16-08-2026, 01:22 AM
अमित, जो अब तक अपनी बारी का इंतजार कर रहा था, उत्तेजना से कांप रहा था। उसने अपना कंडोम पहना और चैताली के पास आया।
"मेरा नंबर आ गया। अब देख मैं इस मिलफ के साथ क्या करता हूँ," अमित ने गंदी भाषा में कहा।
अमित ने चैताली को करवट दिलाकर लेटाया। उसने उसके एक पैर को अपने कंधे पर रखा और धीरे-धीरे अंदर घुसा। चैताली ने एक लंबी आह भरी। अमित की शैली रवि से अलग थी; वह धीरे-धीरे और गहराई से वार कर रहा था।
"तेरी चूत इतनी गर्म है, जैसे आग लगी हो," अमित ने उसके कान में कहा।
चैताली ने अपनी कमर को ऊपर उठाया, जिससे अमित को और गहराई तक जाने का मौका मिला। अमित ने उसके स्तनों को अपने हाथों में लिया और उन्हें जोर-जोर से मरोड़ने लगा।
"आह! अमित... रुक जाओ... बहुत जोर से है," चैताली ने कराहते हुए कहा।
"रुकना क्यों है? तूने पैसे लिए हैं न? तो अब भुगत, बेहेन की लौड़ी " अमित ने बेरहमी से कहा और अपनी गति बढ़ा दी।
चुदाई की आवाजें तेज हो गईं क्योंकि चैताली का प्राकृतिक लुब्रिकेशन और कंडोम का घर्षण मिलकर एक अजीब सा संगीत पैदा कर रहे थे। अमित ने दूसरी बार के लिए उसे दीवार के सहारे खड़ा किया। उसने चैताली के दोनों पैर ऊपर उठा लिए और उसे दीवार से चिपका दिया।
"देख, तू कितनी बेबस लग रही है। देखने में तो तू किसी अच्छे घर की हाउसवाइफ लगती है, बल बच्चे दर, पर यहाँ हॉस्टल के कमरे में चार लड़कों के लिए खुली पड़ी है," अमित ने उसका मजाक उड़ाते हुए कहा।
उसने वार करना शुरू किया। चैताली की पीठ दीवार से रगड़ रही थी, और अमित के हर धक्के से वह दीवार पर टकरा रही थी। उसकी सांसें उखड़ रही थीं, लेकिन उसके शरीर की प्रतिक्रिया बता रही थी कि उसे यह सब पसंद आ रहा था। अमित ने तीसरी बार के लिए उसे फिर से बेड पर लेटाया और उसके दोनों पैरों को उसके सिर के पास मोड़ दिया।
"अब देख असली मजा," अमित ने कहा और पूरी ताकत से अंदर घुसा।
चैताली की चीखें अब कमरे की दीवारों से टकरा रही थीं। वह पूरी तरह से समर्पित हो चुकी थी। अमित ने उसे तब तक पटका जब तक कि वह पूरी तरह से निढाल नहीं हो गई। अमित ने अपना कंडोम उतारा और उसे किनारे फेंक दिया।


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