15-08-2026, 11:45 AM
नया मोड़ —2
सामने मीरा अकेली, बेफिक्र होकर सो रही थी। चादर के नीचे से उसकी गोरी, नंगी टाँगों का कुछ हिस्सा बाहर झाँक रहा था और सफेद स्लिप में उसकी छाती की ढलान साफ झलक रही थी।
शेर (लाइट की रोशनी में मीरा के नंगे जिस्म का दीदार करते): "अबे तेरी तो... क्या माल सो रहा है बे! साली सफेद कपड़े में तो पूरी परी लग रही है! साहब निकल गया और यह रांड बेखबर होकर पड़ी है... आज तो इस अंधेरे का पूरा फायदा उठाऊँगा!"
शेर ने दबे पाँव बिस्तर के बिल्कुल पास पहुँचकर अपनी साँसें रोक लीं। उसने बहुत ही आहिस्ता से, बिना कोई आहट किए, मीरा के बदन पर से चादर को पीछे खिसकाना शुरू कर दिया।
जैसे-जैसे चादर हटती गई, मोबाइल की धुंधली रोशनी में मीरा का कामुक रूप शेर की आँखों के सामने था । शेर की आँखें फटी की फटी रह गईं, उसका गला प्यास के मारे सूखने लगा।
सामने का नज़ारा उसके लिए किसी सपने से कम नहीं था—मीरा की दोनों गोरी, चिकनी और नंगी टाँगें। उसकी सफेद स्लिप उसके हिप्स तक उठी हुई थी, और उसकी नंगी जाँघों के बीच फँसी हुई वह छोटी सी काली पैंटी साफ चमक रही थी।
ऊपर से, स्लिप का गला इतना गहरा और ढीला था कि उसके दोनों बड़े-बड़े, भरे-पूरे मम्मे आधे से ज़्यादा बाहर झलक रहे थे। नींद में डूबा उसका नूरानी, बेखबर चेहरा इस पूरे माहौल को और भी कातिलाना बना रहा था।
शेर (कामुक उन्माद में आँखें फाड़े, मन ही मन हांफते हुए बड़बड़ाया): "अबे मादरचोद... क्या कमाल की चीज़ सो रही है! कसम से, ऐसी गोरी रंगत और ऐसे सुडौल मम्मे तो किसी हीरोइन के भी नहीं होंगे! साली बेखबर सो रही है, और यहाँ मेरा लंड पैंट फाड़ने को तैयार है!"
कुछ पलों तक तो शेर बस अपनी निगाहों से मीरा के उस नंगे जिस्म को पीता रहा। फिर अचानक उसके दिमाग में ख्याल आया। वह जानता था कि ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलता और यह नज़ारा हमेशा के लिए उसके पास होना चाहिए।
शेर ने जेब से अपना मोबाइल निकाला, उसका कैमरा ऑन किया और वीडियो रिकॉर्डिंग चालू कर दी।
वह मोबाइल को मीरा के चेहरे से लेकर उसकी आधी बाहर छाती, उसकी पतली कमर, काली पैंटी और उसकी पूरी नंगी जाँघों पर धीरे-धीरे घुमाने लगा। उसने हर कोण से मीरा के उस बेखबर, आधे-नंगे जिस्म का क्लोज़-अप वीडियो बनाना शुरू कर दिया।
शेर (वीडियो बनाते हुए, मुँह में लार भरते हुए कमीनेपन से मुस्कुराया): "रिकॉर्ड कर ले शेर... रिकॉर्ड कर ले! यह माल तो ज़िन्दगी भर मुट्ठ मारने के काम आएगा! और अगर कभी यह मालकिन ज़्यादा नखरे दिखाएगी, तो यही वीडियो इसके मुँह पर मारूँगा... फिर देखना कैसे सीधी मेरी जाँघों के बीच आकर गिरेगी!"
