18-07-2026, 09:30 AM
अब अगले वीडिये में CCTV केमरे के रिकार्डंग मे दिखा की चाचाजी अपने कमरे में आके वो सीधो बाथरुम में नहाने चलो गये। बाथरुम में आकर ऊन्होने अपने सारे कपडे ऊतार दिए ओर पुरे नंगे हो कर खुद को आईने में दोखने लगो। उनका काला बदन पसींने से भीगकर चमक रहाथा, फिर ऊन्होने अपने कबर्ड् से अपना शोवींग कीट नीकाल कर ऊन्होने अपने झांटोके ऊपर शोवींग क्रीम लगाई और अपने झांटेको अच्छोसे शोव करके साफ किया और नहाने लगो। नहाने के बाद चाचाजी ने अपना बदन अच्छोसे पोछा और खुद को आईने में दोखा। अब फ्रोश होने के बाद वो अच्छो दीख रहे थे, और झांटो को शोव करने के बाद तो उनका हतीयार और भी चमक रहा था और पहलो से बडा दीख रहा था। फिर ऊन्होने अपने सोये हुऐ हतीयार पर कबर्ड् से कोई क्रीम नीकालकर ऊसपे लगाया और ऊसपे अपना हाथ फीराते हुए कहा, "दोस्त लगता हैं आज तुम्हे बहु की गांड की बडिया दावत मिलनेवाली हैं, वे खुद तयार होके तुम्हारे पास आयोगी आज"। एसा बोलकर वो मुस्कुराते हुए अपने कमरपर सिर्फ एक टावल लपोटकर बाथरुम सो बाहर आगऐ। और बाहर आकर वे अपने बाडी पे क्रीम लगाई और अच्छासा बाडी स्प्रो लगाकर अपने बेडपर बैंठ कर नेहा का इंतजार करने लगो। अब वीडिये में नेहाका कमरा दीखा। ईघर नेहा अपने कमरेमे आकर सीधो वो भी अपने बाथरुम मे चली गयी। बाथरुम में आकर ऊसने अपने सारे कपडे ऊतार दीए ओर पुरी नंगी हो कर खुद को आईने में दोखने लगी। पार्लर में २ धंटो को मोकोवर को बाद ऊसका गोरा उजला रंग और भी नीखर गया था, ऊसकी बड़ी बड़ी गोल चूचियां और भी बडी लग रही थी, ऊसकी पतली कमर और उसके नीचे कसे हुए सुडौल नितम्ब, मखमली गुलाबी चुत, जीसपर एक भी बाल नहीं दिख रहे थे। पार्लर वालोने ऊसका फुल्ल बाडि व्याक्सींग की थी जीससे उसके जिस्मपर एक भी बाल नहीं दिख रहे थे। नीचो उसके कोलो के तने जैसी ऊसकी लंबी सुडोल टांगे दोखकर मेरी तो हालत खराब होगयी और मेरा लंड प्यांट में ही खडा होकर अकडने लगा। ईघर नेहा कुच्छ दोर खुद को आईने में दोखने को बाद मुस्कुराइ और अच्छोसे नहाधकर अपना बदन पोछा और फिरसे खुद को आईने में दोखने लगी। और फीर नेहाने अपने चुत और गांड पर कोई क्रीम लगाया ताकी ऊसकी गुलाबी चुत और गांड और भी मखमली होजाय। ऊसके बाद नेहा अपने गांड पर हात फिराते हुऐ कहा, "आज तो तोरी खैर नही, चाचाजी अपने मुसहलसे तुझो कुट कुट कर तोरा कचुमर बनादोंगे, तुने बहुत दिनसे ऊन्हे तडपाया हैं"। एसा बोलकर वह खुद ही हसनेलगी और फिर वैसे ही पुरी नंगी ही बाथरुम सो बाहर आगई। नेहा अब ड्रोसींग टेबल पर बैठकर अपने पुरे बदनपर बाडीलोशन लगाया, हलकासा मेंकप कीया, डार्क लाल लीपस्टींक लगाई, अच्छासा बाडी स्प्रो लगाकर तैयार हूई। अब उसने ऊठकर अलमारी से चाचाजीने दीलाई हुई एक नई पारदर्शी लांन्जरी सेट नीकाकर पहन लीया। ऊस पारदर्शी लांन्जरी सेट में नेहा गजब ढाह रही थी। अब नेहाने कुछ सोचा और वापिस अलमारी में से एक पतलीसी नायटी नीकाल कर पहन ली। नेहाने अंदर लांन्जरी सेट पहना था और ऊपर पतलीसी नायटी, शायद वो चाचाजीके रिझाना चाहति थी। नेहा अब हमारो बेडरुम से बाहर चली गयी। नेहा अब हमारो कमरे से नीकल कर चाचाजी को कमरे की तरफ चल दी। जब वो चाचाजी को कमरे के पास आई और दरवाजा खोल कर सीधो चाचाजी को कमरे के अंदर चली गई। इसबार वो मुझो काफी कोन्फीडंन्ट लग रही थी, पिछलि बार कि तरहा ऊसके मन में किसिभी तरहा की कोई ऊलझन, घबराहट, हीचकिचाहट नहीं दिखरही थी, बलकि वो अब पहलो से और भी ज्यादा कान्फीडोंट लगरही थी।
