पानी रुक जाए तो बताना। मैं निकाल दूँगा।”
उसके इस गंदे, दो अर्थ वाली बात को सुनकर मम्मी चौंक गईं। राहुल ने मुँह मोड़ लिया। उसके चेहरे पर अश्लील मुस्कान नाच रही थी। उसे पता था कि मम्मी उसे पीछे से देख रही हैं। उसने जानबूझकर अपने हाथों को चूमा—जैसे मम्मी की नरम कमर के अहसास को अपने हाथों पर महसूस कर रहा हो।
वह चला गया।
मैं शाम को घर आया तो मम्मी किचन में खड़ी थीं। साड़ी अभी भी थोड़ी नम लग रही थी। उन्होंने मुझसे टंकी वाली बात कही, लेकिन राहुल का नाम बहुत धीरे से लिया। जैसे खुद को याद न दिलाना चाहती हों।
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Messages In This Thread
छोटी सी भूल - by ripsin183 - 08-08-2026, 08:05 PM
RE: छोटी सी भूल - by Uvaaaa - 10-08-2026, 02:06 PM
RE: छोटी सी भूल - by Loveakb18 - 16-08-2026, 08:10 AM
RE: छोटी सी भूल - by Loveakb18 - 16-08-2026, 08:10 AM
RE: छोटी सी भूल - by ripsin183 - 16-08-2026, 02:44 PM
RE: छोटी सी भूल - by Loveakb18 - 16-08-2026, 10:11 PM
RE: छोटी सी भूल - by ripsin183 - 17-08-2026, 03:55 PM
RE: छोटी सी भूल - by ripsin183 - 18-08-2026, 09:58 AM
RE: छोटी सी भूल - by Tejas_8448 - 18-08-2026, 12:48 PM
RE: छोटी सी भूल - by Asli lund - 18-08-2026, 01:43 PM
RE: छोटी सी भूल - by ripsin183 - 18-08-2026, 02:10 PM
RE: छोटी सी भूल - by Asli lund - 18-08-2026, 05:55 PM
RE: छोटी सी भूल - by ripsin183 - 18-08-2026, 09:13 PM
RE: छोटी सी भूल - by Loveakb18 - 18-08-2026, 09:39 PM
RE: छोटी सी भूल - by saya - 18-08-2026, 10:58 PM
RE: छोटी सी भूल - by sdd2686 - 22-08-2026, 02:38 PM
RE: छोटी सी भूल - by Loveakb18 - 22-08-2026, 07:06 PM
RE: छोटी सी भूल - by Uvaaaa - 23-08-2026, 10:54 AM
RE: छोटी सी भूल - by ripsin183 - 25-08-2026, 05:40 PM
RE: छोटी सी भूल - by saya - 25-08-2026, 08:23 PM
RE: छोटी सी भूल - by KkkNad - 28-08-2026, 10:08 AM
RE: छोटी सी भूल - by KkkNad - 28-08-2026, 10:09 AM



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