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Misc. Erotica सम्मान और बदला: Hindi Version Of Honor and Vengeance
खौफ और साजिश—8
 
आज दोपहर कोठी में एक अजीब सा सन्नाटा था। सरताज सुबह ही अपनी ड्यूटी पर निकल चुके थे और ज्योति भी अपनी कॉलेज बस से कॉलेज जा चुकी थी। मीरा घर में अकेली थी।
 
आज उसने हल्के नीले रंग की एक खूबसूरत जॉर्जेट की साड़ी पहनी थी, जिसके साथ गहरे नीले रंग का स्लीवलेस  ब्लाउज उसकी गोरी बाहों को पूरी तरह बेपर्दा कर रहा था। वह रसोई में खड़ी कुछ काम कर रही थी कि तभी दरवाजे पर आहट हुई।
 
मीरा ने चौंककर पीछे देखा। शेर रसोई के दरवाजे पर खड़ा था, उसका एक पैर अभी भी पूरी तरह ठीक नहीं था, इसलिए वह हल्का सा लंगड़ाकर चल रहा था।
 
उसे इस तरह रसोई में दाखिल होते देख मीरा के भीतर का खौफ जाग उठा। उसकी रीढ़ में सिहरन दौड़ गई, लेकिन उसने खुद को संभालते हुए पूछा।
 
मीरा (हाथ में पकड़े बर्तन को कसकर भींचते हुए, घबराहट छुपाकर): "शेर?! तुम... तुम यहाँ रसोई में क्यों आए? तुम्हारी चोटें अभी पूरी तरह ठीक नहीं हुई हैं, तुम्हें अपने क्वार्टर में आराम करने को कहा था ना? जाओ और आराम करो।"
 
शेर (लंगड़ाते हुए दो कदम और आगे बढ़ाते हुए, चेहरे पर बेहद मासूम मुस्कान लाकर): "अरे मेमसाब... आप तो बेकार ही गुस्सा हो रही हैं। अकेले क्वार्टर की उस चारपाई पर लेटे-लेटे मेरा दम घुट रहा था।  बहुत बोर हो रहा था। तो मैंने सोचा कि क्यों न आकर आपसे दो पल बात ही कर लूँ... दिल बहल जाएगा। आखिर मालिक और बिटिया भी तो घर पर नहीं हैं।"
 
शेर की आवाज़ भले ही बहुत शांत और सामान्य थी, लेकिन जब उसने 'मालिक और बिटिया घर पर नहीं हैं' वाले शब्दों पर ज़ोर दिया, तो मीरा का दिल ज़ोर से धड़कने लगा।
 
शेर की नज़रें अब धीरे से ऊपर उठीं और मीरा के उस स्लीवलेस ब्लाउज से झांकती गोरी बाहों और उसकी नीली साड़ी के पल्लू से ढके वक्षस्थल पर जाकर ठहर गईं।
 
उसकी आँखों में वही पुरानी, भूखी चमक धीरे-धीरे वापस लौट रही थी।
 
उसने अपनी आँखें मीरा की नंगी, गोरी बाहों से सरकाते हुए उसकी कमर के उस हिस्से पर टिका दीं जहाँ से साड़ी थोड़ी खिसकी हुई थी।
 
वह धीरे से आगे बढ़ा और रसोई के कोने में रखी एक कुर्सी को खींचकर उस पर बैठ गया। बैठते ही उसकी नज़रों ने मीरा के पूरे बदन का एक्स-रे करना शुरू कर दिया।
 
शेर (कुर्सी पर आराम से टेक लगाते हुए, अपनी आँखें मीरा के वक्षस्थल पर गड़ाकर बेहद धीमी और रसभरी आवाज़ में): "मेमसाब... सच कहें तो आज आप इस नीली साड़ी और बिना बाज़ू वाले ब्लाउज में बहुत खूबसूरत लग रही हैं। कसम से... ऐसा लग रहा है जैसे टीवी में किसी बड़ी मॉडल को देख रहा हूँ। इस नीले रंग में आपकी ये गोरी त्वचा चमक रही है।"
 
मीरा (शेर की इन नंगी तारीफों से असहज होकर, अपने पल्लू को खींचकर छाती पर और कसते हुए कांपती आवाज़ में): "शेर! प्लीज... भगवान के लिए ऐसी बातें मत बोलो। अपनी जुबान को लगाम दो। तुम भूल रहे हो कि तुम किससे और कहाँ खड़े होकर बात कर रहे हो।"
 
शेर (एक कुटिल मुस्कान के साथ): "क्यों मेमसाब? भला एक खूबसूरत चीज़ की तारीफ करना कोई गुनाह है क्या? जो सामने दिख रहा है, इस शेर की आँखें तो बस उसे सराह रही हैं। इसमें इतना गुस्सा होने वाली क्या बात है?"
 
