09-08-2026, 06:37 PM
(This post was last modified: 09-08-2026, 06:37 PM by nitya.bansal3. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
रात हो गई है, उमा आती ही होगी। शायद ये हमारी आखिरी रात हो साथ में", रिशा बोली। राजू ने उसे कस कर आगोश में भर लिया और कहा, "नहीं"…
[b] अब आगे...[/b]
क्या मतलब?" रिशा ने राजू के बगल में सरकते हुए पूछा। राजू भी निश्चिंत होकर सीधा लेट गया और रिशा ने उसके कांधे पर अपना सर टीका लिया। "तुम्हीं ने तो कहा था भाभी.... जब उमा यहां होगी तो हम उसके साथ क्या करेंगे" राजू ने मुस्कुराते हुए कहा.. अपनी कही बात जैसे ही रिशा को याद आई उसका बदन फिर गरम होने लगा। उसकी चूत की गुलाबी पंखुड़िया पनिया कर टपकने लगी। अपने ही ख्यालों में खोई जाने वो कब अपने देवर के जिस्म से चिपक गई और उसके लंड पर अपनी जांघें रगड़ने लगी। उसका ध्यान तब टूटा जब कड़क लंड का गरम चिपचिपा लेसदार रस उसकी मुलायम काया से को फिर से भीगो ने लगा उसके फिर से तनते हुए लंड की गर्मी ने रिशा का ध्यान तोड़ा तो नज़र आया कि राजू शैतानी मुस्कान के साथ उसके भारी स्तनो के साथ खेल रहा था। निपल की घुंडियों को मरोड़ते ही उसके जिस्म में आग सी जल पड़ी। मुस्कुराती कराह के साथ उसने इस हरकत का स्वागत किया।
"हाआअइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइ!!! "देवर जी, मैंने तो बस इक कहानी बनाई थी.. मेरा कोई पक्का इरादा नई था.. जब ये सुनते ही तुम्हारे धक्के तेज़ हो गए तो मुझे भी चुदवाने में और मजा आने लगा और मैंने गंदी गंदी कहानी और बन डाली।" इतना कहते हुए रिशा ने उसके लंड को अपनी जांघों में दबोच कर दबा लिया! मर्दाने हथियार की गर्मी ने फिर वासना का तूफ़ान उठा दिया और रिशा राजू के बगल में लेटते ही उसकी कमर पर चुत रगड़ने लगी। राजू का थोड़ा चेहरा उतर गया पर रिशा की योनि से उठी भाप ने उसके जिस्म या ख्यालों में उबाल ला दिया था। रिशा को भी थोड़ा अच्छा नहीं लग रहा था ये सब कह कर तो उसने बात संभालने के लिए राजू के लंड को थोड़ा और जोर से दबाया। "सच ही कहते है.. मर्द के लंड की भूख कभी एक औत की चूत से शांत नहीं होती.. रोज़ नए नए छेद ढूंढता है! अब ऐसे मुंह ना उतारो ..अच्छा नहीं लगता, मैं उमा को मन लूंगी। वैसे भी तुम दोनो ही जवान हो क्या पता मुझे कुछ करना ही ना पड़े?" ये कहते हुए रिशा ने अपने नाखुनों से राजू के निपल हौले हौले कुरेदने शुरू कर दिये। राजू के बदन में इस हरकत से ऐसी सिरहन सी दौड़ी कि उसके ऊपर से नीचे तक रोम रोम लंड समेता खड़े हो गए। राजू ने रिशा को अपनी बाहों में भर कर एक बार फिर चूम लिया। रिशा भी चूमते हुए उस पर ऊपर आ गई। अब लंड उसकी योनि से चिपके हुए उसकी नितंबो के बीच टीका हुआ था। योनि की गरम भाप लंड को और कड़क कर रही थी जिस से सुपाड़े की ठोकर बार बार गांड के छेद पर हो रही थी।
रिशा और राजू एक दूसरे को जकड़े हुए चुम्बनों में खोए हुए थे। पसीने की झीनी चादर में लिपटे दोनों बदन एक दूसरे पर फ़िसल रहे। उधर योनि रस में भीग कर राजू का लंड भी बड़े आराम से नितंबो की दरार में फ़िसल रहा था। जैसा जैसा वक्त गुजर रहा था दोनों की सांसे फूल रही थी, नरम चुचिया मर्दानी छाती पर रगड़ खा रहे थी। बदन इतने जोर से चिपक गए थे कि हवा भी ना गुजर पाए। धीरे-धीरे बदन के साथ कमरे का तापमन भी बढ़ चला। जाने कब राजू के सुपाड़े की नोक रिशा के गांड के छेद में फंस गई। दोनो ही चौंक उठे और चुम्बन टूट गया। रिशा और राजू एक दूजे को निहार रहे थे कि अचानक उसका लंड फड़का। रिशा "आह" करके रह गयी। अब लंड का टोपा उसकी गांड के अन्दर था. रिशा की आंखों में हवस की डोरियां तैर गई। अपने कमर को हल्का सा मटकाते हुए उसने राजू का लिंग और अंदर ले लिया। लंड मोटा और छेद छोटा, आवाज़ तो आती ही। 'आहह!!! स्स्स्स!!!! ऊओहहह!!म्म्म्माआह!!!'.... 'हाय रे ये जालिम लंड तुम्हारा, प्यार में भी दर्द देता है कमीना आह!!'
"मुझसे गंदी गंदी बातें करो ना भाभी" राजू ने रिशा को कहा।
"क्यों? ऐसा भी क्या मजा गंदी बातों में जो इसमें नहीं?" पूछते हुए रिशा ने अपने नितंबो को कसाव दिया तो सुपाड़े की जान निकल गई।
इस हरकत से दोनो के जिस्म में मादकता की तरंगें बहने लगी..
"तुम्हारी चुदाई का मज़ा नशे में बदल जाता है भाभी...प्लीज़ ना..." कहते हुए राजू ने उसकी कमर को थामा और धीरे से रिशा के कंधे पर दबाव बनाया जिसे रिशा उसके लिंग पर लगभग पूरी बैठ गई। लंड के गांड के अंदर घुसते ही रिशा की साँसें अटक गई, उसने राजू का सीना नोच लिया।
"आ-आ-आ-आ-हह-हह-हह!!!...हह-हाय जालिम, जान निकल दी फिर से!!''