अंदर कमरे मे चाचाजी अपने कमरपर सिर्फ एक टावल लपोटकर बेडपर लोटे हुए नेहा के आनेकाही ईंतजार कर रहे थे, तभी ऊन्होने दोखा की नेहा मुस्कुराते हुए दरवाजा खोल कर अंदर आ रही है। नेहा को अंदर आता दोख कर वो खुश हो गये और कहा, "अरो बहु, तुमने तो आनो मे दोर लगादी, मैं कब से तुम्हारा ईंतजार कर रहा था"। नेहा ने कहा, "वो क्या हैना चाचाजी आप को लिए तैयार होने मे आज थोडा टाईंम लग गया"। तो चाचाजी ने कहा, "कोई बात नहीं बहु वेसे भी हमे कहा आज जल्दी हैं"। चाचाजी की ऐ बात सुनकर नेहा मुस्कुराई ओर कहा, "चाचाजी आज से लोकर अमित के वापस लोटनेतक्क आपकि तो हर रात चांदी ही चांदी हैं"। तो चाचाजी ने कहा, "अरे बहु तुम्हारी जैसी खुबसुरत जवान ओरत सात हो तो दिन क्या और रात क्या हर पल चांदी ही चांदी होगी"। ये बात सुनकर नेहा अपनी आंखे झुकाते हुए शरमा गई, ओर चाचाजी से कहा, "चाचाजी इसका मतलब आप मुझो दिन मे भी नहीं छोडेगे?"। नेहा के मुह से ऐ बात सुनकर चाचाजी बहुत खुश हो गये ओर कहा, "बहु अब ज्यादा शरमावो मत और जल्दिसे मेरे पास आजावो मैं तुम्हे ढेड सार प्यार करके तुम्हारी बरसो की भुक मीटाना चाहताहु और जाने से पहले पहले तुम्हारी गोद भी भर दुंगा"। चाचाजी की ऐसी बाते सुनकर नेहा मुस्कुरायी और कहा, "तो चाचाजी आप आज मेरी गांड नहीं मारेंगे क्या?"। नेहा की ऐ बात सुनकर चाचाजी मुस्कुराये और कहा, "अरे बहु वोतो मेरी दिलि तम्मना हैं, ऊस चीज काते मैं कब से ईंतजार कर रहाहु"। तो नेहा ने अपनी नायटी के ऊपरसेही अपनी उभरी हुई गांड को सहलातेहुए चाचाजी को दिखाते हुए उनके सामने खडी हो गई। यो दोखकर चाचाजी अब अपने बेडसे ऊठकर नेहाके करिब आगयो और उसके कसकर गले लगालीया और अपने कालो मोटे होंठ नेहा के लाल सुर्ख होठों पे रख कर ऊसे कीस्स करने लगो। चाचाजी नेहा के रसीले लाल होठों को अपने कालो मोटे होठों मे लोकर उंन्हे चुमतेहुए, उंन्हे चूसने भी लगे, तो नेहा भी उनका पुरा साथ दो रही थी। अब दोनो एक दूसरे के बदन पर हाथ फिराते हुए एक दूसरे के होठों का चुंबन लोते हुए उनका रसपान करने लगो। नेहा चाचाजीके किस्स करने से इतनी ज़्यादा सेक्सुअली एग्ज़ाइटेड हो गई की उसके मुह से आहह….....ऊऊहह …......उन्न्ञंगंह की आवाज आ रही थी। मैं हैरानी से ऐसब टीवी पर देखता रहा था की, तभी नेहाने अपना मुँह खोलकर अपनी पतलि लंबि गुमाबी जुबान चाचाजी को मुँह मे घुसादि। तब चाचाजी ने भी नेहा की गुमाबी जुबान अपने मुँह मे भरकर ऊसे चुसने लगे, चाचाजी नेहा की पतलि लंबि जुबान को किसि क्यांडी की तरह चुस रहे थे। थोडी देरबाद चाचाजी से अपनी जुबान चुसवानेके बाद नेहाने अपना मुँह पीछे हटाया और चाचाजीके कमरपर पर बंधो टावल को खींचकर उसे हंटा दिया। अब चाचाजी नेहाके सामने मादरजात पुरे नंगे हो कर खडे थे, और उनका काला मोटा लंड किसि काले नाग की तरह अपना फण ऊठाकर ऊपर नीचे होते हुये झटके मार रहा था। अब नेहाने चाचाजीके काले नाग की तरहफ थोडी देर देखा और फिर अपन ऊपर पहना हुवा वो पतलीसी नायटी को खोलकर ऊसे उतारकर फेंक दिया। अब नेहा चाचाजीके सामने उनकि दिलाइहुई नई पारदर्शी लांन्जरी सेट पहनकर खडी थी, चाचाजीने नेहा को ऊस पारदर्शी