मीरा (रसोई के प्लेटफॉर्म का सहारा लेकर खुद को संभालते हुए, सख्त लहजे में): "नहीं शेर, तुम तारीफ नहीं कर रहे, तुम्हारी नीयत खराब हो रही है। और तुम अपनी हदें पार कर रहे हो। हमारे बीच ऐसा कोई रिश्ता नहीं है जो तुम्हारी इन बेहूदा और गंदी बातों को जायज़ ठहरा सके।"
 
शेर (मीरा की बात सुनते ही अचानक ठहाका लगाकर हंसने लगा): "रिश्ता नहीं है मेमसाब?"
 
शेर (कुर्सी से थोड़ा आगे झुककर अपनी आवाज़ को फुसफुसाहट में तब्दील करता है): "अरे... रिश्ता तो कल ही बन गया था जब आपके ये दोनों मम्मे मेरी छाती पर रगड़ खा रहे थे।"
 
शेर (अपनी छाती पर हाथ फेरते हुए कामुक मुस्कान के साथ बोला): "मुझे तो उनकी वो नरमी अभी तक अपने बदन पर महसूस हो रही है।"
 
शेर (अपनी आँखें मूँदकर उस मंज़र को याद करते हुए फुसफुसाया): "क्या लाजवाब नजारा था वो..."
 
शेर (मीरा के जिस्म को भूखी नज़रों से घूरते हुए आगे कहता है): "...आपके वे नंगे मम्मे, उन पर चमकते वो गुलाबी टिप्स और आपकी वो मदहोश कर देने वाली आहें!"
 
कल का वह शर्मनाक मंज़र याद आते ही मीरा का पूरा चेहरा शर्म और अपमान से लाल हो गया।
 
रसोई के शांत माहौल में शेर की आवाज़ खंजर की तरह उसकी रूह में उतर रही थी। शेर कुर्सी पर पूरा वजन डालकर पीछे की तरफ झुका, उसने अपने दोनों हाथ अपनी छाती पर बांध लिए और बड़ी ही धूर्तता और अधिकार भरी नज़रों से मीरा के कांपते हुए बदन को निहारने लगा।
 
शेर (कुर्सी पर बैठे-बैठे ही, एक मुस्कान के साथ): "मेमसाब, जब आप इस नीली साड़ी और स्लीवलेस ब्लाउज में बिल्कुल किसी मॉडल जैसी लग ही रही हैं..."
 
शेर (कामुक लहजे में आगे कहता है): "...तो इस गरीब नौकर की भी एक छोटी सी इच्छा पूरी कर दीजिए। मैं चाहता हूँ कि आप अभी मेरे लिए एक मॉडल की तरह कैटवॉक करके दिखाएं।"
 
मीरा (दहशत से अपनी आँखें फैलाते हुए, ज़ोर-ज़ोर से सिर हिलाने लगी): "नहीं... नहीं शेर! यह... यह मुझसे बिल्कुल नहीं होगा!"
 
शेर (अपनी नज़रें उसकी पतली कमर पर टिकाते हुए फुसफुसाया): "अपनी कमर को थोड़ा मटकाते हुए ज़रा चल कर दिखाइए तो..."
 
मीरा (कांपते हाथों से अपनी साड़ी का पल्लू कसकर पकड़ते हुए बोली): "तुम... तुम पूरी तरह पागल हो गए हो क्या?"
 
मीरा (स्वाभिमान से चिल्लाई): "मैं इस घर की इज़्ज़तदार बहू हूँ, किसी तमाशे की औरत नहीं जो तुम्हारे सामने यहाँ इस तरह नाचूँ या वॉक करके दिखाऊँ!"
 
शेर (उसकी बात सुनते ही अपने चेहरे के हाव-भाव एकदम सख्त कर लेता है): "नहीं होगा?! तो इसका मतलब सीधे-सीधे यही हुआ न मीरा मेमसाब... कि आप अपनी उस पवित्र कसम से मुकर रही हैं?"
 
