11-08-2026, 05:42 AM
खौफ और साजिश—10
शेर ने बड़ी होशियारी से बाथरूम का दरवाज़ा खोला और बिना एक भी कपड़े के, पूरी तरह नंगा अंदर दाखिल हो गया।
फव्वारे के बहते पानी की छम-छम आवाज़ और आँखों में जमे साबुन के झाग के कारण मीरा को शुरुआत में शेर की मौजूदगी का बिल्कुल भी अहसास नहीं हुआ। वह बेखबर होकर अपने बदन को रगड़-रगड़ कर धोने में लगी हुई थी।
उधर, शेर जैसे ही बाथरूम में घुसा, सामने का नज़ारा देखकर उसके कदम वहीं जम गए। उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं और मुँह खुला का खुला रह गया।
पानी की बूंदों से नहाया हुआ मीरा का बिल्कुल नंगा, गोरा बदन दोपहर की रोशनी में किसी तराशी हुई संगमरमर की मूरत की तरह चमक रहा था। ऊपर से पानी की धार उसके भरे-पूरे मम्मों से होती हुई उसके चिकने पेट और नाभि को भिगोती हुई नीचे बह रही थी।
शेर की निगाहें धीरे-धीरे नीचे सरकीं और उसकी सुराहीदार जाँघों के बीच जा टिकीं। मीरा की योनि बिल्कुल साफ़, चिकनी और बेदाग थी, और उसकी गोरी, मखमली जाँघों की रंगत देखकर शेर का लण्ड पल भर में लोहे की तरह सख्त होकर अकड़ गया।
शेर ( मन ही मन कामुक उन्माद में हांफने लगा): "वाह रे किस्मत! .. ऊपर वाले ने सीधे जन्नत का दरवाज़ा ही खोल दिया! ऐसी साफ़-सुथरी और मक्खन जैसी चूत और इतनी गोरी जाँघें तो मैंने सपनों में भी नहीं देखी थीं!"
शेर ने बिना कोई आवाज़ किए अपने नंगे कदमों को आगे बढ़ाया और उसकी नज़र नीचे फर्श पर पड़ी गीली, नीली पैंटी पर पड़ी। उसने झुककर फर्श से मीरा की इस्तेमाल की हुई, गीली पैंटी उठा ली।
पानी की छम-छम के बीच पीछे किसी की गर्म साँसों और साये का अहसास होते ही मीरा झटके से घूमी। सामने शेर को बिल्कुल नंगा देखकर उसकी चीख निकल गई।
उसने बदहवासी में अपने दोनों हाथों से अपने नंगे मम्मों और जाँघों को ढकने की नाकाम कोशिश की।
मीरा (खौफ और नफरत से थर-थर कांपते हुए, चीख पड़ी): "शेर?! तू... तू यहाँ क्या कर रहा है?! निकल यहाँ से! मैंने तुझे बाहर भी साफ़ कह दिया था कि मैं तेरी तरफ देखना भी नहीं चाहती! मेरी नज़रों के सामने से दूर हो जा नीच!"
लेकिन शेर के चेहरे पर वही शैतानी मुस्कान फैली हुई थी। उसकी नज़र मीरा की बात पर कम और अपने हाथ में उसकी गीली, नीली पैंटी पर ज़्यादा थी। उसका ध्यान पैंटी पर लगे गीले दाग पर था और वह उसे अपने हाथ से महसूस कर रहा था।
शेर (पैंटी को उंगलियों में घुमाते हुए, कामुक ठहाका लगाता है): "अरे-अरे मीरा रानी! इतना झूठ भी मत बोलिए... मुँह से तो ऐसे डांट रही हैं जैसे मुझसे घिन आ रही हो, पर ज़रा इस बेचारी पैंटी की हालत तो देखिए!"
शेर ने उस पैंटी को अपनी नाक के पास लाकर एक गहरी सांस खींची, और फिर मीरा की आँखों में आँखें डालकर बेशर्मी से मुस्कुराया।
शेर (ताज़े रस से भीगे हिस्से की तरफ इशारा करते हुए ताना कसता है): "देखिए तो सही... कैसे आपके इस रसीले पानी से पूरी पैंटी तर-बतर हो रही है! अगर मुझसे इतनी ही नफरत है रानी साहब, तो यह चूत का पानी क्या आपके साहब की याद में बह रहा है? बदन तो आपका तरस रहा है मेरे लिए!"
