25-07-2026, 07:55 PM
एक गहरे, काँपते हुए और दर्दनाक सिसकार के साथ, मीरा ने अपने पूरे वजूद की आखिरी बची-कुची ताकत को अपनी उँगलियों में समेटा। उसने शेर के सांवले और बालों से भरे सीने से खुद को धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठाना शुरू किया। उसका पूरा बदन थर-थर काँप रहा था, और उसकी जाँघों के बीच रिसता हुआ गर्म रस उसे हर सेकंड पीछे खींचने की कोशिश कर रहा था।
वह बहुत ही बेबस और लड़खड़ाते कदमों से खाट से नीचे उतरी। उसकी सांसें इतनी तेज थीं कि उसका खुला हुआ सीना बुरी तरह धड़क रहा था। उसने बेहद कांपते हाथों से फर्श पर बिखरे अपने अंतर्वस्त्र और ब्लाउज को उठाया।
अपनी पूरी तरह नग्न और सुर्ख हो चुकी छाती को दोबारा उन कपड़ों के भीतर छुपाने की कोशिश करते हुए, वह अपनी साड़ी और पेटीकोट को ठीक करने लगी। उसकी उँगलियाँ इतनी काँप रही थीं कि ब्लाउज के हुक लगाने में भी उसे भारी मशक्कत करनी पड़ रही थी।
शेर खाट पर लेटे-लेटे ही अपनी कोहनी का सहारा लेकर थोड़ा ऊपर उठा। उसकी आँखों में शिकस्त की कोई भावना नहीं थी; बल्कि वह भली-भांति जानता था कि वह मीरा की मानसिक दीवार को 70 प्रतिशत से ज़्यादा ढहा चुका है और उसकी यह जीत तय हो चुकी है। वह बेहद रसीली नज़रों से मीरा को दोबारा अपने कपड़ों को समेटते और अपनी गोरी जवानी को छुपाते हुए देख रहा था।
लेकिन उसी समय, शेर ने अपनी इस अधूरी प्यास को ज़ाहिर करने के लिए एक और चाल चली। उसने अपना एक मजबूत हाथ अपनी ढीली लुंगी के ऊपर रख दिया, जहाँ उसका लोहे जैसा सख्त लंड कपड़ों की पतली दीवार को फाड़कर बाहर आने को बेताब दिख रहा था। वह उस सख्त उभार को अपने हाथ से धीरे-धीरे दबाने लगा।
शेर (एक बेहद गहरी, भारी और चुभती हुई मर्दाना आवाज़ में, मीरा के जिस्म पर अपनी नजरें गड़ाए हुए): "मान गए मेमसाहिब... सचमुच मान गए आपके इस कंट्रोल को। इतनी आग में तपने के बाद भी आपने खुद को रोक लिया..."
उसने लुंगी के ऊपर अपने उस बेहद सख्त और उभरे हुए अंग को हल्के से भींचते हुए एक गहरी सांस ली।
शेर (अपनी आवाज़ में लाचारी का ढोंग और गहरी हवस मिलाते हुए आगे बोला): "पर ज़रा अपनी आँखों से देख तो लीजिए मीरा जी... आप अपनी कसम के मान के लिए इस गरीब नौकर को यहाँ किस तड़पती हुई और अधूरी हालत में छोड़कर जा रही हैं। यह बेचारा तो आज आपके बिना पूरी तरह जलकर खाक हो जाएगा।"
मीरा (कपड़े ठीक करते हुए, जैसे ही उसकी नज़र शेर की तरफ गई और उसने देखा कि उसका हाथ कहाँ टिका है, वह बुरी तरह सिहर उठी):
शेर की ढीली लुंगी के ऊपर उभरा वह लोहे जैसा सख्त हिस्सा और उस पर जमी उसकी सांवली हथेली देखकर मीरा के गाल शर्म और हया से एकदम दहक उठे। उसके पैर जैसे फर्श से चिपक गए। घबराहट और शर्म की एक तेज़ लहर उसके सीने से उठकर उसके चेहरे तक दौड़ गई। उसने झटके से अपना मुँह दूसरी तरफ फेर लिया, ताकि वह उस सख्त उभार को और न देख सके।
मीरा (अपनी साड़ी के पल्लू को कांपते हाथों से कंधे पर डालते हुए, बेहद तीखी और झेंपी हुई आवाज़ में): "शेर... अपनी ये गंदी हरकतें बंद करो मेरे सामने! तुम्हें ज़रा भी शर्म नहीं आती?"