'कसम' का नाम सुनते ही मीरा के जिस्म का सारा खून जैसे एक पल में जम गया।
 
मीरा (अपनी छाती पर हाथ रखते हुए): "मेरी मासूम बेटी को इस गंदे खेल के बीच में मत लाओ, भगवान के लिए रुक जाओ।"
 
शेर (उसकी आँखों में झांकते हुए कहता है): "आप अपनी ही लाडली बेटी ज्योति की जान की कसम को तोड़ रही हैं! याद है न... अगर कसम टूटी, तो उस मासूम बिटिया की जान पर क्या खौफनाक आफत आ सकती है?"
 
शेर : "ठीक है, मत कीजिए मेरी बात पूरी... पर फिर अपनी बिटिया के साथ आगे होने वाले किसी भी हादसे के लिए मुझे दोष मत दीजिएगा!"
 
ममता की बेबसी और खौफ के आगे मीरा के संस्कारी कदम आखिरकार डगमगा ही गए।
 
मीरा (अपनी बहती आँखों को सुखाते हुए कांपते हाथों से अपनी साड़ी का नीला पल्लू उठाती है): "ठीक है शेर... मैं करती हूँ।"
 
शेर (मुस्कुराते हुए): "मेमसाब, अपने इस आँसुओं से भरे उदास चेहरे को ठीक कीजिए। मुझे आपके चेहरे पर एक मॉडल जैसी कातिलाना मुस्कान चाहिए।"
 
शेर (हुक्म से कहता है): "उठाइए अपनी इस साड़ी का यह नीला पल्लू और इसे अपनी कमर में इस तरह खोसिए कि मुझे आपका पूरा नंगा पेट और गोरी नाभि साफ नज़र आए।"
 
शेर (वहशी लहजे में आगे जोड़ता है): "फिर वैसे ही कमर लचकाते और मुस्कुराते हुए धीरे-धीरे कदम बढ़ाकर सीधे मेरे पास आइए। याद रखिएगा मैडम, अगर आपने यह सही से नहीं किया तो आपको यह दोबारा करना पड़ेगा!"
 
मीरा (पल्लू को अपनी कमर में खोसते हुए अपना गोरा पेट और नाभि शेर के सामने नंगा कर देती है): उसके चेहरे पर मजबूरी का दर्द साफ छलक रहा था, पर वह अपने कांपते होंठों पर एक झूठी मुस्कान लाने की कोशिश करती है।
 
शेर (अपनी भूखी नज़रों से उसके नंगे पेट को ताकने लगता है): "शाबाश मेमसाब! अब ज़रा अपनी पतली कमर को लचकाते हुए, किसी मॉडल की तरह चलकर मेरे पास तक आइए।"
 
मीरा (धीरे-धीरे अपने कदम बढ़ाती है): वह अपनी कमर को हल्का सा मटकाते हुए, भारी दिल से रसोई के फर्श पर शेर की तरफ चलने लगती है।
 
शेर (उसकी लचकत-मटकत चाल और नंगे हुए पेट को देखकर सीटी बजाता है): "वाह मेमसाब, वाह! क्या कातिलाना चाल है, IPS साहब भी क्या याद रखेंगे कि उनकी बीवी मेरे इशारों पर कैसे ठुमके लगाती है!"
 
मीरा चलते-चलते शेर की कुर्सी के बिल्कुल करीब आकर रुक जाती है।
 
शेर : "यह हुई न बात! अब लग रही हैं आप असली मॉडल... पर इतनी दूरी क्यों मेमसाब, ज़रा और पास आइए।"
 
शेर (अपनी कुर्सी से धीरे-धीरे खड़ा होता है और चेहरे पर  चिढ़ाने वाली मुस्कान सजाकर मीरा को सिर से पैर तक ताकता है): "वाह मेमसाब, वाह! चाल तो आपने एकदम कातिलाना दिखाई है... पर सच कहूँ तो आपकी इस वॉक में अभी वह बात नहीं आई जो मैं देखना चाहता था।"
 
शेर : "आपका यह महंगा पल्लू ... बीच में बार-बार आकर इस नौकर के मज़े में खलल डाल रहा है।"
 
