14-08-2026, 07:55 PM
रुही अभी भी कमरे में थोड़ी उत्तेजना और इंतज़ार में बैठी थी। रामू जी का कोई मैसेज नहीं आया था। दिल नहीं लग रहा था, इसलिए वह किचन की तरफ चल दी। सोचा सोनिया से बात कर ले।
किचन का दरवाज़ा आधा खुला था।
रुही जैसे ही अंदर का नज़ारा देखी, उसके पैर जड़ हो गए।
सोनिया गैस पर खड़ी खाना बना रही थी—एक हाथ में चम्मच, दूसरे हाथ से मसाला डाल रही थी। और उसके ठीक पीछे… जामिल। घर का नौकर। सिर्फ सफेद बनियान और नीली लुंगी पहने। उसकी दोनों मज़बूत बाँहें सोनिया की कमर में उलझी हुई थीं। वह सोनिया को पीछे से कसकर जकड़े हुए था और उसकी गर्दन पर, गाल पर गहरे चुम्बन ले रहा था। सोनिया की आँखें आधी बंद थीं, गर्दन टेढ़ी किए हुए मज़े ले रही थी।
रुही का मुँह खुला का खुला रह गया। “सो… सोनिया?”
सोनिया की आँखें खुलीं। उसने पीछे मुड़कर देखा, लेकिन जामिल ने उसे छोड़ा नहीं। बल्कि और कस लिया।
सोनिया हल्के से मुस्कुराई, बिल्कुल शर्मिंदा हुए बिना। “आ गई तू? आ जा अंदर। दरवाज़ा बंद कर दे।”
रुही ने हैरानी से दरवाज़ा बंद किया, लेकिन नज़रें अभी भी दोनों पर जमी हुई थीं। “तू… ये… जामिल?”
जामिल ने सोनिया की कमर से हाथ हटाए बिना रुही की तरफ देखा। उसकी आँखों में एक शरारती मुस्कान थी। गहरे रंग की, मज़बूत बॉडी, दाढ़ी हल्की सी। वह बोला, “नमस्ते भाभी। आज रात तो रामू भैया की मौज है। इतनी तैयार-तैयार करके बैठी हो।”
रुही के गाल तुरंत लाल हो गए। उसने नज़रें झुका लीं। “मैं… मैं बस…”
सोनिया हँसी। जामिल के हाथ अब उसकी छाती की तरफ बढ़ने लगे थे, बनियान के अंदर। सोनिया ने उसकी हथेली को दबाया लेकिन हटाया नहीं। “रुही, तू इतनी हैरान क्यों हो रही है? जामिल मेरे घर का है… और कभी-कभी मेरा भी।” उसने पीछे मुड़कर जामिल के होठों पर एक हल्का चुम्बन ले लिया। “जब पति-बेटा गाँव जाते हैं, तो जामिल ही तो है जो मेरी सेवा करता है।”
जामिल ने सोनिया की गर्दन में मुँह दबाते हुए गुनगुनाया, “सेवा नहीं मैडम… मालिकी। आज रात आप भी रामू भैया की तरह मौज करोगी, और हम भी।”
रुही की साँसें तेज़ चलने लगीं। वह दीवार के सहारे खड़ी हो गई। शर्म से उसका पूरा चेहरा जल रहा था, लेकिन आँखें हट नहीं पा रही थीं। जामिल अब सोनिया की साड़ी का पल्लू हटा रहा था। सोनिया गैस बंद करके पूरी तरह उसकी बाँहों में झुक गई।
“देख रुही,” सोनिया ने आँखें बंद किए हुए कहा, “तू सोचती थी कि सिर्फ तू ही रामू के नीचे दबती है? मैं भी कभी-कभी… इसी तरह दबती हूँ। जामिल थोड़ा rough है। लेकिन मज़ा आता है।”
जामिल ने सोनिया को घुमाया और सीधे उसके होठों पर हमला बोल दिया। गहरा, गीला चुम्बन। सोनिया की कमर उसके लुंगी से सट गई। रुही ने साफ देखा कि लुंगी के अंदर जामिल का लंड तन चुका था और सोनिया की जाँघ से रगड़ खा रहा था।
रुही ने शर्माते हुए कहा, “सोनिया… मैं… मैं कमरे में चली जाऊँ?”