शेर ने मीरा की इस शर्म और झिझक का भरपूर मज़ा लिया। उसने अपनी हथेली को लुंगी के ऊपर से ज़रा और ज़ोर से भींचा और एक बेहद गहरी, नीच और मदहोश कर देने वाली हँसी हँसा।
शेर (अपनी आवाज़ को और धीमा और शातिर करते हुए, सीधे मीरा की रीढ़ में सिहरन पैदा करने वाले लहजे में): "अरे मेमसाहिब, इसमें गंदी हरकत कैसी? यह तो मजबूरी है। आप तो अपनी कसम का मान रखकर साफ बचकर निकल रहीं हैं, पर इस गरीब नौकर के बदन में जो आग लगा दी है, उसे बुझाने के लिए यह हरकत तो मुझे आपके जाने के बाद वैसे भी अकेले में करनी ही पड़ेगी..."
उसने थोड़ा और आगे खिसककर मीरा की पीठ की तरफ देखा, जहाँ से उसकी कमर की गोलाई और नीचे सरकी हुई पैन्टी का अंदाज़ा साफ मिल रहा था। शेर के चेहरे पर एक ऐसी शैतानी मुस्कान आई जो सीधे मीरा के चरित्र को बेपर्दा करने वाली थी।
शेर (एक तीखे और ज़हरीले अंदाज़ में फुसफुसाते हुए, सीधे उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी पर वार करते हुए): "और वैसे भी मैडम... अकेले में तो यह काम शायद आपको भी करना पड़ेगा। अभी जब आप यहाँ से भागकर अपने कमरे के बाथरूम में जाएँगी, तो वहाँ जाकर अपनी उस पूरी तरह गीली हो चुकी पैन्टी को उतारते वक्त खुद को कैसे रोकेंगी? मुझे अच्छे से पता है मीरा जी, कि इस वक्त आपके बदन का पानी अंदर से बहकर आपकी पैन्टी को कितना गिला कर चुका है..."
शेर के इस सीधे और बेशर्म वार ने मीरा को अंदर तक हिलाकर रख दिया। वह शर्म के मारे पानी-पानी हो गई। उसे ऐसा लगा जैसे शेर ने न केवल उसका बदन, बल्कि उसकी अंतरात्मा के उस सबसे गहरे और गीले सच को भी अपनी उँगलियों से छूकर सबके सामने रख दिया हो। वह कुछ बोल न सकी, बस उसकी साँसें और तेज़ हो गईं।
जैसे ही मीरा के लड़खड़ाते कदमों की आहट कमरे से बाहर गई और बंद दरवाज़े के पीछे सन्नाटा छा गया, शेर के चेहरे पर एक बेहद शातिर, गहरी और विजयी मुस्कान तैर गई। वह खाट पर पूरी तरह सीधे लेट गया और अपनी सांवली छाती पर हाथ फेरने लगा, जहाँ अभी भी मीरा के गोरे, मखमली बदन की गर्मी और उसके रसीले स्तनों की रगड़ का तीखा अहसास मौजूद था।
वह बहुत ही बेबस और लड़खड़ाते कदमों से खाट से नीचे उतरी। उसकी सांसें इतनी तेज थीं कि उसका खुला हुआ सीना बुरी तरह धड़क रहा था। उसने बेहद कांपते हाथों से फर्श पर बिखरे अपने अंतर्वस्त्र और ब्लाउज को उठाया।
अपनी पूरी तरह नग्न और सुर्ख हो चुकी छाती को दोबारा उन कपड़ों के भीतर छुपाने की कोशिश करते हुए, वह अपनी साड़ी और पेटीकोट को ठीक करने लगी। उसकी उँगलियाँ इतनी काँप रही थीं कि ब्लाउज के हुक लगाने में भी उसे भारी मशक्कत करनी पड़ रही थी।
शेर खाट पर लेटे-लेटे ही अपनी कोहनी का सहारा लेकर थोड़ा ऊपर उठा। उसकी आँखों में शिकस्त की कोई भावना नहीं थी; बल्कि वह भली-भांति जानता था कि वह मीरा की मानसिक दीवार को 70 प्रतिशत से ज़्यादा ढहा चुका है और उसकी यह जीत तय हो चुकी है। वह बेहद रसीली नज़रों से मीरा को दोबारा अपने कपड़ों को समेटते और अपनी गोरी जवानी को छुपाते हुए देख रहा था।
लेकिन उसी समय, शेर ने अपनी इस अधूरी प्यास को ज़ाहिर करने के लिए एक और चाल चली। उसने अपना एक मजबूत हाथ अपनी ढीली लुंगी के ऊपर रख दिया, जहाँ उसका लोहे जैसा सख्त लंड कपड़ों की पतली दीवार को फाड़कर बाहर आने को बेताब दिख रहा था। वह उस सख्त उभार को अपने हाथ से धीरे-धीरे दबाने लगा।
शेर (एक बेहद गहरी, भारी और चुभती हुई मर्दाना आवाज़ में, मीरा के जिस्म पर अपनी नजरें गड़ाए हुए): "मान गए मेमसाहिब... सचमुच मान गए आपके इस कंट्रोल को। इतनी आग में तपने के बाद भी आपने खुद को रोक लिया..."