इतना कहकर शेर ने अचानक उसके पल्लू को खींचा, जिससे साड़ी का पल्लू सिमटकर उसके दोनों मम्मों के बीच एक पतली सी कपड़े की पट्टी बनकर रह गया।
 
शर्म, अपमान और खौफ के मारे मीरा की छाती धौंकनी की तरह चलने लगी, और पल्लू के नीचे छिपे उसके दोनों मम्मे बेबसी से ऊपर-नीचे फड़कने लगे।
 
शेर (मीरा की तड़प का मज़ा लेते हुए उसकी आँखों में आँखें डालकर हंसता है): "अरे-अरे मेमसाब! इतनी तेज़ी से सांसें क्यों फूल रही हैं आपकी? अभी से घबरा गईं? देखिए तो, आपका यह पल्लू भी आपके उभारों के बीच खुद को छिपाने की कोशिश कर रहा है!"
 
शेर (अपनी उंगलियों से उसकी साड़ी के नेफे को नीचे खिसकाते हुए नीच लहजे में फुसफुसाता है): "जब साहब घर पर नहीं हैं, तो इस गोरे बदन को ऐसे कपड़े में लपेटकर छिपाने का क्या फायदा? ज़रा इसे थोड़ा और नीचे सरकने दीजिए..."
 
शेर ने बेदर्दी से उसकी साड़ी को नाभि के काफी नीचे तक दबा दिया, जिससे मीरा की गोरी, सुराहीदार नाभि और पूरा का पूरा नंगा पेट शेर की प्यासी नज़रों के सामने पूरी तरह नुमायाँ हो गया।
 
शेर (उसकी नाभि को देखकर): "अब आया न असली मज़ा मेमसाब!"
 
इस अपमान को मीरा अब और बर्दाश्त न कर सकी। गुस्से और आत्मसम्मान की ज्वाला में जलते हुए उसने अपना हाथ हवा में उठाया और शेर के चेहरे पर एक ज़ोरदार थप्पड़ रसीद करना चाहा।
 
लेकिन शेर ने हवा में उसके हाथ को बीच में दबोच लिया।
 
शेर (उसके चेहरे के बिल्कुल करीब सांसें छोड़ते हुए आगे बोला): "अगर आप यह सब नहीं करना चाहतीं, तो सीधे-सीधे कह दीजिए न कि आप अपनी बेटी ज्योति की कसम नहीं निभा सकतीं!"
 
शेर (उसकी कलाई पर दबाव और बढ़ाते हुए ताना कसता है): "वरना चुपचाप अपनी इस गुस्ताखी के लिए मुझसे सॉरी बोलिए, और अपने इस रसीले मुँह से कहिए कि आगे से ऐसी हिम्मत कभी नहीं करेंगी।"
 
जब मीरा की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। उसने मीरा की कलाई छोड़ दी और पीछे मुड़कर बाहर जाने के लिए कदम बढ़ा दिए।
 
शेर को इस तरह वापस लौटते देख मीरा के दिल की थम गईं। उसके दिमाग में सिर्फ एक ही खौफनाक ख्याल कौंधा—कि उसकी इस हरकत से बेटी की कसम टूट रही है और ज्योति की जान खतरे में पड़ जाएगी।
 
मीरा (घबराहट में कांपती हुई आवाज़ में): "सॉरी... शेर, मुझे माफ कर दो!"
 
शेर (जाते-जाते रुका, लेकिन बिना पीछे मुड़े अपने चेहरे पर मुस्कान लाते हुए बोला): "क्या कहा? ज़रा तेज़ बोलिए मेमसाब... मुझे कुछ सुनाई नहीं दिया।"
 
मीरा (अपने आँसू पोछते हुए बेबसी और अपमान की घूँट पीकर गिड़गिड़ाई): "सॉरी शेर... आगे से कभी मना नहीं करूँगी, तुम जैसा कहोगे वैसा ही करूँगी।"
 
शेर धीरे-धीरे वापस मीरा के पास आया और अपने  हाथों को  उसके भीगे हुए गालों पर रख दिया।
 
उसकी चौड़ी, गंदी उंगलियां मीरा के थरथराते और लाल पड़े चेहरे पर धीरे-धीरे घूमने लगीं, जैसे वह उसकी बेबसी का एक-एक पल महसूस कर रहा हो।
 
शेर (मीरा की आँखों में घूरते हुए मुस्कुराकर बोला): "आप रोती हुई बिल्कुल अच्छी नहीं लगतीं मेमसाब..."
 
