14-08-2026, 07:38 PM
अगले दिन ऑफिस में लंच ब्रेक के समय सोनिया ने रुही को एक तरफ खींच लिया। दोनों स्टाफ रूम के पीछे वाली बालकनी में खड़ी थीं।
सोनिया ने धीरे से पूछा, “अब बोल… वो दो दिन वाला प्लान फाइनल हुआ?”
रुही के गाल हल्के गुलाबी हो गए। उसने आँखें झुकाते हुए कहा, “हाँ… रामू जी मान गए। शुक्रवार शाम से रविवार रात तक… उनके कमरे में रहूँगी।”
सोनिया की आँखें बड़ी हो गईं, फिर अचानक उसने रुही का हाथ पकड़ लिया। “रुकी। मेरे घर क्यों नहीं आ जाते तुम दोनों?”
रुही हैरान रह गई। “तेरे घर?”
“हाँ।” सोनिया ने आवाज़ और धीमी कर ली। “मेरा पति और बेटा इस शुक्रवार को गाँव जा रहे हैं। शादी में। वो रविवार रात तक ही लौटेंगे। घर पूरा खाली रहेगा। बड़ा सा बेडरूम, एसी, गरम पानी, साफ चादरें… रामू के उस छोटे गंदे कमरे से कहीं बेहतर। और… तू वहाँ और आज़ाद महसूस करेगी।”
रुही थोड़ी सकपका गई। “लेकिन सनी को क्या बोलूँगी? वो पूछेगा न कि कहाँ जा रही हूँ।”
सोनिया मुस्कुराई। “सरल है। बोल देना कि मैं अकेली हूँ घर में, और हम दोनों गर्ल्स नाइट मनाने जा रहे हैं। मूवी, पॉपकॉर्न, बातें… वैसा ही। सनी कभी शक नहीं करेगा। वो तो खुद बिज़नेस ट्रिप पर जा रहा है।”
रुही कुछ पल चुप रही। फिर धीरे से बोली, “तू… ठीक से सोच ले सोनिया। अगर किसी को पता चल गया तो…”
“किसी को पता नहीं चलेगा।” सोनिया ने उसका हाथ दबाया। “मैं चाहती हूँ तू आराम से अपनी वो दो रातें बिताए। और सच कहूँ तो… मुझे भी अच्छा लगेगा कि तुम दोनों मेरे घर में हो। कम से कम तू सुरक्षित रहेगी।”
रुही की आँखें भर आईं। उसने सोनिया को हल्के से गले लगा लिया। “शुक्रिया… सच में।”
शाम को घर पहुँचकर रुही ने सनी के पास जाकर बात की। सनी सोफे पर टीवी देख रहा था।
“सनी…” रुही ने धीरे से शुरुआत की, “एक बात कहनी थी।”
“हम्म बोल।”
“सोनिया का पति और बेटा शुक्रवार को गाँव जा रहे हैं। वो अकेली रह जाएगी। उसने कहा है कि मैं उसके साथ रह लूँ… गर्ल्स नाइट। शुक्रवार शाम से रविवार तक। तू भी बाहर जा रहा है न, तो मैं सोच रही थी…”
सनी ने रिमोट रखा और उसकी तरफ देखा। “दो रात?”