"ओह्ह भाभी!!!" कहते हुए राजू ने उसके सुलगते होठों को अपने होठों के बीच दबा लिया।
"उउफ़्फ़!! तुम मुझे रिशा क्यों नहीं बुलाते हो राजू। मैं तो तुम्हें तुम्हारे नाम से ही बुलाती हूं ना आहह!!!"
"पता नहीं भाभी.. आपको भाभी बुलाना बहुत सेक्सी लगता है"बदन में एक अलग सा रोमांच और लंड में ज्यादा तनाव आता है।. ऐसा कहते ही उसकी लिंग गांड के अंदर फरक उठा।
"उफ्फ्फ.. अगर ऐसी ही बात है तो मैं भी तुम्हें देवरजी ही बुलाऊंगी-आह!!"
रिशा के मुँह से देवरजी निकलते ही राजू का लिंग फिर झटका मार गया।
"ओह मेरे प्यारे देवरजी-आह!!मम्म!!,
कभी तुम कितने भोले देवरजी-ऊहह!!! थे!! अब देखो इस भोले भले देवरजी-स्स्स!!! को कैसे अपने लंड पर बिठा कर भाभी को दो दिनों से चोद रहा है ! खुद भी बेशरम बन गया है और मुझे भी बेशरम बना दिया है और लोग कहेंगे कि इस भाभी-म्म्ह- ने अपने मासूम देवर- आह!! को बिगाड़ दिया!!"
रिशा के अल्फ़ाज़ पिघले मौम के जैसे राजू के कानों में टपक के रह गए। उसका लंड फड़कना रुक ही नहीं रहा था; मानो जैसे उसका अपने लिंग पर काबू ही ना हो। रिशा की शहद भारी आवाज उसके कानों में फिर गिरी। अह्ह्म्म्म!!! जी करता है मेरे देवर का लंड हमेशा के लिए अपनी भाभी की चूत और गांड को ऐसे ही ठोकता रहे-आह!!! और अपने लंड से अपनी प्यासी भाभी को जन्नत की सैर करवाएं!!!”
इतना कहना ही था कि राजू ने उसके मुँह में अपनी जीभ घुसा दी और उसकी आवाज़ दबी ही रह गई। फड़कते लंड की थरथराहट ने रिशा को ऐसा ही पागल बना दिया था। उसकी जीभ भी राजू से गुत्थम गुत्थी करने लगी। लपलापाती जिव्हाँ से देवर की सारी लार रिशा के मुँह में और रिशा के मुँह की लार राजू के मुँह में टपकने लगी। इधर राजू वो सारी लार गटक रहा था उधर लंड पे सवार रिशा के सब्र का बांध टूट चुका था। उसने अपनी कमर लचकाई और राजू के लिंग पर पूरा बैठ गई। कड़क लंड जड़ तक उसकी गांड में फिट हो गया। रिशा की पनियाई चूत तेज़ झड़ने लगी और उसके चिपचिपे रस में दोनों भीग गए..
दोनों की ही साँसें फूल रही थी। बिना कुछ बोले दोनो बस वासना के सागर में तैर रहे थे।
थोड़ी देर यूं ही पड़े रहने के बाद रिशा बोली "मज़ा नशे में बदलना है देवरजी?"
"हां भाभी" राजू ने जवाब दिया।
रिशा ने धीरे धीरे कमर लचकाना शुरू किया और लंड फच्च! फच्च! की आवाज से धीरे धीरे गांड में अंदर बाहर होने लगा।
“चोदो मेरे ठरकी देवर...और जोर से चोदो अपनी रंडी भाभी को और हमेशा के लिए अपनी गुलाम बना लो! इस मजे के लिए मैं ना जाने कब से तरस रही थी...आज कुछ रहम ना करना अपनी भाभी पर और मेरे सारे छेद खोल के अपने गरम गरम वीर्य से नहला दो”
रिशा के मुंह से रंडी सुन सूरज राजू का लंड और जोर से फडकने लगा और उसके धक्के पे पहले से भी ज्यादा तेजी आ गई
चूँकि गांड के छेद की चिकनाहट थोड़ी कम थी तो घर्षण ज्यादा होने से मजा और दर्द दोनों बढ़ रहे थे। राजू ने हाथ बढ़ा कर वैसलीन की डिब्बी उठाई और ढेर सारी वैसलीन लेकर अपने लिंग पर लगा दिया, चुदाई चालू रहने से ढेर सारा वैसलीन रिशा की गांड में भी चला गया। अब चिकनी दरार में लंड आराम से फ़िसल रहा था। बचा हुआ वैसलीन उसने रिशा की मुलायम निताम्बो पे फेला दिया और जाम कर उन्हें दबाने लगा। चिकने माँ पर उसकी उंगलियाँ फिसल सी जाती। इन हरकतों ने रिशा का उन्माद बढ़ा दिया और वो बहुत तेजी से कुल्हे लहराते हुए लंड अंदर लेने लगी। डोनो जिस्मो की गर्मी से वैसलीन भी पिघल कर हर जगह फेल रही थी।
