12-08-2026, 01:16 PM
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होली के दिन सुबह से ही गाँव में रंगों की वर्ष हो रही थी। मम्मी ने एक सुंदर लाल रंग की साड़ी पहनी थी और एक टाइट ब्लाउज पहनी थी ब्लाउज टाइट होने की वजह से चूचियों का उभार साफ दिख रहा था । सभी लोग आंगन में एक दूसरे को रंगोली लगा रहे थे । तभी मैं और विकी भी वह पहुंचे गये .
उसने मम्मी को देखते ही मुस्कुराते हुए कहा, "मामी, आप तो बहुत सुंदर लग रही हो आज। ये लाल साड़ी आप पे मस्त लग रही है।"
मम्मी शर्मा कर बोलीं, "विकी, ऐसी बातें मत कर। तू मेरा भांजा है। आ, रंग लगा ले।"
विकी ने पिचकारी उठाई और मम्मी पर रंग डालना शुरू कर दिया। पहले हल्का सा रंग, फिर धीरे-धीरे वो मम्मी के पास आने लगा। जब मम्मी ने उसको रंग लगाने के लिए झुकाया, तो विकी ने मम्मी के गाल पर रंग लगाया। उसके हाथ मम्मी के गाल से नीचे की तरफ स्लाइड हुए।
मम्मी हल्की सी सिसकारी भर उठी, “आआहह… विकी … धीरे…”
लेकिन विकी ने रुकने की बजाय मम्मी की कमर पर हाथ रख दिया और धीरे से कहा, "मामी, आप बहुत अकेली लग रही हो इस होली पर। मामा तो नहीं है यहां , तो मैं हूं ना आपके साथ।"
मम्मी शर्म के अपनी आंचल ठीक करती हुई बोली, "विकी... तू मेरा भांजा है... ऐसी बातें मत कर।"
लेकिन रंग लगते वक्त निकटता बढ़ती गई। विकी ने मम्मी के हाथों पर रंग लगाया और उनके हाथों को थोड़ा ज्यादा देर तक पकड़ रखा। मम्मी की सांसें तेज़ होने लगीं। विकी ने मम्मी के गले पर हल्का सा रंग लगाया और उसके कान के पास धीरे से कहा,
"मामी... आपकी खुशबू बहुत अच्छी है। आपकी ये गीली साड़ी... बहुत सुंदर लग रही है।"
मम्मी का चेहरा लाल हो गया। उसने धीरे से कहा, "विकी... लोग देख लेंगे।"
लेकिन विकी ने मम्मी को धीरे से अपने सीने से लगा लिया। रंग लगाते वक्त उसका हाथ मम्मी की कमर से नीचे की तरफ स्लाइड हुआ। मम्मी का मुड ख़राब हो गया. वह रंग खेलना छोड़ कर कमरे में आ गई । फिर थोड़ी देर बाद बुआ मम्मी को बुलाने कमरे में आई और अपने साथ रंग खेलने ले गई । मैं थोड़ी देर बाद आंगन में पहुंचा तो मुझे वह सिर्फ बुआ और उनकी कुछ सहेली मम्मी के साथ होली खेलती नजर आई वह मुझे विकी कहीं नहीं दिखाई दिया। इस लिए मैं कमरे में वापस आ गया।
शाम होने लगी थी. होली की शाम गांव में मौज मस्ती चल रही थी। लोग गाने गा रहे थे और नाच रहे थे। मम्मी ने घर के छत पर लाइट जलाने के लिए मुझे बुलाया था पर विकी छत पर चला गया।
मम्मी भी छत पर आई। साड़ी अभी भी रंगों से भरी हुई थी और गीली होने के कारण बदन से चिपकी हुई थी। मैं सीढ़ियों पर से छुप कर देख रहा था ।
मम्मी की लाल साड़ी अभी भी रंगों से भरी हुई थी और गीली होने के कारण बदन से चिपक रही थी। ब्लाउज के अंदर से उनकी बड़ी चूचियों का शेप साफ दिख रहा था। आंचल अभी भी साइड में था.
विकी मम्मी के बिल्कुल पास खड़ा था। उसने मम्मी की कमर पकड़ कर धीरे से अपने सीने से सटा लिया और गहरी आवाज़ में कहा, "मामी ... आप बहुत सुंदर लग रही हो आज। ये लाल साड़ी और रंग... आपको और भी गरम बना रही है। आपकी सांसें तेज़ हो रही हैं। दिल भी तेज़ धड़क रहा है।"
मम्मी शर्मा कर नीचे देखती रही। लेकिन उसने विकी को दूर नहीं हटाया। उसने धीरे से कहा, "विकी...ये गलत है। मैं तेरी मामी हूं...लोग देख लेंगे।"
विकी ने मुस्कुराते हुए मम्मी के गाल पर हाथ फेरते हुए जवाब दिया, "मामी... ऊपर सिर्फ हम दोनों हैं। आज होली है... रंग लगाने का मौका है। आप बहुत अकेली रहती हो। मामा शहर में हैं। आज मैं आपको वो प्यार दूंगा जो आपको चाहिए।"
विकी ने धीरे से मम्मी के होठों पे एक गहरा किस कर दिया। उसने मम्मी की जीभ को अपनी जीभ से लपेट लिया और ज़ोर से चुसने लगा। मम्मी पहले थोड़ी हट्टी, लेकिन फिर उसने भी आंखें बंद कर के विकी के होठों से अपने होंठ लिपटा लिया। दोनों के मुँह से हल्की सी "चुप-चुप" की आवाज़ आ रही थी।
किस के दौरन विकी का हाथ मम्मी की कमर से ऊपर बढ़ा। उसने साड़ी का पल्लू पूरा नीचे गिरा दिया। ब्लाउज के ऊपर से दोनों बड़ी चूचियों को ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा। मम्मी सिसकारी भर उठी, "आआहह... विकी... और ज़ोर से दबाओ... मामी की चूंचियां बहुत प्यासी है। आआहह... बहुत दिन बाद किसी ने ऐसा छुआ है।"
विकी ने ब्लाउज के सारे हुक एक साथ खोल दिये। दोनों बड़ी, गोल, नरम चूचियां बाहर आ गई। निप्पल पहले से ही टाइट और खड़े हो चुके थे । विकी ने एक चूची को मुँह में लेकर ज़ोर से चुसने लगा और जीभ से निप्पल घुमाने लगा । कभी वह धीरे से काटता यह कभी ज़ोर से चुसता । दूसरी चूची को हाथ से मसलता और निप्पल को उंगलियों से खींचता ।
मम्मी तड़पकर विकी के बाल पकड़ लिए करती और उसके सर चूंचियों पर दबा दिया करती । और बोलती "हां विकी ... और ज़ोर से चूसो। मामी की चूंचियां तेरी है आज... काटो उन्हें... दर्द के साथ मजा दो ... आआहह... दूसरा भी चूसो ना विकी..."