लांन्जरी सेट में देखकर ऊसे दोखतेही रहगए। नेहा ऊस पारदर्शी लांन्जरी में गजब ढाह रही थी, ऊस पारदर्शी ब्रा पैंटी में नेहा को देखा कर चाचाजी ऊसे देखती रह गये, उसकी गोरी गोरी बड़ी बड़ी चूचियाँ ऊस पारदर्शी ब्रा से बाहर निकलने को मचल रही थी तो नीचे एक पतलिसि पैंटी सिर्फ उसकि चूत के ही डकपारहि थी और उसके अंदर उसके चूत के होंठ उत्तेजना से बिल्कुल फूले हुए दिखरहे थो। नेहा को अब चाचाजीके आँखों में कामुकता दिखरहि थी, नेहा को ईस् सेक्सी पारदर्शी लांन्जरी मे देखकर चाचाजी के मुँह से लार टपकने लगी। नेहा ने जब चाचाजी के आँखों में देखा तो ऊसे उनमे वासना देखी और उसे भी अब साथ ही साथ उत्तेजना महसूस होने लगी। अब नेहा की नजर चाचाजी के कमरके निचे गई तो वो उनका बड़ा और मोटा लंड देखा वो हिप्नोटाइज हो गयी। अब वो सोचनेलगी की उसके गांड के टाइट छोद में इतना मोटा लंड घुसेगा कैसे? ये सोचकर ही नेहा को एक्साइट्मेंट होने लगी। अब नेहाने चाचाजी को उपरसे निचे तक्क पुरीतरहा देखा तो पाया की चाचाजीके तो छाती और पीठ में भी इतने सारे बाल हैं, यो साला आदमी है या भालू नेहा ये सब सोचते हुए फिरसे ऊन्हे कसकर गलो लगालीया। नेहा को अब चाचाजीके बाँहों में देखकर मुझो ‘ब्यूटी एंड द बीस्ट’ वाली कहावत याद आ रही थी। नेहा ने चाचाजी को वापस गलो लगाकर उनके चेहरे को पकड़कर ऊन्हे जोर सो किस्स करने लगी और उनके कालो मोटे होठों को अपने लाल नर्म होठों मे लेकर चूसने लगी। अब नेहा चाचाजी को उत्तेजना किस्स करते हुए उनके पीठ और नितंबों पर अपना हाथ फिराने लगी, फिर उनके मुँह में अपनि जीभ घुसाकर अंदर घुमाने लगी और दाँतों से चाचाजीके होठों काटने लगी। नेहा की बड़ी मुलायम चूचियाँ चाचाजी के बालों से भरी बडि छाती से दबी हुई थीं, चाचाजी ने अब अपने हाथों से नेहा के बडे बडे नितंबों को जोर से दबाते हुए बोलो, ”नेहा तुम्हारी गांड तो बहुत गरम लग रही है, रुको मैं थोड इसक टेंपरेचर चैक करलू"। ऎसा बेलतेहुए चाचाजी ने नेहा के नितंबों को फैलाकर उसकी गांड के छोदपर अपनी अंगूठे से कुरेदने लगा, चाचाजी के अंगुली करने से नेहा अपने नितंब ऊपर को उचकाने लगी और करहाने लगी, लेकिन चाचाजी ने अंगुली करना बंद नहीं किया। फिर चाचाजी ने अपनी एक अंगुली को नेहा की गांड के छेद में घुसा दिया, नेहा ज़ोर से चिल्लाई ….आआहह…... और ज़ोर से सिसकते हुए फड़फड़ाने लगी। पर चाचाजी ने नेहा को कसकर पकड लीया और कहने लगे, "अरे बहु तुम तो मेरी अंगुली डालनेसेही तडपने लगी, अभी तो मैंने मेरा लंड डालाही नहिं" और हसने लगे। फिर चाचाजी ने अपनी अंगुली नेहा के गांड के छेद से बाहर निकालदी और ऊसकी बड़ी चुथडोंको को पकडकर ऊन्हे जोर से दबाते हुए मसलने लगो। अब नेहा भी गरम होने लगी थी, तो उसने चाचाजी को वैसे ही ज़ोर से जकडकर ऊनके नितंबों को अपना हाथ में भरकर ऊन्हे जोर से दबाते हुए किस्स करते हुऐ सिसकारियाँ लेने लगी "……ओह्ह……ऊऊहह.... ……आआअहह....…… उनन्ं…….... आआआहह……...."