इतना कहते ही शेर ने मीरा के सामने ही उस पैंटी के भीगे हुए हिस्से पर अपनी जीभ टिका दी और उसे बुरी तरह चाटना शुरू कर दिया।
शेर (पैंटी को चाटते हुए, कामुकता से आँखें मूँदकर गुर्राया): "उम्मम्म्म... वाह मीरा! क्या गज़ब का स्वाद है... मज़ा आ गया! आपकी इस जवानी का रस तो शहद से भी ज़्यादा मीठा है!"
मीरा (अपनी ही पैंटी को उस हैवान के मुँह में देखकर घोर अपमान और बेकाबू कामुक लज़्ज़त के तीखे संगम से तड़प उठी): "आह्ह्... उफ़्फ़... शेर... नीच... नीच इंसान... मत कर ऐसा... श्श्श्..."
शेर ने पैंटी को चाटना बंद किया और उसे एक तरफ फेंक दिया। उसकी आँखें वासना के मारे लाल हो चुकी थीं। उसने फव्वारे के बहते पानी के नीचे मीरा की तरफ अपने नंगे जिस्म को बढ़ाया और सीधे उसकी आँखों में देखा।
शेर (अपनी जीभ से होठों को चाटते हुए कमीनेपन से फुसफुसाया): "अरे मीरा रानी... जब इस कपड़े में इतना स्वाद है, तो आपकी असली जगह पर कितना रस होगा? आपका यह गरम बदन चिल्ला-चिल्लाकर कह रहा है कि 'शेर, इस सूखी पैंटी को क्या चाट रहा है, आ और मेरी असली जगह से सीधा स्वाद ले!'"
मीरा (पानी के नीचे कांपती हुई, बदहवासी में सिर हिलाती है): "नहीं... नहीं शेर... ऐसा मत कर... खुदा के लिए बाहर निकल जा... आह्ह्..."
लेकिन शेर ने उसकी एक न सुनी। उसने झटके से मीरा को पीछे दीवार से सटा दिया। पानी की ठंडी धार दोनों के नंगे शरीरों पर गिर रही थी।
शेर ने मीरा के दोनों हाथों को ऊपर उठाकर दीवार से चिपका दिया और अपनी चौड़ी काली जाँघों से उसकी गोरी, नंगी टाँगों को चौड़ा करके फैला दिया। मीरा की आँखें डर के मारे फैली हुई थीं, हाथ दोनों ऊपर थे, और उसके दोनों स्तन ऊपर की तरफ उठे हुए थे, जिन पर गुलाबी निप्पल डर या उत्तेजना के मारे खड़े थे।
मीरा की साफ़, चिकनी और गीली योनि अब सीधे शेर के मुँह के सामने नंगी थी, शेर की निगाहें योनि के बीच डर के मारे थरथराते होंठों पर पड़ी। "अरे मीरा जी, देखो तो कैसे खुल रही है मेरे को देख के।"
शेर ने अपना सिर नीचे झुकाया और सीधे मीरा की योनि पर अपना मुँह जमा दिया। उसने अपनी गर्म, जीभ बाहर निकाली और उसकी योनि के सबसे नाज़ुक हिस्से को नीचे से ऊपर तक चाटना शुरू कर दिया।
मीरा (पानी की धार के बीच जैसे ही शेर की जीभ उसकी चूत के नाज़ुक हिस्से से टकराई, उसकी पूरी देह ऐंठ गई और एक तीखी चीख-सह-आह निकल गई): "आअाह्ह्ह्! उफ़्फ़... शेर... श्श्श्... यह क्या... आह्ह्!"
शेर किसी भूखे जानवर की तरह मीरा की चूत के रस को अपनी जुबान पर समेटने लगा। वह उसकी योनि के दानों को अपने होठों में भरकर चूसने लगा और अपनी जीभ को गहराई तक अंदर-बाहर करने लगा। बहता हुआ पानी और उसकी गर्म लार मिलकर मीरा के निचले हिस्से में आग लगा रहे थे।
मीरा (मन ही मन इस घोर पाप और ज़िल्लत से जलते हुए, पर बदन के बेकाबू मजे में तड़पते हुए अपनी कमर को अनजाने में शेर के मुँह पर रगड़ने लगी): "हे ईश्वर... मुझे मार क्यों नहीं देते? यह हैवान... यह हैवान मेरी चाट रहा है... और मेरा नीच बदन... उफ़्फ़... कितना मज़ा आ रहा है... आह्ह्... श्श्श्... शेर... मत चूस वहाँ... मर जाऊँगी... आह्ह्!"
