25-07-2026, 07:53 PM
खौफ और साजिश—6
शेर (उसी समय मन ही मन सोचते हुए): "भोली औरत, पाँच मिनट में मैं तेरी यह हालत करूँगा, कि जिंदगी भर याद रखेगी।"
मीरा कांपते हुए कदमों से खाट से उठी और कमरे के दरवाजे की तरफ बढ़ने लगी। अपनी खुली हुई छाती को दोनों हाथों से ढंकते हुए जब वह दरवाजे के पास पहुँची, तो पीछे से शेर की आवाज़ गूँजी।
शेर (खाट पर लेटे-लेटे ही उसे पीछे से घूरते हुए, एक कुटिल मुस्कान के साथ): "वैसे मीरा मैडम... ब्लाउज और ब्रा के हुक तो पहले ही खुल चुके हैं और वे आपके बदन पर महज़ एक बोझ की तरह लटके हैं, तो क्यों न उस कुंडी को चढ़ाने से पहले उन्हें पूरा उतार कर वहीं फेंक दें?"
दरवाजे के हैंडल पर हाथ रखते ही मीरा का पूरा बदन सिहर उठा। उसने कुंडी को अंदर से बंद किया और पीछे मुड़कर शेर की तरफ देखा।
मीरा (दरवाजे की बंद कुंडी का सहारा लेकर खड़ी होते हुए, कांपती आवाज़ में): "नहीं शेर! हमारी यह बात बिल्कुल नहीं हुई थी। तुमने मुझसे वादा किया था कि तुम मेरे और कपड़े नहीं उतारोगे!"
शेर (एक हल्की सी हंसी हंसते हुए, तकिए का सहारा लेकर थोड़ा और ऊपर उठते हुए): "अरे मैडम, मैंने अपना वादा कहाँ तोड़ा? मैंने आपसे 'और' नए कपड़े उतारने के लिए थोड़ी न कहा है... मैं तो सिर्फ उन कपड़ों को पूरी तरह बदन से अलग करने की बात कर रहा हूँ जो ऑलरेडी उतर चुके हैं, यानी आपकी ब्रा और ब्लाउज। आख़िर सिर्फ पाँच मिनट की ही तो बात है।"
यह कहते ही शेर ने अपनी खाट के पास पड़े मोबाइल को उठाया और उसकी स्क्रीन मीरा की तरफ घुमा दी।
शेर (मोबाइल पर उँगली टिकाते हुए): "लीजिए, मैं इस मोबाइल में पूरे पाँच मिनट का स्टॉपवॉच तभी चालू करूँगा जब आप पूरी तरह ऊपर से नंगी होकर मेरे पास इस खाट पर आकर लेटेंगी।"
शेर (मीरा की झिझक और उसके चेहरे पर छाई गहरी उलझन को ताड़ते हुए, एक उकसाने वाली मुस्कान के साथ): "क्या हुआ मीरा मैडम... डर गईं? अपने ही जिस्म के उस भरोसे का दम टूट गया क्या?"
शेर के इस सीधे वार ने मीरा के भीतर छिपे नारीत्व और उसके स्वाभिमान को झकझोर कर रख दिया। वह खुद को शेर के सामने कमज़ोर साबित नहीं होने देना चाहती थी।
इस चुनौती का सामना करने और शेर के उस घिनौने आरोप को झूठा साबित करने के लिए उसने अपनी आँखें बंद कीं और एक गहरा घूँट निगलते हुए अपने हाथों को अपनी छाती से हटा लिया। उसने धीरे से अपने बदन से ढीला हो चुका वह ब्लाउज और ब्रा पूरी तरह उतार कर एक तरफ फेंक दिए।
अब उसका ऊपर का आधा धड़ पूरी तरह नंगा था। वह अपने दोनों स्तनों को हवा में खुला छोड़ते हुए भारी कदमों से शेर की खाट की तरफ बढ़ने लगी। क्या नज़ारा था! दो गोरे-चिट्टे मुम्मे, जो पहले ही लाल हो चुके थे, हर कदम के साथ झूल रहे थे।
मीरा को वह सख्त लग रहे थे डर या उत्तेजना की वजह से। उनपे गुलाबी निप्पल पूरी तरह अकड़ के खड़े थे।
शेर की आँखें फटी की फटी रह गईं यह नज़ारा देख कर। धोती के नीचे लूँड पूरा सख्त हो गया था, पाँच मिनट में मीरा पे राज करने के लिए।
इसी बीच, शेर ने अपने बदन पर पड़े कुर्ते और नीचे पहनी बनियान को एक ही झटके में सिर के ऊपर से खींचकर उतार दिया।
अब शेर का भी ऊपर का पूरा धड़ पूरी तरह नंगा हो चुका था। उसका मजबूत सीना घने काले बालों से ढका हुआ था। उसका बदन सांवला ज़रूर था, पर उसका सीना काफी तना हुआ और पेट बिना किसी अतिरिक्त चर्बी के एकदम मजबूत था।
मीरा (शेर के इस सख्त और नंगे सांवले बदन को देखकर एकदम ठिठकते हुए, डर और सिहरन के मिले-जुले स्वर में): "शेर... यह... यह क्या कर रहे हो तुम? तुमने तो कहा था..."