। फिर मैने देखा की चाचाजी और नेहा में तो जैसे जंग छीडगयी वो देने एक दुसरे को दबातो, मसलतो हुऐ एक दुसरेके मुँह में अपनि जीभ घुसाकर चुसतेहुए जोरदार तरिकेसे किस्स कर रहे थे। अगले दस्स मिनीट तक चाचाजी और नेहा इसी तरिकेसे किस्स करते रहे। फिर चाचाजी ने अपना लंड हाथ में लोकर ऊसे नेहा की गांड के छेद में लगा दिया और सुपाड़े को अंदर डालने के लिए उन्होने एक धक्का लगाया। “ओइईईईईईई…माआ……आआअहह……, मैं मर जाऊँगी, बहुत दर्द हो रहा है चाचाजी,” नेहा अपने गांड में हो रहे दर्द से चिल्ला पड़ी। पर चाचाजी ने अपने लंड के सुपाड़े को नेहा की गांड में घुसाते हुए बोला,” बस बहु थोड़ा दुखेगा, तेरी गांड भी तो बहुत टाइट है ना…...., अभी आगे और मज़ा भी मिलेगा तुम्हें….” कहते हुये चाचाजी अपने लंड को नेहा की गांड में घुसाने लगो। “अहह ओह फट गयी ……ईईईईईईईईईईईईईईईईईई माआआआआआआ….” नेहा फिर चिल्लाई, “आहह….बस किजिये चाचाजी …आहह ओइईई…”। लेकिन चाचाजी भी बहुत गांडू थे, अबतक्क बहुत औरतो कि गांड मारते मारते अब उनको गांड मारने की आदत पड़ गयी थी, इसलिए वो नहीं माने और फिर उन्हेने नेहा के दोनो नितंबों को फैला कर ऊसके गांड के छेद में अपना लंड घुसाने की कोशिश करने लगो। “आहह…..मैं मर गयी ……..कमीने कुत्ते हरामजादे ने मेरी गांड फाड़ दी...... उईईईईईईईईईई माआआआआआ…”, नेहा फिर चिल्लाई और चाचाजी को गालि दोतोहुए चाचाजी से अलग हो गयी। नेहा के रोने चिल्लाने से चाचाजी ने भी ऊसे छोड़ दिया और हट गयो, दर्द से नेहा की आँखों से टपाटप आँसू बहने लगे। ऊसे दोखकर चाचाजी ने नेहा से कहने लगे, "नेहा तुम्हे गांड मरवाने में बहुत तकलीफ हो रही है क्या?"। तो नेहाने जवाब दिया, "हा चाचाजी आपका लंड तो किसी गधें कि तरहा मोठा और लंबा है, लगता है आपने तो मेरी गांड ही फाड़ दी आज......जान ही निकाल दी आपने मेरी" नेहा अपने गांड को सहलातेहुए चाचाजी से उनकी शिकायत करनेलगी। तब चाचाजी ने कहा, "अरे बहु पहली बार में तो थोड़ा दुखेगा ही और तेरी गांड भी तो बहुत टाइट है ना….... मजा तो ऊसके बाद ही तो आऐगा, भुल गई जब मैंने पहलि बार जब तोरी चुत मारी थी तब तो तुम्हो डाक्टर साहिबा के पास लो जाना पडा था"। ईसपर नेहा ने कहा, "जी हा चाचाजी मगर आपके खातिर मैंने वो दर्द तो सहलिया था, मगर मैं अपनी गांड नहीं फाड्डा सकती"। ईस बातपर चाचाजी कहने लगे, "अरे बहु आजकल तो तुमसे ऊमर में क्कम कालोज कि लेंडिया भी बडे शोक से और आरम से मुझसे भी बडे लंड से अपनी गांड मरवाती हैं और तुम हो कि रोने, चील्लाने लगी"। चाचाजी के ईस बातपर नेहा अब और भडकते हुऐ बोलने लगी, "वो कालोज कि लेंडिया लोती होंगी आपका शोकसे, पर मैं नहीं लो सकती ईस मुसल को अपने गांडके अंदर"। तो चाचाजी फिर से कहने लगे, "अरे बहु मैं तो तुम्हे बडी बाहदुर, हिम्मत वाली और सयनि समझता था, मगर तुम तो आजकल की कालोज कि लेंडिया से भी मात खाने वाली बहुत ही कमजोर निकली"। चाचाजी की ईस बात से नेहा ताव में आ गई और कहा, "मैं कोई आजकल की कालोज कि लेंडिया से मात खाने वाली नहीं हु, अगर मौका मीला तो मैं दिखा दुंगी की मैं ऊन कालोज कि लेंडियो से कम नहीं हु"। नेहा के ईस बातपर चाचाजी ने अब ऊसे और भडकने को लिऐ बोले, "ठिक हैं बहु तो हम एक शर्त लगाते है और दोखते है की कोन ऊस शर्त में जीतता हैं"। नेहा ने पुछा, "कैसी शर्त चाचाजी?" तो चाचाजी ने कहा, "कल मैं एक कालोज के लडका लडकि को पटाकर यहा हमारे घर पर लाता हु, और ऊनसे शर्त लगाते है की हम्म एक दुसरे को पाटर्न की गांड मारेंगे, और मुझो यकीन हैं की तुमको दोखकर कोईभी कालोज का लडका तुम्हारी गांड मारने के लिऐ तैयार हो जाऐगा और अपनी ग्रर्लफ्रेंड को भी मुझसे अपनी गांड मारने के मना लोगा. और अगर ऐसा हुआ और ऊस कालोज कि लडकी ने मुझसे अपने गांड मारली तो बहु तुम भी ऊनके सामने ही मुझसे अपनी गांड चुदवावोगि. बोलो क्या तुम्हे मेरी ऐ शर्त मंजुर हैं?"