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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
पुरुष में वासना की उत्पति पानी के बुलबुले की तरह क्षणिक होती है, किन्तु स्त्री में यह एक लहर कि तरह होती जो बहुत गहराई तक जाती है... और सहज शांत भी नहीं होती... इसे शांत करने के लिये कुशलता व अनुभव की जरूरत होती है... जब कोई पुरूष इसे करने में परांगत हो जाता है... तब स्त्री स्वयं ही उसे आमंत्रण देती है और प्रेम मे लीन होकर स्वयं को सौप देती है..!

[Image: 1593598636410.jpg]
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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 12-08-2026, 06:59 PM



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