विकी ने दोनों चूंचियों को बारी-बारी चूसा, काटा और जीभ को चूंचियां पर घुमाता । मम्मी की सांसें बहुत तेज़ हो रही थीं। उसकी जांघें काँप रही थी और वो खड़ी नहीं हो पा रही थी।
विकी ने मम्मी को छत पर रखी चारपाई पर लिटा दिया । उसने साड़ी उतार कर साया की नाड़ी खोल दी और पैंटी नीचे कर दी। मम्मी की चूत अभी से गीली हो चुकी थी। विकी ने घुटनों के बल बैठकर मम्मी की टांग फैलाई और अपनी जीभ से चूत चाटनी शुरू कर दी - पहले ऊपर से नीचे तक चाटा। फिर चूत को मुँह में ले कर ज़ोर से चुसने लगा , कभी अंदर डाल कर और भी बाहर करके।
इससे मम्मी ज़ोर से तड़प उठती "आआहह... विकी ... और अंदर तक... चाटो मेरी चूत। जीभ अंदर डाल दो... आआहह... बहुत मजा आ रहा है... और तेज़ करो। अब मैं झड़ने वाली है।"
मम्मी ने विकी के सर को कसकर पकड़ लिया और चूत को उसके मुँह पर रगड़ने लगी। थोड़ी देर में मम्मी ज़ोर से कांप उठी और पहली बार झड़ गई। उसका गरम रस विकी के मुँह में चला गया।
फिर विकी ने मम्मी की चूत को अच्छे से चाटकर साफ कर दिया। फिर उसने अपना मोटा, लंबा लंड बाहर निकाला और मम्मी उसके लौड़े को देखकर चौंक गई और आंख हटा नहीं पा रही थी।
विकी ने मम्मी की टांगें को अपने कंधों पर रख कर मिशनरी पोजीशन में लंड को चूत के मुँह पर रगड़ना शुरू किया। मम्मी तड़प रही थी, " विकी... धीरे डाल... बहुत मोटा है... मामी की चूत फट जाएगी... लेकिन डाल दो... आज होली है... मामी को पूरा प्यार दे..."
विकी ने धीरे से लंड अंदर घुसा दिया। पहले आधा, फिर पूरा। मम्मी चीख उठी,
“आआहह… बहुत मोटा है विकी… फाड़ रही है मेरी चूत… धीरे… आआहह… पूरा अन्दर दे दो…”
विकी ने धीरे-धीरे धक्के मारने चालू कर दिए थोड़ी देर बाद फिर स्पीड बढ़ा दी। हर धक्के के साथ मम्मी की चूचियाँ ऊपर-नीचे हिल रही थीं। विकी ने एक हाथ से चूचियों को पकड़कर चुसना शुरू कर दिया।
मम्मी अब खुलकर चुदवा रही थी, "हां विकी... और ज़ोर से... फाड़ दो मेरी चूत... चोदो आआहह....। मामी तेरी है आज... और जोर से । मेरी रूह तक पहुंच दो..."
विकी ने मम्मी को घुमाकर डॉगी स्टाइल में किया। मम्मी की गांड ऊपर थी. विकी ने पीछे से लंड अन्दर डाला और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारे। थप-थप-थप की तेज़ आवाज़ छत पर गूँज रही थी।
विकी ने मम्मी को अपने ऊपर बैठा लिया और मम्मी ऊपर-नीचे हो रही थी, उसकी चूचियाँ ज़ोर से हिल रही थी। विकी ने नीचे से कूल्हे उठा-उठा कर धक्के मारे और मम्मी के निप्पल को खूब खींचा ।
थोड़ी देर बाद विकी चिल्लाया , “ मामी… मैं झड़ रहा हूँ… "
मम्मी ने कहा : " अंदर ही झाड़ दो…मामी को अपना माल दे दो… आआह्ह्ह…”
विकी ने ज़ोर से धक्का मारा और मम्मी के अंदर ही गरम माल भर दिया। मम्मी ज़ोर से कांप उठी और उनके साथ ही झड़ गयी। दोनों एक-दूसरे को कसकर लिपटे हुए थक कर लेट गए।
मम्मी ने विकी के सीने पर सर रखकर धीरे से कहा,
"विकी... ये बहुत गलत है... लेकिन आज मामी को बहुत सुकून मिला। तू मेरा भांजा है... लेकिन आज रात तू मामी का मर्द बन गया।"
मैं सीढ़ी पर से पूरा इंटेंस सीन देख रहा था। मेरा दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था।
करवाचौथ ....
मेरा दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था। मैं कमरे में आकर लेट गया। कुछ देर बाद बुआ मेरे कमरे में आई । मैंने उनसे पूछा- क्या बात है पूनम ?
ये बोलते ही बुआ बोली- क्या बात है … बड़ा प्यार आ रहा है? बुआ से सीधा पूनम?
और बोली- तेरे मुँह से अच्छा लगता है. चल अब अपनी बाइक ले आ, मुझे बाजार जाना है. कल शाम करवाचौथ है इसलिए कुछ समान लाने हैं।
मैंने कहा- शाम का टाइम है, ?