। चाचाजी का ऐ चैलोंज सुनकर नेहा घमंड में फिर से ताव आ गई और कहा, "मुझो आपकी शर्त मंजुर हैं चाचाजी. पर मेरी भी एक शर्त हैं, अगर ऊस कालोज कि लडकी ने आप से अपनी गांड नहीं चुदवाई तो आप फिर कभी भी मेरी गांड मारने की बात भी नहीं करेंगे. बोलीए मेरी शर्त मंजुर हैं?"। ईसबात पर चाचाजी ने कहा, "ठिक हैं बहु मुझो तुम्हारी हर शर्त मंजुर हैं" और वो मन ही मन हसने लगे. क्युकी उन्होने आखिरकारा नेहा को अपने बातोके जाल मे फसाकर ऊसकी गांड मारने का इंतजाम कर ही लिया था। चाचाजी अब ऐ जान गयो थे की नेहा एक बहुतही घमंडी और मगरुर औरत हैं, अग ऊसे किसी बातके लिए ऊकराकर ऊसे चैलोंज करे ते नेहा घमंड में आकर जितने के लिए कुछ भी करेगी. और चाचाजी ने आज नेहा की ईसी कमजोरिका फायदा उठाया था। अब चाचाजी ने लोहे के मुसहल जैसे अपने लंड को सहलाते हुए नेहा से कहा, "चलो बहु आज अपनी गांड ना सही पर अपनी चुत को तो देकर मेरे ईस लंड को शांत कर दो"। ऐ बात सुनतो ही नेहा ने हलकोसे मुस्कुराते हुऐ बेड पर लोट गई और अपने पैर फैलाकर अपनी नाझुक मखमली गुलाबी चुत को चाचाजी के सामने खोलकर ऊन्हे आनेका निमंत्रण दो दिया। ऊसे देखकर चाचाजी का काला मोटा लंड ऊपर नीचे होते हुये झटके मार रहा था। नेहा की गोरी गोरी मक्खन जैसी जांघें और फूली हुई चूत के गुलाबी होंठ देखकर चाचाजी उत्तेजना से पागल हो गयो ओर नेहा की चूत पर टूट पडो। नेहा की गुलाबी चूत के फूले होठों को देखकर चाचाजी कामवसना से पागल हो उठे, और ऊन्हेने नेहा की चूत में जीभ लगाकर चाटने लगे वो उसकी क्लिट को जीभ से छेड़ने लगे। “....उनन्नज्ग्घह... …...आअहह.......आअहह…...आअहह.....” चाचाजी की जीभ अपनी चूत पर रगड़ने से नेहा सिसकारियाँ लेने लगी। नेहा को अपनी चूत चटवाना बहुत पसंद था, चाचाजी के चूत चाटने से नेहा बहुत उत्तेजित हो गयी ओर उसकी चूत से रस निकलने लगा। नेहा उत्तेजना से भरकर अपने नितंबों को चाचाजी के मुँह पर उछालने लगी। चाचाजी नेहा की ईस कामुकता से हैरान रह गया और सोचने लगा ये तो बहुत ही मज़े ले रही है, उन्हेने अपनी जीभ लगाकर नेहा की चूत से बहते रस को चाटने लगो। फिर चाचाजी ने नेहा की दोने टाँगें खींचकर अलग कर दी और फिर उसकी फड़कती चूत में मुँह लगाकर चूत के अंदर जीभ डाल दी और उसे अंदर घुमाने लगे और अपने जीभ से चाटने लगे। नेहा लेटे हुए सिसकारियाँ लेने लगी और बडबडाने लगी “उहह….चाचाजी…. उन्न्नह…उननग्ज्ग……एसस्स्सस्स….ज़ोर से चाचाजी और ज़ोर से….” ऐसे बोलते हुऐ उसने अपने बड़े नितंबों को उछालकर चाचाजी के मुँह में झटका देने लगी। अब नेहा उत्तेजना से तड़प रही थी और वो चुदाई के लिए तरस रही थी उसने कहा, “ मुझे चोदो….हाँ मुझे चोदो चाचाजी…..प्लीज़….चोदोमुझे....”। फिर की चाचाजी ने नेहा की टांगों को उठा कर अपने कंधों पों रख लिया और नेहा की टाइट चूत के छेद पर अपने स्खंत लंड का सूपाड़ा रगडने लगे। नेहा बेड पर पड़े हुए चाचाजी को अपने अंदर लंड धुसानेका इंतज़ार करते देखकर चाचाजी मुस्कुराया और अपना स्खंत लंड नेहा की प्यासी परंतु गीली चूत पर लगाया और उत्तेजना से फूले हुए चूत के होठों के भीतर डालकर एक झटके में सुपाड़ा अंदर घुसा दिया। चाचाजी को लंड का सुपाड़ा नेहा की टाइट चूत की दीवारों को फैलाते हुए जैसे ही अंदर घुसा, नेहा के मुँह से सिसकारियाँ निकल ने लगी "……ओह्ह……ऊऊहह ……आआअहह…… उनन्ं…… आआआहह......