शेर ने बड़ी होशियारी से मोबाइल को साइड टेबल पर किताबों के सहारे इस तरह टिकाकर खड़ा कर दिया कि कैमरे का पूरा फोकस बिस्तर पर सो रही मीरा और उसकी नंगी जाँघों पर रहे। रिकॉर्डिंग चालू थी।
अब बेफिक्र होकर शेर दबे पाँव बिस्तर पर चढ़ा और मीरा की फैली हुई नंगी जाँघों के पास घुटनों के बल बैठ गया। उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था—एक तरफ पकड़ाने का खौफ था, तो दूसरी तरफ इस बेखबर गोरे जिस्म को छूने का भयानक सुरूर।
उसने कांपते, हाथ को आगे बढ़ाया और डरते-डरते अपनी उंगलियाँ मीरा की नंगी जाँघ पर टिका दीं।
उंगलियों का स्पर्श होते ही शेर के पूरे वजूद में करंट दौड़ गया।
शेर (मन ही मन कामुकता में पागल होते हुए हांफने लगा): "उफ़्फ़ मादरचोद... क्या चीज़ है यह! बिल्कुल मक्खन... एकदम मखमली! हाथ तो साला ऐसे फिसल रहा है जैसे बर्फ पर कोई तेल लगा दिया हो!"
मीरा की चिकनी, गोरी त्वचा की गर्माहट और उसका रेशमीपन शेर के हाथों में उतर रहा था। शेर ने धीरे-धीरे अपनी हथेली को उसकी जाँघों पर ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर फेरना शुरू कर दिया। उसकी उंगलियाँ मीरा की काली पैंटी के किनारों को छूती हुई निकल रही थीं।
इस छुअन और नज़ारे का असर यह हुआ कि शेर की लुंगी के अंदर उसका लंड सख्त होकर अकड़ गया और कपड़े को फाड़कर बाहर आने को बेताब होने लगा।
उधर, साइड टेबल पर रखा मोबाइल इस पूरे घिनौने और कामुक दृश्य को खामोशी से अपने कैमरे में रिकॉर्ड कर रहा था—मीरा का बेखबर नूरानी चेहरा, उसकी सफेद स्लिप में से झांकते मम्मे, उसकी गोरी जाँघों पर रेंगता शेर का काला हाथ, और लुंगी में तना हुआ उसका सख्त लंड।
शेर (कैमरे की तरफ एक पल को देखकर कमीनेपन से मुस्कुराया): "रिकॉर्ड हो रहा है सब... पूरा सबूत बन रहा है मीरा रानी ! अब तो तुम चाहकर भी इस शेर के चंगुल से नहीं भाग सकती!"
जाँघों पर हाथ फेरते-फेरते शेर की हवस और बढ़ती चली गई। वह अपना मुँह नीचे ले गया और अपने होठों को मीरा की गोरी, मखमली जाँघों पर टिका दिया।
वह बहुत आहिस्ता-आहिस्ता अपनी जीभ से उसकी जाँघों की चिकनी त्वचा को चाटने और चूमने लगा। उसकी गर्म सांसें और जीभ का गीलापन मीरा के बदन को छू रहा था।
तभी अचानक नींद की आगोश में डूबी मीरा हल्की सी कुनमुनाई और उसकी टाँग में मामूली सी हलचल हुई।
शेर झटके से वहीं रुक गया। उसने अपनी साँसें थाम लीं और एकटक मीरा के चेहरे को देखने लगा। ऐसा नहीं था कि वह मीरा से डरता था, बल्कि वह जानता था कि अगर मीरा जाग गई तो शोर मचाएगी और यह मज़ा वहीं खत्म हो जाएगा।
वह तो बस यही चाहता था कि मालकिन ऐसे ही बेखबर सोती रहे और वह बिना किसी रुकावट के उसके इस कयामत जिस्म से खिलवाड़ करता रहे, और यह सारा नज़ारा मोबाइल में रिकॉर्ड होता रहे।
जब मीरा फिर से गहरी साँसें लेने लगी और शांत हो गई, तो शेर के होठों पर एक मुस्कान तैर गई।