बुआ बोली- सब देख लिया… अब तु बाजार चल।
हम दोनों चल दिये. बुआ ने सूट पहन रखा था और बाइक पर दोनों साइड पैर किये हुए बैठी थी. कुछ दूर पहुंचा ही था तभी सड़क पर बाईक के सामने एक कुत्ता आ गया और मैंने जोर से ब्रेक लगा दिए. तो बुआ मुझसे चिपक गयी और बोली- थोड़ा सब्र करो!
फिर हमें बाजार जा रहे थे तो मैं पुरे रास्ते चुप था तो बुआ बोली- क्या बात है मेरे हीरो … क्या हुआ?
मैंने भी मजाक में बोल दिया- कुछ नहीं हुआ मेरी माल …?
बुआ जोर से हंसी और मेरी पीठ पर मुक्का मार के बोली- जितनी मस्ती चढ़ी है ना … सारी निकाल दूंगी।
मैं भी बोला- इसी का तो इन्तजार है।
तभी रास्ता सुनसान देख कर मैंने बाइक रोक दी. बुआ उतरकर साइड में खड़ी हो गयी. पास में ही एक अधूरा बना मकान सा था, मैंने बुआ का हाथ पकड़ा और उसे खींचते हुए उस मकान में ले गया. अंदर जाते ही मैंने बुआ के होंठों पर अपने होंठ रख दिये.
होंठ चुमते हुए जैसे ही मैंने बुआ की सलवार खोलनी चाही तो बुआ दूर हो गयी और बोली- बस आज के लिए इतना ही … बाकी फिर करवाचौथ वाली रात ।
मैंने काफी मिन्नतें भी की पर बुआ के दिमाग में बड़ा प्लान चल रहा था जो मैं उस वक्त नहीं समझ सका। लेकिन तब तो मैं बुआ से गुस्सा हो गया.
करवाचौथ वाले शाम तक मैंने न बुआ की तरफ देखा और ना ही कोई बात की।
करवाचौथ वाली शाम को बुआ मम्मी के खोजते हुए कमरे में आई और मुझसे पुछी: भाभी कहां है। मैंने गुस्से में जब दिया छत पर पुजा की तैयारियां कर रही है
यह सुनते ही बुआ बिस्तर पर मेरे ऊपर चढ़ गई और मुझे पागलों की तरह चुमने लगी।
जैसे ही मैं गर्म हुआ कि तभी बुआ मेरे से दूर हो गई और बोली- अभी बस इतना ही … आज रात को तेरी सारी नाराज़गी दूर कर दूंगी।
रात होने का इंतजार करने लगा। करीब रात के लगभग 9:00 बज गए कि तभी मम्मी ने आवाज दी- पूनम , चांद निकल आया है, अपनी पूजा पाठ कर लो. हम सभी लोग छत पर पहुंच मम्मी और बुआ ने अपना पुजा पाठ का कार्य शुरू किया।
मैं साइड में खड़ा था चुपचाप सब देख रहा था । तभी बुआ ने छलनी में से पहले चांद को देखा फिर हल्का सा तीरछा करें छलनी से मुझे देख उसे इस हरकत से मैं चौंक गया। और फिर चांद की आरती की फिर दीया को भी हल्का तीरछा करके मेरी भी आरती की. इस बार मुझे डबल शौक लगा। तभी मेरी नजर विकी पर पड़ी पर वह साइड में बैठकर मोबाईल देख रहा था । मैंने एक लम्बी सांस ली और फिर मेरी नजर मम्मी पर पड़ी वह मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी और उन्होंने मुझे देखकर आंख मारा और इशारा किया।
मैं बुआ की हरकत समझ गया और तभी बुआ ने अपने हाथों में पानी से भरे लोटें को उठकर मेरे तरफ आने लगी । तभी मम्मी ने बुआ को रोकते हुए कहा " आओ मैं तुझे पानी पिला देती हुं फिर उन दोनों ने एक-दूसरे को पानी पिला। इस पुजा सम्पूर्ण हुआ फिर हम लोग सभी नीचे हॉल में चलें आये। मैं थोड़ी देर हॉल में बैठने के बाद कमरे में आया। कुछ देर बाद मम्मी भी कमरे में आई और मेरे से बोली- नयन… आज रात अपनी बुआ के पास सोने चले जाना।
मैंने पहले जाने से मना किया पर थोड़ी देर बाद मैंने बोल दिया- ओके … चला जाऊंगा।
रात का खाना खाकर सभी अपने अपने कमरे में चले गए। करीब एक घंटे बाद जब मैं कमरे से निकल कर हॉल में पहुंचा तो विकी वहां मुझे सोफे पे सोए हुए दिखाया मैं उसके करीब गया जाकर चेक किया तो वह गहरी नींद में सोया हुआ था मैंने बिना देर किए
बुआ के कमरे में पहुंचा । जब मैं उनके कमरे में पहुंचा तो वहां तरह तरह के फल रखें थे।
मैंने पूछा- ये फल किसके लिए हैं?
तो बुआ ने कहा- ये मैंने अपने एक रात के पति के लिए रखे हैं, आज रात को मैं अपने पति को अपने हाथों से खिलाऊंगी.