…ओइईईईईईईईईईईईईई….....म्म्म्माआआआआआआ…..... तुम मेरी फाड़ दोगे चाचाजी …….....उईईईईई……......माआआअ....….”। नेहा सिसकारियों के बीच बोली, “ ऊ...आअहह….इट फील्स सो गुड….”। फिर चाचाजी ने अपने पूरे लंड को नेहा की चूत में गहराई तक घुसाकर लम्बे स्ट्रोक लगाने शुरू कर दिए, चाचाजी के ताकतवर धक्कों से नेहा का जिस्म हिल गया उत्तेजना में अब वो भी अपनी गांड ऊपर को उछालकर चाचाजी के धक्कों का जवाब देने लगी। “आआहाआंन्न…..... बहुत मज़ा आ रहा है….....चोदो…चोदो…उईईई माआ....और चोदो....…चाचाजी…...….चोदोमुझे...." उत्तेजना में अपने नितंबों को ऊपर उछालती हुई नेहा बोली। तब चाचाजी ने कमरे में लगे CCTV कैमरा की तरफ दिखते हुऐ मुस्कुराने लगे, मुझे पताथा लगा की ये वो मुझे दीखनेके लीए कर रहे थे की दोखो कैसे तुम्हारी पतनी नेहा मुझसे चुदनेके लीए तडप रही है। लेकिन नेहा को ईस बात का पता नही था की कमरे में CCTV कैमरा लगे हुए है ओर ये सब रेकॉर्ड हो रहा है। अब चाचाजी ने तेज़ी से स्ट्रोक लगाने शुरू कर दिए उसकी जांघे नेहा की उठी हुई गांड से टकराने लगी और ठप... ठप... ठप... की आवाज़ पूरे बेडरूम में गूंजने लगी। मैने देखा कि चाचाजी और नेहा में जैसे जंग छीडगयी हैं, वो देने एक दुसरे को दबातो, मसलतो हुऐ जोरदार चुदायी करने लगो। अगले दो धंटे तक चाचाजी का बेड चरमराता रहा और नेहा चीखति, चील्लाते हुऐ सिसकारियाँ भरती रही। आज ऊसो पहलोसे काफि कम दर्द हो रहा था, और वो आज बडो मजोसे चाचाजी से चुदवा रहीथी। दो धंटे को चुदाई के बाद चाचाजी अपने सारा गरम वीर्य नेहा की चूत की गहराई में ऊतारने को बाद, नेहा की चूत से लंड बाहर निकालकर वो नेहा के बगल में लेट गये। दोनो के बदन पसीने से भीग गये थे और साँसे रुक रुक कर चल रही थी, बेडसीट पर उनके और नेहा के प्यार के निशानीया बन गई थी, और दो धंटे को चुदाईके दोरान चाचाजी ने नेहा को इतनीबार झडा दीयाथा की पुरी बेडसीट ऊसके चुतरससे गीली हो गईथी ओर उसपे धःबे पड गायो थे। अब कुछ देर मैं ही नेहा दो धंटे को चुदाई से पुरी तरह से संतुश्ट होकर थक कर चाचाजी के मोटे कालो शरीर से लिपटकर सो गई। नेहा को सोया हुवा पाकर चाचाजी ने CCTV केमरे की तरफ देखकर मुझो फिरसे थंम्स अप का ईशार करके मुस्कुराये। और फिर वीडिये खतम हो गया।
अंदर कमरे मे चाचाजी अपने कमरपर सिर्फ एक टावल लपोटकर बेडपर लोटे हुए नेहा के आनेकाही ईंतजार कर रहे थे, तभी ऊन्होने दोखा की नेहा मुस्कुराते हुए दरवाजा खोल कर अंदर आ रही है। नेहा को अंदर आता दोख कर वो खुश हो गये और कहा, "अरो बहु, तुमने तो आनो मे दोर लगादी, मैं कब से तुम्हारा ईंतजार कर रहा था"। नेहा ने कहा, "वो क्या हैना चाचाजी आप को लिए तैयार होने मे आज थोडा टाईंम लग गया"। तो चाचाजी ने कहा, "कोई बात नहीं बहु वेसे भी हमे कहा आज जल्दी हैं"। चाचाजी की ऐ बात सुनकर नेहा मुस्कुराई ओर कहा, "चाचाजी आज से लोकर अमित के वापस लोटनेतक्क आपकि तो हर रात चांदी ही चांदी हैं"। तो चाचाजी ने कहा, "अरे बहु तुम्हारी जैसी खुबसुरत जवान ओरत सात हो तो दिन क्या और रात क्या हर पल चांदी ही चांदी होगी"। ये बात सुनकर नेहा अपनी आंखे झुकाते हुए शरमा गई, ओर चाचाजी से कहा, "चाचाजी इसका मतलब आप मुझो दिन मे भी नहीं छोडेगे?"