वह रेंगते हुए और ऊपर खिसका और मीरा की दोनों जाँघों के जोड़ पर पहुँच गया, जहाँ उसकी काली पैंटी फँसी हुई थी। उसने बहुत ही सावधानी और नरमी से अपने कांपते हाथों से पैंटी को पकड़ा और उसे धीरे-धीरे नीचे की तरफ खिसकाना शुरू कर दिया।
जैसे-जैसे काली पैंटी नीचे सरकती गई, मोबाइल की धुंधली रोशनी में मीरा की बिल्कुल साफ़, चिकनी और सुंदर चूत बेपर्दा होने लगी।
शेर (उस बेदाग, साफ-सुथरी चूत को सामने देखकर आँखें फाड़े, मन ही मन हवस में बुरी तरह हांफने लगा): "उफ़्फ़ मादरचोद... क्या कमाल का नज़ारा है! साला ऐसी साफ़ और मक्खन जैसी चूत सामने हो तो कोई भी मचल जाए! आज तो इस कैमरे में ऐसी-ऐसी चीज़ रिकॉर्ड होगी कि मालकिन ज़िन्दगी भर इस शेर की उंगलियों पर नाचेगी!"
कैमरे में लाल डॉट अब भी खामोशी से झपक रहा था और शेर की नीच हरकत का एक-एक पल रिकॉर्ड हो रहा था।
शेर का मन तो बार-बार मचल रहा था कि सीधे अपनी जीभ मीरा की उस साफ़ चूत पर टिका दे, लेकिन वह जानता था कि नीचे का हिस्सा बहुत संवेदनशील होता है। ज़रा सी जीभ की छुअन से मीरा की नींद टूट सकती थी और सारा खेल बिगड़ सकता था।
इसलिए उसने पहले ऊपर के हिस्से को निशाना बनाने का फैसला किया।
वह बहुत आहिस्ता से खिसककर मीरा के चेहरे के पास बैठा। उसने अपने हाथों को आगे बढ़ाया और उसकी सफेद स्लिप को धीरे-धीरे नीचे की तरफ धकेल दिया। स्लिप के नीचे सरकते ही मीरा के दोनों भरे-पूरे, गोरे मम्मे पूरी तरह नंगे होकर बाहर आ गए।
शेर ने बहुत ही हल्के हाथों से, बिना ज़्यादा दबाव दिए, उन मम्मों को सहलाना शुरू किया। उसकी उंगलियाँ मीरा के मखमली मम्मों और कड़क होते निप्पलों पर रेंग रही थीं।
फिर उसने अपना मुँह नीचे झुकाया और मीरा के चेहरे को बड़े गौर से देखा। उसके गुलाबी, सुराहीदार होंठ... वही होंठ जहाँ मीरा ने उसको चूमने नहीं दिया था।
शेर (कमीनेपन से मुस्कुराते हुए, मन ही मन बड़बड़ाया): "बहुत नखरे दिखा रही थी उस दिन कि होंठों को मत छूना शेर... आज देख, तेरे उन्हीं होंठों का रस कैसे पीता हूँ, और तू बेखबर सोती रह जाएगी!"
शेर ने बड़ी नज़ाकत से अपने मोटे, होठों को मीरा के नाज़ुक होठों पर टिका दिया। वह बहुत हल्के-हल्के से मीरा के ऊपरी और निचले होंठ को अपने मुँह में भरकर चूसने लगा।
उसकी एक हथेली मीरा के नंगे मम्मे पर बहुत आहिस्ता से घूम रही थी, और उसके होंठ मीरा के रसीले होठों का मज़ा ले रहे थे। उधर साइड टेबल पर रखा मोबाइल इस पूरे घिनौने, कामुक और चोरी-छिपे किए जा रहे किस को खामोशी से कैमरे में कैद कर रहा था।
नींद के आगोश में सो रही मीरा के बेखबर बदन पर जब शेर की गर्म सांसें, होठों की चुंबन और मम्मों पर हाथों का रेंगना जारी रहा, तो उसका शरीर अनजाने में ही उत्तेजित होने लगा। नींद की धुंध में उसे लगा कि उसका पति उसके साथ प्यार कर रहा है।
मीरा ने नींद ही नींद में अपना मुँह हल्का सा खोला और बेहद मदहोश आवाज़ में फुसफुसाई, "सरताज... सोने दो न..."