बुआ ने एक बड़ी थाली में सारे फल सजा लिए और लाकर मेरे पास बैठ गई। और मुझे फल खिलाने लगी। मुझे जिंदगी में पहली बार बुआ ने अपने हाथ से इतने प्यार से फल खिलाया था
फल खाने के बाद बुआ ने मुझसे कहा ।
( अगले आप जो भी पड़ेंगे यह सुनेंगे वह मेरे बुआ के आवास होगी )
मैंने धीरे से उसके कान में फुसफुसाया " आ जाओ सैंया … अब दिखाओ अपना प्यार मेरे दूध पीकर ”
नयन बोला, “ठीक है बुआ ।” फिर मैंने अपना ब्लाउज धीरे-धीरे निकाला, ब्रा भी उतारी, मेरे बड़े-बड़े चूची बाहर आ गए, निप्पल्स टाइट होकर खड़े थे। वह पास आया, पहले मेरे निप्पल को चूमा, फिर मुँह में लेकर चूसने लगा। “बुआ , कितने नरम हैं…” वो बोला। मैंने कहा, “आराम से, जल्दी बाज़ी मत करो ।” उसने एक चूची चूसा और हाथ से दूसरे को मसलता रहा, निप्पल को भी जीभ से घुमाता, चूसता, काटता हल्के-हल्के से। अब मैं सिसकारी ले रही थी, “आह्ह… स्स्स… नयन , अच्छा लग रहा है…” मेरी चूत गीली हो रही थी, थोड़ी देर बाद मैंने उसके सिर को अपने चूची में दबाया ।
फिर मैंने कहा, “अब मेरी नाभि चूमो।” वो नीचे झुका, नाभि पर किस किया, जीभ से चाटा, नीचे से ऊपर चुची की तरफ आता रहा, फिर दोनों चुचियों को बारी-बारी चूसता। इस दौरान मैंने अपना पेटीकोट खोल दिया, अब सिर्फ पैंटी में थी। नयन ने मेरी पैंटी भी उतार दी, मैं पूरी नंगी हो गई। मेरी चूत पर हल्के बाल और गीलापन थी। नयन घबराया नहीं, मेरे पैरों को चूमा, जाँघों को, फिर चूत के पास आया। मैंने इशारा किया, वो मेरी चूत चाटने लगा, जीभ अंदर डालकर, क्लिट को चूसता। “आह्ह… नयन… उफ्फ्फ… ऐसे ही…” मैं काँप रही थी। थोड़ी देर बाद उसने अपने कपड़े उतार दिए।
दुसरी बार नयन का लंड देखा तो होश उड़ गए। उसने अपना पैंट उतारा, लंड बाहर आया – मेरे पति से डबल मोटा, डबल लंबा, कम से कम ९ इंच, मोटाई ऐसी कि मुट्ठी नहीं भरती हो । मैं डर गई, सोचा ये तो मेरी चूत फाड़ देगा। लेकिन मैं कुछ नहीं बोली , बस उसने मेरे माथे को चूमा , होठों को चूमा, चूची को मसलता रहा। मैंने इशारा किया, वो मेरे ऊपर आया। मैंने उसका लंड पकड़ा, अपनी चूत पर रखा। पहले झटके में आधा लंड अंदर गया, मेरी चीख निकल गई, “आआआह्ह्ह… उई माँ… फट गई…!” चूत से गंदा पानी निकला, जलन हुई। पर वह डर नहीं गया, रुक गया। मैंने दिलासा दिया, “कुछ नहीं नयन , ऐसे ही होता है , गंदा पानी है, जारी रखों ।”
नयन बोला, “ठीक है बुआ ।” फिर धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। पूरा लंड अंदर जाता तो मैं बेहोश सी हो जाती, लेकिन जोश में थी, उसका साथ दे रही थी। “आह्ह… स्स्स… नयन… धीरे… उफ्फ्फ… कितना मोटा है तेरा लंड… मेरी चूत भर दी…” वो बोला, “बुआ, कितनी टाइट है तुम्हारी… चूत आह्ह…” मैंने पैर उसके कमर पर लपेटे, अब वह घोड़ी स्टाइल में धक्के मारने लगा , मेरे चूची हर धक्का के साथ उछलता । फिर मैं उसके ऊपर आई, उसका लंड पकड़कर बैठ गई, धीरे-धीरे उछली, “पछ पछ… आह्ह… उम्ह्ह…” आवाजें आ रही थीं। नयन ने मेरे चूंतड़ पकड़े के , नीचे से धक्के मारे। मैंने उसकी छाती पर हाथ रखकर उछलने लगी।
फिर मैंने कहा, “नयन, अब पीछे से…” वो पीछे आया, मेरी गांड ऊपर की, लंड चूत में डाला, डॉगी स्टाइल में जोर-जोर से पेलने लगा। “पट पट पट… आह्ह… बुआ… कितनी गर्म है तुम्हारी बुर… उफ्फ्फ…” मैं चिल्लाई, “चोद नयन… जोर से… फाड़ दे अपनी बुआ की चूत… आआह्ह्ह… हाँ… ऐसे ही…” उसने मेरे बाल पकड़े, कमर पकड़ी, तेज धक्के मारे। मैंने तकिया मुँह में दबाया, लेकिन मुंह से कामुक आवाजें निकल रहे थे, “उम्ह्ह्ह… ओह्ह्ह… नयन… आह्ह…” वो मेरी गांड पर थप्पड़ मारता, लंड अंदर-बाहर। फिर मैंने उसे लिटाया, ६९ पोजीशन में, मैं उसका लंड चूसी – मुँह में लिया, जीभ घुमाई, गले तक उतारा, वो मेरी चूत चाटता। और बोला “बुआ… तुम्हारा रस…कितना मीठा है…” मैं बोली, “चूस नयन… ”
फिर वापस मिशनरी में, वो मेरे ऊपर, लंड पूरा अंदर, धक्के तेज। मेरी चूत से आवाजें, “फछ फछ… पछ पछ…” मैं झड़ने लगी, “आह्ह… नयन … मैं झड़ गई… उफ्फ्फ…” शरीर काँपा रही थी , लेकिन वो रुका नहीं, जारी रखा। उसकी उम्र कम लेकिन स्टैमिना, लंड तगड़ा। आखिर वो बोला, “बुआ… आने वाला है…” मैं बोली, “अंदर ही डाल… कुछ नहीं होगा …” वो जोर से धक्का मारा, वीर्य अंदर छोड़ दिया, गर्म-गर्म तभी मुझे लगा उसका वीर्य मेरी बच्चेदानी में चला गया हो मैंने इस बात को इतना महत्व नहीं दिया क्योंकि की हम दोनों पसीने से तरबतर थे और वह चिपके हुए लेटे था
................ भाग 2 का अंत होता हुआ और भाग 3 बहुत जल्द आयेगी ...........
