01-08-2026, 12:45 PM
पहले पूजा और अब ये मयूरी
बाबा पूजा को चोदने वाले थे। उनका मोटा लंड पूजा की चूत के मुहाने पर टिका हुआ था और वे ठीक धक्का देने ही वाले थे कि तभी बाहर किसी ने आवाज दी - “बाबाजी… बाबाजी जी…!” मैत्री की प्रस्तुति।
बाबा ने झुंझलाकर और गुस्से में दरवाजा खोला।
बाहर दूसरी गली में रहने वाली मयूरी खड़ी थी, जिसकी उम्र 38 के आसपास थी। उसके साथ उसकी 16 साल की बेटी ऋचा भी थी, जो 11वीं कक्षा में पढ़ती थी।
बाबाजी मयूरी को देखते ही मन ही मन खुश हो गए। हो भी क्यों न! मयूरी रोज आया करती थी और उसका भरा-भरा, मोटा-मोटा जिस्म बाबाजी को हमेशा आकर्षित करता था। मयूरी की भारी-भरकम चूचियाँ ब्लाउज को फाड़ने को तैयार थीं, चौड़ी कमर, मोटी और निचली तरफ झूलती हुई गांड, और गोरा-मटोला शरीर - सब कुछ बाबाजी की नजरों में आग लगा देता था।
उसका पति गोपाल जो गली-गली जाकर ठेले पर सब्जियां बेचा करता था, वो बाबाजी का करीबी दोस्त बन चूका था और वो दोनों अक्सर बाबाजी के कमरे में बैठकर शराब पिया करते थे। और दोनों जब नशे में चूर हो जाते तो अपने-अपने मन की बातें एक दुसरे के सामने निकालकर अपना मन हल्का किया करते थे। उनका टॉपिक हमेशा सेक्स के आस पास ही घूमता रहता था। पर उन दोनों की इतनी घनिष्टता के बारे में कोई भी नहीं जानता था, गोपाल की पत्नी मयूरी भी नहीं।
बाबाजी ने कभी भी गोपाल को ये नहीं बताया था की उनका मन उसकी पत्नी के प्रति आकर्षित है। गोपाल जब भी बाबाजी जी के पास आकर बैठता तो वो अपनी जिन्दगी का रोना उनके सामने सुना कर अपना मन हल्का कर लेता था, वो अपनी पत्नी यानी मयूरी के सेक्स के प्रति रूचि ना दिखाने को लेकर अक्सर परेशान रहता था। रंडियों के पास जाने के लिए उसके पास पैसे नहीं थे। पूरा दिन गलियों में सब्जियां बेचकर वो इतना ही कमा सकता था की अपने परिवार का पालन पोषण कर पाए। इसलिए रोज रात को शराब लेकर वो बाबाजी जी के पास जाकर अपने दुःख दर्द सुनाता और बाबाजी भी अपने 'ख़ास' दोस्त के साथ कुछ पल बिताकर अपना रूतबा और पहचान भूल जाते और खुलकर मजा करते।
मयूरी: “नमस्कार बाबाजी जी…” प्रस्तुतकर्ता मैत्री पटेल।
बाबाजी ने मुस्कुराते हुए, लेकिन अंदर से लालच भरी नजरों से उसे देखते हुए कहा, “आओ आओ मयूरी… नमस्कार… आज इस समय कैसे आना हुआ? अंदर आओ ना…”
वो अक्सर सुबह ही आया करती थी और दोपहर के समय उसको देखकर और वो भी उस वक़्त जब अन्दर कमरे में पूजा नंगी होकर उनका वेट कर रही थी। कोई और मौका होता तो वो भी मयूरी से गप्पे मारकर अपनी आँखों की सिकाई कर लेते पर अभी तो उसको जल्द से जल्द निकाल ने के में मूड में थे। ताकि अन्दर जाकर फिर से पूजा के यौवन का सेवन कर पाए। वह अब अपने माल को ऐसे ही जाने देने का मूड में नहीं था।
मयूरी ने शर्माते हुए कहा, “बाबाजी जी… आप तो जानते ही हैं इनके (गोपाल) बारे में… पूरा दिन मेहनत करते हैं और रात को पता नहीं कहाँ जाकर शराब पीते हैं और अपनी आधी से ज्यादा कमाई फूँक देते हैं। ये मेरी बेटी ऋचा है और ये पढ़ने में काफी होशियार है पर कॉलेज में भरने लायक फीस नहीं है इस महीने। मैं बस आपसे ये कहने आई थी कि अगर हो सके तो आप उनको समझाओ ताकि हमारी बेटी आगे पढ़ाई पूरी कर सके। वो आपकी बात कभी नहीं टालेंगे।”