मीरा के मुँह खोलते ही शेर को जैसे मुँह माँगी मुराद मिल गई। उसने एक पल की भी देरी किए बिना अपने मोटे होठों को मीरा के मुँह पर कसकर चिपका दिया और अपनी जीभ सीधे मीरा के मुँह के अंदर घुसा दी। वह मीरा की जीभ और मुँह के अंदरूनी हिस्से को चाटने और चूसने लगा।
नींद और जिस्मानी सुरूर के चक्रव्यूह में फँसी मीरा इसे सरताज का प्यार समझकर इस चुंबन का सकारात्मक जवाब देने लगी। उसके गले से हल्की-हल्की कामुक आहें और सिसकियाँ निकलने लगीं— "उम्मम्म्म... आह्ह्..."
वह नींद में ही शेर की जीभ का साथ देने लगी और अपनी जीभ से उसकी जीभ को लपेटने लगी।
अब शेर की जीभ पूरी तरह मीरा के मुँह के अंदर गहराई तक समा चुकी थी। दोनों की लार आपस में मिल रही थी। इस सकारात्मक प्रतिसाद से शेर का हौसला सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसने अपने हाथों का दबाव बढ़ाया और मीरा के दोनों नंगे, मम्मों को और ज़्यादा कसकर भींचना शुरू कर दिया।
मीरा अब भी नींद और गहरी उत्तेजना के भंवर में फँसी हुई थी। उसे ज़रा भी अहसास नहीं था कि जिसे वह अपना पति सरताज समझकर चुंबन दे रही है और जिसकी छुअन पर सिसकियाँ भर रही है, वह उसका नौकर शेर है—और साइड टेबल पर रखा मोबाइल इस पूरे धोखे और गहरी वासना के खेल का एक-एक पल खामोशी से रिकॉर्ड कर रहा था।
लगभग दो मिनट तक मीरा के होठों का रसीला रस पीने और उसकी जीभ को चूसने के बाद, शेर आहिस्ता से पीछे हटा। वह जानता था कि अगर ज़्यादा देर तक मुँह में जीभ घुसाई रखी, तो दम घुटने या ज़्यादा हलचल से मीरा की नींद टूट सकती थी, और वह इस सुनहरे मौके को इतनी जल्दी गँवाना नहीं चाहता था।
वह बिस्तर से नीचे उतरा और उसने बिना कोई आहट किए झटके से अपनी धोती और बाकी के सारे कपड़े उतारकर ज़मीन पर फेंक दिए। अब वह पूरी तरह नंगा हो चुका था, और उसका कड़क, तना हुआ लंड उसके बदन के आगे फन फैलाए खड़ा था।
शेर घुटनों के बल खिसकते हुए वापस बेड पर मीरा के चेहरे के पास आया। उसने अपने कड़क लंड को पकड़ा और उसकी लाल सुपारी को मीरा के गुलाबी, नंगे होठों पर धीरे-धीरे रगड़ना शुरू कर दिया।
मीरा के होठों की गर्माहट से शेर के लंड के मुहाने से चिपचिपा पानी (प्री-कम) रिसने लगा, जो सीधे मीरा के निचले और ऊपरी होठों पर गुदगुदाते हुए छपने लगा।
शेर (कामुक उन्माद में आँखें मूँदकर, मन ही मन नीचता से हँसते हुए फुसफुसाया): "ज़िंदगी भर बड़े नखरे दिखाए तूने रांड! जब भी तेरे पास आता था, तो मुँह फेर लेती थी... कहती थी कि 'होठों को मत छूना'। आज देख... तेरा यह नौकर अपना तना हुआ लंड सीधे तेरे होठों और मुँह पर घिस रहा है! और सबसे मज़े की बात तो यह है कि साइड में रखा यह कैमरा तेरी इस ज़िल्लत की एक-एक तस्वीर और वीडियो रिकॉर्ड कर रहा है!"