मीरा इतनी शॉक्ड थी कि उसे पता ही नहीं चला कि शेर के हाथ कब उसके हाथों को छोड़ चुके थे। वह अब भी स्तब्ध खड़ी अपने दोनों हाथ ऊपर दीवार से चिपकाए हुए थी, जैसे उसकी पूरी देह काठ की हो गई हो।
शॉवर से गिरती पानी की ठंडी धार उसकी गर्दन और स्तनों से होती हुई बह रही थी।
उसे अहसास ही नहीं हुआ कि शेर की पकड़ ढीली हो चुकी है, क्योंकि उसका ध्यान उस खौफ और छुअन पर ही अटका हुआ था। शेर का एक भारी, हाथ उसकी गोरी, चिकनी और भीगी हुई जांघ पर रेंग रहा था। उसकी हर उंगली मीरा की नंगी त्वचा पर एक खौफनाक सिहरन पैदा कर रही थी। वहीं उसका दूसरा हाथ नीचे सरककर उसकी गोल, सुडौल गांड पर कसकर टिका हुआ था, जहाँ उसकी उंगलियों की पकड़ मीरा की गोरी रंगत में गहरे लाल निशान छोड़ रही थी।
मीरा का सांस लेना भारी हो चुका था। वह दीवार से सटी, बिना कोई हरकत किए बस शेर की इस दरिंदगी भरी छुअन को महसूस कर रही थी, जहाँ डर, अपमान और एक अनचाही कामुकता का तूफ़ान उसे अंदर ही अंदर निगल रहा था।
शेर का जो हाथ मीरा की भीगी हुई जांघ पर था, वह धीरे-धीरे सरकता हुआ उसकी योनि के बिल्कुल पास आ पहुँचा। उसकी उंगलियों की भारी छुअन मीरा की संवेदनशील त्वचा पर एक अजीब सी सिहरन दौड़ा रही थी। शेर ने मीरा की योनि के पास से अपना चेहरा थोड़ा पीछे हटाया, ताकि उसकी उंगली को अंदर जाने की पूरी जगह मिल सके।
जैसे ही उसकी मोटी, बेपरवाह उंगली ने मीरा की गीली और तंग योनि की गहराई में झटके से प्रवेश किया, मीरा के हलक से एक तीखी, दर्द और बेकाबू उत्तेजना से भरी चीख निकल गई—"आह्ह्!" उसका पूरा जिस्म दीवार से सटकर ऐंठ गया और उसके ऊपर उठे हुए स्तन जोर-जोर से हांफने लगे।
उंगली को अंदर धकेलने के तुरंत बाद शेर ने एक पल की भी देर नहीं की और अपना मुँह दोबारा नीचे झुकाकर मीरा की योनि को फिर से दीवानों की तरह चाटना शुरू कर दिया। उंगली की गहरी हलचल और जीभ की गरम, गीली लपटों का यह दोहरा हमला मीरा को पूरी तरह से लाचार और मदहोश करने लगा।
पानी की छम-छम के बीच मीरा की बेकाबू आहें और सिसकियाँ बाथरूम की दीवारों से टकराकर गूंजने लगीं।
पानी की धार दोनों के तपते शरीरों पर लगातार गिर रही थी, लेकिन नीचे की आग ठंडी होने के बजाय और भड़कती जा रही थी।
शेर का मुँह मीरा की योनि के रसीले उभारों पर बेदर्दी से रेंग रहा था। उसकी जीभ जब-जब मीरा की दानेदार नाज़ुक त्वचा को चाटती और चूसती, मीरा का पूरा बदन बिजली के झटके की तरह ऐंठ उठता।
शेर (मुँह को उसकी चूत से थोड़ा हटाकर, जीभ से अपनी मूछों पर लगा रस चाटते हुए कामुक उन्माद में गुर्राया): "आह्ह् मीरा रानी! क्या मक्खन जैसा रस है... कसम से, आज तक ऐसा मीठा पानी नहीं पिया इस शेर ने! देखो, तुम्हारी यह चूत कैसे थिरक रही है मेरे मुँह के ऊपर!"
मीरा (दीवार से चिपकी, पानी की बूंदों के बीच अपनी आँखें भींचकर तड़प रही थी): "आह्ह्... उफ़्फ़... शेर... बस करो... अब और नहीं... श्श्श्... मर जाऊँगी मैं..."