जिससे नितंबों और जांघों की टक्कर दर टक्कर पे छप्प!! चाप!! की आवाज़ आ रही थी जो किसी मधुर संगीत से कम नहीं लग रही थी ओह! आह्ह!!सस्स्सआह्ह्ह्ह!! कि मदम सिस्कारियों ने भी खूब समां बनाया हुआ था। धीरे से जब रिशा को अपने आगोश से राजू ने आज़ाद किया तो वो उन्मादित होकर आराम से कमर लहराने लगी। अब राजू का लंड घपाघप पूरा गांड में घुसा जा रहा था। रिशा ने भी उसकी कलाईयाँ थाम कर सिरहाने पर दबा दी और उसके सीने से उठ गई। उसे यकीन था कि इस पोजीशन में लंड और ज्यादा आराम से अंदर जा सकता है। राजू की कलाईयां जकडे रख रिशा ने हौले हौले से कमर लचकनी शुरू कर दी, उसकी योनि राजू की झांटो पर रगड़ रही थी। मर्दाना झांटो का कड़क स्पर्श मुलायम योनि के फलो पे पड़ते ही उसके बदन में झुरझुरी होने लगी। रिशा धीरे-धीरे बेकाबू होने लगी। झुरझुरी कम्पन में बदलने लगी।
रिशा -“हाए...राजू क्या मस्त लंड है तेरा...पूरा अंदर तक घुस के चोट करता है..हर झटके में इतना जोश। तू सच में कमाल का मर्द है”
राजू -“भाभी क्या भैया ने तुम्हारी गांड कभी नहीं मारी। एक दम टाइट और कसी गांड है तुम्हारी”
रिशा -“अरे तेरे भैया तो मेरी चूत भी ढग से नहीं मार पाये...गांड क्या खाक मारते। लेकिन तूने तो सारे छेद दो दिन में ही खोल डाले”
रिशा के मुख से ये बात सुन राजू का जोश दुगना और धक्को की स्पीड चौगुनी हो गई! रिशा के सुडोल स्तन राजू के सामने झूम रहे थे. बदन की थरथराहट से स्तनो में भी कम्पन उठ रहा था जिसे वो इधर उधर छलक रहे थे। दोनों रसीले शाही टुकड़ों ने राजू की कामवासना की आग में घी का काम कर दिया। उसने गर्दन ऊंची कर अपनी जिह्वा निकल कर दोनो स्तनो को चाट लिया। सुलगते जिस्म की गर्मी से उसकी जुबान जल गई। वासना का तूफ़ान दोनो को लीलने लगा। राजू अपनी जिह्वा से रिशा के यौवन का रसपान करता रहा। जीभ लहरा लहरा कर वो स्तनो को आइसक्रीम के जैसी चाट रहा था। गीली जुबान की हरकतें और चूत पर कड़क झांटों की रगड़न से रिशा का पूरा बदन कांप रहा था। काँपती हुई कराह के साथ वो राजू के पेडू पर झड़ने लगी। "आ-आ-आ-आ-हह-हह-म्म्म्ह-ह!!...हाअइइइइइइह! मैं आई गई राजू....!" गरम लावा के जैसा रस बदन पर गिरते ही राजू ने आपा खो दिया और अपने हाथ छुड़ा कर रिशा के मांसल स्तनो को दबा लिया। रिशा भी गरम हाथों की मजबूत पकड़ से आनंदित हो उठी और अपने दोनों हाथ दीवार पर टीका दिए, जिसका बदन स्थिर हो गया और गदराए स्तन बिल्कुल राजू के चेहरे के आगे झूलने लगे।
राजू उसके निपलों को जोर से पकड़ कर खिचता हुआ मुंह के पास लता और जीभ से आस पास चाट लेता।
रिशा स्थिर उसके बदन पे टिकी हुई अपनी चुचिया अपने हाथों में दबा उसके मुँह के पास ला उसे बस लालाच दे रही थी। "क्यों देवरजी; क्या हुआ? थोड़ी और कोशिश करो ना.. उफ्फ!! इतनी देर कोई और होता तो ना करता.. अब तक तो मेरी रसीली चुचियों का रस निचोड़ देता वो!!!" रिशा के मुँह से ऐसी बातें सुनते ही राजू का जिस्म सिहर उठा। वासना के पागलपन में चूर उसने लगभाग एक स्तन को नोचते हुए उसके निपल पर एक झापड़ जड़ दिया.. चटअक्क!! "आह!!" रिशा चिल्ला उठी.
रिशा -“ हाय कितने जालिम हो देवर जी..अपनी भाभी को ऐसा भी दर्द देता है क्या कोई?”
उसपर कोई ध्यान दिए बिना राजू ने दूसरे स्तन को जोर से दबा कर रगड़ दिया जिसे कड़क निप्पल और फूल कर मोटे से हो गए। दूसरे निपल पर भी उसने एक थप्पड़ रसीद दिया। चटअक्क!! "आह!!"
राजू ने अपनी जीभ से अपनी उंगलियां गिली करी और फिर कड़क निप्प्लो पर हमला कर दिया। ताड़!! तडक्क!! चटाक!! की आवाज़ से कामरा गूंज उठा। रिशा की चीखें अब उन्माद भरी हंसी में बदल चुकी थीं। वो मदहोशी में बड़बड़ा रही थी। अहहाहाहा- और तेज़ राज्जजू!! और तेज से मारो नाआअहहहहह!! बहुत अच्छा लग रहा है!! निकाल दो मेरे बदन की सारी गरमी!! एसएसएसएस!! निम्बू समझ कर निचोड़ दो मेरे निपल मेरे देवरर जी!!!" "चूसो इन्हें...काट खाओ और मरोड़ के सारी अकड़ निकाल दो इनकी!! चूस चूस के लाल कर दो मेरी चुचियाँ!!! काट खाओ मेरा मुलायम जिस्स को अम्म्म्माआह्ह्ह्ह!!!!!" मेरे जिस्म के हर अंग पर अपनी निशानी छोड़ दो मेरे राजा ! बड़ा तड़पाती है ये चुचिया...मैं खुद मसलती हूं तो इतना मजा नहीं आता जितना मजा तेरे हाथों से मसलवाने से आ रहा है राजू उफ्फ्फ!!