। नेहा के मुह से ऐ बात सुनकर चाचाजी बहुत खुश हो गये ओर कहा, "बहु अब ज्यादा शरमावो मत और जल्दिसे मेरे पास आजावो मैं तुम्हे ढेड सार प्यार करके तुम्हारी बरसो की भुक मीटाना चाहताहु और जाने से पहले पहले तुम्हारी गोद भी भर दुंगा"। चाचाजी की ऐसी बाते सुनकर नेहा मुस्कुरायी और कहा, "तो चाचाजी आप आज मेरी गांड नहीं मारेंगे क्या?"। नेहा की ऐ बात सुनकर चाचाजी मुस्कुराये और कहा, "अरे बहु वोतो मेरी दिलि तम्मना हैं, ऊस चीज काते मैं कब से ईंतजार कर रहाहु"। तो नेहा ने अपनी नायटी के ऊपरसेही अपनी उभरी हुई गांड को सहलातेहुए चाचाजी को दिखाते हुए उनके सामने खडी हो गई। यो दोखकर चाचाजी अब अपने बेडसे ऊठकर नेहाके करिब आगयो और उसके कसकर गले लगालीया और अपने कालो मोटे होंठ नेहा के लाल सुर्ख होठों पे रख कर ऊसे कीस्स करने लगो। चाचाजी नेहा के रसीले लाल होठों को अपने कालो मोटे होठों मे लोकर उंन्हे चुमतेहुए, उंन्हे चूसने भी लगे, तो नेहा भी उनका पुरा साथ दो रही थी। अब दोनो एक दूसरे के बदन पर हाथ फिराते हुए एक दूसरे के होठों का चुंबन लोते हुए उनका रसपान करने लगो। नेहा चाचाजीके किस्स करने से इतनी ज़्यादा सेक्सुअली एग्ज़ाइटेड हो गई की उसके मुह से आहह….....ऊऊहह …......उन्न्ञंगंह की आवाज आ रही थी। मैं हैरानी से ऐसब टीवी पर देखता रहा था की, तभी नेहाने अपना मुँह खोलकर अपनी पतलि लंबि गुमाबी जुबान चाचाजी को मुँह मे घुसादि। तब चाचाजी ने भी नेहा की गुमाबी जुबान अपने मुँह मे भरकर ऊसे चुसने लगे, चाचाजी नेहा की पतलि लंबि जुबान को किसि क्यांडी की तरह चुस रहे थे। थोडी देरबाद चाचाजी से अपनी जुबान चुसवानेके बाद नेहाने अपना मुँह पीछे हटाया और चाचाजीके कमरपर पर बंधो टावल को खींचकर उसे हंटा दिया। अब चाचाजी नेहाके सामने मादरजात पुरे नंगे हो कर खडे थे, और उनका काला मोटा लंड किसि काले नाग की तरह अपना फण ऊठाकर ऊपर नीचे होते हुये झटके मार रहा था। अब नेहाने चाचाजीके काले नाग की तरहफ थोडी देर देखा और फिर अपन ऊपर पहना हुवा वो पतलीसी नायटी को खोलकर ऊसे उतारकर फेंक दिया। अब नेहा चाचाजीके सामने उनकि दिलाइहुई नई पारदर्शी लांन्जरी सेट पहनकर खडी थी, चाचाजीने नेहा को ऊस पारदर्शी लांन्जरी सेट में देखकर ऊसे दोखतेही रहगए। नेहा ऊस पारदर्शी लांन्जरी में गजब ढाह रही थी, ऊस पारदर्शी ब्रा पैंटी में नेहा को देखा कर चाचाजी ऊसे देखती रह गये, उसकी गोरी गोरी बड़ी बड़ी चूचियाँ ऊस पारदर्शी ब्रा से बाहर निकलने को मचल रही थी तो नीचे एक पतलिसि पैंटी सिर्फ उसकि चूत के ही डकपारहि थी और उसके अंदर उसके चूत के होंठ उत्तेजना से बिल्कुल फूले हुए दिखरहे थो। नेहा को अब चाचाजीके आँखों में कामुकता दिखरहि थी, नेहा को ईस् सेक्सी पारदर्शी लांन्जरी मे देखकर चाचाजी के मुँह से लार टपकने लगी। नेहा ने जब चाचाजी के आँखों में देखा तो ऊसे उनमे वासना देखी और उसे भी अब साथ ही साथ उत्तेजना महसूस होने लगी। अब नेहा की नजर चाचाजी के कमरके निचे गई तो वो उनका बड़ा और मोटा लंड देखा वो हिप्नोटाइज हो गयी। अब वो सोचनेलगी की उसके गांड के टाइट छोद में इतना मोटा लंड घुसेगा कैसे? ये सोचकर ही नेहा को एक्साइट्मेंट होने लगी। अब