लेकिन शेर रोकने वाला नहीं था। उसने अपनी जीभ की धार को और तेज़ कर दिया और मीरा की योनि के ऊपरी दाने को अपने होठों के बीच भरकर ज़ोर से चूसने लगा, साथ ही भीतर फँसी अपनी उंगली की रफ़्तार बढ़ा दी।
उस तीखे, ज़हरीले मजे का हमला इतना ज़बरदस्त था कि मीरा के घुटने जवाब देने लगे। उसके हाथ, जो दीवार पर टिके थे, ढीले पड़ गए और उसने बेबसी में शेर के गीले बालों को अपने हाथों में जकड़ लिया।
वह न चाहते हुए भी अपनी कमर को आगे धकेलकर अपने कामुक हिस्से को शेर के मुँह पर और कसकर रगड़ने लगी।
मीरा (गहरे गिल्ट और बेकाबू उत्तेजना के चरम पर पहुँचकर रोते-हाँफते हुए चीख उठी): "उफ़्फ़... आअाह्ह्ह्! शेर... यह... यह क्या हो रहा है... श्श्श्... मत करो इतना... आह्ह्... मेरी जान निकल जाएगी... उफ़्फ़!"
शेर ने उसकी जाँघों पर अपनी पकड़ और सख्त कर दी। वह समझ गया था कि मीरा अपनी उत्तेजना के बिल्कुल करीब पहुँच चुकी है। वह किसी दरिंदे की तरह उसकी चूत के रस को घट-घट पीने लगा।
मीरा की सांसें उखड़ चुकी थीं। बदन के भीतर एक भयानक तूफान उठ रहा था—जहाँ एक तरफ अपनी आत्मा का कत्ल होने का गम था, तो दूसरी तरफ एक नीच नौकर की जीभ से मिल रहा ऐसा चरम सुख जो उसे अपनी पूरी शादीशुदा जिंदगी में कभी महसूस नहीं हुआ था।
मीरा (कांपती हुई, अपनी कमर को शेर के चेहरे पर झटके से मारते हुए चरम आनंद में सिहर उठी): "आह्ह्ह्... शेर... गया... सब खत्म हो गया... उफ़्फ़... श्श्श्!"
मीरा का पूरा जिस्म थर-थर कांपने लगा और उसकी योनि से रस का एक और गरम फव्वारा छूट पड़ा, जो सीधे शेर की जीभ और मुँह पर बहने लगा। वह बेजान सी दीवार के सहारे ढीली पड़ गई, उसकी सांसें धौंकनी की तरह चल रही थीं और आँखें आंसुओं से भरी हुई थीं।
शेर ने उस पूरे बहते रस को अपनी जीभ पर समेटा, गहरी सांस ली और खड़ा होकर सीधे मीरा के रोते हुए चेहरे को देखने लगा।
शेर (अपनी जीभ होठों पर घुमाते हुए, वासना से भरी हँसी के साथ ताना मारता है): "वाह रानी साहब! मान गए आपकी इस जवानी को! मुँह से तो बड़ा 'ना-ना' कर रही थीं, पर नीचे से तो इस गरीब नौकर के मुँह में अपनी पूरी जवानी उड़ेल दी आपने!"
मीरा बस बेजान सी खड़ी पानी की धार के नीचे रोती रही। उसका जिस्म शांत हो चुका था, लेकिन उसकी आत्मा गिल्ट की आग में पूरी तरह भस्म हो रही थी।
शेर खड़ा हुआ, तो उसका लोहे जैसा कड़क लंड मीरा की नाभि और नंगे पेट पर रगड़ खाने लगा। उसकी निगाहें मीरा के चेहरे पर टिकी थीं, जो पानी की धार के नीचे ढीली और बेजान सी खड़ी हांफ रही थी।
शेर (अपनी हथेली से मीरा के दोनों नंगे मम्मों को एक साथ दबोचते हुए और अपने सख्त लंड को उसके पेट पर दबाते हुए फुसफुसाया): "क्यों मीरा रानी? चूत का पानी निकालकर सोच रही हो कि खेल खत्म हो गया? असली खेल तो अब शुरू होगा जब यह शेर अपना यह मोटा लंड आपकी इस गोरी चूत के अंदर उतारेगा!"