राजू ने भी गदराये उभारों को किसी वहशी की तरह चुमना चाटाना जारी रखा था। उसकी लार और पसीने से दोनों चुचिया चमक रही थी गए। राजू भी मदमस्त होकर निप्पलो को काटने से पहले ही दम लगा कर स्तन की मालिश कर रहा था। दर्द होने की हद तक वो उन्हें दबाता और फिर पूरी नंगी छाती पर हथेलिया रगड़ कर चुमता जाता। रिशा अभी भी उसका लिंग जो गांड में घुसा था उसपर बैठी थी। राजू की हरकतों से आनंदित होकर उसकी आंखें चढ़ गईं। इतनी मजबूत मालिश और लम्बी चुदाई से उसकी चूत से उसकी चूत फिर झड़ने लगी. "आह्ह्ह्ह्ह!!!!!!" मैं फिर से छूट गई मेरे राजा !चूत से मादक सुगंध वाला योनि रस फूट पड़ा। इस बार जोर बहुत तेज था. रस की फुहारें राजू के बदन को जलाते हुए यहां वहां बिखर रही थी। राजू के चेहरे, छाती और जिव्हा पर भी काफी रस झड़ चुका था।
"उसके कमर के पास रस बह कर बिस्तर गिला कर रहा था। इधर रिशा का चरम उन्माद से बुरा हाल था। जड़ तक धंसे हुए लंड के झटके गांड में तूफान मचा रहे थे। उसकी जांघें बुरी तरह कांप रही थी, पूरा बदन शांत पड़ चुका था। वो बस हाथों के सहारे राजू के ऊपर टिकी हुई थी। उसकी जुबान बहार को लटक गई और उखडती सांसों के बीच उसकी लार जिह्वा से टपक कर उसकी छाती पर बहने लगी। बड़ा सुंदर दृश्य था. राजू ने भी उसके स्तनो पर बहती लार का रसास्वादन कर लिया। रिशा ने उसे खींच कर सीधा किया और दोनों टांगे उसकी कमर के पीछे फंसा कर उसका सर अपने सीने में छुपा लिया। उसने राजू को जोर से जकड़ रखा था और तेज़ सांसों से उठते-बैठते गदराए स्तन मानो राजू के लिए तकिये का काम कर रहे थे। वो अभी भी उसके भारी स्तनो का रस पी रहा था।
उसने रिशा की गद्देदार नितंबो को थाम कर उसे सहारा दिया। धीरे-धीरे वो उसके नितंब भी सहलाने लगा। अब तक गांड का छेद फेल कर काफी ढीला हो चुका था। लिंग के इतनी गहराई तक घुसे होने से अब रिशा को कोई दिक्कत नई हो रही थी। थोड़ी देर तक दोनों एक दूसरे से यूं ही लिपटे रहे।
“उफ़्फ़ देवरजी-आह”
लंड फिर फड़क गया गांड के अंदर; रिशा ने उसके कानों में धीरे से कहा, "मेरी गांड मारो ना देवर राजा! तुम्हारे मजबूत लौड़े को तरस रही है मेरी गांड.. तुम्हारे मूसल का मर्दाना दर्द महसूस करना चाहती है मेरी गांड। मारो नाआह!!" रिशा की कराह भारी पुकार से राजू खुद को रोक न पाया और मांसल नितंबो को भीच कर पकड़ लिया। उसकी नाखून उसकी मुलायम गांड में घुस गए। नाखूनो
की चुभन से रिशा उचक पड़ी जिससे लंड थोड़ा बाहर निकल आया। राजू ने उसका एक निपल ढेर सारे मांस के साथ अपने मुंह में भरा और जोर से रिशा को अपने लिंग पर खींचा। अचानक हमले से लंड फच्च की आवाज के साथ गांड में पूरा समा गया।
"आह"
उसने रिशा की गांड फिर उठा के अपने लंड पर बैठा दिया। एक और कराह..
"आह!! देवरजीइइइ!!!!सस्स्स!!!"
सुनते ही राजू ने उन्माद में फिर उसके नितंबो को उठा कर अपने लंड पर पेल दिया।
"ओह माआह!! देवर जी!!!आज मार ही डालोगे क्या अपनी भाभी को लंड पेल पेल कर”
राजू ने फिर उसकी गांड उचका कर घप्प से अपने लंड पर बैठा लिया।
"ह्ह्हाआऐइइइ ममीरिइइ गाआआँधाआह्ह्ह्ह!!!'
राजू इधर घपाघप उसकी गांड को अपने लंड पर पेल देता और उधर रिशा की कामुक कराहे उसके कानों में गूँज रही थी। "आह! आह! ओह्ह!! ओह्ह!! ददैय्या रे! ओ मेरे देवरजी! हाय!! आह्ह!! बस्स ऐसे पेलते रहो रज्जा!! तुम्हारा मुसल हाय!! मेरी ओखली ईई!! कुट डालो मेरी गांड!! धीरेईई!!! आआहह!!! हौले हौले मेरे सैंया ! फाड़ डालो मेरी गांड..मेरे राजा”
गांड चुदाई ऐसे ही मदम मदम काफी देर चलती रही। लंड का काफ़ी सारा रस गांड की दीवारों को चिकना कर चुका था। अब बस मामुली सी हरकत से भी लंड अंदर तक चला जाता। हवस के बादल फिर घिरने लगे। राजू भी अब पूरी लय से रिशा की गांड ले रहा था। अब वो सुपाड़े के लगभाग बहार आने तक गांड को ऊपर खिंचता और फिर रिशा को लंड पे बिठा लेता। उसकी मीठी बातें जोश में और इज़ाफ़ा कर रही थी। थोड़ी ही देर में चोदन की लय बदल गई। अब गांड से पूरा लंड पक से बाहर आता और फेले हुए छेद में फिर फच्च से घुस जाता। रिशा की मद्धम कराहे इस ताल में सुर दे रही थी।
पक!! . . . फच्च!! . . . "आह" पक!! . . . फच्च!! . . . "ओह" पक!! . . . फच्च!! . . . "हन्नह" पक!! . . . फच्च!! . . . "मम्ह" पक!!. . . फच्च!! . . .
