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Thriller बेटे के दोस्त ने आंटी को सम्मोहित(hypnotize) किया....फिर क्या हुआ?
#1
यह एक काल्पनिक कहानी है और इसका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है।

इस कहानी के सभी पात्र 18 वर्ष से अधिक आयु के हैं।

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चैताली घोष - लगभग 40 साल की बंगाली महिला, जो विधवा हैं। उसका फ़िगर 38D-32-40 है। वह गुड़गांव में वाटिका रियल एस्टेट में एग्जीक्यूटिव के तौर पर काम करती हैं।
 
आदित्य घोष – 21 साल का कॉलेज स्टूडेंट और चैताली का बेटा।
 
हरीश – आदित्य के कॉलेज का दोस्त।
 
मिस्टर और मिसेज चटर्जी - चैताली के माता-पिता और आदित्य के नाना-नानी।


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गुड़गांव की उमस भरी शाम हवा में भारीपन लेकर आई थी। आदित्य के अपार्टमेंट के लिविंग रूम में एयर कंडीशनर की गूँज के बीच हरीश सोफे पर पसरा हुआ था। उसकी उंगलियों के बीच एक चांदी का पेंडेंट धीरे-धीरे झूल रहा था। हरीश के चेहरे पर एक अजीब सी चमक थी, एक ऐसी भूख जो किताबों और इंटरनेट पर पढ़े गए हिप्नोसिस के प्रयोगों से जन्मी थी। वह अब केवल सिद्धांतों से संतुष्ट नहीं था; उसे एक जीवित, सांस लेते हुए शिकार की तलाश थी।
 
"अबे देख, ये सिर्फ एक खिलौना नहीं है, आदित्य," हरीश ने पेंडेंट को हवा में लहराते हुए कहा। उसकी आवाज़ में एक किस्म का सम्मोहन था। "ये दिमाग के उन दरवाजों को खोल देता है जिन्हें समाज और नैतिकता ने बंद कर रखा है। एक बार जब कोई इस लय में खो जाता है, तो वह वही करता है जो मैं चाहता हूँ।"
 
आदित्य, जो अपने दोस्त की बातों को केवल एक मज़ाक समझ रहा था, हंसा। "तू पागल हो गया है, हरीश। असली दुनिया फिल्मों जैसी नहीं होती। कोई बस एक पेंडेंट देखकर अपना होश नहीं खो देता।"
 
हरीश ने एक कुटिल मुस्कान के साथ पेंडेंट को अपनी हथेली में बंद कर लिया। "चुनौती स्वीकार है। बस सही मौके और सही इंसान का इंतज़ार है।"
 
तभी मुख्य दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई। चैताली घोष अंदर दाखिल हुईं। बयालीस साल की उम्र में भी उसकी खूबसूरती किसी युवा लड़की को मात दे सकती थी। वैटिका रियल एस्टेट की एग्जीक्यूटिव होने के नाते उसके पहनावे में एक पेशेवर सख्ती थी, लेकिन उसकी रेशमी साड़ी उसके उभारों को पूरी तरह छुपा नहीं पा रही थी। 38D के भारी मम्मे ब्लाउज के कपड़ों को फाड़ने को बेताब लग रहे थे, और उसकी 40 इंच की चौड़ी गांड और भारी कूल्हे हर कदम के साथ एक मदहोश कर देने वाली लय में हिल रहे थे। विधवा होने के बाद उसके जीवन में काम और बेटा ही सब कुछ था, लेकिन उसकी आँखों में एक दबी हुई, अनकही प्यास थी जिसे उसने सालों से दबा रखा था।
 
"आदित्य, मैं आ गई," चैताली ने अपना बैग मेज़ पर रखते हुए थकान भरी आवाज़ में कहा, ।
 
"मम्मी, आप आ गईं? देखिए, हरीश आया है," आदित्य ने उठते हुए कहा।
 
चैताली ने एक हल्की मुस्कान के साथ हरीश की ओर देखा। "नमस्ते हरीश, कैसे हो? बहुत दिनों बाद आए।"
 
हरीश खड़ा हुआ, उसकी नज़रें चैताली के चेहरे से फिसलकर उसके गहरे गले वाले ब्लाउज के बीच की घाटी में जा टिकीं। "नमस्ते आंटी। बस आदित्य के साथ कुछ प्रोजेक्ट्स पर बात करनी थी। वैसे, चड्डेर्जी अंकल और आंटी कहाँ हैं?"
 
"वो एक दोस्त के यहाँ डिनर पर गए हैं, शायद देर से आएंगे," चैताली ने अपनी साड़ी का पल्लू ठीक करते हुए जवाब दिया।
 
हरीश के दिमाग में बिजली कौंधी। घर खाली था, केवल वह, आदित्य और यह कामुक महिला। उसने धीरे से पेंडेंट अपनी जेब से निकाला।
 
"आंटी, आप बहुत थकी हुई लग रही हैं। क्या मैं आपको एक छोटी सी रिलैक्सेशन तकनीक दिखाऊं? मैं ने हाल ही में एक कोर्स किया है, तनाव दूर करने के लिए बहुत कारगर है," हरीश ने अपनी आवाज़ को मखमली और धीमा बनाते हुए कहा।
 
चैताली ने संदेह से उसे देखा। "रिलैक्सेशन? मुझे इसकी ज़रूरत तो है, ऑफिस में आज बहुत काम था।"
 
"बस दो मिनट, आंटी। आप बस यहाँ सोफे पर आराम से बैठ जाइए और मेरी आँखों में देखिए," हरीश ने उन्हें निर्देशित किया।
 
चैताली सोफे पर बैठ गईं। हरीश उसके ठीक सामने खड़ा हो गया। उसने पेंडेंट को उसकी आँखों के ठीक सामने लटका दिया और उसे धीरे-धीरे आगे-पीछे झुलाने लगा।
 
"मेरी आवाज़ पर ध्यान दें, आंटी... सिर्फ मेरी आवाज़। इस चमकते हुए पेंडेंट को देखें। यह आपकी पलकों को भारी कर रहा है। आपकी सारी थकान, सारी चिंताएं इस पेंडेंट के साथ नीचे गिर रही हैं," हरीश ने एक लयबद्ध स्वर में बोलना शुरू किया।
 
चैताली की नज़रें पेंडेंट के साथ घूमने लगीं। उसका दिमाग, जो ऑफिस की फाइलों और डेडलाइन्स से भरा था, धीरे-धीरे खाली होने लगा। हरीश की आवाज़ उसके कानों में शहद की तरह घुल रही थी।
 
"आपकी आँखें बंद हो रही हैं... आप गहरी नींद में जा रही हैं... जब मैं चुटकी बजाऊंगा, आप पूरी तरह से मेरी गुलाम होंगी। आप वही करेंगी जो मैं कहूंगा, और आपको इसमें असीम आनंद मिलेगा," हरीश ने फुसफुसाते हुए कहा।
 
उसने अपनी उंगलियों से एक तेज़ चुटकी बजाई। 'चटाक!'
 
चैताली का शरीर अचानक ढीला पड़ गया। उसकी आँखें खुली थीं, लेकिन उनमें कोई चेतना नहीं थी। वे एक खाली बर्तन की तरह थीं, जो अब हरीश के आदेशों से भरने के लिए तैयार था।
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बेटे के दोस्त ने आंटी को सम्मोहित(hypnotize) किया....फिर क्या हुआ? - by MohdIqbal - 11-08-2026, 11:13 PM



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