होली के दिन सुबह से ही गाँव में रंगों की वर्ष हो रही थी। मम्मी ने एक सुंदर लाल रंग की साड़ी पहनी थी और एक टाइट ब्लाउज पहनी थी ब्लाउज टाइट होने की वजह से चूचियों का उभार साफ दिख रहा था । सभी लोग आंगन में एक दूसरे को रंगोली लगा रहे थे । तभी मैं और विकी भी वह पहुंचे गये .
उसने मम्मी को देखते ही मुस्कुराते हुए कहा, "मामी, आप तो बहुत सुंदर लग रही हो आज। ये लाल साड़ी आप पे मस्त लग रही है।"
मम्मी शर्मा कर बोलीं, "विकी, ऐसी बातें मत कर। तू मेरा भांजा है। आ, रंग लगा ले।"
विकी ने पिचकारी उठाई और मम्मी पर रंग डालना शुरू कर दिया। पहले हल्का सा रंग, फिर धीरे-धीरे वो मम्मी के पास आने लगा। जब मम्मी ने उसको रंग लगाने के लिए झुकाया, तो विकी ने मम्मी के गाल पर रंग लगाया। उसके हाथ मम्मी के गाल से नीचे की तरफ स्लाइड हुए।
मम्मी हल्की सी सिसकारी भर उठी, “आआहह… विकी … धीरे…”
लेकिन विकी ने रुकने की बजाय मम्मी की कमर पर हाथ रख दिया और धीरे से कहा, "मामी, आप बहुत अकेली लग रही हो इस होली पर। मामा तो नहीं है यहां , तो मैं हूं ना आपके साथ।"
मम्मी शर्म के अपनी आंचल ठीक करती हुई बोली, "विकी... तू मेरा भांजा है... ऐसी बातें मत कर।"
लेकिन रंग लगते वक्त निकटता बढ़ती गई। विकी ने मम्मी के हाथों पर रंग लगाया और उनके हाथों को थोड़ा ज्यादा देर तक पकड़ रखा। मम्मी की सांसें तेज़ होने लगीं। विकी ने मम्मी के गले पर हल्का सा रंग लगाया और उसके कान के पास धीरे से कहा,
"मामी... आपकी खुशबू बहुत अच्छी है। आपकी ये गीली साड़ी... बहुत सुंदर लग रही है।"
मम्मी का चेहरा लाल हो गया। उसने धीरे से कहा, "विकी... लोग देख लेंगे।"
लेकिन विकी ने मम्मी को धीरे से अपने सीने से लगा लिया। रंग लगाते वक्त उसका हाथ मम्मी की कमर से नीचे की तरफ स्लाइड हुआ। मम्मी का मुड ख़राब हो गया. वह रंग खेलना छोड़ कर कमरे में आ गई । फिर थोड़ी देर बाद बुआ मम्मी को बुलाने कमरे में आई और अपने साथ रंग खेलने ले गई । मैं थोड़ी देर बाद आंगन में पहुंचा तो मुझे वह सिर्फ बुआ और उनकी कुछ सहेली मम्मी के साथ होली खेलती नजर आई वह मुझे विकी कहीं नहीं दिखाई दिया। इस लिए मैं कमरे में वापस आ गया।
शाम होने लगी थी. होली की शाम गांव में मौज मस्ती चल रही थी। लोग गाने गा रहे थे और नाच रहे थे। मम्मी ने घर के छत पर लाइट जलाने के लिए मुझे बुलाया था पर विकी छत पर चला गया।
मम्मी भी छत पर आई। साड़ी अभी भी रंगों से भरी हुई थी और गीली होने के कारण बदन से चिपकी हुई थी। मैं सीढ़ियों पर से छुप कर देख रहा था ।
मम्मी की लाल साड़ी अभी भी रंगों से भरी हुई थी और गीली होने के कारण बदन से चिपक रही थी। ब्लाउज के अंदर से उनकी बड़ी चूचियों का शेप साफ दिख रहा था। आंचल अभी भी साइड में था.
विकी मम्मी के बिल्कुल पास खड़ा था। उसने मम्मी की कमर पकड़ कर धीरे से अपने सीने से सटा लिया और गहरी आवाज़ में कहा, "मामी ... आप बहुत सुंदर लग रही हो आज। ये लाल साड़ी और रंग... आपको और भी गरम बना रही है। आपकी सांसें तेज़ हो रही हैं। दिल भी तेज़ धड़क रहा है।"
मम्मी शर्मा कर नीचे देखती रही। लेकिन उसने विकी को दूर नहीं हटाया। उसने धीरे से कहा, "विकी...ये गलत है। मैं तेरी मामी हूं...लोग देख लेंगे।"
विकी ने मुस्कुराते हुए मम्मी के गाल पर हाथ फेरते हुए जवाब दिया, "मामी... ऊपर सिर्फ हम दोनों हैं। आज होली है... रंग लगाने का मौका है। आप बहुत अकेली रहती हो। मामा शहर में हैं। आज मैं आपको वो प्यार दूंगा जो आपको चाहिए।"
विकी ने धीरे से मम्मी के होठों पे एक गहरा किस कर दिया। उसने मम्मी की जीभ को अपनी जीभ से लपेट लिया और ज़ोर से चुसने लगा। मम्मी पहले थोड़ी हट्टी, लेकिन फिर उसने भी आंखें बंद कर के विकी के होठों से अपने होंठ लिपटा लिया। दोनों के मुँह से हल्की सी "चुप-चुप" की आवाज़ आ रही थी।
किस के दौरन विकी का हाथ मम्मी की कमर से ऊपर बढ़ा। उसने साड़ी का पल्लू पूरा नीचे गिरा दिया। ब्लाउज के ऊपर से दोनों बड़ी चूचियों को ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा। मम्मी सिसकारी भर उठी, "आआहह... विकी... और ज़ोर से दबाओ... मामी की चूंचियां बहुत प्यासी है। आआहह... बहुत दिन बाद किसी ने ऐसा छुआ है।"
विकी ने ब्लाउज के सारे हुक एक साथ खोल दिये। दोनों बड़ी, गोल, नरम चूचियां बाहर आ गई। निप्पल पहले से ही टाइट और खड़े हो चुके थे । विकी ने एक चूची को मुँह में लेकर ज़ोर से चुसने लगा और जीभ से निप्पल घुमाने लगा । कभी वह धीरे से काटता यह कभी ज़ोर से चुसता । दूसरी चूची को हाथ से मसलता और निप्पल को उंगलियों से खींचता ।
मम्मी तड़पकर विकी के बाल पकड़ लिए करती और उसके सर चूंचियों पर दबा दिया करती । और बोलती "हां विकी ... और ज़ोर से चूसो। मामी की चूंचियां तेरी है आज... काटो उन्हें... दर्द के साथ मजा दो ... आआहह... दूसरा भी चूसो ना विकी..."