"मक्खन निकल दो मेरा" फक!! . . . फच्च!! . . . "तुम्हारी मलाई से भर दो नाआह!!!" फक!! . . . फच्च!! . . . "पूरा रस उतार देना मेरी मासूम गांड में" पक!! . . . फच्च!! . . . "बस ऐसे दबोच कर पेलते रहो मेरी गांड आह्ह" पक!! . . . फच्च!! . . . "दिन भर और रात भर" पक!! . . . फच्च!! . . . "ऐसे मेरी गांड में लंड भर कर सोना है मुझे आहह" पक!! . . . फच्च!! . . . "काट खाओ मेरी भारी चुचियाँ भी" पक!! . . . फच्च!! . . . "पूरा रस निचोड़ दो देवर रज्जा!! अब मैं तुम्हें और किसी के साथ नहीं बांट सकती मेरे राजा..तुम सिर्फ मेरे हो और मैं तुम्हारी दासी। मेरी चूत और गांड पर सिर्फ तुम्हारा अधिकार है...जब चाहो चोद लेना...कभी मना नहीं करूंगी
[b] अब आगे...[/b]
क्या मतलब?" रिशा ने राजू के बगल में सरकते हुए पूछा। राजू भी निश्चिंत होकर सीधा लेट गया और रिशा ने उसके कांधे पर अपना सर टीका लिया। "तुम्हीं ने तो कहा था भाभी.... जब उमा यहां होगी तो हम उसके साथ क्या करेंगे" राजू ने मुस्कुराते हुए कहा.. अपनी कही बात जैसे ही रिशा को याद आई उसका बदन फिर गरम होने लगा। उसकी चूत की गुलाबी पंखुड़िया पनिया कर टपकने लगी। अपने ही ख्यालों में खोई जाने वो कब अपने देवर के जिस्म से चिपक गई और उसके लंड पर अपनी जांघें रगड़ने लगी। उसका ध्यान तब टूटा जब कड़क लंड का गरम चिपचिपा लेसदार रस उसकी मुलायम काया से को फिर से भीगो ने लगा उसके फिर से तनते हुए लंड की गर्मी ने रिशा का ध्यान तोड़ा तो नज़र आया कि राजू शैतानी मुस्कान के साथ उसके भारी स्तनो के साथ खेल रहा था। निपल की घुंडियों को मरोड़ते ही उसके जिस्म में आग सी जल पड़ी। मुस्कुराती कराह के साथ उसने इस हरकत का स्वागत किया।
"हाआअइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइ!!! "देवर जी, मैंने तो बस इक कहानी बनाई थी.. मेरा कोई पक्का इरादा नई था.. जब ये सुनते ही तुम्हारे धक्के तेज़ हो गए तो मुझे भी चुदवाने में और मजा आने लगा और मैंने गंदी गंदी कहानी और बन डाली।" इतना कहते हुए रिशा ने उसके लंड को अपनी जांघों में दबोच कर दबा लिया! मर्दाने हथियार की गर्मी ने फिर वासना का तूफ़ान उठा दिया और रिशा राजू के बगल में लेटते ही उसकी कमर पर चुत रगड़ने लगी। राजू का थोड़ा चेहरा उतर गया पर रिशा की योनि से उठी भाप ने उसके जिस्म या ख्यालों में उबाल ला दिया था। रिशा को भी थोड़ा अच्छा नहीं लग रहा था ये सब कह कर तो उसने बात संभालने के लिए राजू के लंड को थोड़ा और जोर से दबाया। "सच ही कहते है.. मर्द के लंड की भूख कभी एक औत की चूत से शांत नहीं होती.. रोज़ नए नए छेद ढूंढता है! अब ऐसे मुंह ना उतारो ..अच्छा नहीं लगता, मैं उमा को मन लूंगी। वैसे भी तुम दोनो ही जवान हो क्या पता मुझे कुछ करना ही ना पड़े?" ये कहते हुए रिशा ने अपने नाखुनों से राजू के निपल हौले हौले कुरेदने शुरू कर दिये। राजू के बदन में इस हरकत से ऐसी सिरहन सी दौड़ी कि उसके ऊपर से नीचे तक रोम रोम लंड समेता खड़े हो गए। राजू ने रिशा को अपनी बाहों में भर कर एक बार फिर चूम लिया। रिशा भी चूमते हुए उस पर ऊपर आ गई। अब लंड उसकी योनि से चिपके हुए उसकी नितंबो के बीच टीका हुआ था। योनि की गरम भाप लंड को और कड़क कर रही थी जिस से सुपाड़े की ठोकर बार बार गांड के छेद पर हो रही थी।
रिशा और राजू एक दूसरे को जकड़े हुए चुम्बनों में खोए हुए थे। पसीने की झीनी चादर में लिपटे दोनों बदन एक दूसरे पर फ़िसल रहे। उधर योनि रस में भीग कर राजू का लंड भी बड़े आराम से नितंबो की दरार में फ़िसल रहा था। जैसा जैसा वक्त गुजर रहा था दोनों की सांसे फूल रही थी, नरम चुचिया मर्दानी छाती पर रगड़ खा रहे थी। बदन इतने जोर से चिपक गए थे कि हवा भी ना गुजर पाए। धीरे-धीरे बदन के साथ कमरे का तापमन भी बढ़ चला। जाने कब राजू के सुपाड़े की नोक रिशा के गांड के छेद में फंस गई। दोनो ही चौंक उठे और चुम्बन टूट गया। रिशा और राजू एक दूजे को निहार रहे थे कि अचानक उसका लंड फड़का। रिशा "आह" करके रह गयी। अब लंड का टोपा उसकी गांड के अन्दर था. रिशा की आंखों में हवस की डोरियां तैर गई। अपने कमर को हल्का सा मटकाते हुए उसने राजू का लिंग और अंदर ले लिया। लंड मोटा और छेद छोटा, आवाज़ तो आती ही। 'आहह!!! स्स्स्स!!!! ऊओहहह!!म्म्म्माआह!!!'.... 'हाय रे ये जालिम लंड तुम्हारा, प्यार में भी दर्द देता है कमीना आह!!'
"मुझसे गंदी गंदी बातें करो ना भाभी" राजू ने रिशा को कहा।
"क्यों? ऐसा भी क्या मजा गंदी बातों में जो इसमें नहीं?" पूछते हुए रिशा ने अपने नितंबो को कसाव दिया तो सुपाड़े की जान निकल गई।
इस हरकत से दोनो के जिस्म में मादकता की तरंगें बहने लगी..
"तुम्हारी चुदाई का मज़ा नशे में बदल जाता है भाभी...प्लीज़ ना..." कहते हुए राजू ने उसकी कमर को थामा और धीरे से रिशा के कंधे पर दबाव बनाया जिसे रिशा उसके लिंग पर लगभग पूरी बैठ गई। लंड के गांड के अंदर घुसते ही रिशा की साँसें अटक गई, उसने राजू का सीना नोच लिया।
"आ-आ-आ-आ-हह-हह-हह!!!...हह-हाय जालिम, जान निकल दी फिर से!!''