शेर (अपने चौड़े और काले बालों से भरे सीने पर हाथ फेरते हुए, एक मर्दाना और वहशी अंदाज़ में): "अरे मीरा मैडम, जब आप ऊपर से पूरी तरह नग्न होकर मेरे इस बिस्तर पर आ रही हैं, तो बराबरी तो होनी ही चाहिए ना... आपके इस बेहद गोरे बदन के सामने इस गरीब नौकर का यह सांवला बदन भी तो पूरी तरह नंगा होना ही चाहिए।"
मीरा (पीछे ठिठकते हुए, अपने दोनों हाथों को अपनी बेपर्दा और उभरी हुई छाती के आगे आड़ा करने की नाकाम कोशिश करते हुए): "नहीं शेर... यह बिल्कुल तय नहीं हुआ था! यह तुम्हारी सरासर चालाकी है, मैं इस तरह तुम्हारे सामने..."
शेर (एक गहरी, चुनौती भरी हँसी हँसते हुए और तकिये के सहारे खाट पर थोड़ा और पीछे खिसकते हुए): "अरे मेमसाहिब, मैंने अपना वादा कहाँ तोड़ा? मैंने आपके बदन का तो कोई नया कपड़ा नहीं छुआ... मैंने तो बस अपने खुद के कपड़े उतारे हैं। अब पीछे मत हटिए, वरना साफ़ ज़ाहिर हो जाएगा कि आपको सचमुच अपने इस बहकते हुए बदन पर बिल्कुल भरोसा नहीं है।"
शेर अपनी सांवली, गठीली और बालों से ढकी छाती को तानते हुए मीरा की आँखों में आँखें डाल दीं।
शेर (अपनी आवाज़ को और धीमा करते हुए फुसफुसाया): "अब ज़्यादा देर मत कीजिए मीरा मैडम... दोपहर ढल रही है, कोठी का कोई भी बंदा कभी भी इस तरफ आ सकता है। सिर्फ पाँच मिनट की ही तो बात है... आइए, और आज जानिए कि आप सच बोल रही हैं या सिर्फ अपने मन को समझाने की कोशिश कर रही हैं, इस खाट पर मेरे पास आकर लेट जाइए।"
शेर (जैसे ही मीरा खाट के पास पहुँची, उसकी कलाई को कसकर पकड़ते हुए और दूसरे हाथ से मोबाइल का स्टॉपवॉच शुरू करते हुए): "लीजिए मेमसाहिब, समय शुरू होता है अब... पूरे पाँच मिनट।"
घड़ी की टिक-टिक शुरू होते ही शेर ने मीरा के हाथ को थोड़ा ऊपर खींचा और अपनी भूखी आँखों से उसकी पूरी तरह नग्न और उभरी हुई छाती को घूरते हुए बोला।
शेर (एक बेहद गहरी और हवस भरी आवाज़ में): "अब देर मत कीजिए, अपनी इस आधी खुली साड़ी के साथ जरा मेरे सीने के ऊपर आ जाइए... आज इस नौकर को अपने इस तपते हुए काले सीने पर आपकी इस गोरी और मखमली जवानी का पूरा अहसास चाहिए।"
मीरा के भीतर जैसे शर्म और कशमकश का एक भयानक तूफ़ान चल रहा था। उसका बदन काँप रहा था, लेकिन शेर की उस चुनौती को सच साबित करने की ज़िद में उसने अपने कदम आगे बढ़ाए।
वह बेहद हिचकिचाहट और कंपकंपी के साथ खाट पर चढ़ी और घुटनों के बल होकर शेर के चौड़े और गठीले सीने के ठीक ऊपर बैठ गई। उसकी आधी खुली हुई साड़ी उसके कूल्हों के पास लिपटी थी, और उसके दोनों भारी, सुर्ख और गोरे स्तन पूरी तरह आज़ाद होकर शेर की आँखों के ठीक सामने धड़क रहे थे।
शेर अपनी आँखों के सामने मखमली गोरेपन का ऐसा नज़ारा देखकर अपना आपा खोने लगा। वह एक भी सेकंड बर्बाद नहीं करना चाहता था। उसने मीरा की पीठ पर अपने मजबूत हाथ रखे और उसे झटके से नीचे की ओर खींचते हुए अपने नंगे, बालों से भरे सीने पर पूरी तरह लिटा लिया।
मीरा (जैसे ही उसका गोरा बदन शेर के सख्त जिस्म से टकराया): "आह्ह्...!"