विकी ने दोनों चूंचियों को बारी-बारी चूसा, काटा और जीभ को चूंचियां पर घुमाता । मम्मी की सांसें बहुत तेज़ हो रही थीं। उसकी जांघें काँप रही थी और वो खड़ी नहीं हो पा रही थी।
विकी ने मम्मी को छत पर रखी चारपाई पर लिटा दिया । उसने साड़ी उतार कर साया की नाड़ी खोल दी और पैंटी नीचे कर दी। मम्मी की चूत अभी से गीली हो चुकी थी। विकी ने घुटनों के बल बैठकर मम्मी की टांग फैलाई और अपनी जीभ से चूत चाटनी शुरू कर दी - पहले ऊपर से नीचे तक चाटा। फिर चूत को मुँह में ले कर ज़ोर से चुसने लगा , कभी अंदर डाल कर और भी बाहर करके।
इससे मम्मी ज़ोर से तड़प उठती "आआहह... विकी ... और अंदर तक... चाटो मेरी चूत। जीभ अंदर डाल दो... आआहह... बहुत मजा आ रहा है... और तेज़ करो। अब मैं झड़ने वाली है।"
मम्मी ने विकी के सर को कसकर पकड़ लिया और चूत को उसके मुँह पर रगड़ने लगी। थोड़ी देर में मम्मी ज़ोर से कांप उठी और पहली बार झड़ गई। उसका गरम रस विकी के मुँह में चला गया।
फिर विकी ने मम्मी की चूत को अच्छे से चाटकर साफ कर दिया। फिर उसने अपना मोटा, लंबा लंड बाहर निकाला और मम्मी उसके लौड़े को देखकर चौंक गई और आंख हटा नहीं पा रही थी।
विकी ने मम्मी की टांगें को अपने कंधों पर रख कर मिशनरी पोजीशन में लंड को चूत के मुँह पर रगड़ना शुरू किया। मम्मी तड़प रही थी, " विकी... धीरे डाल... बहुत मोटा है... मामी की चूत फट जाएगी... लेकिन डाल दो... आज होली है... मामी को पूरा प्यार दे..."
विकी ने धीरे से लंड अंदर घुसा दिया। पहले आधा, फिर पूरा। मम्मी चीख उठी,
“आआहह… बहुत मोटा है विकी… फाड़ रही है मेरी चूत… धीरे… आआहह… पूरा अन्दर दे दो…”
विकी ने धीरे-धीरे धक्के मारने चालू कर दिए थोड़ी देर बाद फिर स्पीड बढ़ा दी। हर धक्के के साथ मम्मी की चूचियाँ ऊपर-नीचे हिल रही थीं। विकी ने एक हाथ से चूचियों को पकड़कर चुसना शुरू कर दिया।
मम्मी अब खुलकर चुदवा रही थी, "हां विकी... और ज़ोर से... फाड़ दो मेरी चूत... चोदो आआहह....। मामी तेरी है आज... और जोर से । मेरी रूह तक पहुंच दो..."
विकी ने मम्मी को घुमाकर डॉगी स्टाइल में किया। मम्मी की गांड ऊपर थी. विकी ने पीछे से लंड अन्दर डाला और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारे। थप-थप-थप की तेज़ आवाज़ छत पर गूँज रही थी।
विकी ने मम्मी को अपने ऊपर बैठा लिया और मम्मी ऊपर-नीचे हो रही थी, उसकी चूचियाँ ज़ोर से हिल रही थी। विकी ने नीचे से कूल्हे उठा-उठा कर धक्के मारे और मम्मी के निप्पल को खूब खींचा ।
थोड़ी देर बाद विकी चिल्लाया , “ मामी… मैं झड़ रहा हूँ… "
मम्मी ने कहा : " अंदर ही झाड़ दो…मामी को अपना माल दे दो… आआह्ह्ह…”
विकी ने ज़ोर से धक्का मारा और मम्मी के अंदर ही गरम माल भर दिया। मम्मी ज़ोर से कांप उठी और उनके साथ ही झड़ गयी। दोनों एक-दूसरे को कसकर लिपटे हुए थक कर लेट गए।
मम्मी ने विकी के सीने पर सर रखकर धीरे से कहा,
"विकी... ये बहुत गलत है... लेकिन आज मामी को बहुत सुकून मिला। तू मेरा भांजा है... लेकिन आज रात तू मामी का मर्द बन गया।"
मैं सीढ़ी पर से पूरा इंटेंस सीन देख रहा था। मेरा दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था।
करवाचौथ ....
मेरा दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था। मैं कमरे में आकर लेट गया। कुछ देर बाद बुआ मेरे कमरे में आई । मैंने उनसे पूछा- क्या बात है पूनम ?
ये बोलते ही बुआ बोली- क्या बात है … बड़ा प्यार आ रहा है? बुआ से सीधा पूनम?
और बोली- तेरे मुँह से अच्छा लगता है. चल अब अपनी बाइक ले आ, मुझे बाजार जाना है. कल शाम करवाचौथ है इसलिए कुछ समान लाने हैं।
मैंने कहा- शाम का टाइम है, ?