"ओह्ह भाभी!!!" कहते हुए राजू ने उसके सुलगते होठों को अपने होठों के बीच दबा लिया।
"उउफ़्फ़!! तुम मुझे रिशा क्यों नहीं बुलाते हो राजू। मैं तो तुम्हें तुम्हारे नाम से ही बुलाती हूं ना आहह!!!"
"पता नहीं भाभी.. आपको भाभी बुलाना बहुत सेक्सी लगता है"बदन में एक अलग सा रोमांच और लंड में ज्यादा तनाव आता है।. ऐसा कहते ही उसकी लिंग गांड के अंदर फरक उठा।
"उफ्फ्फ.. अगर ऐसी ही बात है तो मैं भी तुम्हें देवरजी ही बुलाऊंगी-आह!!"
रिशा के मुँह से देवरजी निकलते ही राजू का लिंग फिर झटका मार गया।
"ओह मेरे प्यारे देवरजी-आह!!मम्म!!,
कभी तुम कितने भोले देवरजी-ऊहह!!! थे!! अब देखो इस भोले भले देवरजी-स्स्स!!! को कैसे अपने लंड पर बिठा कर भाभी को दो दिनों से चोद रहा है ! खुद भी बेशरम बन गया है और मुझे भी बेशरम बना दिया है और लोग कहेंगे कि इस भाभी-म्म्ह- ने अपने मासूम देवर- आह!! को बिगाड़ दिया!!"
रिशा के अल्फ़ाज़ पिघले मौम के जैसे राजू के कानों में टपक के रह गए। उसका लंड फड़कना रुक ही नहीं रहा था; मानो जैसे उसका अपने लिंग पर काबू ही ना हो। रिशा की शहद भारी आवाज उसके कानों में फिर गिरी। अह्ह्म्म्म!!! जी करता है मेरे देवर का लंड हमेशा के लिए अपनी भाभी की चूत और गांड को ऐसे ही ठोकता रहे-आह!!! और अपने लंड से अपनी प्यासी भाभी को जन्नत की सैर करवाएं!!!”
इतना कहना ही था कि राजू ने उसके मुँह में अपनी जीभ घुसा दी और उसकी आवाज़ दबी ही रह गई। फड़कते लंड की थरथराहट ने रिशा को ऐसा ही पागल बना दिया था। उसकी जीभ भी राजू से गुत्थम गुत्थी करने लगी। लपलापाती जिव्हाँ से देवर की सारी लार रिशा के मुँह में और रिशा के मुँह की लार राजू के मुँह में टपकने लगी। इधर राजू वो सारी लार गटक रहा था उधर लंड पे सवार रिशा के सब्र का बांध टूट चुका था। उसने अपनी कमर लचकाई और राजू के लिंग पर पूरा बैठ गई। कड़क लंड जड़ तक उसकी गांड में फिट हो गया। रिशा की पनियाई चूत तेज़ झड़ने लगी और उसके चिपचिपे रस में दोनों भीग गए..
दोनों की ही साँसें फूल रही थी। बिना कुछ बोले दोनो बस वासना के सागर में तैर रहे थे।
थोड़ी देर यूं ही पड़े रहने के बाद रिशा बोली "मज़ा नशे में बदलना है देवरजी?"
"हां भाभी" राजू ने जवाब दिया।
रिशा ने धीरे धीरे कमर लचकाना शुरू किया और लंड फच्च! फच्च! की आवाज से धीरे धीरे गांड में अंदर बाहर होने लगा।
“चोदो मेरे ठरकी देवर...और जोर से चोदो अपनी रंडी भाभी को और हमेशा के लिए अपनी गुलाम बना लो! इस मजे के लिए मैं ना जाने कब से तरस रही थी...आज कुछ रहम ना करना अपनी भाभी पर और मेरे सारे छेद खोल के अपने गरम गरम वीर्य से नहला दो”
रिशा के मुंह से रंडी सुन सूरज राजू का लंड और जोर से फडकने लगा और उसके धक्के पे पहले से भी ज्यादा तेजी आ गई
चूँकि गांड के छेद की चिकनाहट थोड़ी कम थी तो घर्षण ज्यादा होने से मजा और दर्द दोनों बढ़ रहे थे। राजू ने हाथ बढ़ा कर वैसलीन की डिब्बी उठाई और ढेर सारी वैसलीन लेकर अपने लिंग पर लगा दिया, चुदाई चालू रहने से ढेर सारा वैसलीन रिशा की गांड में भी चला गया। अब चिकनी दरार में लंड आराम से फ़िसल रहा था। बचा हुआ वैसलीन उसने रिशा की मुलायम निताम्बो पे फेला दिया और जाम कर उन्हें दबाने लगा। चिकने माँ पर उसकी उंगलियाँ फिसल सी जाती। इन हरकतों ने रिशा का उन्माद बढ़ा दिया और वो बहुत तेजी से कुल्हे लहराते हुए लंड अंदर लेने लगी। डोनो जिस्मो की गर्मी से वैसलीन भी पिघल कर हर जगह फेल रही थी।