इतना कहकर शेर मीरा के चेहरे के और करीब झुका और अपनी जीभ निकालकर उसके गाल पर बहते हुए गरम आँसू को चाट लिया।
 
शेर की इस हरकत से मीरा के मुँह से एक रुंधी हुई सिसकी निकल गई।
 
मीरा (मन ही मन गुस्से और घिन से जलते हुए): "जी चाहता है इस हैवान को पूरे ज़ोर से धक्का देकर दूर फेंक दूँ... अपने इस जिस्म को इसकी गंदी नीयत से बचा लूँ!"
 
लेकिन अगले ही पल उसकी नज़रों के सामने अपनी मासूम बेटी ज्योति का चेहरा घूम गया, और उसका उठता हुआ गुस्सा खौफ के आगे टूट कर बिखर गया।
 
मीरा (कांपते होंठों को भींचते हुए मन ही मन बेबसी से रो पड़ी): "नहीं मीरा... अपनी बेटी की कसम का ख्याल कर... तुझे सहना होगा।"
 
मीरा खामोश खड़ी रही, अपनी आँखें मूँदकर इस कड़वे अपमान का ज़हर चुपचाप पी गई।
 
मीरा के भीगे चेहरे को अपनी जीभ से बेशर्मी से चाटने के बाद, शेर दो कदम पीछे हटा।
 
उसने मीरा के चेहरे की ताकते हुए अचानक अपने हाथ से उसकी गांड पर एक थप्पड़ जड़ दिया।
 
शेर (थप्पड़ मारते ही मुस्कुराया): "हाँ! अब आया न चेहरे पर थोड़ा सा रंग मेमसाब..."
 
शेर (अपनी कुर्सी की तरफ वापस मुड़ते हुए रोबदार आवाज़ में बोला): "अब वापस उस कोने में जाइए, और फिर से कैटवॉक करके मेरे पास आइए।"
 
इतना कहकर वह अपनी कुर्सी पर पैर फैलाकर बैठ गया।
 
शेर (अपनी आँखें उसकी नंगी नाभि और पतली कमर पर टिकाते हुए हुक्म देता है): "याद रहे मेमसाब, इस बार एकदम सही होना चाहिए... चेहरे पर मॉडल वाली कातिलाना मुस्कान और कमर में वही मदहोश कर देने वाली लचक होनी चाहिए।"
 
शेर (फुसफुसाहट के साथ चेतावनी देता है): "ज़रा सा भी ढीलापन दिखा, तो समझ लीजिएगा कि आपको यह बार-बार दोहराना पड़ेगा!"
 
मीरा इस असहनीय अपमान को जल्द से जल्द खत्म करना चाहती थी।
 
मीरा (मन ही मन अपने आँसू पीते हुए बेबसी से सोचती है): "मुझे यह घिनौना खेल खत्म करना ही होगा... ज्योति की खातिर मुझे इस की हर बात माननी होगी।"
 
उसने अपनी बहती आँखों को संभाला और अपने कांपते, होंठों पर एक बनावटी, कातिलाना मुस्कान बिखेर दी।
 
शेर (उसकी इस कातिलाना चाल को देखकर अपनी उंगलियों से एक ज़ोरदार सीटी बजाता है): "वाह मेमसाब, वाह! क्या बात है! अब आया न असली नज़ारा!"
 
शेर (कुर्सी पर बैठकर अपनी जाँघ ठोकते हुए चीखकर ताना मारता है): "क्या लाजवाब मम्मे हैं आपके मेमसाब... इस पतली सी पट्टी में दबाकर रखे हैं, फिर भी कैसे तड़प रहे हैं!"
 
शेर (अपनी भूखी नज़रों को उसकी नंगी कमर पर गड़ाते हुए चिढ़ाता है): "और वाह! क्या चिकना और गोरा पेट है आपका... साहब तो रोज़ देखते होंगे, पर आज तो इस गरीब नौकर की आँखें ठंडी हो गईं!"
 
शेर (गहरी सुराहीदार नाभि को घूरते हुए ): "और इस नाभि का तो पूछो ही मत मेमसाब... बिल्कुल कयामत ढा रही है! ज़रा और लचकिए, थोड़ा और मटकाकर पास आइए!"
 