बुआ बोली- सब देख लिया… अब तु बाजार चल।
हम दोनों चल दिये. बुआ ने सूट पहन रखा था और बाइक पर दोनों साइड पैर किये हुए बैठी थी. कुछ दूर पहुंचा ही था तभी सड़क पर बाईक के सामने एक कुत्ता आ गया और मैंने जोर से ब्रेक लगा दिए. तो बुआ मुझसे चिपक गयी और बोली- थोड़ा सब्र करो!
फिर हमें बाजार जा रहे थे तो मैं पुरे रास्ते चुप था तो बुआ बोली- क्या बात है मेरे हीरो … क्या हुआ?
मैंने भी मजाक में बोल दिया- कुछ नहीं हुआ मेरी माल …?
बुआ जोर से हंसी और मेरी पीठ पर मुक्का मार के बोली- जितनी मस्ती चढ़ी है ना … सारी निकाल दूंगी।
मैं भी बोला- इसी का तो इन्तजार है।
तभी रास्ता सुनसान देख कर मैंने बाइक रोक दी. बुआ उतरकर साइड में खड़ी हो गयी. पास में ही एक अधूरा बना मकान सा था, मैंने बुआ का हाथ पकड़ा और उसे खींचते हुए उस मकान में ले गया. अंदर जाते ही मैंने बुआ के होंठों पर अपने होंठ रख दिये.
होंठ चुमते हुए जैसे ही मैंने बुआ की सलवार खोलनी चाही तो बुआ दूर हो गयी और बोली- बस आज के लिए इतना ही … बाकी फिर करवाचौथ वाली रात ।
मैंने काफी मिन्नतें भी की पर बुआ के दिमाग में बड़ा प्लान चल रहा था जो मैं उस वक्त नहीं समझ सका। लेकिन तब तो मैं बुआ से गुस्सा हो गया.
करवाचौथ वाले शाम तक मैंने न बुआ की तरफ देखा और ना ही कोई बात की।
करवाचौथ वाली शाम को बुआ मम्मी के खोजते हुए कमरे में आई और मुझसे पुछी: भाभी कहां है। मैंने गुस्से में जब दिया छत पर पुजा की तैयारियां कर रही है
यह सुनते ही बुआ बिस्तर पर मेरे ऊपर चढ़ गई और मुझे पागलों की तरह चुमने लगी।
जैसे ही मैं गर्म हुआ कि तभी बुआ मेरे से दूर हो गई और बोली- अभी बस इतना ही … आज रात को तेरी सारी नाराज़गी दूर कर दूंगी।
रात होने का इंतजार करने लगा। करीब रात के लगभग 9:00 बज गए कि तभी मम्मी ने आवाज दी- पूनम , चांद निकल आया है, अपनी पूजा पाठ कर लो. हम सभी लोग छत पर पहुंच मम्मी और बुआ ने अपना पुजा पाठ का कार्य शुरू किया।
मैं साइड में खड़ा था चुपचाप सब देख रहा था । तभी बुआ ने छलनी में से पहले चांद को देखा फिर हल्का सा तीरछा करें छलनी से मुझे देख उसे इस हरकत से मैं चौंक गया। और फिर चांद की आरती की फिर दीया को भी हल्का तीरछा करके मेरी भी आरती की. इस बार मुझे डबल शौक लगा। तभी मेरी नजर विकी पर पड़ी पर वह साइड में बैठकर मोबाईल देख रहा था । मैंने एक लम्बी सांस ली और फिर मेरी नजर मम्मी पर पड़ी वह मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी और उन्होंने मुझे देखकर आंख मारा और इशारा किया।
मैं बुआ की हरकत समझ गया और तभी बुआ ने अपने हाथों में पानी से भरे लोटें को उठकर मेरे तरफ आने लगी । तभी मम्मी ने बुआ को रोकते हुए कहा " आओ मैं तुझे पानी पिला देती हुं फिर उन दोनों ने एक-दूसरे को पानी पिला। इस पुजा सम्पूर्ण हुआ फिर हम लोग सभी नीचे हॉल में चलें आये। मैं थोड़ी देर हॉल में बैठने के बाद कमरे में आया। कुछ देर बाद मम्मी भी कमरे में आई और मेरे से बोली- नयन… आज रात अपनी बुआ के पास सोने चले जाना।
मैंने पहले जाने से मना किया पर थोड़ी देर बाद मैंने बोल दिया- ओके … चला जाऊंगा।
रात का खाना खाकर सभी अपने अपने कमरे में चले गए। करीब एक घंटे बाद जब मैं कमरे से निकल कर हॉल में पहुंचा तो विकी वहां मुझे सोफे पे सोए हुए दिखाया मैं उसके करीब गया जाकर चेक किया तो वह गहरी नींद में सोया हुआ था मैंने बिना देर किए
बुआ के कमरे में पहुंचा । जब मैं उनके कमरे में पहुंचा तो वहां तरह तरह के फल रखें थे।
मैंने पूछा- ये फल किसके लिए हैं?
तो बुआ ने कहा- ये मैंने अपने एक रात के पति के लिए रखे हैं, आज रात को मैं अपने पति को अपने हाथों से खिलाऊंगी.