उसने लुंगी के ऊपर अपने उस बेहद सख्त और उभरे हुए अंग को हल्के से भींचते हुए एक गहरी सांस ली।
शेर (अपनी आवाज़ में लाचारी का ढोंग और गहरी हवस मिलाते हुए आगे बोला): "पर ज़रा अपनी आँखों से देख तो लीजिए मीरा जी... आप अपनी कसम के मान के लिए इस गरीब नौकर को यहाँ किस तड़पती हुई और अधूरी हालत में छोड़कर जा रही हैं। यह बेचारा तो आज आपके बिना पूरी तरह जलकर खाक हो जाएगा।"
मीरा (कपड़े ठीक करते हुए, जैसे ही उसकी नज़र शेर की तरफ गई और उसने देखा कि उसका हाथ कहाँ टिका है, वह बुरी तरह सिहर उठी):
शेर की ढीली लुंगी के ऊपर उभरा वह लोहे जैसा सख्त हिस्सा और उस पर जमी उसकी सांवली हथेली देखकर मीरा के गाल शर्म और हया से एकदम दहक उठे। उसके पैर जैसे फर्श से चिपक गए। घबराहट और शर्म की एक तेज़ लहर उसके सीने से उठकर उसके चेहरे तक दौड़ गई। उसने झटके से अपना मुँह दूसरी तरफ फेर लिया, ताकि वह उस सख्त उभार को और न देख सके।
मीरा (अपनी साड़ी के पल्लू को कांपते हाथों से कंधे पर डालते हुए, बेहद तीखी और झेंपी हुई आवाज़ में): "शेर... अपनी ये गंदी हरकतें बंद करो मेरे सामने! तुम्हें ज़रा भी शर्म नहीं आती?"
शेर ने मीरा की इस शर्म और झिझक का भरपूर मज़ा लिया। उसने अपनी हथेली को लुंगी के ऊपर से ज़रा और ज़ोर से भींचा और एक बेहद गहरी, नीच और मदहोश कर देने वाली हँसी हँसा।
शेर (अपनी आवाज़ को और धीमा और शातिर करते हुए, सीधे मीरा की रीढ़ में सिहरन पैदा करने वाले लहजे में): "अरे मेमसाहिब, इसमें गंदी हरकत कैसी? यह तो मजबूरी है। आप तो अपनी कसम का मान रखकर साफ बचकर निकल रहीं हैं, पर इस गरीब नौकर के बदन में जो आग लगा दी है, उसे बुझाने के लिए यह हरकत तो मुझे आपके जाने के बाद वैसे भी अकेले में करनी ही पड़ेगी..."
उसने थोड़ा और आगे खिसककर मीरा की पीठ की तरफ देखा, जहाँ से उसकी कमर की गोलाई और नीचे सरकी हुई पैन्टी का अंदाज़ा साफ मिल रहा था। शेर के चेहरे पर एक ऐसी शैतानी मुस्कान आई जो सीधे मीरा के चरित्र को बेपर्दा करने वाली थी।
शेर (एक तीखे और ज़हरीले अंदाज़ में फुसफुसाते हुए, सीधे उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी पर वार करते हुए): "और वैसे भी मैडम... अकेले में तो यह काम शायद आपको भी करना पड़ेगा। अभी जब आप यहाँ से भागकर अपने कमरे के बाथरूम में जाएँगी, तो वहाँ जाकर अपनी उस पूरी तरह गीली हो चुकी पैन्टी को उतारते वक्त खुद को कैसे रोकेंगी? मुझे अच्छे से पता है मीरा जी, कि इस वक्त आपके बदन का पानी अंदर से बहकर आपकी पैन्टी को कितना गिला कर चुका है..."
शेर के इस सीधे और बेशर्म वार ने मीरा को अंदर तक हिलाकर रख दिया। वह शर्म के मारे पानी-पानी हो गई। उसे ऐसा लगा जैसे शेर ने न केवल उसका बदन, बल्कि उसकी अंतरात्मा के उस सबसे गहरे और गीले सच को भी अपनी उँगलियों से छूकर सबके सामने रख दिया हो। वह कुछ बोल न सकी, बस उसकी साँसें और तेज़ हो गईं।
जैसे ही मीरा के लड़खड़ाते कदमों की आहट कमरे से बाहर गई और बंद दरवाज़े के पीछे सन्नाटा छा गया, शेर के चेहरे पर एक बेहद शातिर, गहरी और विजयी मुस्कान तैर गई। वह खाट पर पूरी तरह सीधे लेट गया और अपनी सांवली छाती पर हाथ फेरने लगा, जहाँ अभी भी मीरा के गोरे, मखमली बदन की गर्मी और उसके रसीले स्तनों की रगड़ का तीखा अहसास मौजूद था।
Deepak Kapoor
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