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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#99
..रिशा राजू को किसी से बांटना नहीं चाहती क्योंकि जी अधूरापन उसने अपने जीवन में आज तक महसूस किया था उससे शून्य को भरने का काम किया है राजू ने..शादी के बाद पति छोड़ कर चला गया...पहली बार जब राजू से प्यार करने का मौका मिला बढ़ गई तो सास ने पहले अपना हक जता दिया..


ये बात सच है कि हर महिला के जीवन में ऐसा वाक्या नहीं घटता लेकिन कुछ एक महिलाएं ऐसी भी होती हैं जिनकी शादीशुदा जिंदगी में भी एक तरह का सूनापन रहता है। शादी होने के बाद भी किन्ही अनचाहे कारणों से पति के साथ उस तरह का खुलापन या प्रेम नहीं हो पाता जैसा कि होना चाहिए और ऐसे में उसे एक अदद साथ की, एक दोस्त की सख्त ज़रूरत महसूस होती ही रहती है जिससे वह जब चाहे डांट सके, लड़ सके, कंधे पर सिर रख कर रो सके, खुलकर हँस सके, घूम सके, जब चाहें मन चाही खुल कर चैट कर सके, बेझिझक होकर निःसंकोच सब कुछ उसे बता सके, बिना इस बात की परवाह किये कि सामने वाला व्यक्ति क्या सोचेगा या कहीं उसे जज तो नहीं करेगा...?

एक ऐसा इंसान पा लेना, एक ऐसा व्यक्ति मिलना जो स्त्री के भीतर छिपे ज़ज़्बात समझ सके, उसकी बातो को जान सके। एक स्त्री किसी से कुछ नहीं मांगती बस तन और मन की संतुष्टि और थोड़ा सा सम्मान चाहती है। अगर एक ऐसा दोस्त स्त्री के पास है तो वह आंतरिक तौर पर खुश हैं वरना शादीशुदा औरतें मूल रूप से इसी कारण दुखी हैं कि हमारे पास सुनाने वाले तो बहुत हैं पर सुनने वाला कोई नहीं। इच्छा ज़ाहिर करने वाले तो बहुत हैं, इच्छा समझने वाला कोई नहीं, दिलफरेब दीवाने तो बहुत हैं, दिल में रखने वाला कोई नहीं।

एक शादीशुदा स्त्री का प्यार लाजवाब होता है जिस मे जिस्म के साथ साथ खूबसूरत मन को सौंपने साथ की चाहत भी होती है,

अगर एक अधूरी और किसी के साथ और तलाश को ढूंढ रही स्त्री के मन की भावनाओं को समझने वाला मिल जाए तो.......खुद को या कुछ हदों के पार जाकर खुद के जिस्म भी वह सौंप देना मुमकिन भी है…ये वासना नहीं बल्कि आत्मा की तृप्ति और आंतरिक संतुष्टि के लिए अनिवार्य है।
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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 12-08-2026, 01:17 PM



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