मीरा (चूत के पानी निकलने के बाद की थकान और गिल्ट में चूर थी, लेकिन शेर के लंड का सख्त स्पर्श अपने पेट पर महसूस होते ही खौफ से उसकी आँखें खुल गईं): "नहीं... उफ़्फ़... शेर... नहीं... यह नहीं... प्लीज... ऐसा मत करो..."
शेर (कामुक ठहाका लगाकर ताना कसता है): "अरे रानी साहब, जब मुँह से चूत का पानी पीकर इतना मज़ा आया, तो सोचिए जब यह अंदर जाएगा तो कितना स्वर्ग मिलेगा! अपनी इस कसम को पूरा कीजिए और चुपचाप इस दीवार से चिपकी रहिए!"
शेर ने मीरा की कमर को कसकर पकड़ा और उसके एक पैर को उठाकर अपनी जाँघ पर रख लिया। मीरा की पूरी तरह गीली और खुली हुई योनि के मुहाने पर उसने अपने कड़क, फूले हुए लंड की सुपारी को टिका दिया।
पानी की धार दोनों के जिस्मों पर गिर रही थी। शेर ने अपनी कमर को थोड़ा पीछे खींचा और फिर एक ही झटके में अपना आधा लंड मीरा की बेहद टाइट और भीगी हुई चूत में उतार दिया।
मीरा (दर्द, खिंचाव और उस अनजाने शारीरिक अहसास से जोर से चीख उठी, उसकी उंगलियाँ शेर के मजबूत कंधों में गड़ गईं): "आह्ह्ह्! ... मर गई... शेर निकालो इसे... उफ़्फ़... बहुत बड़ा है... आह्ह्!"
शेर (अपनी कमर को वहीं रोककर, मीरा की नंगी छाती पर अपना मुँह रगड़ते हुए गुर्राया): "उम्मम्म्म... क्या टाइट चूत है आपकी रानी साहब! कसम से, जैसे कोई रेशमी मखमली गुफा हो... अभी तो आधा ही गया है, पूरा जाना बाकी है!"
शेर ने बिना दया दिखाए अपनी कमर का एक और ज़ोरदार झटका मारा, और उसका पूरा लंड मीरा की योनि की गहराइयों को चीरता हुआ सीधे अंदर समा गया।
मीरा (आँखें फटी की फटी रह गईं, मुँह से सांस लेना मुश्किल हो गया): "उफ़्फ़... आअाह्ह्ह्... श्श्श्... हे भगवान... यह क्या पाप हो गया... आह्ह्..."
शेर ने दीवार से सटी मीरा की कमर को दोनों हाथों से भींचा और अपनी कमर को तेज़ रफ़्तार में आगे-पीछे पटकना शुरू कर दिया। पानी की छम-छम के साथ-साथ चूत के गीलेपन और लंड की रगड़ की थप्प-थप्प की खौफनाक आवाज़ पूरे बाथरूम में गूंजने लगी।
शेर (अपनी रफ़्तार बढ़ाते हुए, मीरा के गालों को चूमते और ताना मारते हुए बोला): "वाह मीरा रानी... देखो तुम्हारा यह नौकर आज तुम्हारा राजा बनके तुम्हें कैसे ठोक रहा है! बोलो... आ रहा है न मज़ा?"
मीरा (ऊपर से दर्द और आत्मा की चीख, लेकिन नीचे से चूत में लंड की घर्षण से उठती भयानक कामुक तरंगें... वह रोते-हाँफते हुए बेकाबू आहें भरने पर मजबूर हो गई): "आह्ह्... उफ़्फ़... शेर... धीमे... श्श्श्... मर जाऊँगी... आह्ह्... उफ़्फ़... हे भगवान मुझे माफ कर देना... आह्ह्!"