उस धुंधले कमरे की खाट पर अब मीरा का ऊपर का आधा हिस्सा पूरी तरह निर्वस्त्र होकर शेर के सांवले और तने हुए नंगे सीने से चिपक गया था।
दोनों के बीच कोई पर्दा नहीं था; मीरा के दोनों सुडौल स्तन शेर की घनी छाती और उसके काले बालों के बीच पूरी तरह पिचक गए थे। दोनों के शरीरों की गर्मी एक-दूसरे में समाने लगी थी।
उसी क्षण, जैसे ही मीरा का निचला हिस्सा शेर के पेट और जाँघों के संपर्क में आया, उसे अपनी जाँघों के बीच, अपनी चूत के ठीक ऊपर शेर के कपड़े के भीतर छिपे अंग का एक बेहद सख्त और लोहे जैसा कड़ा उभार साफ़ महसूस हुआ।
यद्यपि उनके बीच अभी भी मीरा की आधी साड़ी और शेर के निचले कपड़ों की दीवार थी, लेकिन शेर का वह सीधा प्रहार मीरा की देह की उस गीली नमी को और भड़काने के लिए काफी था।
वह महसूस करते ही पूरी तरह सुन्न रह गई, और उसकी सांसें शेर के चेहरे पर गर्म भाप की तरह टकराने लगीं।
शेर (अपनी आँखों को आधा बंद किए हुए):
उसने अपना हाथ मीरा की चिकनी नंगी पीठ पर जाकर चिपका दिया। उसकी चौड़ी उंगलियां मीरा की रीढ़ की हड्डी पर रेंगते हुए नीचे की ओर सरकने लगीं, जिससे मीरा की देह में घबराहट की एक और लहर दौड़ गई।
शेर (एक बेहद गहरी, नीची और हुक्म भरी आवाज़ में फुसफुसाते हुए): "अब... धीरे-धीरे अपने इन नंगे सुडौल मुम्मों को मेरी इस छाती पर रगड़ना शुरू कीजिए, मीरा मैडम। इस गरीब नौकर को आपके इस मखमली गोरेपन की पूरी रगड़ अपने इस तपते हुए सीने पर महसूस करनी है। रुकना मत... जैसे ही आप रुकेंगी, मोबाइल का यह स्टॉपवॉच वहीं ठहर जाएगा और आपके छूटने का समय और बढ़ जाएगा..."
मीरा पूरी तरह जाल में फँस चुकी थी। उसकी पीठ पर शेर का वह मजबूत हाथ लगातार दबाव बना रहा था, जिससे उसकी छाती शेर के सख्त, सांवले और बालों से भरे सीने में और गहराई से धँसती जा रही थी।
अपनी पाँच मिनट के नरक को खत्म करने की चाह में, मीरा ने बेहद शर्म और लाचारी के साथ अपने ऊपरी धड़ को धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया। जैसे ही उसके मखमली, सुर्ख और सुडौल स्तन शेर के सीने के कड़े बालों और उसकी सख्त पसलियों पर रगड़ाने लगे, दोनों के शरीरों के बीच घर्षण से एक तीखी गर्मी पैदा होने लगी।
शेर के सीने के बालों का खुरदरापन मीरा के नाजुक, सख्त हो चुके निप्पलों को बुरी तरह छू रहा था, जिससे उसके मुँह से सिसकियों और कराहों का सिलसिला और तेज़ हो गया।
मीरा (आँखें बंद किए, दर्द और बेकाबू उत्तेजना के मिले-जुले अहसास में हाँफते हुए): "आह... उफ़्फ़... शेर... सीऽऽ... धीरे..."