मीरा नींद की आगोश में अपने होठों पर उस अजीब सी गर्माहट और चिपचिपाहट को महसूस करके हल्की सी सिसकी ले रही थी, जबकि शेर अपने लंड की सुपारी को उसके पूरे चेहरे और होठों पर रगड़े जा रहा था।
शेर धीरे से उठा और घुटनों के बल खिसकते हुए वापस मीरा की जाँघों के पास आ गया।
उसने बहुत ही सावधानी और नरमी से मीरा की काली पैंटी के किनारों को पकड़ा और उसे धीरे-धीरे खींचकर उसकी टाँगों से पूरी तरह बाहर निकाल दिया। अब मीरा की साफ़ और सुडौल योनि बिल्कुल बेपर्दा होकर शेर की नज़रों के सामने थी। उस पर कामुक रस की एक हल्की सी चमकीली बूंद छलक रही थी—शायद नींद में ही शेर की छुअन और चुंबन का ही नतीजा था।
जैसे ही शेर ने अपना मुँह झुकाकर अपनी गर्म जीभ से उस नाज़ुक जगह को हल्का सा छुआ, नींद में डूबी मीरा के मुँह से एक तीखी सिसकी निकल गई— "उफ़्फ़..."
शेर तुरंत रुक गया और अपनी साँसें थाम लीं। आज उसका मकसद मीरा को जगाना बिल्कुल नहीं था।
जब मीरा फिर से गहरी साँसें लेने लगी, तो शेर ने आहिस्ता से अपने हाथों को ऊपर बढ़ाया और उसकी सफ़ेद स्लिप को धीरे-धीरे कंधों और सीने से नीचे सरकाना शुरू किया। कुछ ही पलों में उसने उस स्लिप को भी मीरा के जिस्म से अलग कर के एक तरफ फेंक दिया।
अब मीरा बिना किसी कपड़े के, पूरी तरह नंगी बिस्तर पर सो रही थी। उसके बड़े-बड़े मम्मे, पतली कमर और गोरी चिकनी चूत धुंधली रोशनी में जगमगा रहे थे। और उसके ठीक पास खड़ा था नंगा शेर—अपने सख्त और तने हुए लंड के साथ।
साइड टेबल पर रखा मोबाइल इस पूरे नज़ारे को बिना रुके रिकॉर्ड कर रहा था।
शेर (अपने कड़क लंड पर हाथ फेरते हुए, कैमरे की तरफ देखकर मुस्कान के साथ मन ही मन बड़बड़ाया): "बस... खेल खत्म! आज की रात के इस एक वीडियो के बाद यह मीरा और इसका वो पति सरताज, दोनों हमेशा-हमेशा के लिए मेरी मुट्ठी में हैं! अब यह मालकिन अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए इस शेर के इशारों पर नाचेगी!"
