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Misc. Erotica सम्मान और बदला: Hindi Version Of Honor and Vengeance
शेर मीरा के मुँह से यह तीखा जवाब सुनकर ज़रा भी नाराज़ नहीं हुआ। वह दिल ही दिल में मुस्कुराया। वह अच्छी तरह जानता था कि वह मीरा की मानसिक और शारीरिक दीवार को पचास प्रतिशत से ज़्यादा ढहा चुका है।

 
उसकी देह का गीलापन और उसकी सिसकियाँ गवाही दे चुकी थीं कि वह शेर के सम्मोहन में फँस रही है। शेर अब यह परखना चाहता था कि क्या कसम का डर हटने के बाद भी मीरा के भीतर का छुपा हुआ जिस्मानी झुकाव उसे यहाँ रोके रखता है या नहीं।
 
शेर (अपनी आँखों को थोड़ा सिकोड़ते हुए, एक शातिर दांव खेलते हुए): "अच्छा... ऐसी बात है? ठीक है मीरा मैडम, मैं आज के लिए... सिर्फ आज के लिए आपको उस कसम के हर बंधन से पूरी तरह आज़ाद करता हूँ। अब ज्योति की कसम आपके आड़े नहीं आएगी।"
 
मीरा ने चौंककर अपनी आँखें खोलीं और अविश्वास से शेर की तरफ देखा।
 
शेर (अपनी आवाज़ को और धीमा और मदहोश करते हुए आगे बढ़ा): "लेकिन... मेरी एक छोटी सी शर्त है। आपको मुझे सिर्फ और सिर्फ पाँच मिनट देने होंगे। इन पाँच मिनटों के बाद भी अगर आपका दिल कहे कि आपको यहाँ से चले जाना चाहिए, तो मैं कसम खाता हूँ कि मैं आपका रास्ता नहीं रोकूँगा और आपको इज़्ज़त से जाने दूँगा। बस... सिर्फ पाँच मिनट और..."
 
मीरा (घबराकर, अपनी छाती पर बंधी बाहों को और भींचते हुए): "शेर... प्लीज, ऐसी अजीब शर्तें मत रखो। मुझे अब यहाँ से जाने दो।"
 
शेर (एक तीखी, चुनौती भरी मुस्कान के साथ): "तो इसका मतलब आप झूठ बोल रही हैं मेमसाहिब... आपके मन में चोर है।"
 
मीरा (अपनी सफाई देते हुए, तेजी से सिर हिलाकर): "नहीं! ऐसी कोई बात नहीं है। मैं सच कह रही हूँ।"
 
शेर (अपनी आँखों को सिकोड़कर, सीधे उसकी कमज़ोरी पर वार करते हुए): "फिर तो लगता है कि आपको अपने ही इस गर्म बदन पर भरोसा नहीं है। आपको डर है कि कसम टूटने के बाद भी आपका यह जिस्म मेरे पास से उठकर भाग नहीं पाएगा।"
 
शेर की इस बात ने मीरा के स्वाभिमान और उसकी झिझक के बीच एक गहरा द्वंद्व पैदा कर दिया। वह खुद को और अपने चरित्र को सच्चा साबित करना चाहती थी, लेकिन शेर की शर्तों से उसे डर भी लग रहा था।
 
मीरा (थूक निगलते हुए, कांपती आवाज़ में): "ठीक है... लेकिन वादा करो, तुम मेरे और कपड़े नहीं उतारोगे।"
 
शेर (एक गहरी, मदहोश कर देने वाली मुस्कान के साथ): "मंजूर है मेमसाहिब... मैं आपके और कपड़े नहीं उतारूँगा। पर मेरी पाँच मिनट की शर्त शुरू होने से पहले, आप खुद जाकर इस कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद कर दीजिए... आखिर मैं तो चोट की वजह से उठ नहीं सकता। और कुंडी लगाने के बाद, चुपचाप यहाँ मेरे पास आकर इस खाट पर लेट जाइए।"
Deepak Kapoor
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https://xossipy.com/thread-72031.html -- सम्मान और बदला
https://xossipy.com/thread-71793.html -- अनीता सिंह-
https://xossipy.com/thread-73166.html - अम्मी और अंकल 



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RE: सम्मान और बदला: Hindi Version Of Honor and Vengeance - by Deepak.kapoor - 22-07-2026, 01:16 PM



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