“नहीं।” सोनिया ने चुम्बन तोड़ा और साँस लेते हुए बोली, “खड़ी रह। देख। आज रात तू भी तो वही करने वाली है। शर्म क्यों करती है? जामिल, बता इससे… रामू भैया कैसे होंगे आज रात।”
जामिल ने रुही की तरफ देखते हुए सोनिया की कमर पकड़ी और धीरे से उसकी साड़ी ऊपर की। “रामू भैया तो मज़े उड़ाएँगे भाभी। आप इतनी चिकनी-चिकनी, खुशबूदार बनकर आई हो… वो तो पूरी रात चोदते रहेंगे। और आप… आप बस ‘हाँ रामू जी’ करती रहेंगी। जैसे मैडम अभी ‘हाँ जामिल’ कर रही हैं।”
सोनिया हल्की सी कराह के साथ हँसी। “चुप कर।” फिर रुही की तरफ देखकर बोली, “सच कहूँ? मुझे अच्छा लग रहा है कि तू देख रही है। थोड़ी शर्म तू भी महसूस कर… जैसी मैं कभी-कभी करती हूँ।”
जामिल अब सोनिया के स्तनों को बनियान के ऊपर से मसल रहा था। सोनिया की साँसें तेज़ हो गई थीं। वह रुही से बात करते हुए भी जामिल के स्पर्श में डूबी हुई थी।
“रुही,” सोनिया ने आधी आँखें खोलकर कहा, “जा, थोड़ी देर और तैयार हो ले। रामू आने वाला होगा। और हाँ… अगर रात को आवाज़ें आएँ तो घबराना मत। जामिल थोड़ा जोर से ही करता है।”
रुही की हालत खराब थी। शर्म, उत्तेजना और एक अजीब सी घबराहट सब एक साथ। उसने बस सिर हिलाया और जल्दी से किचन से बाहर निकल गई। पीछे जामिल की भारी आवाज़ और सोनिया की हल्की कराह सुनते हुए।
कमरे में आकर उसने दरवाज़ा बंद किया। पीठ दरवाज़े से सटाई और आँखें बंद कर लीं। दिल जोर-जोर से धधक रहा था।
सोनिया भी… जामिल के साथ…
और मैं… अभी रामू जी के आने का इंतज़ार कर रही हूँ।
शर्म से उसका पूरा शरीर गर्म हो रहा था। लेकिन अंदर ही अंदर एक और भावना भी थी—उत्तेजना। उसने अपनी काली नाइटी के अंदर हाथ डाला और महसूस किया कि वह कितनी गीली हो चुकी है।
अब इंतज़ार और भी लंबा लगने लगा था।
किचन का दरवाज़ा आधा खुला था।
रुही जैसे ही अंदर का नज़ारा देखी, उसके पैर जड़ हो गए।
सोनिया गैस पर खड़ी खाना बना रही थी—एक हाथ में चम्मच, दूसरे हाथ से मसाला डाल रही थी। और उसके ठीक पीछे… जामिल। घर का नौकर। सिर्फ सफेद बनियान और नीली लुंगी पहने। उसकी दोनों मज़बूत बाँहें सोनिया की कमर में उलझी हुई थीं। वह सोनिया को पीछे से कसकर जकड़े हुए था और उसकी गर्दन पर, गाल पर गहरे चुम्बन ले रहा था। सोनिया की आँखें आधी बंद थीं, गर्दन टेढ़ी किए हुए मज़े ले रही थी।
रुही का मुँह खुला का खुला रह गया। “सो… सोनिया?”
सोनिया की आँखें खुलीं। उसने पीछे मुड़कर देखा, लेकिन जामिल ने उसे छोड़ा नहीं। बल्कि और कस लिया।
सोनिया हल्के से मुस्कुराई, बिल्कुल शर्मिंदा हुए बिना। “आ गई तू? आ जा अंदर। दरवाज़ा बंद कर दे।”
रुही ने हैरानी से दरवाज़ा बंद किया, लेकिन नज़रें अभी भी दोनों पर जमी हुई थीं। “तू… ये… जामिल?”
