15-08-2026, 05:11 PM
चौतरफा दीवारों वाले उस घुटन भरे हॉस्टल के कमरे में हवा भारी थी। सिगरेट के धुएं और पसीने की गंध ने माहौल को और भी उत्तेजक बना दिया था। चैताली घोष, जो दिन में वाटिका रियल एस्टेट की एक गंभीर और प्रभावशाली एग्जीक्यूटिव थी, इस वक्त फर्श पर घुटनों के बल बैठी थी। उसके शरीर की परिपक्वता, उसके 38-32-40 के उभार, और उसकी उम्र का तजुर्बा उन चारों लड़कों के लिए किसी नशे से कम नहीं था। उसने अभी-अभी करण के लंड को अपने मुंह से आजाद किया था। उसके होंठों के कोनों से लार की एक पतली लकीर टपक रही थी और उसकी सांसें तेज थीं।
करण ने एक लंबी सांस ली और पीछे हटते हुए अपनी पैंट ऊपर की, हालांकि उसकी उत्तेजना अभी भी चरम पर थी। उसने चैताली के चेहरे पर एक तिरस्कार भरी लेकिन कामुक मुस्कान डाली।
"वाह रंडी, तेरा मुंह तो वाकई जादू है। पर अब सिर्फ मुंह से काम नहीं चलेगा," करण ने कहा।
रवि, जो अब तक किनारे खड़ा होकर इस नजारे का लुत्फ उठा रहा था, आगे बढ़ा। उसकी आंखों में भूख थी। उसने अपनी जेब से एक कंडोम निकाला और उसे अपने सख्त लंड पर चढ़ाते हुए चैताली की ओर देखा।
"अब मेरी बारी है। चल, इस बेड पर लेट जा, मोटी," रवि ने आदेश दिया।
चैताली ने एक धीमी आह भरी। वह धीरे से उठी, उसके भारी बूब्स बिना किसी सहारे के झूल रहे थे। उसने बेड की चादर को अपने हाथों से जकड़ा और अपनी पीठ के बल लेट गई। उसके चौड़े कूल्हे गद्दे में धंस गए, जिससे उसकी कमर और भी गहरी और आकर्षक लग रही थी।
रवि उसके ऊपर चढ़ा और उसके पैरों को फैला दिया। उसने चैताली की जांघों के बीच अपनी उंगलियां घुमाईं, जहाँ वह पहले से ही गीली हो चुकी थी।
"कितनी गीली है तू, कुतिया। लगता है तुझे लड़कों के साथ रहने की आदत हो गई है," रवि ने गंदी हंसी हंसते हुए कहा।
उसने बिना किसी देरी के अपना कंडोम चढ़ा हुआ लंड उसकी तंग चूत में धकेल दिया। चैताली के मुंह से एक तेज चीख निकली, जो दर्द और सुख का मिला-जुला मिश्रण थी।
"आह! धीरे... रवि," चैताली ने कराहते हुए कहा।
"चुप रह! तू यहाँ मेरी बातें सुनने नहीं, मेरी प्यास बुझाने आई है," रवि ने उसकी कमर को कसकर पकड़ा और जोर-जोर से धक्का देना शुरू किया।
चुदाई की आवाजें कमरे में गूंजने लगीं। मांस से मांस के टकराने की वह 'चप-चप' की आवाज और कंडोम के घर्षण ने माहौल को और भी कामुक बना दिया। रवि की हर धमक के साथ चैताली के 38 इंच के भारी बूब्स ऊपर-नीचे उछल रहे थे। वह अपनी आंखें बंद कर चुकी थी, उसकी उंगलियां चादर को फाड़ने की हद तक भींच रही थीं। रवि ने अपनी गति बढ़ाई, उसकी सांसें तेज हो गईं।
"तेरी ये चर्बी... उफ़, बहुत सही है तू," रवि ने उसके बूब्स को जोर से दबाते हुए कहा।
रवि ने पहली बार अपनी चरम सीमा तक पहुँचने के बाद उसे छोड़ दिया। लेकिन खेल अभी शुरू हुआ था। उसने उसे पलटने का इशारा किया।
"अब घुटनों के बल आ जा। मुझे तेरी ये बड़ी गांड़ देखनी है," रवि ने आदेश दिया।
चैताली ने आज्ञा का पालन किया। वह डॉगी स्टाइल में आ गई, उसकी पीठ नीचे की ओर झुकी हुई थी और उसके भारी कूल्हे हवा में उठे हुए थे। रवि पीछे से आया और एक बार फिर उसके भीतर समा गया। इस बार गहराई ज्यादा थी।
"ओह गॉड... रवि, बहुत गहरा है," चैताली की आवाज अब और भी भारी हो गई थी।
"गहरा होना चाहिए, तभी तो तुझे पता चलेगा कि असली मर्द क्या होता है," रवि ने उसके कूल्हों को जोर से थप्पड़ मारा, जिससे उसकी त्वचा लाल हो गई।
रवि ने उसे बुरी तरह पटका। हर धक्का चैताली के शरीर को आगे की ओर धकेल रहा था। वह अपनी कोहनियों के बल टिकी हुई थी, उसका चेहरा गद्दे में दबा था। कमरे में केवल उनकी भारी सांसों और शरीर के टकराने की आवाजें थीं। रवि ने तीसरी बार के लिए उसे अपनी गोद में बिठाया।
चैताली अब उसके ऊपर थी, उसका चेहरा रवि के चेहरे के सामने था। उसने अपनी कमर को गोल-गोल घुमाना शुरू किया।
"हाँ, ऐसे ही घुमा इसे। तू तो पूरी प्रोफेशनल है," रवि ने उसके चेहरे पर थूकते हुए कहा।
चैताली ने अपनी कमर की गति और तेज कर दी। वह अपनी ही कामुकता में खो गई थी। जब रवि ने तीसरी बार अपना काम पूरा किया, तो वह पसीने से तर-बतर था। उसने चैताली को बिस्तर पर धक्का दिया और अमित की ओर इशारा किया।


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)