19-07-2026, 01:28 AM
सोनू : अरे पगली अपने भैया के सामने ना चली जाना नही तो वह भी तेरी मोटी मोटी गोरी गोरी जाँघो को देख कर फिसल जाएगे
सुधा : मुस्कुराते हुए तुम भी ना भाभी बहुत मज़ाक करती हो
सोनूः चल अब मैं जाउ कि और कुछ
सुधा : भाभी बस एक काम और
सोनूः बोल ना
सुधा : भाभी भैया को बोल दो प्लीज मुझे कॉलेज ड्रॉप कर दें
सोनू : मुस्कुराते हुए, एक शर्त पर
सुधा : वो क्या
सोनू तू बाइक पर अपने भैया के साथ क्रॉस लेग बैठ कर जाएगी
सुधाः तो इसमे शर्त की बात कहाँ से अ गई वो तो मैं वैसे भी बयके पर क्रॉस लेग ही बैठ्ँगी म्झे एक ही तरफ दोनो पाँव करके बैठने में डर लगता है
सोनूः चल ठीक है मैं तेरे भैया 'को बोलती हॅँ
दोनो को मैं खिडकी से देख रहा था और सचमुच सुधा की मोटी मोटी गोरी जांघे देख कर मेरा लंड उसकी गुदाज जवार्न का रस पीने के लिए मचल रहा था और यह बात सानू् बहत पहले ही ताड गई थी जब मैं सुधा के भारी चृतडों को तब घूर रहा था जब वह जीन्स पहन कर मटक मटक कर गाडेन में घम रही थी और मैं C और सोन् बेंच पर बैठे थे चलो बता ही देता हूँ ...... ..वह हुआ यह था 'कि शाम को अक्सर 6 के बाद मैं, सोनू और सुध घर के सामने वाले पार्क में जाकर घूमते थे,
पहले तो हम तीनो घूमते रहे फिर मैं बेंच पर बैठ गया और सुधा और सोनू राउंड लगाने लगी जब भी वह मेरे सामने से निकलती तो मैं कभी सोन की और कभी स्धा की मोटी गान्ड को देख देख कर मस्त हो रहा था फिर सोन भी थक कर नेरे पास बैठ गर्ड और अब जब भी स्ध नेरे सामने से गजरती मैं पाजामे में उछाल लेते हुए उसके भारी चुतड़ों को खा जाने वाली नजरो से देख रहा था उसकी पैंटी की लाडन भी झीने से पाजामे में साफ नजर आ रही थी और उसके मोटे मोटे दूध तो ऐसे लग रहे थे जैसे कलमी आम हो थोडा अंधेरा होने लगा था वही सोन ने मेरी नजरो को ताड लिया और सीधे मेरे लंड को पकड लियां जो कि स्धा की गुदाज जवानी को देख देख कर पहले ही ताव में आ चुक था
सुधा : मुस्कुराते हुए तुम भी ना भाभी बहुत मज़ाक करती हो
सोनूः चल अब मैं जाउ कि और कुछ
सुधा : भाभी बस एक काम और
सोनूः बोल ना
सुधा : भाभी भैया को बोल दो प्लीज मुझे कॉलेज ड्रॉप कर दें
सोनू : मुस्कुराते हुए, एक शर्त पर
सुधा : वो क्या
सोनू तू बाइक पर अपने भैया के साथ क्रॉस लेग बैठ कर जाएगी
सुधाः तो इसमे शर्त की बात कहाँ से अ गई वो तो मैं वैसे भी बयके पर क्रॉस लेग ही बैठ्ँगी म्झे एक ही तरफ दोनो पाँव करके बैठने में डर लगता है
सोनूः चल ठीक है मैं तेरे भैया 'को बोलती हॅँ
दोनो को मैं खिडकी से देख रहा था और सचमुच सुधा की मोटी मोटी गोरी जांघे देख कर मेरा लंड उसकी गुदाज जवार्न का रस पीने के लिए मचल रहा था और यह बात सानू् बहत पहले ही ताड गई थी जब मैं सुधा के भारी चृतडों को तब घूर रहा था जब वह जीन्स पहन कर मटक मटक कर गाडेन में घम रही थी और मैं C और सोन् बेंच पर बैठे थे चलो बता ही देता हूँ ...... ..वह हुआ यह था 'कि शाम को अक्सर 6 के बाद मैं, सोनू और सुध घर के सामने वाले पार्क में जाकर घूमते थे,
पहले तो हम तीनो घूमते रहे फिर मैं बेंच पर बैठ गया और सुधा और सोनू राउंड लगाने लगी जब भी वह मेरे सामने से निकलती तो मैं कभी सोन की और कभी स्धा की मोटी गान्ड को देख देख कर मस्त हो रहा था फिर सोन भी थक कर नेरे पास बैठ गर्ड और अब जब भी स्ध नेरे सामने से गजरती मैं पाजामे में उछाल लेते हुए उसके भारी चुतड़ों को खा जाने वाली नजरो से देख रहा था उसकी पैंटी की लाडन भी झीने से पाजामे में साफ नजर आ रही थी और उसके मोटे मोटे दूध तो ऐसे लग रहे थे जैसे कलमी आम हो थोडा अंधेरा होने लगा था वही सोन ने मेरी नजरो को ताड लिया और सीधे मेरे लंड को पकड लियां जो कि स्धा की गुदाज जवानी को देख देख कर पहले ही ताव में आ चुक था


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