25-07-2026, 03:42 PM
पूजा ने शर्म और उत्तेजना से काँपते हुए कहा, “बाबाजी… आगे से पैंटी नहीं पहनूँगी… आपके लिए दोनों छेद खुला ही रखूँगी।”
बाबा ने मुस्कुराते हुए पूजा की पैंटी को जाँघों तक सरका दिया और पूरी तरह उतार फेंका। पूजा की गीली चूत और गुलाबी गांड अब पूरी तरह नंगी थी।
बाबा ने पूजा की जाँघें फैलाकर कहा, “मेरी रानी… अपनी चूत द्वार का सेवन तो करा दे…” प्रस्तुतकर्ता मैत्री है।
यह कहकर बाबा पूजा की चूत पर झुक गए और जोर-जोर से चाटने लगे। उनकी गर्म जीभ पूजा की चूत की फाँक पर घूम रही थी, clit को चूस रही थी और अंदर तक घुसने की कोशिश कर रही थी।
पूजा के बदन में करंट-सा दौड़ गया। वह पहली बार किसी के द्वारा चूत चटवाई रही थी। उसका पूरा शरीर सिहर उठा।
पूजा ने सिर पीछे झुकाकर चीखते हुए कहा, “आआह्ह… म… एमेम… मेरी चूत का सेवन कर लो बाबाजी… तुम्हारे लिए सारे द्वार खुले हैं… अपनी शुद्ध जीभ से मेरी चूत का भोग लगा लो… मेरी चूत भी पवित्र हो जाएगी… आआह्ह…”
बाबा ने जीभ अंदर डालकर चूसते हुए कहा, “आअहह… मजा आ गया… पुत्री, तेरा चूत-रस का स्वाद आल्हादक है। और यह चूत का नजारा मुर्दे को भी उठाकर उसके लंड में आग लगा दे ऐसी है। क्या चूत पाई है रानी…”
पूजा ने बाबा के बाल पकड़कर उनकी जीभ को और गहरा दबाते हुए बोली, “अया… हाँ… हाँ… ले लो मजा… एक विधवा को तुमने गरम तो कर ही दिया है… इसकी चूत चखने का मौका मत गँवाओ… मेरे बाबाजी… आआईई… प…”
बाबा ने पूजा को पेट के बल लिटा दिया। उसकी साड़ी और घाघरा उसकी हिप्स के ऊपर चढ़ा दिए। पूजा की मोटी, गोरी और नरम गांड अब पूरी तरह उजागर थी। बाबा ने दोनों हाथों से उसके चूतड़ फैलाए और गांड के छेद को चाटने लगा।
पूजा को इसमें बहुत मजा आ रहा था। वह अपनी गांड को पीछे की तरफ दबा रही थी। बाबा गांड चाटते हुए साथ-साथ उसकी चूत को भी उँगलियों से रगड़ रहे थे।
पूजा कराहते हुए बोली, “आअहह… चलो… बाबाजी… अब स्वाहा कर दो… ऊऊस्स्ष्ह… मेरे इन दोनों छेदों को…” रचयिता मैत्री पटेल है।
बाबा ने पूजा की गांड पर थूक लगाया, अपनी उँगलियों से फैलाया और बोले, “चल… अब मेरा प्रसाद लेने के लिए तैयार हो जा…”
पूजा ने शर्माते हुए लेकिन उत्सुकता से कहा, “आह्ह… बाबाजी… आज मैं प्रसाद पीछे से लूँगी…ऐसे सीधे सीधे प्रसाद ना देना मार-मार के बड़ी भोस जैसी बना दो मेरी गांड को, फिर कभी लंड मांगे नहीं ऐसा कर दो, और बाद में मेरी गांड को आपके लंड के प्रसाद से नवाजो।” अब वह बेशरम हो गई थी।
बाबा: “चल मेरी रानी… जैसे तेरी मर्ज़ी…”
पूजा अब पूरी तरह बाबा के अधीन थी। बाबा ने पूजा को पेट के बल लिटाया, उसकी साड़ी और घाघरे कमर तक चढ़ा दिए। पूजा की मोटी, गोरी, नरम गांड अब पूरी तरह उजागर थी। बाबा ने दोनों हाथों से उसके चूतड़ फैलाए, थूक लगाया और अपनी उँगलियों से गांड का छेद फैलाने लगा।
पूजा काँपते हुए बोली, “बाबाजी… धीरे… मेरी गांड बहुत टाइट है… डर लग रहा है…”
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जुड़े रहिये दोस्तों।
Maitri patel.
