14-08-2026, 07:46 PM
शुक्रवार की सुबह सनी फ्लाइट पकड़ चुका था। घर खाली था। रुही ऑफिस गई, लेकिन उसका मन पूरे दिन सिर्फ शाम पर अटका रहा।
शाम ठीक पाँच बजे सोनिया ने उसका हाथ पकड़ा।
“चल, अब देर मत कर।”
दोनों सीधे सोनिया के घर पहुँचीं। बड़ा सा, साफ-सुथरा फ्लैट। सोनिया ने दरवाज़ा बंद करते हुए कहा, “पूरा घर तेरे और तेरे रामू का है आज से। बेडरूम वो वाला ले ले… अटैच्ड बाथroom के साथ।”
रुही का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उसने नोड किया और अंदर चली गई।
पहले उसने बाथरूम का दरवाज़ा बंद किया। गर्म पानी खोला। फिर अपने कपड़े एक-एक करके उतारे। आईने के सामने खड़ी होकर उसने अपने नंगे शरीर को देखा—गोरा, गुलाबी, थोड़ा उत्तेजना से सजा हुआ।
उसने पहले अपने अंडरआर्म्स को अच्छी तरह से वॉश किया, फिर वैक्स स्ट्रिप लगाई। दर्द हुआ, लेकिन उसने सह लिया। फिर अपनी बाहों, पैरों और सबसे sensually… अपनी चूत के आसपास के बालों को साफ किया। स्किन मुलायम और चिकनी हो गई। उसने अपने हाथ से महसूस किया और शर्माते हुए मुस्कुराने लगी।
रामू जी को आज सब चिकना मिले…
फिर उसने बॉडी लोशन लगाया—हल्का फूलों वाली खुशबू वाला। गर्दन से लेकर जाँघों तक, स्तनों के नीचे, कमर के गड्ढे तक। हर जगह। निपल्स को उंगलियों से छूते हुए उसके शरीर में सिहरन दौड़ गई।
बालों को खोला, धोया, फिर छोड़ दिया। लंबे, गीले, काले बाल पीठ पर बिखर गए। हल्का मेकअप किया—आँखों में पतली सी लाइन, होंठों पर हल्का गुलाबी टिंट, गालों पर हल्की सी लाली जो उत्तेजना से खुद ही आ रही थी।
कपड़े बदले। एक पतली सी काली सैटिन नाइटी पहनी, जिसके नीचे सिर्फ एक छोटी सी काली लेस की पैंटी थी। नाइटी इतनी हल्की थी कि स्तनों की आकृति साफ दिख रही थी। गले में छोटा सा पेंडेंट, कानों में हल्के झुमके।
जब वह कमरे से बाहर निकली तो सोनिया लिविंग रूम में खड़ी थी। सोनिया की निगाहें रुही पर पड़ीं और उसकी आँखें चमक उठीं।
“अरे बाप रे…” सोनिया ने धीरे से सीटी बजाई। “देख तो किसने तैयार होकर आई है।”
रुही शर्माते हुए मुस्कुराने लगी। आँखें झुका लीं। “ज्यादा हो गया क्या?”
सोनिया पास आई। रुही को ऊपर से नीचे तक घूरा। “ज्यादा? तू तो पूरी ‘रामू की बुलबुल’ बनकर खड़ी है। इतनी चिकनी, इतनी सुगंधित, इतनी… तैयार। बेचारी बुलबुल, आज रात तेरा मालिक तुझे कितना चिरेगा पता है?”
रुही के गाल तुरंत लाल हो गए। उसने दोनों हाथों से अपना चेहरा ढक लिया। “सोनिया… चुप कर यार… बहुत शर्म आ रही है।”
सोनिया हँस पड़ी। “शर्म? अभी तो रामू आया भी नहीं। जब वो तुझे इस नाइटी में देखेगा न… तो पहले नाइटी फाड़ेगा, फिर तुझे।” उसने रुही की ठुड्डी हल्के से उठाई। “बोल, बुलबुल… तू तैयार है ना अपने मालिक के लिए?”