बुआ ने एक बड़ी थाली में सारे फल सजा लिए और लाकर मेरे पास बैठ गई। और मुझे फल खिलाने लगी। मुझे जिंदगी में पहली बार बुआ ने अपने हाथ से इतने प्यार से फल खिलाया था
फल खाने के बाद बुआ ने मुझसे कहा ।
( अगले आप जो भी पड़ेंगे यह सुनेंगे वह मेरे बुआ के आवास होगी )
मैंने धीरे से उसके कान में फुसफुसाया " आ जाओ सैंया … अब दिखाओ अपना प्यार मेरे दूध पीकर ”
नयन बोला, “ठीक है बुआ ।” फिर मैंने अपना ब्लाउज धीरे-धीरे निकाला, ब्रा भी उतारी, मेरे बड़े-बड़े चूची बाहर आ गए, निप्पल्स टाइट होकर खड़े थे। वह पास आया, पहले मेरे निप्पल को चूमा, फिर मुँह में लेकर चूसने लगा। “बुआ , कितने नरम हैं…” वो बोला। मैंने कहा, “आराम से, जल्दी बाज़ी मत करो ।” उसने एक चूची चूसा और हाथ से दूसरे को मसलता रहा, निप्पल को भी जीभ से घुमाता, चूसता, काटता हल्के-हल्के से। अब मैं सिसकारी ले रही थी, “आह्ह… स्स्स… नयन , अच्छा लग रहा है…” मेरी चूत गीली हो रही थी, थोड़ी देर बाद मैंने उसके सिर को अपने चूची में दबाया ।
फिर मैंने कहा, “अब मेरी नाभि चूमो।” वो नीचे झुका, नाभि पर किस किया, जीभ से चाटा, नीचे से ऊपर चुची की तरफ आता रहा, फिर दोनों चुचियों को बारी-बारी चूसता। इस दौरान मैंने अपना पेटीकोट खोल दिया, अब सिर्फ पैंटी में थी। नयन ने मेरी पैंटी भी उतार दी, मैं पूरी नंगी हो गई। मेरी चूत पर हल्के बाल और गीलापन थी। नयन घबराया नहीं, मेरे पैरों को चूमा, जाँघों को, फिर चूत के पास आया। मैंने इशारा किया, वो मेरी चूत चाटने लगा, जीभ अंदर डालकर, क्लिट को चूसता। “आह्ह… नयन… उफ्फ्फ… ऐसे ही…” मैं काँप रही थी। थोड़ी देर बाद उसने अपने कपड़े उतार दिए।
दुसरी बार नयन का लंड देखा तो होश उड़ गए। उसने अपना पैंट उतारा, लंड बाहर आया – मेरे पति से डबल मोटा, डबल लंबा, कम से कम ९ इंच, मोटाई ऐसी कि मुट्ठी नहीं भरती हो । मैं डर गई, सोचा ये तो मेरी चूत फाड़ देगा। लेकिन मैं कुछ नहीं बोली , बस उसने मेरे माथे को चूमा , होठों को चूमा, चूची को मसलता रहा। मैंने इशारा किया, वो मेरे ऊपर आया। मैंने उसका लंड पकड़ा, अपनी चूत पर रखा। पहले झटके में आधा लंड अंदर गया, मेरी चीख निकल गई, “आआआह्ह्ह… उई माँ… फट गई…!” चूत से गंदा पानी निकला, जलन हुई। पर वह डर नहीं गया, रुक गया। मैंने दिलासा दिया, “कुछ नहीं नयन , ऐसे ही होता है , गंदा पानी है, जारी रखों ।”
नयन बोला, “ठीक है बुआ ।” फिर धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। पूरा लंड अंदर जाता तो मैं बेहोश सी हो जाती, लेकिन जोश में थी, उसका साथ दे रही थी। “आह्ह… स्स्स… नयन… धीरे… उफ्फ्फ… कितना मोटा है तेरा लंड… मेरी चूत भर दी…” वो बोला, “बुआ, कितनी टाइट है तुम्हारी… चूत आह्ह…” मैंने पैर उसके कमर पर लपेटे, अब वह घोड़ी स्टाइल में धक्के मारने लगा , मेरे चूची हर धक्का के साथ उछलता । फिर मैं उसके ऊपर आई, उसका लंड पकड़कर बैठ गई, धीरे-धीरे उछली, “पछ पछ… आह्ह… उम्ह्ह…” आवाजें आ रही थीं। नयन ने मेरे चूंतड़ पकड़े के , नीचे से धक्के मारे। मैंने उसकी छाती पर हाथ रखकर उछलने लगी।
फिर मैंने कहा, “नयन, अब पीछे से…” वो पीछे आया, मेरी गांड ऊपर की, लंड चूत में डाला, डॉगी स्टाइल में जोर-जोर से पेलने लगा। “पट पट पट… आह्ह… बुआ… कितनी गर्म है तुम्हारी बुर… उफ्फ्फ…” मैं चिल्लाई, “चोद नयन… जोर से… फाड़ दे अपनी बुआ की चूत… आआह्ह्ह… हाँ… ऐसे ही…” उसने मेरे बाल पकड़े, कमर पकड़ी, तेज धक्के मारे। मैंने तकिया मुँह में दबाया, लेकिन मुंह से कामुक आवाजें निकल रहे थे, “उम्ह्ह्ह… ओह्ह्ह… नयन… आह्ह…” वो मेरी गांड पर थप्पड़ मारता, लंड अंदर-बाहर। फिर मैंने उसे लिटाया, ६९ पोजीशन में, मैं उसका लंड चूसी – मुँह में लिया, जीभ घुमाई, गले तक उतारा, वो मेरी चूत चाटता। और बोला “बुआ… तुम्हारा रस…कितना मीठा है…” मैं बोली, “चूस नयन… ”
फिर वापस मिशनरी में, वो मेरे ऊपर, लंड पूरा अंदर, धक्के तेज। मेरी चूत से आवाजें, “फछ फछ… पछ पछ…” मैं झड़ने लगी, “आह्ह… नयन … मैं झड़ गई… उफ्फ्फ…” शरीर काँपा रही थी , लेकिन वो रुका नहीं, जारी रखा। उसकी उम्र कम लेकिन स्टैमिना, लंड तगड़ा। आखिर वो बोला, “बुआ… आने वाला है…” मैं बोली, “अंदर ही डाल… कुछ नहीं होगा …” वो जोर से धक्का मारा, वीर्य अंदर छोड़ दिया, गर्म-गर्म तभी मुझे लगा उसका वीर्य मेरी बच्चेदानी में चला गया हो मैंने इस बात को इतना महत्व नहीं दिया क्योंकि की हम दोनों पसीने से तरबतर थे और वह चिपके हुए लेटे था
................ भाग 2 का अंत होता हुआ और भाग 3 बहुत जल्द आयेगी ...........


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