हर झटके के साथ मीरा के दोनों सुडौल मम्मे ऊपर-नीचे उछल रहे थे और शेर उन पर अपनी लार टपकाते हुए उन्हें मसले जा रहा था। मीरा गिल्ट, लाचारी और शारीरिक मजे की उस खौफनाक भंवर में पूरी तरह डूब चुकी थी जहाँ से वापसी का कोई रास्ता नहीं बचा था।
बाथरूम में पानी की तेज़ धार के नीचे शेर की कमर की थप्प-थप्प की आवाज़ें और तेज़ होती चली गईं। हर झटके के साथ उसका मोटा लंड मीरा की योनि की गहराइयों को बेरहमी से नाप रहा था।
मीरा का नंगा बदन दीवार से सटा हुआ थर-थर कांप रहा था। उसके दोनों सुडौल मम्मे शेर के हर धक्के के साथ तेज़ी से उछल रहे थे, जिन पर ऊपर से गिरता पानी और शेर की लार मिलकर एक अजीब सी चमक पैदा कर रहे थे।
शेर (मीरा की गर्दन पर अपने दाँत गड़ाते हुए और कमर की रफ़्तार को और बढ़ाते हुए गुर्राया): "आह्ह् मीरा रानी! क्या कसाब है आपकी इस चूत में... कसम से, आपके साहब ने तो सालों में भी ऐसा मज़ा नहीं लिया होगा जो आज यह नौकर ले रहा है!"
मीरा (दर्द, खिंचाव और जिस्म के भीतर उठती उस बेकाबू उत्तेजना के बवंडर में पिसती हुई, रोते-हांफते हुए चीख उठी): "आह्ह्... उफ़्फ़... शेर... बस करो... श्श्श्... मर जाऊँगी मैं... आह्ह्... इतनी ज़ोर से मत करो... उफ़्फ़!"
लेकिन शेर पर वासना का भूत सवार था। उसने मीरा की दोनों बाहों को पीछे से मरोड़कर पकड़ा और अपनी कमर को और तेज़ी से पटकना शुरू कर दिया। उसकी हर पेलम-पेल के साथ मीरा के मुँह से सिसकियाँ और कामुक आहें एक साथ फूट रही थीं— "उफ़्फ़... आअाह्ह्ह्... श्श्श्..."
शेर को महसूस हुआ कि उसकी अपनी कमर में भी एक मीठा सा दर्द और खिंचाव उठ रहा है। उसका वीर्य अब चरम सीमा पर पहुँच चुका था और बाहर आने को बेताब था।
शेर (अपनी आँखें मूँदकर, मीरा के मम्मों को दोनों हाथों में भरकर बेदर्दी से भींचते हुए हांफने लगा): "रानी साहब... अब... अब मेरा छूटने वाला है! आज तो इस शेर का पूरा पानी आपकी इसी गोरी चूत के अंदर ही गिरेगा!"
मीरा (खौफ से आँखें फाड़े, बदहवासी में सिर हिलाते हुए चीखी): "नहीं... नहीं शेर! अंदर मत गिराना... प्लीज... बाहर निकालो... मैं बर्बाद हो जाऊँगी... सरताज मुझे मार डालेंगे... प्लीज शेर!"
शेर (कामुक अट्टहास लगाते हुए, आखरी तीखे और गहरे धक्के मारते हुए बोला): "अरे कैसी बर्बादी रानी जी! जब पूरी की पूरी मेरी हो चुकी हो, तो यह रस भी तो मेरा ही अंदर जाएगा!"
इतना कहते ही शेर ने एक आखरी, बेहद ज़ोरदार झटका मारा और अपने लंड को मीरा की चूत में आखरी सीमा तक दबा दिया। अगले ही पल, उसके कड़क लंड से गाढ़े और गरम वीर्य की धारें मीरा की योनि की गहराई में छूटने लगीं।
शेर (चरम सुख की संतुष्टि में एक लंबी, भारी आह भरते हुए): "आह्ह्ह्... उफ़्फ़... मीरा रानी... क्या मज़ा दिया है तुमने आज!"
मीरा के भीतर शेर का गरम पानी भरता जा रहा था। उस अहसास से मीरा का पूरा वजूद कांप उठा। उसकी आत्मा घोर पाप और ज़िल्लत के बोझ से पूरी तरह टूट चुकी थी, जबकि उसका शरीर उस गरम वीर्य की छुअन से सिहर रहा था।
सब कुछ शांत होने के बाद, शेर ने धीरे-धीरे अपना ढीला पड़ता लंड उसकी चूत से बाहर खींचा। चूत के मुहाने से शेर का सफ़ेद वीर्य और मीरा का कामुक रस मिलकर बहता हुआ उसकी नंगी जाँघों पर से नीचे पानी में घुलने लगा।
मीरा बेजान होकर दीवार के सहारे फर्श पर ढह गई। पानी की धार उसके सिर पर गिर रही थी और वह अपने मुँह पर हाथ रखकर बिना कोई आवाज़ किए फूट-फूट कर रोने लगी।
Deepak Kapoor
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