रुही की आवाज़ बहुत धीमी हो गई। आँखें अभी भी झुकी थीं। “हाँ… तैयार हूँ। बहुत…”
सोनिया ने उसके कंधे पर हाथ रखा। “अच्छी लग रही है तू। सच में। जैसे कोई दुल्हन अपने असली पति के पास जा रही हो। जा, थोड़ा पानी पी ले। रामू को मैसेज कर दे कि पहुँच सकता है।”
रुही कमरे में वापस गई। दरवाज़ा बंद करके आईने के सामने खड़ी हो गई। नाइटी में अपना शरीर देखती रही। हाथ से अपने चिकने अंडरआर्म्स और जाँघों को छूते हुए उसके मन में सिर्फ एक ही बात आ रही थी—
आज रात… मैं पूरी तरह उनकी हूँ।
कोई जल्दी नहीं। कोई भागना नहीं।
सिर्फ रामू जी… और मेरी समर्पण।
उसने फोन उठाया। हाथ काँप रहे थे। मैसेज टाइप किया:
“रामू जी… मैं तैयार हूँ। सोनिया के घर आ जाइए।”
भेजने के बाद वह बिस्तर के किनारे बैठ गई। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। शर्म, उत्तेजना और एक गहरी कामुक खुशी सब एक साथ उसके अंदर उमड़ रहे थे।
अब बस इंतज़ार था अपने मर्द का।
शाम ठीक पाँच बजे सोनिया ने उसका हाथ पकड़ा।
“चल, अब देर मत कर।”
दोनों सीधे सोनिया के घर पहुँचीं। बड़ा सा, साफ-सुथरा फ्लैट। सोनिया ने दरवाज़ा बंद करते हुए कहा, “पूरा घर तेरे और तेरे रामू का है आज से। बेडरूम वो वाला ले ले… अटैच्ड बाथroom के साथ।”
रुही का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उसने नोड किया और अंदर चली गई।
पहले उसने बाथरूम का दरवाज़ा बंद किया। गर्म पानी खोला। फिर अपने कपड़े एक-एक करके उतारे। आईने के सामने खड़ी होकर उसने अपने नंगे शरीर को देखा—गोरा, गुलाबी, थोड़ा उत्तेजना से सजा हुआ।
उसने पहले अपने अंडरआर्म्स को अच्छी तरह से वॉश किया, फिर वैक्स स्ट्रिप लगाई। दर्द हुआ, लेकिन उसने सह लिया। फिर अपनी बाहों, पैरों और सबसे sensually… अपनी चूत के आसपास के बालों को साफ किया। स्किन मुलायम और चिकनी हो गई। उसने अपने हाथ से महसूस किया और शर्माते हुए मुस्कुराने लगी।
रामू जी को आज सब चिकना मिले…
फिर उसने बॉडी लोशन लगाया—हल्का फूलों वाली खुशबू वाला। गर्दन से लेकर जाँघों तक, स्तनों के नीचे, कमर के गड्ढे तक। हर जगह। निपल्स को उंगलियों से छूते हुए उसके शरीर में सिहरन दौड़ गई।
बालों को खोला, धोया, फिर छोड़ दिया। लंबे, गीले, काले बाल पीठ पर बिखर गए। हल्का मेकअप किया—आँखों में पतली सी लाइन, होंठों पर हल्का गुलाबी टिंट, गालों पर हल्की सी लाली जो उत्तेजना से खुद ही आ रही थी।
कपड़े बदले। एक पतली सी काली सैटिन नाइटी पहनी, जिसके नीचे सिर्फ एक छोटी सी काली लेस की पैंटी थी। नाइटी इतनी हल्की थी कि स्तनों की आकृति साफ दिख रही थी। गले में छोटा सा पेंडेंट, कानों में हल्के झुमके।
जब वह कमरे से बाहर निकली तो सोनिया लिविंग रूम में खड़ी थी। सोनिया की निगाहें रुही पर पड़ीं और उसकी आँखें चमक उठीं।
“अरे बाप रे…” सोनिया ने धीरे से सीटी बजाई। “देख तो किसने तैयार होकर आई है।”
रुही शर्माते हुए मुस्कुराने लगी। आँखें झुका लीं। “ज्यादा हो गया क्या?”
सोनिया पास आई। रुही को ऊपर से नीचे तक घूरा। “ज्यादा? तू तो पूरी ‘रामू की बुलबुल’ बनकर खड़ी है। इतनी चिकनी, इतनी सुगंधित, इतनी… तैयार। बेचारी बुलबुल, आज रात तेरा मालिक तुझे कितना चिरेगा पता है?”
रुही के गाल तुरंत लाल हो गए। उसने दोनों हाथों से अपना चेहरा ढक लिया। “सोनिया… चुप कर यार… बहुत शर्म आ रही है।”
सोनिया हँस पड़ी। “शर्म? अभी तो रामू आया भी नहीं। जब वो तुझे इस नाइटी में देखेगा न… तो पहले नाइटी फाड़ेगा, फिर तुझे।” उसने रुही की ठुड्डी हल्के से उठाई। “बोल, बुलबुल… तू तैयार है ना अपने मालिक के लिए?”
रुही की आवाज़ बहुत धीमी हो गई। आँखें अभी भी झुकी थीं। “हाँ… तैयार हूँ। बहुत…”
सोनिया ने उसके कंधे पर हाथ रखा। “अच्छी लग रही है तू। सच में। जैसे कोई दुल्हन अपने असली पति के पास जा रही हो। जा, थोड़ा पानी पी ले। रामू को मैसेज कर दे कि पहुँच सकता है।”
रुही कमरे में वापस गई। दरवाज़ा बंद करके आईने के सामने खड़ी हो गई। नाइटी में अपना शरीर देखती रही। हाथ से अपने चिकने अंडरआर्म्स और जाँघों को छूते हुए उसके मन में सिर्फ एक ही बात आ रही थी—
आज रात… मैं पूरी तरह उनकी हूँ।
कोई जल्दी नहीं। कोई भागना नहीं।
सिर्फ रामू जी… और मेरी समर्पण।
उसने फोन उठाया। हाथ काँप रहे थे। मैसेज टाइप किया:
“रामू जी… मैं तैयार हूँ। सोनिया के घर आ जाइए।”
भेजने के बाद वह बिस्तर के किनारे बैठ गई। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। शर्म, उत्तेजना और एक गहरी कामुक खुशी सब एक साथ उसके अंदर उमड़ रहे थे।
अब बस इंतज़ार था अपने मर्द का।


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)