मयूरी जानती तो थी की गोपाल अक्सर बाबाजी के साथ बैठता है पर वो ये नहीं जानती थी की उनके साथ बैठकर ही वो शराब भी पीता है और उसके बारे में बातें भी करता है।
बाबाजी ने मयूरी के भरे-भरे स्तनों और मोटी कमर पर नजर डालते हुए मन ही मन सोचा - “अरे वाह… आज तो दो माल एक साथ मिल गए… माँ और बेटी दोनों… मयूरी की ये मोटी गांड और भारी चूचियाँ… और ये नन्ही ऋचा… वाह! आज का दिन तो कमाल का है।”
बाहर से शांत और प्यार भरे स्वर में बोले, “अरे मयूरी, तुम परेशान मत हो, वो बेचारा भी परेशान रहता है, उसके और तुम्हारे संबंधों को लेकर, वो अक्सर मेरे पास आकर अपना दर्द सुनाता है।”
ये बात सुनकर मयूरी चौंक गई। उसकी आँखें फैल गईं। वह कुछ कहना चाहती थी, लेकिन अपनी बेटी ऋचा के पास खड़े होने की वजह से चुप रह गई। उसकी आँखों में सवाल था, लेकिन वह पूछ नहीं पाई। “क्या-क्या बात होती है उन दोनों के बीच?” मैत्री पटेल रचित कहानी।
बाबाजी मन ही मन मुस्कुराए - अब नया शिकार तैयार था। उन्होंने मयूरी की तरफ देखकर नरम स्वर में कहा, “तुम दोनों अंदर आओ… मैं गोपाल को समझा दूँगा। लेकिन पहले चाय तो पी लो…”
मयूरी और ऋचा अंदर आने लगीं। बाबाजी का मन पहले से ही नई योजना बनाने लगा था।
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यही तक दोस्तों।
आपके कोमेंट्स की प्रतीक्षा में......
मैत्री पटेल का जय भारत।।
बाबा पूजा को चोदने वाले थे। उनका मोटा लंड पूजा की चूत के मुहाने पर टिका हुआ था और वे ठीक धक्का देने ही वाले थे कि तभी बाहर किसी ने आवाज दी - “बाबाजी… बाबाजी जी…!” मैत्री की प्रस्तुति।
बाबा ने झुंझलाकर और गुस्से में दरवाजा खोला।
बाहर दूसरी गली में रहने वाली मयूरी खड़ी थी, जिसकी उम्र 38 के आसपास थी। उसके साथ उसकी 16 साल की बेटी ऋचा भी थी, जो 11वीं कक्षा में पढ़ती थी।
बाबाजी मयूरी को देखते ही मन ही मन खुश हो गए। हो भी क्यों न! मयूरी रोज आया करती थी और उसका भरा-भरा, मोटा-मोटा जिस्म बाबाजी को हमेशा आकर्षित करता था। मयूरी की भारी-भरकम चूचियाँ ब्लाउज को फाड़ने को तैयार थीं, चौड़ी कमर, मोटी और निचली तरफ झूलती हुई गांड, और गोरा-मटोला शरीर - सब कुछ बाबाजी की नजरों में आग लगा देता था।
उसका पति गोपाल जो गली-गली जाकर ठेले पर सब्जियां बेचा करता था, वो बाबाजी का करीबी दोस्त बन चूका था और वो दोनों अक्सर बाबाजी के कमरे में बैठकर शराब पिया करते थे। और दोनों जब नशे में चूर हो जाते तो अपने-अपने मन की बातें एक दुसरे के सामने निकालकर अपना मन हल्का किया करते थे। उनका टॉपिक हमेशा सेक्स के आस पास ही घूमता रहता था। पर उन दोनों की इतनी घनिष्टता के बारे में कोई भी नहीं जानता था, गोपाल की पत्नी मयूरी भी नहीं।