शेर ( मीरा के इस बेबस समर्पण का पूरा मज़ा लेते हुए):
उसने अपना एक हाथ नीचे खिसकाया और मीरा के भरे हुए गांड पर पूरी ताकत से जमा दिया। इस अचानक और भारी दबाव के कारण मीरा का निचला धड़ पूरी तरह घिसटता हुआ शेर की जाँघों के बीच उठ रहे उस लोहे जैसे लूँड के साथ कसकर जुड़ गया। अब कपड़ों की पतली दीवार के आर-पार उन दोनों के गुप्त अंग एक-दूसरे से पूरी तरह चिपक चुके थे, जिससे उठने वाली गर्मी मीरा के पूरे बदन को बेकाबू कर रही थी।
इसी बीच, शेर का दूसरा हाथ मीरा की चिकनी पीठ पर उस जगह जाकर जमा जहाँ ब्लाउज और ब्रा की पट्टी हुआ करती थी। उसने वहाँ से मीरा की पीठ को दबोचा और झटके से अपनी तरफ खींचा, जिससे मीरा के सुडौल, भारी और नंगे स्तन शेर की गठीली, बालों से ढकी छाती में इस तरह धँस गए कि उन दोनों के सीनों के बीच हवा गुज़रने की भी गुंजाइश नहीं बची। मीरा की नाजुक त्वचा पर शेर के छाती के बाल और सख्त पसलियां बुरी तरह चुभ रही थीं।
मीरा (अपनी जाँघों के बीच शेर की उस कड़ाई को सीधे महसूस करके और अपने स्तनों पर पड़ रहे उस बेतहाशा दबाव से तड़पकर): "आह्ह्... ओ गॉड... शेर..."
शेर की कामुकता इस वक्त चरम पर थी। उसने अपना चेहरा ऊपर उठाया और अपनी गीली, गर्म जीभ सीधे मीरा के गोरे गले पर फेर दी। मीरा की संवेदनशील गर्दन को चाटते हुए शेर के मुँह से निकलती गर्म और तेज सांसें मीरा की त्वचा को झुलसा रही थीं।
गले से ऊपर सरकते हुए शेर ने अपनी आँखें खोलीं और सीधे मीरा के काँपते हुए गुलाबी होंठों को चूमने के लिए अपना मुँह आगे बढ़ाया।
लेकिन अपनी बची-कुची गरिमा और लाज को समेटते हुए, मीरा ने आखिरी पल में अपनी पूरी हिम्मत जुटाई और अपना मुँह झटके से दूसरी तरफ फेर लिया।
मीरा (हांफते हुए, रुआंसी और डरी हुई आवाज़ में): "शेर... प्लीज... वहाँ नहीं... मुंह पर नहीं..."
शेर इस वक्त अपनी पूरी जीत का स्वाद चख रहा था, इसलिए उसने मीरा की इस छोटी सी ना-नुकुर पर कोई बहस करना ठीक नहीं समझा। वह जानता था कि मीरा का पूरा बदन पहले ही उसकी गिरफ्त में पूरी तरह जकड़ा हुआ है और वह जो चाहे कर सकता है।
उसने एक गहरी मुस्कान के साथ अपने चेहरे को वापस मीरा की गर्दन के पास टिका दिया, जहाँ वह लगातार अपनी जीभ और होंठों की गर्मी छोड़ रहा था।
शेर ( मीरा की पीठ पर अपनी मजबूत पकड़ को और कसते हुए): "रगड़ते रहिए मेमसाहिब... रुकिए मत। अभी तो सिर्फ एक मिनट ही हुए हैं..."
एक मिनट! मीरा के दिमाग में जैसे बिजली सी कौंधी। उसका पूरा जिस्म इस वक्त बुरी तरह तप रहा था, और उसकी योनि से निकलता गर्म रस उसकी साड़ी को अंदर ही अंदर गीला कर चुका था। वह मन ही मन बुरी तरह छटपटा उठी।
मीरा (अपने मन में, अत्यधिक घबराहट और बेबसी के साथ): "हे भगवान... मेरा पूरा बदन आग की तरह दहक रहा है, मुझसे अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा... और अभी सिर्फ एक मिनट ही बीते हैं? मैं और चार मिनट कैसे झेलूँगी!"