शेर ने बिस्तर पर पड़ी चादर उठाई और उसे अपने और मीरा के ऊपर इस तरह ढँक लिया कि दोनों के जिस्म चादर के भीतर छुप गए। चादर के नीचे छाए उस अंधियारे में अब शेर का भारी, गठीला और पूरी तरह से नंगा बदन मीरा के बेहद कोमल, गोरे और बेपर्दा जिस्म के साथ चिपका हुआ था। दोनों की नंगी त्वचा जब आपस में टकराई, तो चादर के भीतर एक अजीब सी तपन और सरगर्मी तैर गई।
शेर ने बिना कोई आवाज़ किए, अपना एक भारी हाथ मीरा के सर के नीचे से निकाला और उसकी पतली कमर पर अपनी उंगलियों की पकड़ कसते हुए उसे धीरे से खींचकर अपनी तरफ़ कर लिया। मीरा, जो अब भी गहरी नींद की आगोश में अचेत पड़ी थी, इस छुअन को पहचान न सकी। आधे-अधूरे ख्वाब और मदहोशी के आलम में उसने यही समझा कि यह उसका पति सरताज है जो रात की ख़ामोशी में उसे प्यार से अपनी बाहों में समेट रहा है।
इसी मुग़ालते में मीरा की तरफ़ से कोई विरोध नहीं हुआ; बल्कि उसने नींद में ही एक हल्की सी सिसकारी भरी और सरताज का अहसास समझकर शेर के नंगे, चौड़े सीने के और भी करीब आ गई। उसने अपना चेहरा शेर के गरम सीने में छुपा लिया और उसकी जांघों से अपना जिस्म सटा दिया।
शेर ने झुककर मीरा की नाजुक, गोरी गर्दन को सहलाते हुए धीरे-धीरे अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया। उसकी गर्दन की महक और भीगी रंगत देखकर शेर का मन हुआ कि वह उसकी त्वचा पर एक गहरा 'लव बाइट' दे दे और अपने निशान छोड़ दे, लेकिन वह नहीं चाहता था कि किसी भी तरह मीरा की नींद टूटे और यह हसीन पल हाथ से निकल जाए। इसलिए वह अपनी हवस पर काबू रखते हुए बिल्कुल नरमी से अपनी गीली जीभ उसकी गर्दन पर फेरता रहा।
उसकी चौड़ी, काली जांघ मीरा की दोनों गोरी, नंगी जांघों के बीच जमी हुई थी और वह धीरे-धीरे अपनी रंगत को मीरा की संवेदनशीलता के साथ रगड़ रहा था। इस रगड़ से उठती तपन पूरे बिस्तर में फैल रही थी। वहीं शेर का एक भारी हाथ मीरा के भरे हुए नंगे स्तन पर जमा हुआ था, जिसे वह बेहद आहिस्ता-आहिस्ता सहला रहा था, दबा रहा था।
चादर के उस तंग और गरम अँधेरे में मीरा नींद की गहरी मदहोशी में डूबती जा रही थी। जिस्म में उठती इस अनचाही मिठास और छुअन से उसके हलक से एक हल्की सी कराह निकल आई।
इस स्पर्श को महसूस करते ही मीरा बेसुध होकर बोली, "सरताज... यह क्या कर रहे हो? "
शेर ने बेहद सावधानी और नरमी से मीरा के नरम, गोरे हाथ को पकड़ा और उसे धीरे से खींचते हुए सीधे अपने अकड़े हुए भारी लिंग पर रख दिया। उसका लिंग सात इंच लंबा और सामान्य से दुगना मोटा था। अंधेरे चादर के नीचे, उसकी गहरी काली रंगत और मीरा की गोरी-चिट्टी उंगलियों का संगम एक अजीब ही दृश्य बना रहा था।
मीरा, जो गहरी नींद की मदहोशी में डूब चुकी थी, उसे अब भी यही लग रहा था कि यह उसका पति सरताज है। उसने नींद के खुमार में ही अपनी उंगलियों की पकड़ उस गरम और सख्त अंग पर कस ली और अनजाने में ही उसे सहलाना शुरू कर दिया। उसकी गोरी, सुडौल उंगलियां उस काले, भारी और नसों से भरे अंग के इर्द-गिर्द लिपटकर धीरे-धीरे ऊपर-नीचे रेंग रही थीं।