बाबा ने मुस्कुराते हुए पूजा की पैंटी को जाँघों तक सरका दिया और पूरी तरह उतार फेंका। पूजा की गीली चूत और गुलाबी गांड अब पूरी तरह नंगी थी।
बाबा ने पूजा की जाँघें फैलाकर कहा, “मेरी रानी… अपनी चूत द्वार का सेवन तो करा दे…” प्रस्तुतकर्ता मैत्री है।
यह कहकर बाबा पूजा की चूत पर झुक गए और जोर-जोर से चाटने लगे। उनकी गर्म जीभ पूजा की चूत की फाँक पर घूम रही थी, clit को चूस रही थी और अंदर तक घुसने की कोशिश कर रही थी।
पूजा के बदन में करंट-सा दौड़ गया। वह पहली बार किसी के द्वारा चूत चटवाई रही थी। उसका पूरा शरीर सिहर उठा।
पूजा ने सिर पीछे झुकाकर चीखते हुए कहा, “आआह्ह… म… एमेम… मेरी चूत का सेवन कर लो बाबाजी… तुम्हारे लिए सारे द्वार खुले हैं… अपनी शुद्ध जीभ से मेरी चूत का भोग लगा लो… मेरी चूत भी पवित्र हो जाएगी… आआह्ह…”
बाबा ने जीभ अंदर डालकर चूसते हुए कहा, “आअहह… मजा आ गया… पुत्री, तेरा चूत-रस का स्वाद आल्हादक है। और यह चूत का नजारा मुर्दे को भी उठाकर उसके लंड में आग लगा दे ऐसी है। क्या चूत पाई है रानी…”
पूजा ने बाबा के बाल पकड़कर उनकी जीभ को और गहरा दबाते हुए बोली, “अया… हाँ… हाँ… ले लो मजा… एक विधवा को तुमने गरम तो कर ही दिया है… इसकी चूत चखने का मौका मत गँवाओ… मेरे बाबाजी… आआईई… प…”
बाबा ने पूजा को पेट के बल लिटा दिया। उसकी साड़ी और घाघरा उसकी हिप्स के ऊपर चढ़ा दिए। पूजा की मोटी, गोरी और नरम गांड अब पूरी तरह उजागर थी। बाबा ने दोनों हाथों से उसके चूतड़ फैलाए और गांड के छेद को चाटने लगा।
पूजा को इसमें बहुत मजा आ रहा था। वह अपनी गांड को पीछे की तरफ दबा रही थी। बाबा गांड चाटते हुए साथ-साथ उसकी चूत को भी उँगलियों से रगड़ रहे थे।
पूजा कराहते हुए बोली, “आअहह… चलो… बाबाजी… अब स्वाहा कर दो… ऊऊस्स्ष्ह… मेरे इन दोनों छेदों को…” रचयिता मैत्री पटेल है।
बाबा ने पूजा की गांड पर थूक लगाया, अपनी उँगलियों से फैलाया और बोले, “चल… अब मेरा प्रसाद लेने के लिए तैयार हो जा…”
पूजा ने शर्माते हुए लेकिन उत्सुकता से कहा, “आह्ह… बाबाजी… आज मैं प्रसाद पीछे से लूँगी…ऐसे सीधे सीधे प्रसाद ना देना मार-मार के बड़ी भोस जैसी बना दो मेरी गांड को, फिर कभी लंड मांगे नहीं ऐसा कर दो, और बाद में मेरी गांड को आपके लंड के प्रसाद से नवाजो।” अब वह बेशरम हो गई थी।
बाबा: “चल मेरी रानी… जैसे तेरी मर्ज़ी…”
पूजा अब पूरी तरह बाबा के अधीन थी। बाबा ने पूजा को पेट के बल लिटाया, उसकी साड़ी और घाघरे कमर तक चढ़ा दिए। पूजा की मोटी, गोरी, नरम गांड अब पूरी तरह उजागर थी। बाबा ने दोनों हाथों से उसके चूतड़ फैलाए, थूक लगाया और अपनी उँगलियों से गांड का छेद फैलाने लगा।
पूजा काँपते हुए बोली, “बाबाजी… धीरे… मेरी गांड बहुत टाइट है… डर लग रहा है…”
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