मीरा बस अपनी आज़ादी की चाह में अपने शरीर को ऊपर-नीचे करते हुए रगड़ने लगी। जैसे ही वह रगड़ते हुए थोड़ा ऊपर की ओर उठी, शेर ने अपनी इस हरकत का पूरा फायदा उठाया। उसने फुर्ती से अपने मजबूत पैर को मीरा की आधी लिपटी साड़ी के घेरे के भीतर अड़ा दिया।
चूंकि शेर केवल एक ढीली लुंगी पहने हुए था, उसका सांवला और मजबूत नंगा पैर सीधे मीरा के रेशमी जिस्म के संपर्क में आ गया। जैसे ही मीरा अगले ही पल वापस नीचे की ओर झुकी, शेर के उस नंगे पैर के दबाव से उसकी साड़ी सरक कर जाँघों से ऊपर चढ़ गई। अब शेर का वह नंगा पैर मीरा की दोनों चिकनी गोरी जाँघों के बीच की संवेदनशील जगह को सीधे छूते हुए अपनी जगह बनाने लगा था।
मीरा (चारों तरफ से हो रहे इस तीखे और वहशी जिस्मानी हमले से पूरी तरह दहल उठी):
उसका दिमाग जैसे काम करना बंद कर चुका था। वह चाहकर भी इस चक्रव्यूह से बाहर नहीं निकल पा रही थी। शेर ने उसे इस कदर अपने जिस्मानी घेरे में जकड़ लिया था कि मीरा का रोम-रोम वासना और बेबसी की आग में सुलग रहा था:
उसके दोनों भारी, तने और पूरी तरह नंगे मुम्मे शेर के सख्त, सांवले और बालों से भरे सीने पर लगातार रगड़ खा रहे थे, जिससे उसके नाजुक निप्पलों में एक मीठा दर्द और सिहरन उठ रही थी।
शेर की मजबूत पकड़ के कारण उसका गांड इतनी बुरी तरह दबा हुआ था कि उसकी संवेदनशील चुट कपड़ों के पतले पर्दे के आर-पार शेर के सख्त लूँड पर हर हरकत के साथ सीधे रगड़ खा रही थी।
शेर का एक हाथ उसकी भारी गांड को बुरी तरह दबोचे हुए था, जबकि उसकी दूसरी गर्म हथेली मीरा की बेहद चिकनी और नंगी पीठ पर मखमली अहसास को टटोलते हुए घूम रही थी।
शेर का मुँह मीरा के गले से चिपका हुआ था, और उसके गर्म, प्यासे होंठ मीरा की गोरी और संवेदनशील गर्दन की त्वचा को पागलों की तरह चूस रहे थे, जिससे मीरा के मुँह से लगातार सिसकियाँ फूट रही थीं।
नीचे की तरफ, शेर का सांवला और मजबूत नंगा पैर मीरा की दोनों बेहद गोरी, चिकनी और सेक्सी नंगी जाँघों के बीच पूरी तरह समा चुका था और उसकी मखमली त्वचा पर रगड़ खा रहा था।
मीरा का पूरा वजूद इस वक्त पानी-पानी हो रहा था। उसके जिस्म से रिसता हुआ गर्म रस अब उसकी जाँघों को गीला कर रहा था, और वह खुद को इस नौकर के सामने पूरी तरह घुटने टेकते हुए महसूस कर रही थी।
शेर (मीरा की जाँघों के बीच अपने पैर की रगड़ को और तेज़ करते हुए, उसकी गर्दन पर अपने होंठों का दबाव बढ़ाते हुए बेहद भारी और मदहोश आवाज़ में फुसफुसाया): "रुकिए मत... बस इसी तरह रगड़ती रहिए मीरा मेमसाहिब... इस नौकर को अपने इस सांवले बदन पर आपकी इस गोरी जवानी का पूरा रस पी जाने दीजिए..."
शेर (एक गहरी, वहशी हँसी के साथ मीरा के कानों के पास फुसफुसाते हुए): "अभी तो सिर्फ ढाई मिनट ही हुए हैं, मेमसाहिब... आधा टाइम बाकी है। अभी से इतनी बेहाल मत होइए, खेल तो अभी आधा बाकी है..."
मीरा (अपनी आँखें बंद करके, अपने सिर को बेबस होकर इधर-उधर पटकते हुए): "नहीं... तुम... तुम झूठ बोल रहे हो शेर! मुझे पता है, ढाई मिनट से बहुत ज्यादा हो गया है। मैं... मैं अब और बर्दाश्त नहीं कर सकती!"
