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Misc. Erotica सुपरस्टीशन
बाबा के मुँह से अचानक निकल गया,

“ओह्ह बहनचोद… अभी इस समय कौन टपक गया? किसकी माँ की चूत में खुजली चढ़ गई?”
 
पूजा ने जब बाबाजी के मुख से वे शब्द सुने, तो उसके होंठों पर एक हल्की, शांत मुस्कान तैर गई। यह केवल प्रसन्नता की मुस्कान नहीं थी; उसमें विश्वास, अपनापन और एक गहरा आंतरिक समर्पण छिपा था। कुछ समय पहले तक जिन बातों को वह प्रश्नों की दृष्टि से देखती थी, अब वही बातें उसे अर्थपूर्ण लगने लगी थीं। उसे ऐसा प्रतीत होता था मानो बाबाजी का प्रत्येक कार्य किसी ऐसी अनुभूति से जुड़ा है, जिसे शब्दों में बाँध पाना कठिन है। मैत्री की प्रस्तुति।
 
उसकी आँखों में अब विरोध या संशय का कोई चिह्न नहीं था। वहाँ केवल एक निश्चल स्वीकृति थी। वह बाबाजी को देखती तो उसके भीतर का कोलाहल शांत होने लगता। उसे लगता मानो वह अपने मन का भार धीरे-धीरे उतार रही हो और स्वयं को किसी बड़े सत्य के हाथों सौंप रही हो। समर्पण उसके लिए हार नहीं था, बल्कि विश्वास की वह अवस्था थी जहाँ प्रश्नों की जगह श्रद्धा ले लेती है। उसके चेहरे पर वही भाव स्पष्ट झलक रहे थे,एक ऐसी शांति, जो भीतर तक उतर चुकी हो।
 
इसी बीच देवस्थल के बाहर किसी आगंतुक के आने की आहट सुनाई दी। बाबाजी ने तुरंत अपना ध्यान उस ओर किया और उठकर देवस्थल में चले गए। वहाँ एक महिला पूजा-अर्चना के लिए आई थी। बाबाजी ने पूरे मनोयोग से उसका स्वागत किया और उसकी पूजा में सहभागी बन गए।
 
देवस्थल का वातावरण एकदम शांत और पवित्र था। दीपक की लौ स्थिर होकर जल रही थी, धूप की सुगंध हवा में घुल रही थी, और घंटियों की मधुर ध्वनि वातावरण को और भी दिव्य बना रही थी। बाबाजी ने बड़ी एकाग्रता से पूजा की प्रत्येक विधि संपन्न करवाई। उनके स्वर में मंत्रों का उच्चारण गूँज रहा था, जो सुनने वाले के मन को सहज ही स्थिर कर देता था।
 
महिला भी पूरी श्रद्धा के साथ पूजा में लीन थी। उसके चेहरे पर जीवन के संघर्षों की थकान दिखाई देती थी, पर जैसे-जैसे पूजा आगे बढ़ती गई, उसके भावों में एक अलग ही शांति उतरने लगी। ऐसा लगता था मानो वह अपने मन की चिंताओं को देवता के चरणों में रखती जा रही हो। मैत्री रचित कहानी।
 
कुछ समय बाद पूजा सम्पन्न हुई। महिला ने श्रद्धा से हाथ जोड़कर प्रणाम किया। बाबाजी ने उसे आशीर्वाद दिया। उसके चेहरे पर अब आते समय वाली बेचैनी नहीं थी; उसकी जगह एक हल्का संतोष और आत्मिक सुकून था। उसने दानपेटी में कुछ रुपये दान किये और वह धीरे-धीरे देवस्थल की सीढ़ियाँ उतरकर अपने रास्ते चली गई।
 
उसके जाने के बाद भी कुछ क्षण तक वहाँ एक विशेष निस्तब्धता बनी रही। दीपक की लौ अब भी उसी तरह जल रही थी, धूप की सुगंध अब भी वातावरण में फैली हुई थी, और ऐसा प्रतीत होता था मानो उस छोटी-सी पूजा ने वहाँ उपस्थित हर व्यक्ति के मन में थोड़ी-सी शांति छोड़ दी हो। पूजा दूर खड़ी यह सब देख रही थी। उसे महसूस हुआ कि श्रद्धा और समर्पण का वास्तविक अर्थ शायद इसी निस्वार्थ सेवा और आस्था में छिपा है। लेकिन उसकी श्रद्धा अब दूसरी तरीके से थी। वह अब बाबजी की सम्पूर्ण समर्पित थी और रहना चाहती थी।
 
जब देवस्थल फिर खाली हो गया, तो बाबा पूजा के पास वापस आए। उन्होंने पूजा को दीवार से सटाकर खड़ा कर दिया और उसके होंठों को फिर चूसने लगे।
 
बाबा: “पूजा… इस वक्त तो कोई न कोई आता ही रहेगा… तुम वही अपने पूजा के टाइम पर आ जाना…” कथाकार मैत्री और फनलवर है।
 
पूजा ने बाबा की छाती पर सिर रखकर कहा,
 
“जी बाबाजी… लेकिन मुझे आपकी बहुत याद आती है… कल रात मैंने खुद को छुआ… लेकिन आपकी उँगलियों जितना मजा नहीं आया…अभी जो आपने मेरी गांड के दरार को छुआ, मैं तो गई थी।”
 
बाबा ने पूजा की चूत पर हाथ रखकर हल्का सा दबाया और कान में फुसफुसाया,
 
“जल्दी ही पूरा मजा दूँगा… तब तक इंतजार कर… मेरी कामुक पूजारन…तेरी गांड में अभी गरमी ज्यादा है बेटी इसलिए ऐसा होता है, लेकिन मेरा लंड किस काम में आएगा बेटी, मेरा लंड अब तेरे सभी छेदों के लिए सदा भरता रहेगा और वह तू अच्छे से जानती है।”
 
पूजा ने शर्म और प्यार से बाबा की छाती चूम ली।
 
क्रमशः..............................


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जुड़े रहिये दोस्तों।

मैत्री पटेल।
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सुपरस्टीशन - by maitripatel - 10-04-2026, 03:59 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Glenlivet - 10-04-2026, 05:01 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 25-04-2026, 07:06 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 29-04-2026, 01:06 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 29-04-2026, 03:45 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 07-05-2026, 07:42 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 19-05-2026, 09:54 AM
RE: सुपरस्टीशन - by naree - 22-05-2026, 04:12 AM
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RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 09-06-2026, 03:40 PM
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RE: सुपरस्टीशन - by maitripatel - 19-07-2026, 02:57 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Rizzi1198 - 30-07-2026, 12:21 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 22-08-2026, 06:21 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 28-08-2026, 05:28 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 07-09-2026, 06:23 PM
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RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 21-09-2026, 09:57 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 22-09-2026, 05:39 PM
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RE: सुपरस्टीशन - by Tadpole - 23-09-2026, 07:12 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Wanton - 23-09-2026, 07:24 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 01-10-2026, 09:20 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Bumchod - 05-10-2026, 05:27 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 07-10-2026, 08:23 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 10-10-2026, 07:50 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 21-10-2026, 06:40 PM
RE: सुपरस्टीशन - by sarit11 - 22-10-2026, 08:35 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 24-10-2026, 08:15 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Adonis - 27-10-2026, 12:20 PM



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