मीरा अपने नंगे पेट और गोरी नाभि को दिखाती हुई, अपनी कमर को धीरे-धीरे लचकाकर रसोई के फर्श पर आगे बढ़ने लगी।
 
उसके हर कदम के साथ उसके मम्मे पल्लू के बीच हिल रहे थे, और चेहरे पर एक झूठी, कामुक मुस्कान सजी हुई थी।
 
शेर (उसकी चाल और खूबसूरती को नज़रों से ताकते हुए सीटी बजाता है): "लाजवाब मेमसाब! बस ऐसे ही... धीरे-धीरे लचकते हुए सीधे करीब चली आइए।"
 
जैसे-जैसे मीरा अपनी कमर लचकाते हुए शेर की तरफ बढ़ रही थी, अचानक उसे अपनी टांगों के बीच एक अजीब सी गर्माहट और गीलापन महसूस हुआ।
 
मीरा (मन ही मन  गहरे सदमे से सिहर उठी): "यह... यह मुझे क्या हो रहा है? नहीं! ऐसा कैसे हो सकता है?!"
 
उसकी आत्मा इस घिनौने अहसास से कांप उठी।
 
मीरा (अपनी आँखें भींचते हुए बेबसी से बड़बड़ाई): "यह... यह बिल्कुल भी आनंददायक नहीं हो सकता! मैं ऐसी औरत नहीं हूँ... मैं एक इज़्ज़तदार माँ हूँ, एक अफसर की बीवी हूँ! यह मेरा जिस्म मेरे साथ कैसा गंदा धोखा कर रहा है?"
 
शेर (उसकी चाल में आई हल्की सी रुकावट मुस्कान के साथ चिढ़ाता है): "क्या हुआ मेमसाब? कदम क्यों रुक गए? चेहरे की मुस्कान कहाँ गायब हो गई?"
 
शेर (उसकी थरथराती टांगों और नंगी नाभि को भूखी नज़रों से ताकते हुए): "ज़रा और पास आइए... आपकी देह का यह खिंचाव बता रहा है कि यह नौकर सिर्फ हुक्म ही नहीं चला रहा, बल्कि आपके जिस्म के सुप्त शोले भी भड़का रहा है!"
 
शेर वहीं बैठा रहा, जैसे ही मीरा उसके ठीक सामने आकर खड़ी हुई, शेर ने अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाए और उसकी पतली कमर को दोनों तरफ से जकड़कर अपनी फैली हुई जाँघों के ठीक बीच में खींच लिया।
 
अब मीरा का बदन शेर के घुटनों से पूरी तरह सट गया, और वह चाहकर भी पीछे नहीं हट सकती थी।
 
कुर्सी पर नीचे बैठे होने के कारण शेर की आँखें सबसे पहले मीरा के पेट के उस नंगे हिस्से पर जाकर टिक गईं, जो साड़ी और स्लीवलेस ब्लाउज के बीच से साफ झांक रहा था।
 
 
शेर (मीरा के गोरे पेट पर अपनी भूखी नज़रें टिकाते हुए): "वाह मेमसाब! दूर से तो सिर्फ लचक दिख रही थी, पर पास आकर तो आपका यह गोरा पेट चमक रहा है।"
 
शेर की गंदी निगाहें धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ीं और मीरा के भरे-पूरे वक्षस्थल पर जाकर ठहर गईं। खौफ, तनाव और तेज़ सांसों के चलने के कारण मीरा की छाती बहुत तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी।
 
शेर (मीरा की तेज़ चलती सांसों की धड़कन को इतने करीब से महसूस करते हुए, अपनी जीभ को होंठों पर फेरकर): "आह्ह् मेमसाब... इतनी तेज़ सांसें? इस नौकर के इतने करीब आते ही आपका यह सीना कैसे फड़कने लगा है!"
 
शेर (उसकी आँखों में झांककर कमीनेपन से मुस्कुराता है): "बताइए तो सही मेमसाब... यह बदन इतना कांप क्यों रहा है? यह डर के मारे थरथरा रहा है... या फिर इस गरीब नौकर के छुअन का मज़ा आने लगा है?"
 
मीरा (डर के मारे अपनी आँखें बंद करने की कोशिश करते हुए, सिसककर बोली): "शेर... प्लीज... अब और नहीं... तुमने कहा था सिर्फ पास आने के लिए... मुझे जाने दो..."
 