शेर ने जैसे ही मीरा की आवाज़ सुनी, उसने अपना एक हाथ मीरा की गर्दन के पीछे डाला और अपनी पकड़ इतनी सख्त कर ली कि मीरा की आवाज़ गले में ही दबकर रह गई।
शेर (मीरा के चेहरे के ठीक सामने झुककर, उसकी आँखों में घूरते हुए): "मैडम... क्या कहा मैंने? बीच में मत बोलिए। अगर एक शब्द भी और निकला, तो मैं इस स्टॉपवॉच को शून्य पर ले जाऊँगा और फिर से सब कुछ 'जीरो' से शुरू करना पड़ेगा। क्या आप चाहती हैं कि यह तड़प पाँच मिनट के बजाय बीस मिनट तक खींचे?"
उसकी धमकी ने मीरा के होश ठिकाने लगा दिए। उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर अपने मुँह को सिला और बस अपनी गर्दन को 'ना' में हिलाया।
शेर (मदहोश आवाज़ में): "गुड। अब खामोश रहिए और बस अपने जिस्म को मेरी छाती पर रगड़ते रहिए। मुझे पता है कि आपको यह हर एक सेकंड भारी पड़ रहा है, पर यकीन मानिए मीरा मेमसाहिब, इस एक-एक सेकंड में जो आग आप महसूस कर रही हैं, वो मुझे भी पागल कर रही है। क्या गज़ब की आग है आपमें... आपकी ये रेशमी जाँघें, ये रसीले मुम्मे... मुझे तो लगता है कि ये पाँच मिनट भी कम पड़ जाएंगे।"
मीरा ने अब कोई जवाब नहीं दिया। वह बस आँखों से आँसू बहाते हुए, लाचारी में अपने भारी स्तनों को शेर के बालों वाले सीने पर और ज़ोर से रगड़ने लगी।
शेर का हाथ उसकी गांड पर अब भी सख्ती से जमा हुआ था, और उसके नंगे पैर की रगड़ मीरा की जाँघों के बीच की गीली नमी को और बढ़ा रही थी। मीरा का जिस्म शेर के हर हुक्म को मान रहा था, जबकि उसका दिमाग अंदर ही अंदर इस हवस के खेल में पूरी तरह हार मान चुका था।
मीरा (अपनी आँखें बंद किए, पूरी तरह बदहवास होकर अपने होठों को चेंटती हुई): "ओह... गॉड... आhh... शेर... बस..."
मीरा की हालत इस वक्त सचमुच बहुत खराब हो चुकी थी। अपनी पूरी संभ्रांत जिंदगी में उसने कभी भी इस तरह के बर्बर, सीधे और वहशी जिस्मानी हमले का सामना नहीं किया था।
उसका पूरा जिस्म इस तरह दहक रहा था जैसे रगों में खून की जगह खौलता हुआ पारा दौड़ रहा हो। उसके मुँह से अब शब्दों के बजाय सिर्फ बेकाबू सिसकियाँ और "ओह गॉड" की मदहोश कराहें निकल रही थीं, जो कमरे की उमस भरी हवा में तैर रही थीं।
उनकी इस लगातार रगड़ और कशमकश के कारण मीरा की साड़ी और पेटीकोट पूरी तरह सिमटकर और इकट्ठे होकर उसकी पतली कमर के पास जमा हो चुके थे। नीचे का पूरा हिस्सा लगभग बेपर्दा हो चुका था।
शेर का सांवला, मजबूत और नंगा पैर मीरा की दोनों नग्न, मखमली जाँघों के बीच पूरी तरह अड़ा हुआ था। जब-जब मीरा शेर के हुक्म के मुताबिक खुद को ऊपर-नीचे करके अपने स्तनों को उसके सीने पर रगड़ती, तब-तब शेर का वह सख्त पैर उसकी जाँघों के जोड़ पर मौजूद उसकी योनि के नाजुक हिस्से को बीचों-बीच से बेरहमी से मसल देता था। इस सीधे और गीले घर्षण से मीरा का रोम-रोम काँप उठता था।
लेकिन शेर इतने पर ही रुकने वाला नहीं था। उसने अपनी उस बड़ी हथेली को, जो मीरा की गांड पर टिकी थी, थोड़ा और नीचे खिसकाया। उसने पूरी ताकत से मीरा की सिमटी हुई साड़ी को और ऊपर की ओर खींचा, जिससे उसकी जाँघें और कूल्हे पूरी तरह नंगे हो गए। फिर, बिना एक पल गंवाए, शेर की उंगलियों ने मीरा की महीन पैन्टी के किनारे को पकड़ा और उसे झटके से नीचे की तरफ सरका दिया।
अगले ही पल, शेर ने अपनी पूरी खुली हुई, खुरदरी गर्म हथेली सीधे मीरा की पूरी तरह नग्न, गोरी और गदरायी हुई गांड पर जमा दी।
जैसे ही उस बेहद संवेदनशील और ठंडे हिस्से पर शेर की गर्म, सख्त हथेली और उंगलियों का सीधा, नंगा स्पर्श हुआ, मीरा के पूरे बदन में जैसे बिजली का एक तेज़ झटका लगा। उसकी रीढ़ की हड्डी थरथरा उठी।
मीरा (इस अचानक और सीधे नग्न स्पर्श के तीखे अहसास से पूरी तरह कांपकर, अपनी पीठ को हवा में तानते हुए पागलों की तरह चीख उठी): "आह्ह्... श-शेर...!!!"