शेर ने मीरा के हाथ के ऊपर अपना भारी हाथ जमा रखा था और उसके हाथों की हरकत को दिशा देते हुए बेहद धीमी गति से हिचकोले दे रहा था। मीरा के हाथ का स्पर्श इतना कोमल और गरम था कि शेर की आँखों में एक अजीब सा वहशीपन उतर आया। उसे एक असीम, अकल्पनीय आनंद का अहसास हो रहा था। हर एक सहलाहट के साथ उसका लिंग और अधिक अकड़कर सख्त होता जा रहा था, मानो उसकी नसें फटने को तैयार हों।
शेर का सांस लेना भारी हो गया। चादर के भीतर उठती उस गरम सांस और जिस्मानी तपन के बीच, मीरा नींद में ही अपनी पतली कमर को थोड़ा सा ऐंठती हुई शेर के और करीब आ गई, जबकि उसका हाथ बिना रुके उस कठोर अंग की गर्माहट को मापता जा रहा था। शेर अब अपनी हवस के चरम पर पहुँच रहा था, और उसका पूरा जिस्म उस बेकाबू मिठास से कांपने लगा था।
वह बहुत आहिस्ता से रेंगते हुए मीरा के नंगे बदन के ऊपर आ गया। उसने अपना पूरा वजन मीरा के नाजुक शरीर पर नहीं डाला, बल्कि अपने हाथों और कोहनियों के सहारे खुद को थोड़ा ऊपर उठाए रखा। उसकी चौड़ी छाती मीरा के दोनों बड़े-बड़े, गर्म मम्मों से सटकर रगड़ खा रही थी। उसने अपना चेहरा चादर के अंधेरे में पूरी तरह छुपा रखा था ताकि अगर मीरा अचानक जाग भी जाए, तो नींद के खुमार में यही समझे कि उसका पति सरताज ही उसके ऊपर लेटा हुआ है।
शेर ने अपने कांपते हाथों से अपनी कमर को थोड़ा नीचे खिसकाया और अपने कड़क लंड की सुपारी को मीरा की भीगी हुई, रसीली योनि के मुहाने पर टिकाकर धीरे-धीरे रगड़ना शुरू कर दिया।
फिर, एक गहरी सांस लेते हुए, उसने अपनी कमर का हल्का सा दबाव बनाया और लंड को आहिस्ता-आहिस्ता मीरा की टाइट चूत के अंदर उतारना शुरू किया।
मीरा की बेहद टाइट और मखमली चूत शेर के मोटे लंड को धीरे-धीरे अपने भीतर निगलने लगी। उस तंग और गर्म गहराई का अहसास होते ही शेर के रोएँ खड़े हो गए।
इस स्पर्श को महसूस करते ही मीरा बेसुध होकर बोली, "सरताज... यह क्या कर रहे हो? अभी थोड़ी देर पहले ही तो किया था ना... प्लीज, अब मेरा मूड नहीं है।"
शेर ने मीरा की बात सुनकर मन ही मन भारी गाली दी—"साली! सरताज को दे सकती है, बस मेरे को ही देने में इसको आफ़त आती है... 'मूड नहीं है'! साली नखरे ज़्यादा करती है।"
उसने मीरा की फरियाद पर ज़रा भी ध्यान नहीं दिया ।
यह वही लम्हा था जिसके सपने वह सालों से देख रहा था—!
शेर (कामुक सुरूर में आँखें मूँदकर, चादर के अंदर मन ही मन हांफते हुए बड़बड़ाया): "उफ़्फ़ मादरचोद... क्या गर्मी है! क्या कसाव है इस चूत में! आज सालों की हसरत पूरी हो गई... मालकिन आज तेरी यह अकड़ हमेशा के लिए मिट गई!"
धीमे-धीमे, बिना कोई झटका दिए, शेर अपनी कमर को ढकेलता गया और उसका पूरा का पूरा सख्त लंड मीरा की योनि की गहराइयों में समा गया।
नींद की आगोश में डूबी मीरा ने अपने निचले हिस्से में उस भारी खिंचाव और फैलाव को महसूस करके एक लंबी, कामुक सिसकी भरी— "उफ़्फ़... सरताज... श्श्श्..."