“हाँ। वो बोर हो जाएगी अकेली। और… हमें भी काफी दिनों से बातें करने का मौका नहीं मिला।”
सनी थोड़ी देर सोचा, फिर कंधे उचकाए। “ठीक है। तू चली जा। मैं तो वैसे भी शनिवार सुबह की फ्लाइट से जा रहा हूँ। घर पर अकेली रहने से अच्छा है सोनिया के पास रह। बस फोन पकड़ के रखना।”
रुही के चेहरे पर हल्की मुस्कान तैर गई, लेकिन उसने इसे छुपाने की कोशिश की। “धन्यवाद। मैं सामान रख लेती हूँ।”
सनी वापस टीवी की तरफ मुड़ गया। उसे रत्ती भर अंदाज़ा नहीं था कि उसकी बीवी असल में किन दो रातों की तैयारी कर रही है।
रात का समय था।
सनी सो चुका था। कमरे में अंधेरा था। रुही बिस्तर पर करवट लेकर लेटी थी, आँखें खुली हुईं। छत की तरफ घूरते हुए उसके मन में सिर्फ एक ही बात घूम रही थी—
दो रात।
रामू जी के नीचे।
उसके शरीर में एक धीमी, गहरी सनसनाहट दौड़ रही थी। उसने आँखें बंद कर लीं और खुद को उनके कमरे में, बल्कि अब सोनिया के बड़े बिस्तर पर कल्पना करने लगी।
रामू जी… आपके बड़े हाथ मेरी कमर पकड़ेंगे। आपकी दाढ़ी मेरे स्तनों पर रगड़ेगी। आपका मोटा, भारी लंड… दो रात तक मेरी चूत का मालिक बनेगा।
उसकी साँसें तेज़ हो गईं। जाँघें अपने-आप भींच गईं।
मैं पूरी तरह समर्पित रहूँगी। जैसे आप कहेंगे, वैसे ही लेटूँगी। कुत्ते की तरह, गोद में, ऊपर बैठकर… जो भी आप चाहेंगे। मैं आपसे कुछ नहीं पूछूँगी। बस लूँगी। जितना देंगे, उतना।
रुही ने धीरे से अपना हाथ अपने पेट पर फेरते हुए सोचा—
आपकी मर्दानगी… वो वाली जो सनी में कभी नहीं थी। वो वाली जो मुझे कमजोर और सुरक्षित दोनों बना देती है। आपके सामने मैं सिर्फ औरत बन जाती हूँ। सोचने-समझने वाली रुही सिंह खत्म हो जाती है। सिर्फ रुही कामत बचती है… जो आपके लंड की प्यासी रहती है।
उसकी निपल्स तन गई थीं। शरीर गर्म हो रहा था।
दो रात मैं आपकी बाँहों में सोऊँगी। सुबह आपकी छाती पर सिर रखकर उठूँगी। आप मुझे नहलाएँगे, या मैं आपको। आप जब चाहेंगे चोदेंगे… और मैं हर बार “हाँ रामू जी” कहूँगी। क्योंकि मैं आपकी हूँ। पूरी तरह।
रुही ने तकिया कसकर पकड़ लिया। आँखों में हल्की सी मुस्कान थी, और मन में एक गहरी, कामुक शांति।
अब बस कुछ दिन बाकी थे।
फिर वो दो रातें शुरू होने वाली थीं…
जहाँ वो पूरी तरह रामू जी की मर्दानगी के नीचे दबकर, अपनी समर्पण की भूख बुझाएगी।
सोनिया ने धीरे से पूछा, “अब बोल… वो दो दिन वाला प्लान फाइनल हुआ?”
रुही के गाल हल्के गुलाबी हो गए। उसने आँखें झुकाते हुए कहा, “हाँ… रामू जी मान गए। शुक्रवार शाम से रविवार रात तक… उनके कमरे में रहूँगी।”
सोनिया की आँखें बड़ी हो गईं, फिर अचानक उसने रुही का हाथ पकड़ लिया। “रुकी। मेरे घर क्यों नहीं आ जाते तुम दोनों?”
रुही हैरान रह गई। “तेरे घर?”
“हाँ।” सोनिया ने आवाज़ और धीमी कर ली। “मेरा पति और बेटा इस शुक्रवार को गाँव जा रहे हैं। शादी में। वो रविवार रात तक ही लौटेंगे। घर पूरा खाली रहेगा। बड़ा सा बेडरूम, एसी, गरम पानी, साफ चादरें… रामू के उस छोटे गंदे कमरे से कहीं बेहतर। और… तू वहाँ और आज़ाद महसूस करेगी।”
रुही थोड़ी सकपका गई। “लेकिन सनी को क्या बोलूँगी? वो पूछेगा न कि कहाँ जा रही हूँ।”
सोनिया मुस्कुराई। “सरल है। बोल देना कि मैं अकेली हूँ घर में, और हम दोनों गर्ल्स नाइट मनाने जा रहे हैं। मूवी, पॉपकॉर्न, बातें… वैसा ही। सनी कभी शक नहीं करेगा। वो तो खुद बिज़नेस ट्रिप पर जा रहा है।”
रुही कुछ पल चुप रही। फिर धीरे से बोली, “तू… ठीक से सोच ले सोनिया। अगर किसी को पता चल गया तो…”
“किसी को पता नहीं चलेगा।” सोनिया ने उसका हाथ दबाया। “मैं चाहती हूँ तू आराम से अपनी वो दो रातें बिताए। और सच कहूँ तो… मुझे भी अच्छा लगेगा कि तुम दोनों मेरे घर में हो। कम से कम तू सुरक्षित रहेगी।”
रुही की आँखें भर आईं। उसने सोनिया को हल्के से गले लगा लिया। “शुक्रिया… सच में।”
शाम को घर पहुँचकर रुही ने सनी के पास जाकर बात की। सनी सोफे पर टीवी देख रहा था।
“सनी…” रुही ने धीरे से शुरुआत की, “एक बात कहनी थी।”
“हम्म बोल।”
“सोनिया का पति और बेटा शुक्रवार को गाँव जा रहे हैं। वो अकेली रह जाएगी। उसने कहा है कि मैं उसके साथ रह लूँ… गर्ल्स नाइट। शुक्रवार शाम से रविवार तक। तू भी बाहर जा रहा है न, तो मैं सोच रही थी…”
सनी ने रिमोट रखा और उसकी तरफ देखा। “दो रात?”