उसकी वह तीखी, मदहोश और दर्द से भरी चीख कमरे के बंद दरवाज़े के भीतर गूँज उठी, जबकि उसका पूरा निचला धड़ शेर के लोहे जैसे सख्त अंग पर पूरी तरह बेबस होकर छटपटाने लगा।
मीरा (हवस, खौफ और अपनी नंगी त्वचा पर शेर के उस खुरदरे हाथ के सीधे स्पर्श से पूरी तरह थरथराते हुए, सिसककर): "शेर... प्लीज... वहाँ नहीं... वहाँ हाथ मत लगाओ... आह!"
शेर (अपनी उँगलियों को उसकी नग्न गांड के गोश्त में और गहराई से धंसाते हुए, एक बेहद घिसी हुई और वहशी आवाज़ में): "अरे मेमसाहिब, मैंने आपके बदन से कोई नया कपड़ा कहाँ उतारा है? पैन्टी तो खुद-ब-खुद नीचे खिसक गई... आप बस इन नंगे मुम्मों की रगड़ पर ध्यान दीजिए, वरना घड़ी सुई की तरह वहीं अटक जाएगी।"
मीरा के पास सोचने का वक्त ही नहीं था। घबराहट और लाचारी में, जैसे ही उसने स्टॉपवॉच के सेकंड पूरे करने के लिए अपने ऊपरी धड़ को वापस नीचे की ओर झुकाया, शेर ने इसी मौके का इंतज़ार किया था।
उसने नीचे से अपनी कमर को एक ज़ोरदार झटका दिया। अपनी पूरी मर्दाना ताकत बटोरकर शेर ने अपनी लुंगी के भीतर छिपे उस लोहे जैसे सख्त लंड के हिस्से को आगे की तरफ से मीरा की पूरी तरह गीली हो चुकी संवेदनशील चुत पर सीधे रगड़ दिया।
साथ ही, उसने अपनी दूसरी हथेली से मीरा की नग्न, गोरी गांड को इतनी बेतहाशा ताकत से नीचे की ओर दबाया कि मीरा का पूरा निचला हिस्सा शेर के उस तने हुए अंग के ऊपर पूरी तरह पिस गया।
यद्यपि दोनों के बीच अभी भी कपड़ों का एक महीन पर्दा बाकी था, लेकिन उस भयानक और सीधी रगड़ के तीखे प्रहार ने मीरा के पूरे वजूद को हिलाकर रख दिया। उस अंग की कड़ाई और गर्मी ने मीरा की योनि के सबसे संवेदनशील हिस्से को इतनी बेरहमी से छुआ कि उसकी आँखों के आगे जैसे अंधेरा छा गया।
मीरा (अपनी जाँघों के बीच अचानक फूटे इस बेहद तीखे, अधूरे और असहनीय कामुक अहसास से तड़पकर, अपना सिर पीछे की तरफ पटकते हुए पागलों की तरह चीख उठी): "आह्ह्...!!! ओ गॉड... श-शेर... गई...!!!"