जिससे नितंबों और जांघों की टक्कर दर टक्कर पे छप्प!! चाप!! की आवाज़ आ रही थी जो किसी मधुर संगीत से कम नहीं लग रही थी ओह! आह्ह!!सस्स्सआह्ह्ह्ह!! कि मदम सिस्कारियों ने भी खूब समां बनाया हुआ था। धीरे से जब रिशा को अपने आगोश से राजू ने आज़ाद किया तो वो उन्मादित होकर आराम से कमर लहराने लगी। अब राजू का लंड घपाघप पूरा गांड में घुसा जा रहा था। रिशा ने भी उसकी कलाईयाँ थाम कर सिरहाने पर दबा दी और उसके सीने से उठ गई। उसे यकीन था कि इस पोजीशन में लंड और ज्यादा आराम से अंदर जा सकता है। राजू की कलाईयां जकडे रख रिशा ने हौले हौले से कमर लचकनी शुरू कर दी, उसकी योनि राजू की झांटो पर रगड़ रही थी। मर्दाना झांटो का कड़क स्पर्श मुलायम योनि के फलो पे पड़ते ही उसके बदन में झुरझुरी होने लगी। रिशा धीरे-धीरे बेकाबू होने लगी। झुरझुरी कम्पन में बदलने लगी।
रिशा -“हाए...राजू क्या मस्त लंड है तेरा...पूरा अंदर तक घुस के चोट करता है..हर झटके में इतना जोश। तू सच में कमाल का मर्द है”
राजू -“भाभी क्या भैया ने तुम्हारी गांड कभी नहीं मारी। एक दम टाइट और कसी गांड है तुम्हारी”
रिशा -“अरे तेरे भैया तो मेरी चूत भी ढग से नहीं मार पाये...गांड क्या खाक मारते। लेकिन तूने तो सारे छेद दो दिन में ही खोल डाले”
रिशा के मुख से ये बात सुन राजू का जोश दुगना और धक्को की स्पीड चौगुनी हो गई! रिशा के सुडोल स्तन राजू के सामने झूम रहे थे. बदन की थरथराहट से स्तनो में भी कम्पन उठ रहा था जिसे वो इधर उधर छलक रहे थे। दोनों रसीले शाही टुकड़ों ने राजू की कामवासना की आग में घी का काम कर दिया। उसने गर्दन ऊंची कर अपनी जिह्वा निकल कर दोनो स्तनो को चाट लिया। सुलगते जिस्म की गर्मी से उसकी जुबान जल गई। वासना का तूफ़ान दोनो को लीलने लगा। राजू अपनी जिह्वा से रिशा के यौवन का रसपान करता रहा। जीभ लहरा लहरा कर वो स्तनो को आइसक्रीम के जैसी चाट रहा था। गीली जुबान की हरकतें और चूत पर कड़क झांटों की रगड़न से रिशा का पूरा बदन कांप रहा था। काँपती हुई कराह के साथ वो राजू के पेडू पर झड़ने लगी। "आ-आ-आ-आ-हह-हह-म्म्म्ह-ह!!...हाअइइइइइइह! मैं आई गई राजू....!" गरम लावा के जैसा रस बदन पर गिरते ही राजू ने आपा खो दिया और अपने हाथ छुड़ा कर रिशा के मांसल स्तनो को दबा लिया। रिशा भी गरम हाथों की मजबूत पकड़ से आनंदित हो उठी और अपने दोनों हाथ दीवार पर टीका दिए, जिसका बदन स्थिर हो गया और गदराए स्तन बिल्कुल राजू के चेहरे के आगे झूलने लगे।
राजू उसके निपलों को जोर से पकड़ कर खिचता हुआ मुंह के पास लता और जीभ से आस पास चाट लेता।
रिशा स्थिर उसके बदन पे टिकी हुई अपनी चुचिया अपने हाथों में दबा उसके मुँह के पास ला उसे बस लालाच दे रही थी। "क्यों देवरजी; क्या हुआ? थोड़ी और कोशिश करो ना.. उफ्फ!! इतनी देर कोई और होता तो ना करता.. अब तक तो मेरी रसीली चुचियों का रस निचोड़ देता वो!!!" रिशा के मुँह से ऐसी बातें सुनते ही राजू का जिस्म सिहर उठा। वासना के पागलपन में चूर उसने लगभाग एक स्तन को नोचते हुए उसके निपल पर एक झापड़ जड़ दिया.. चटअक्क!! "आह!!" रिशा चिल्ला उठी.
रिशा -“ हाय कितने जालिम हो देवर जी..अपनी भाभी को ऐसा भी दर्द देता है क्या कोई?”
उसपर कोई ध्यान दिए बिना राजू ने दूसरे स्तन को जोर से दबा कर रगड़ दिया जिसे कड़क निप्पल और फूल कर मोटे से हो गए। दूसरे निपल पर भी उसने एक थप्पड़ रसीद दिया। चटअक्क!! "आह!!"
राजू ने अपनी जीभ से अपनी उंगलियां गिली करी और फिर कड़क निप्प्लो पर हमला कर दिया। ताड़!! तडक्क!! चटाक!! की आवाज़ से कामरा गूंज उठा। रिशा की चीखें अब उन्माद भरी हंसी में बदल चुकी थीं। वो मदहोशी में बड़बड़ा रही थी। अहहाहाहा- और तेज़ राज्जजू!! और तेज से मारो नाआअहहहहह!! बहुत अच्छा लग रहा है!! निकाल दो मेरे बदन की सारी गरमी!! एसएसएसएस!! निम्बू समझ कर निचोड़ दो मेरे निपल मेरे देवरर जी!!!" "चूसो इन्हें...काट खाओ और मरोड़ के सारी अकड़ निकाल दो इनकी!! चूस चूस के लाल कर दो मेरी चुचियाँ!!! काट खाओ मेरा मुलायम जिस्स को अम्म्म्माआह्ह्ह्ह!!!!!" मेरे जिस्म के हर अंग पर अपनी निशानी छोड़ दो मेरे राजा ! बड़ा तड़पाती है ये चुचिया...मैं खुद मसलती हूं तो इतना मजा नहीं आता जितना मजा तेरे हाथों से मसलवाने से आ रहा है राजू उफ्फ्फ!!