बाबाजी ने कभी भी गोपाल को ये नहीं बताया था की उनका मन उसकी पत्नी के प्रति आकर्षित है। गोपाल जब भी बाबाजी जी के पास आकर बैठता तो वो अपनी जिन्दगी का रोना उनके सामने सुना कर अपना मन हल्का कर लेता था, वो अपनी पत्नी यानी मयूरी के सेक्स के प्रति रूचि ना दिखाने को लेकर अक्सर परेशान रहता था। रंडियों के पास जाने के लिए उसके पास पैसे नहीं थे। पूरा दिन गलियों में सब्जियां बेचकर वो इतना ही कमा सकता था की अपने परिवार का पालन पोषण कर पाए। इसलिए रोज रात को शराब लेकर वो बाबाजी जी के पास जाकर अपने दुःख दर्द सुनाता और बाबाजी भी अपने 'ख़ास' दोस्त के साथ कुछ पल बिताकर अपना रूतबा और पहचान भूल जाते और खुलकर मजा करते।
मयूरी: “नमस्कार बाबाजी जी…” प्रस्तुतकर्ता मैत्री पटेल।
बाबाजी ने मुस्कुराते हुए, लेकिन अंदर से लालच भरी नजरों से उसे देखते हुए कहा, “आओ आओ मयूरी… नमस्कार… आज इस समय कैसे आना हुआ? अंदर आओ ना…”
वो अक्सर सुबह ही आया करती थी और दोपहर के समय उसको देखकर और वो भी उस वक़्त जब अन्दर कमरे में पूजा नंगी होकर उनका वेट कर रही थी। कोई और मौका होता तो वो भी मयूरी से गप्पे मारकर अपनी आँखों की सिकाई कर लेते पर अभी तो उसको जल्द से जल्द निकाल ने के में मूड में थे। ताकि अन्दर जाकर फिर से पूजा के यौवन का सेवन कर पाए। वह अब अपने माल को ऐसे ही जाने देने का मूड में नहीं था।
मयूरी ने शर्माते हुए कहा, “बाबाजी जी… आप तो जानते ही हैं इनके (गोपाल) बारे में… पूरा दिन मेहनत करते हैं और रात को पता नहीं कहाँ जाकर शराब पीते हैं और अपनी आधी से ज्यादा कमाई फूँक देते हैं। ये मेरी बेटी ऋचा है और ये पढ़ने में काफी होशियार है पर कॉलेज में भरने लायक फीस नहीं है इस महीने। मैं बस आपसे ये कहने आई थी कि अगर हो सके तो आप उनको समझाओ ताकि हमारी बेटी आगे पढ़ाई पूरी कर सके। वो आपकी बात कभी नहीं टालेंगे।”
मयूरी जानती तो थी की गोपाल अक्सर बाबाजी के साथ बैठता है पर वो ये नहीं जानती थी की उनके साथ बैठकर ही वो शराब भी पीता है और उसके बारे में बातें भी करता है।
बाबाजी ने मयूरी के भरे-भरे स्तनों और मोटी कमर पर नजर डालते हुए मन ही मन सोचा - “अरे वाह… आज तो दो माल एक साथ मिल गए… माँ और बेटी दोनों… मयूरी की ये मोटी गांड और भारी चूचियाँ… और ये नन्ही ऋचा… वाह! आज का दिन तो कमाल का है।”
बाहर से शांत और प्यार भरे स्वर में बोले, “अरे मयूरी, तुम परेशान मत हो, वो बेचारा भी परेशान रहता है, उसके और तुम्हारे संबंधों को लेकर, वो अक्सर मेरे पास आकर अपना दर्द सुनाता है।”
ये बात सुनकर मयूरी चौंक गई। उसकी आँखें फैल गईं। वह कुछ कहना चाहती थी, लेकिन अपनी बेटी ऋचा के पास खड़े होने की वजह से चुप रह गई। उसकी आँखों में सवाल था, लेकिन वह पूछ नहीं पाई। “क्या-क्या बात होती है उन दोनों के बीच?” मैत्री पटेल रचित कहानी।
बाबाजी मन ही मन मुस्कुराए - अब नया शिकार तैयार था। उन्होंने मयूरी की तरफ देखकर नरम स्वर में कहा, “तुम दोनों अंदर आओ… मैं गोपाल को समझा दूँगा। लेकिन पहले चाय तो पी लो…”
मयूरी और ऋचा अंदर आने लगीं। बाबाजी का मन पहले से ही नई योजना बनाने लगा था।
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यही तक दोस्तों।
आपके कोमेंट्स की प्रतीक्षा में......
मैत्री पटेल का जय भारत।।



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