शेर ने उसकी गुहार पर कोई ध्यान नहीं दिया।
 
मीरा के पेट के ठीक बीचों-बीच स्थित उसकी गहरी और खूबसूरत नाभि पूरी तरह शेर की नज़रों के सामने नंगी हो गई। गोरी त्वचा के बीच वह नाभि किसी गहरे राज़ की तरह दिख रही थी, जिस पर शेर का पूरा ध्यान टिक गया और उसकी साँसें और भारी होने लगीं।
 
शेर (अपनी उंगली को मीरा की नाभि के ठीक पास की त्वचा पर हल्के से सहलाते हुए, फुसफुसाहट में बोला): "देख रही हो मेमसाब? तुम्हारी यह नाभि... कसम से किसी खजाने से कम नहीं है!"
 
शेर (उसकी नाभि में उंगली गड़ाने करते हुए): "साहब तो अपनी ड्यूटी में व्यस्त रहते होंगे, पर इस नाभि की गहराई और खूबसूरती का कद्रदान तो शेर बना है!"
 
शेर की उंगली जब मीरा की नाज़ुक नाभि के पास रेंग रही थी, तो मीरा का पूरा बदन ख़ौफ़ और वासना के अनचाहे अहसास से थर-थर काँप रहा था।
 
शेर ने कुछ पल उसकी नाभि को अपनी नज़रों से घूरा, और फिर अचानक अपना सिर ऊपर उठाकर सीधे मीरा की डबडबाई आँखों में देखा।
 
शेर (मीरा की कमर पर अपनी पकड़ को और मज़बूत करते हुए, बेहद धीमी, भारी और हुक्म देती आवाज़ में): "मेमसाब, मैं चाहता हूँ कि आप खुद अपने इन गोरे हाथों को आगे बढ़ाएं, और अपनी इस नीली साड़ी के पल्लू को खुद अपने काँधे से नीचे सरका दें। "
 
मीरा (सिसकते हुए, अपने दोनों हाथों को अपनी छाती पर): "नहीं... नहीं शेर... ऐसा मत करो... मैं मर जाऊँगी... प्लीज मुझ पर रहम करो..."
 
शेर (चेहरे पर मुस्कान लाकर, अपनी आवाज़ को और तीखा करते हुए): "चूँ भी मत करना मेमसाब! याद रखो, ज्योति बिटिया।"
 
शेर (उसकी थरथराती नाभि पर चुटकी काटते हुए चिढ़ाता है): "मेरी बात ध्यान से सुनो... पहले अपना पल्लू नीचे गिराओ, फिर दो कदम और आगे बढ़कर अपने इस गोरे, नंगे पेट को सीधे मेरे चेहरे और मेरे होठों से ले जाकर रगड़ो।"
 
मीरा ने अपनी आँखें बंद कर लीं। उसकी आँखों से आंसुओं की धार बहकर उसकी गर्दन पर गिर रही थी। उसकी ममता शेर की धमकी के आगे पूरी तरह घुटने टेक चुकी थी।
 
लेकिन इसी खौफ और लाचारी के बीच, मीरा को अपने जिस्म में एक खौफनाक आग सुलगती हुई महसूस हुई।
 
मीरा (मन ही मन रोते हुए खुद पर लानत भेजती है): "हे भगवान, यह मुझे क्या हो रहा है? मैं इस हैवान से नफरत करती हूँ... फिर भी मेरा जिस्म इसके नीच इरादों के आगे ऐसे घुटने क्यों टेक रहा है? यह कैसा पाप है जो मेरा बदन इस यातना में भी मज़ा ढूंढ रहा है?"
 
शेर ने मीरा के चेहरे पर छाए इस दोहरे खिंचाव को भांप लिया और वासना से हांफते हुए उसके और करीब आया।
 
शेर (मीरा के कांपते होंठों को ताकते हुए फुसफुसाहट में बोला): "और हाँ मेमसाब, सिर्फ पेट रगड़ने से काम नहीं चलेगा। जब आपका पेट मेरे मुँह के सामने होगा, तो आप खुद अपनी ज़ुबान से मुझसे कहेंगी..."
 