“हाँ। वो बोर हो जाएगी अकेली। और… हमें भी काफी दिनों से बातें करने का मौका नहीं मिला।”
सनी थोड़ी देर सोचा, फिर कंधे उचकाए। “ठीक है। तू चली जा। मैं तो वैसे भी शनिवार सुबह की फ्लाइट से जा रहा हूँ। घर पर अकेली रहने से अच्छा है सोनिया के पास रह। बस फोन पकड़ के रखना।”
रुही के चेहरे पर हल्की मुस्कान तैर गई, लेकिन उसने इसे छुपाने की कोशिश की। “धन्यवाद। मैं सामान रख लेती हूँ।”
सनी वापस टीवी की तरफ मुड़ गया। उसे रत्ती भर अंदाज़ा नहीं था कि उसकी बीवी असल में किन दो रातों की तैयारी कर रही है।
रात का समय था।
सनी सो चुका था। कमरे में अंधेरा था। रुही बिस्तर पर करवट लेकर लेटी थी, आँखें खुली हुईं। छत की तरफ घूरते हुए उसके मन में सिर्फ एक ही बात घूम रही थी—
दो रात।
रामू जी के नीचे।
उसके शरीर में एक धीमी, गहरी सनसनाहट दौड़ रही थी। उसने आँखें बंद कर लीं और खुद को उनके कमरे में, बल्कि अब सोनिया के बड़े बिस्तर पर कल्पना करने लगी।
रामू जी… आपके बड़े हाथ मेरी कमर पकड़ेंगे। आपकी दाढ़ी मेरे स्तनों पर रगड़ेगी। आपका मोटा, भारी लंड… दो रात तक मेरी चूत का मालिक बनेगा।
उसकी साँसें तेज़ हो गईं। जाँघें अपने-आप भींच गईं।
मैं पूरी तरह समर्पित रहूँगी। जैसे आप कहेंगे, वैसे ही लेटूँगी। कुत्ते की तरह, गोद में, ऊपर बैठकर… जो भी आप चाहेंगे। मैं आपसे कुछ नहीं पूछूँगी। बस लूँगी। जितना देंगे, उतना।
रुही ने धीरे से अपना हाथ अपने पेट पर फेरते हुए सोचा—
आपकी मर्दानगी… वो वाली जो सनी में कभी नहीं थी। वो वाली जो मुझे कमजोर और सुरक्षित दोनों बना देती है। आपके सामने मैं सिर्फ औरत बन जाती हूँ। सोचने-समझने वाली रुही सिंह खत्म हो जाती है। सिर्फ रुही कामत बचती है… जो आपके लंड की प्यासी रहती है।
उसकी निपल्स तन गई थीं। शरीर गर्म हो रहा था।
दो रात मैं आपकी बाँहों में सोऊँगी। सुबह आपकी छाती पर सिर रखकर उठूँगी। आप मुझे नहलाएँगे, या मैं आपको। आप जब चाहेंगे चोदेंगे… और मैं हर बार “हाँ रामू जी” कहूँगी। क्योंकि मैं आपकी हूँ। पूरी तरह।
रुही ने तकिया कसकर पकड़ लिया। आँखों में हल्की सी मुस्कान थी, और मन में एक गहरी, कामुक शांति।
अब बस कुछ दिन बाकी थे।
फिर वो दो रातें शुरू होने वाली थीं…
जहाँ वो पूरी तरह रामू जी की मर्दानगी के नीचे दबकर, अपनी समर्पण की भूख बुझाएगी।


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