उसकी वह चीख इतनी तीखी और मदहोश थी कि कमरे की दीवारें भी काँप उठीं। उस एक झटके ने मीरा के पूरे बदन को पानी-पानी कर दिया था, और उसकी आँखों से आंसुओं की धार बहने लगी, जबकि उसका गोरा जिस्म शेर के सांवले बदन के ऊपर पूरी तरह बेजान होकर काँपने लगा।
शेर (मीरा की जाँघों के बीच की तेज थरथराहट और उसके जिस्म की इस बेकाबू तपिश को भांपते हुए, अचानक अपनी सारी हरकतों को रोकते हुए):
उसने अपनी कमर को झटका देना बंद कर दिया, और उसकी नंगी पीठ तथा गांड पर जमी उसकी मजबूत हथेलियाँ भी स्थिर हो गईं। कमरे में अचानक एक गहरा सन्नाटा छा गया, जिसमें सिर्फ मीरा की उखड़ती हुई, तेज़ सांसों और सिसकियों का शोर गूंज रहा था।
शेर ने धीरे से अपना सिर ऊपर उठाया और मीरा के पसीने से भीगे, शर्म से लाल हो चुके चेहरे की तरफ देखा। उसकी आँखों में एक बेहद शातिर, विजयी और मदहोश कर देने वाली मुस्कान थी।
उसने अपने हाथ में पकड़े मोबाइल की स्क्रीन मीरा की धुंधली आँखों के सामने कर दी, जहाँ स्टॉपवॉच के पाँच मिनट पूरे हो चुके थे।
शेर (एक बेहद धीमी, भारी और गहरी आवाज़ में फुसफुसाते हुए): "मीरा मैडम... पूरे पाँच मिनट बीत चुके हैं। मोबाइल देख लीजिए। जैसा कि मैंने वादा किया था, मैं अपनी बात का पक्का हूँ। आज के लिए आप अपनी बेटी की उस कसम के हर बंधन से पूरी तरह आज़ाद हैं।"
उसने मीरा की गांड पर से अपनी पकड़ को थोड़ा ढीला किया, जिससे उसे ऊपर उठने का रास्ता मिल सके।
शेर (अपनी आँखों में पूरी वहशियत और चुनौती भरकर, सीधे मीरा के काँपते होठों को घूरते हुए): "अब फैसला पूरी तरह आपके हाथ में है... अगर आपका मन कहता है कि आपको इस नौकर के पास से चले जाना चाहिए, तो आप अभी इसी वक्त मेरे इस बदन से उतर सकती हैं, अपने बिखरे कपड़े समेटकर यहाँ से जा सकती हैं। मैं आपका रास्ता बिल्कुल नहीं रोकूँगा।"
मीरा ने अविश्वास और बेहद लाचारी से शेर की तरफ देखा। उसका पूरा जिस्म इस वक्त चरम सीमा के ठीक मुहाने पर खड़ा तड़प रहा था, और जाँघों के बीच की गीली नमी उसे अंदर ही अंदर पागल कर रही थी।
शेर (अपनी आवाज़ को और धीमा करके, उसके कानों के पास अपनी गर्म सांसें छोड़ते हुए आगे बढ़ा): "लेकिन... अगर आपकी यह प्यासी देह कुछ और चाहती है... अगर आप चाहती हैं कि हम इस खेल में और आगे बढ़ें और आपकी इस आग को पूरी तरह शांत करें... तो बस चुपचाप इसी तरह अपने इस गर्म बदन को मेरे सीने पर रगड़ती रहिए। फैसला आपका है, मेमसाहिब... उठना है या फिर से रगड़ना शुरू करना है?"
मीरा (भीतर चल रहे एक भयंकर और जानलेवा मानसिक युद्ध में घुटते हुए, अपनी आँखें मूँदकर हाँफती रही):
उसका पूरा बदन इस वक्त चरम उत्तेजना की उस दहलीज पर खड़ा था जहाँ से एक कदम आगे बढ़ते ही वह सीधे वासना की गहरी खाई में गिर जाती। उसकी प्यासी देह चीख-चीखकर शेर के उस सख्त बदन और अपनी कामुक तृप्ति की मांग कर रही थी।
लेकिन दूसरी तरफ उसका स्वाभिमान, उसका संभ्रांत चरित्र और शेर के उस घिनौने आरोप को गलत साबित करने की जिद दीवार बनकर खड़ी हो गई। वह शेर को यह दिखाने के लिए अपनी पूरी ताकत बटोरना चाहती थी कि वह वाकई सिर्फ कसम के आड़ में लाचार थी, कोई हवस की मारी औरत नहीं।
Deepak Kapoor
Author on amazon
https://xossipy.com/thread-71793.html -- अनीता सिंह-
https://xossipy.com/thread-73166.html - अम्मी और अंकल
Author on amazon
- An Innocent Beauty Series ( 5 Books )
https://xossipy.com/thread-71793.html -- अनीता सिंह-
https://xossipy.com/thread-73166.html - अम्मी और अंकल


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)