शेर (उसकी नंगी नाभि पर उंगली से गोल घेरा बनाते हुए हुक्म देता है): "कहो कि 'शेर, अपनी जीभ बाहर निकालो... और चाट जाओ मेरे इस नंगे पेट को... अपनी प्यास बुझा लो।' चलो मेमसाब, अपनी इस रेशमी आवाज़ में ये शब्द बोलो!"
 
मीरा की ममता पूरी तरह बेबस हो चुकी थी। अपनी मासूम बेटी ज्योति को सलामत देखने के लिए उसने अपनी बची-कुची मर्यादा को भी कुर्बान कर दिया।
 
मीरा ने कांपते हाथों से अपनी नीली साड़ी के पल्लू को पकड़ा और भारी दिल से उसे अपने कंधे से नीचे ढलका दिया।
 
रेशमी कपड़ा सरककर उसके पैरों में जा गिरा, जिससे उसके स्लीवलेस ब्लाउज़ में जकड़े भरे-पूरे मम्मे और नंगा हुआ पेट शेर की निगाहों के सामने था।
 
मीरा (अपनी बहती आँखों को मूँदकर, कांपती और रुंधी हुई आवाज़ में बोली): "शेर... अपनी... अपनी जीभ बाहर निकालो... और चाट जाओ मेरे इस नंगे पेट को... अपनी प्यास बुझा लो..."
 
शेर के चेहरे पर जीत की एक मुस्कान तैर गई। उसने अपनी गर्म जीभ बाहर निकाली। मीरा ने बेबसी में एक कदम आगे बढ़ाकर अपने गोरे, सुगठित और नंगे पेट को शेर के चेहरे और होठों से ले जाकर रगड़ दिया।
 
शेर ने अपनी गीली जीभ मीरा के चिकने पेट पर फेरना शुरू कर दिया। वह उसके गोरे पेट को बुरी तरह चाटने लगा और उसकी सुराहीदार नाभि को अपने होठों में भरकर ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा।
 
मीरा (पेट पर शेर की गर्म और गीली जीभ का स्पर्श महसूस होते ही सिहर उठी): "आह्ह्... उफ़्फ़... श्श्श्..."
 
जैसे ही शेर ने उसकी नाभि को अपने मुँह में खींचकर चूसना शुरू किया, मीरा के जिस्म में बिजली की एक लहर दौड़ गई। एक तरफ जहाँ उसकी आत्मा इस घिनौने काम से घृणा कर रही थी और गिल्ट में जल रही थी, वहीं दूसरी तरफ उसका बेकाबू बदन शेर की इस छुअन से आनंद की चरम सीमाओं को छूने लगा।
 
मीरा (मन ही मन रोते हुए खुद को कोसने लगी): "हे ईश्वर! मुझे उठा क्यों नहीं लेते? यह हैवान मेरी आबरू की धज्जियां उड़ा रहा है... और मेरा नीच बदन इस ज़िल्लत में भी प्यासा होकर तड़प रहा है! मैं अपनी ही नज़रों में कितनी गिर चुकी हूँ..."
 
लेकिन बदन का रस और उत्तेजना इतनी हावी हो चुकी थी कि मीरा की सिसकियां धीरे-धीरे कामुक आहाटों में बदलने लगीं।
 
मीरा (शेर के सिर को बेबसी में थामते हुए, अपनी सांसों को रोक न सकी): "आह्ह्... श्श्श्... शेर... उफ़्फ़... यह तुम... क्या कर रहे हो... आह्ह्..."
 
मीरा के मुँह से निकली उस हल्की सी आह को शेर के कानों ने तुरंत पकड़ लिया। उसकी आँखों में  जीत की चमक कौंध गई। उसने अपना मुँह मीरा के पेट से थोड़ा सा हटाया, लेकिन अपनी दोनों हथेलियों से उसकी पतली कमर को और कसकर अपनी जाँघों के बीच भींच लिया।
 
उसने नीचे से ऊपर की तरफ मीरा के लाल और आंसुओं से भीगे चेहरे को देखा।
 
शेर (कामुक हँसी हंसते हुए, अपनी लार से सने होठों को जीभ से चाटकर): "अरे... अरे मेमसाब! यह क्या? आपके मुँह से ये कैसी आवाजें निकल रही हैं? कसम से... ऐसा लग रहा है कि मालकिन को इस सेवा में मज़ा आने लगा है।"
Deepak Kapoor
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