उधर साइड टेबल पर रखा मोबाइल चादर के बाहर से हिलती हुई आकृतियों और सिसकियों की आवाज़ों को खामोशी से रिकॉर्ड किए जा रहा था, जबकि चादर के अंदर शेर अपनी ज़िंदगी का सबसे बड़ा घिनौना सपना पूरा कर रहा था।
चादर के अंदर शेर का उत्साह अपने चरम पर था। जैसे ही उसने पहला ज़ोरदार झटका मारने के लिए अपने लंड को थोड़ा बाहर खींचा ताकि पूरी ताकत से वापस अंदर धकेल सके, उसकी किस्मत ने उसका साथ छोड़ दिया।
सालों की दबा कर रखी गई हवस, मीरा के नंगे जिस्म का नज़ारा और उसकी टाइट चूत की गर्माहट का पहला स्पर्श ही शेर के लिए बर्दाश्त से बाहर साबित हुआ। अभी वह ढोंग पूरा कर भी नहीं पाया था कि उसके तने हुए लंड में एक तेज़ झनझनाहट उठी और वह बेकाबू होकर तड़पने लगा।
बिना अंदर गए ही, उसका वीर्य फव्वारे की तरह छूटकर मीरा की नंगी चूत के बाहरी हिस्से और जाँघों पर बिखर गया।
शेर (कामुक बौखलाहट और खौफ में घबराकर मन ही मन चीखा): "अबे शिट... शिट! अबे रुक जा मादरचोद! अभी नहीं... थोड़ा सब्र कर भोसड़ी के!"
लेकिन सब बेकार साबित हुआ। कुछ ही सेकंडों में उसका कड़क लंड पूरी तरह ढीला पड़कर किसी मरे हुए केंचुए की तरह लटक गया।
नींद के खुमार में डूबी मीरा को कुछ भी खास अहसास नहीं हुआ; वह वैसे ही बेखबर सोती रही।
शेर अपनी इस शर्मनाक परफॉर्मेंस पर बुरी तरह खीझ उठा। उसे खुद पर इतनी ग्लानि और गुस्सा आ रहा था जिसकी कोई सीमा नहीं थी। उसकी हालत किसी नौसिखिया टीनेजर से भी बदतर साबित हुई थी जो पहली बार में ही ढेर हो जाता है।
शेर (घोर निराशा और गुस्से में खुद को मन ही मन गालियाँ देते हुए): "अबे चूतिया है क्या बे तू शेर?! साला भड़वा... इतनी मेहनत करके यहाँ तक पहुँचा, सब कुछ सेट था, और तूने दो सेकंड में ही पूरा खेल गुड़-गोबर कर दिया! थू है तेरी इस मर्दानगी पर!"
उसने भारी निराशा के साथ खुद को मीरा के ऊपर से उठाया। नीचे गिरी अपनी धोती उठाई और मीरा की चूत और जाँघों पर बिखरे अपने वीर्य को बहुत संभालकर पोंछा, ताकि सुबह कोई सबूत न छूटे।
फिर उसने डरते-डरते और खुद को कोसते हुए, आहिस्ता-आहिस्ता मीरा को वापस वही काली पैंटी पहनाई और उसकी सफेद स्लिप को खींचकर उसके नंगे मम्मों को ढक दिया। उसने चादर को भी ठीक वैसे ही मीरा के बदन पर उड़ा दिया जैसा कि उसने पहले देखा था।
वह माहौल को बिल्कुल वैसा ही छोड़ देना चाहता था जैसा उसके आने से पहले था, ताकि मीरा को ज़रा सा भी शक न हो।
उसने साइड टेबल से अपना मोबाइल उठाया, रिकॉर्डिंग बंद की और पसीने से तर-बतर होकर दबे पाँव कमरे से बाहर निकल गया। उसकी बरसों पुरानी हसरत हाथ आते-आते भी अधूरी रह गई थी—सब कुछ होने के बाद भी वह खाली हाथ लौट आया था।
Deepak Kapoor
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