जामिल ने सोनिया की कमर से हाथ हटाए बिना रुही की तरफ देखा। उसकी आँखों में एक शरारती मुस्कान थी। गहरे रंग की, मज़बूत बॉडी, दाढ़ी हल्की सी। वह बोला, “नमस्ते भाभी। आज रात तो रामू भैया की मौज है। इतनी तैयार-तैयार करके बैठी हो।”
रुही के गाल तुरंत लाल हो गए। उसने नज़रें झुका लीं। “मैं… मैं बस…”
सोनिया हँसी। जामिल के हाथ अब उसकी छाती की तरफ बढ़ने लगे थे, बनियान के अंदर। सोनिया ने उसकी हथेली को दबाया लेकिन हटाया नहीं। “रुही, तू इतनी हैरान क्यों हो रही है? जामिल मेरे घर का है… और कभी-कभी मेरा भी।” उसने पीछे मुड़कर जामिल के होठों पर एक हल्का चुम्बन ले लिया। “जब पति-बेटा गाँव जाते हैं, तो जामिल ही तो है जो मेरी सेवा करता है।”
जामिल ने सोनिया की गर्दन में मुँह दबाते हुए गुनगुनाया, “सेवा नहीं मैडम… मालिकी। आज रात आप भी रामू भैया की तरह मौज करोगी, और हम भी।”
रुही की साँसें तेज़ चलने लगीं। वह दीवार के सहारे खड़ी हो गई। शर्म से उसका पूरा चेहरा जल रहा था, लेकिन आँखें हट नहीं पा रही थीं। जामिल अब सोनिया की साड़ी का पल्लू हटा रहा था। सोनिया गैस बंद करके पूरी तरह उसकी बाँहों में झुक गई।
“देख रुही,” सोनिया ने आँखें बंद किए हुए कहा, “तू सोचती थी कि सिर्फ तू ही रामू के नीचे दबती है? मैं भी कभी-कभी… इसी तरह दबती हूँ। जामिल थोड़ा rough है। लेकिन मज़ा आता है।”
जामिल ने सोनिया को घुमाया और सीधे उसके होठों पर हमला बोल दिया। गहरा, गीला चुम्बन। सोनिया की कमर उसके लुंगी से सट गई। रुही ने साफ देखा कि लुंगी के अंदर जामिल का लंड तन चुका था और सोनिया की जाँघ से रगड़ खा रहा था।
रुही ने शर्माते हुए कहा, “सोनिया… मैं… मैं कमरे में चली जाऊँ?”
“नहीं।” सोनिया ने चुम्बन तोड़ा और साँस लेते हुए बोली, “खड़ी रह। देख। आज रात तू भी तो वही करने वाली है। शर्म क्यों करती है? जामिल, बता इससे… रामू भैया कैसे होंगे आज रात।”
जामिल ने रुही की तरफ देखते हुए सोनिया की कमर पकड़ी और धीरे से उसकी साड़ी ऊपर की। “रामू भैया तो मज़े उड़ाएँगे भाभी। आप इतनी चिकनी-चिकनी, खुशबूदार बनकर आई हो… वो तो पूरी रात चोदते रहेंगे। और आप… आप बस ‘हाँ रामू जी’ करती रहेंगी। जैसे मैडम अभी ‘हाँ जामिल’ कर रही हैं।”
सोनिया हल्की सी कराह के साथ हँसी। “चुप कर।” फिर रुही की तरफ देखकर बोली, “सच कहूँ? मुझे अच्छा लग रहा है कि तू देख रही है। थोड़ी शर्म तू भी महसूस कर… जैसी मैं कभी-कभी करती हूँ।”
जामिल अब सोनिया के स्तनों को बनियान के ऊपर से मसल रहा था। सोनिया की साँसें तेज़ हो गई थीं। वह रुही से बात करते हुए भी जामिल के स्पर्श में डूबी हुई थी।
“रुही,” सोनिया ने आधी आँखें खोलकर कहा, “जा, थोड़ी देर और तैयार हो ले। रामू आने वाला होगा। और हाँ… अगर रात को आवाज़ें आएँ तो घबराना मत। जामिल थोड़ा जोर से ही करता है।”
रुही की हालत खराब थी। शर्म, उत्तेजना और एक अजीब सी घबराहट सब एक साथ। उसने बस सिर हिलाया और जल्दी से किचन से बाहर निकल गई। पीछे जामिल की भारी आवाज़ और सोनिया की हल्की कराह सुनते हुए।
कमरे में आकर उसने दरवाज़ा बंद किया। पीठ दरवाज़े से सटाई और आँखें बंद कर लीं। दिल जोर-जोर से धधक रहा था।
सोनिया भी… जामिल के साथ…
और मैं… अभी रामू जी के आने का इंतज़ार कर रही हूँ।
शर्म से उसका पूरा शरीर गर्म हो रहा था। लेकिन अंदर ही अंदर एक और भावना भी थी—उत्तेजना। उसने अपनी काली नाइटी के अंदर हाथ डाला और महसूस किया कि वह कितनी गीली हो चुकी है।
अब इंतज़ार और भी लंबा लगने लगा था।


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