राजू ने भी गदराये उभारों को किसी वहशी की तरह चुमना चाटाना जारी रखा था। उसकी लार और पसीने से दोनों चुचिया चमक रही थी गए। राजू भी मदमस्त होकर निप्पलो को काटने से पहले ही दम लगा कर स्तन की मालिश कर रहा था। दर्द होने की हद तक वो उन्हें दबाता और फिर पूरी नंगी छाती पर हथेलिया रगड़ कर चुमता जाता। रिशा अभी भी उसका लिंग जो गांड में घुसा था उसपर बैठी थी। राजू की हरकतों से आनंदित होकर उसकी आंखें चढ़ गईं। इतनी मजबूत मालिश और लम्बी चुदाई से उसकी चूत से उसकी चूत फिर झड़ने लगी. "आह्ह्ह्ह्ह!!!!!!" मैं फिर से छूट गई मेरे राजा !चूत से मादक सुगंध वाला योनि रस फूट पड़ा। इस बार जोर बहुत तेज था. रस की फुहारें राजू के बदन को जलाते हुए यहां वहां बिखर रही थी। राजू के चेहरे, छाती और जिव्हा पर भी काफी रस झड़ चुका था।
"उसके कमर के पास रस बह कर बिस्तर गिला कर रहा था। इधर रिशा का चरम उन्माद से बुरा हाल था। जड़ तक धंसे हुए लंड के झटके गांड में तूफान मचा रहे थे। उसकी जांघें बुरी तरह कांप रही थी, पूरा बदन शांत पड़ चुका था। वो बस हाथों के सहारे राजू के ऊपर टिकी हुई थी। उसकी जुबान बहार को लटक गई और उखडती सांसों के बीच उसकी लार जिह्वा से टपक कर उसकी छाती पर बहने लगी। बड़ा सुंदर दृश्य था. राजू ने भी उसके स्तनो पर बहती लार का रसास्वादन कर लिया। रिशा ने उसे खींच कर सीधा किया और दोनों टांगे उसकी कमर के पीछे फंसा कर उसका सर अपने सीने में छुपा लिया। उसने राजू को जोर से जकड़ रखा था और तेज़ सांसों से उठते-बैठते गदराए स्तन मानो राजू के लिए तकिये का काम कर रहे थे। वो अभी भी उसके भारी स्तनो का रस पी रहा था।
उसने रिशा की गद्देदार नितंबो को थाम कर उसे सहारा दिया। धीरे-धीरे वो उसके नितंब भी सहलाने लगा। अब तक गांड का छेद फेल कर काफी ढीला हो चुका था। लिंग के इतनी गहराई तक घुसे होने से अब रिशा को कोई दिक्कत नई हो रही थी। थोड़ी देर तक दोनों एक दूसरे से यूं ही लिपटे रहे।
“उफ़्फ़ देवरजी-आह”
लंड फिर फड़क गया गांड के अंदर; रिशा ने उसके कानों में धीरे से कहा, "मेरी गांड मारो ना देवर राजा! तुम्हारे मजबूत लौड़े को तरस रही है मेरी गांड.. तुम्हारे मूसल का मर्दाना दर्द महसूस करना चाहती है मेरी गांड। मारो नाआह!!" रिशा की कराह भारी पुकार से राजू खुद को रोक न पाया और मांसल नितंबो को भीच कर पकड़ लिया। उसकी नाखून उसकी मुलायम गांड में घुस गए। नाखूनो
की चुभन से रिशा उचक पड़ी जिससे लंड थोड़ा बाहर निकल आया। राजू ने उसका एक निपल ढेर सारे मांस के साथ अपने मुंह में भरा और जोर से रिशा को अपने लिंग पर खींचा। अचानक हमले से लंड फच्च की आवाज के साथ गांड में पूरा समा गया।
"आह"
उसने रिशा की गांड फिर उठा के अपने लंड पर बैठा दिया। एक और कराह..
"आह!! देवरजीइइइ!!!!सस्स्स!!!"
सुनते ही राजू ने उन्माद में फिर उसके नितंबो को उठा कर अपने लंड पर पेल दिया।
"ओह माआह!! देवर जी!!!आज मार ही डालोगे क्या अपनी भाभी को लंड पेल पेल कर”
राजू ने फिर उसकी गांड उचका कर घप्प से अपने लंड पर बैठा लिया।
"ह्ह्हाआऐइइइ ममीरिइइ गाआआँधाआह्ह्ह्ह!!!'
राजू इधर घपाघप उसकी गांड को अपने लंड पर पेल देता और उधर रिशा की कामुक कराहे उसके कानों में गूँज रही थी। "आह! आह! ओह्ह!! ओह्ह!! ददैय्या रे! ओ मेरे देवरजी! हाय!! आह्ह!! बस्स ऐसे पेलते रहो रज्जा!! तुम्हारा मुसल हाय!! मेरी ओखली ईई!! कुट डालो मेरी गांड!! धीरेईई!!! आआहह!!! हौले हौले मेरे सैंया ! फाड़ डालो मेरी गांड..मेरे राजा”
गांड चुदाई ऐसे ही मदम मदम काफी देर चलती रही। लंड का काफ़ी सारा रस गांड की दीवारों को चिकना कर चुका था। अब बस मामुली सी हरकत से भी लंड अंदर तक चला जाता। हवस के बादल फिर घिरने लगे। राजू भी अब पूरी लय से रिशा की गांड ले रहा था। अब वो सुपाड़े के लगभाग बहार आने तक गांड को ऊपर खिंचता और फिर रिशा को लंड पे बिठा लेता। उसकी मीठी बातें जोश में और इज़ाफ़ा कर रही थी। थोड़ी ही देर में चोदन की लय बदल गई। अब गांड से पूरा लंड पक से बाहर आता और फेले हुए छेद में फिर फच्च से घुस जाता। रिशा की मद्धम कराहे इस ताल में सुर दे रही थी।
पक!! . . . फच्च!! . . . "आह" पक!! . . . फच्च!! . . . "ओह" पक!! . . . फच्च!! . . . "हन्नह" पक!! . . . फच्च!! . . . "मम्ह" पक!!. . . फच्च!! . . .
"मक्खन निकल दो मेरा" फक!! . . . फच्च!! . . . "तुम्हारी मलाई से भर दो नाआह!!!" फक!! . . . फच्च!! . . . "पूरा रस उतार देना मेरी मासूम गांड में" पक!! . . . फच्च!! . . . "बस ऐसे दबोच कर पेलते रहो मेरी गांड आह्ह" पक!! . . . फच्च!! . . . "दिन भर और रात भर" पक!! . . . फच्च!! . . . "ऐसे मेरी गांड में लंड भर कर सोना है मुझे आहह" पक!! . . . फच्च!! . . . "काट खाओ मेरी भारी चुचियाँ भी" पक!! . . . फच्च!! . . . "पूरा रस निचोड़ दो देवर रज्जा!! अब मैं तुम्हें और किसी के साथ नहीं बांट सकती मेरे राजा..तुम सिर्फ मेरे हो और मैं तुम्हारी दासी। मेरी चूत और गांड पर सिर्फ तुम्हारा अधिकार है...जब चाहो चोद लेना...कभी मना नहीं करूंगी


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