नेहाने चाचाजी को उपरसे निचे तक्क पुरीतरहा देखा तो पाया की चाचाजीके तो छाती और पीठ में भी इतने सारे बाल हैं, यो साला आदमी है या भालू नेहा ये सब सोचते हुए फिरसे ऊन्हे कसकर गलो लगालीया। नेहा को अब चाचाजीके बाँहों में देखकर मुझो ‘ब्यूटी एंड द बीस्ट’ वाली कहावत याद आ रही थी। नेहा ने चाचाजी को वापस गलो लगाकर उनके चेहरे को पकड़कर ऊन्हे जोर सो किस्स करने लगी और उनके कालो मोटे होठों को अपने लाल नर्म होठों मे लेकर चूसने लगी। अब नेहा चाचाजी को उत्तेजना किस्स करते हुए उनके पीठ और नितंबों पर अपना हाथ फिराने लगी, फिर उनके मुँह में अपनि जीभ घुसाकर अंदर घुमाने लगी और दाँतों से चाचाजीके होठों काटने लगी। नेहा की बड़ी मुलायम चूचियाँ चाचाजी के बालों से भरी बडि छाती से दबी हुई थीं, चाचाजी ने अब अपने हाथों से नेहा के बडे बडे नितंबों को जोर से दबाते हुए बोलो, ”नेहा तुम्हारी गांड तो बहुत गरम लग रही है, रुको मैं थोड इसक टेंपरेचर चैक करलू"। ऎसा बेलतेहुए चाचाजी ने नेहा के नितंबों को फैलाकर उसकी गांड के छोदपर अपनी अंगूठे से कुरेदने लगा, चाचाजी के अंगुली करने से नेहा अपने नितंब ऊपर को उचकाने लगी और करहाने लगी, लेकिन चाचाजी ने अंगुली करना बंद नहीं किया। फिर चाचाजी ने अपनी एक अंगुली को नेहा की गांड के छेद में घुसा दिया, नेहा ज़ोर से चिल्लाई ….आआहह…... और ज़ोर से सिसकते हुए फड़फड़ाने लगी। पर चाचाजी ने नेहा को कसकर पकड लीया और कहने लगे, "अरे बहु तुम तो मेरी अंगुली डालनेसेही तडपने लगी, अभी तो मैंने मेरा लंड डालाही नहिं" और हसने लगे। फिर चाचाजी ने अपनी अंगुली नेहा के गांड के छेद से बाहर निकालदी और ऊसकी बड़ी चुथडोंको को पकडकर ऊन्हे जोर से दबाते हुए मसलने लगो। अब नेहा भी गरम होने लगी थी, तो उसने चाचाजी को वैसे ही ज़ोर से जकडकर ऊनके नितंबों को अपना हाथ में भरकर ऊन्हे जोर से दबाते हुए किस्स करते हुऐ सिसकारियाँ लेने लगी "……ओह्ह……ऊऊहह.... ……आआअहह....…… उनन्ं…….... आआआहह……...."। फिर मैने देखा की चाचाजी और नेहा में तो जैसे जंग छीडगयी वो देने एक दुसरे को दबातो, मसलतो हुऐ एक दुसरेके मुँह में अपनि जीभ घुसाकर चुसतेहुए जोरदार तरिकेसे किस्स कर रहे थे। अगले दस्स मिनीट तक चाचाजी और नेहा इसी तरिकेसे किस्स करते रहे। फिर चाचाजी ने अपना लंड हाथ में लोकर ऊसे नेहा की गांड के छेद में लगा दिया और सुपाड़े को अंदर डालने के लिए उन्होने एक धक्का लगाया। “ओइईईईईईई…माआ……आआअहह……, मैं मर जाऊँगी, बहुत दर्द हो रहा है चाचाजी,” नेहा अपने गांड में हो रहे दर्द से चिल्ला पड़ी। पर चाचाजी ने अपने लंड के सुपाड़े को नेहा की गांड में घुसाते हुए बोला,” बस बहु थोड़ा दुखेगा, तेरी गांड भी तो बहुत टाइट है ना…...., अभी आगे और मज़ा भी मिलेगा तुम्हें….” कहते हुये चाचाजी अपने लंड को नेहा की गांड में घुसाने लगो। “अहह ओह फट गयी ……ईईईईईईईईईईईईईईईईईई माआआआआआआ….” नेहा फिर चिल्लाई, “आहह….बस किजिये चाचाजी …आहह ओइईई…”। लेकिन चाचाजी भी बहुत गांडू थे, अबतक्क बहुत औरतो कि गांड मारते मारते अब उनको गांड मारने की आदत पड़ गयी थी, इसलिए वो नहीं माने और फिर उन्हेने नेहा के दोनो नितंबों को फैला कर ऊसके गांड के छेद में अपना लंड घुसाने की कोशिश करने लगो। “आहह…..मैं मर गयी ……..कमीने कुत्ते हरामजादे ने मेरी गांड फाड़ दी...... उईईईईईईईईईई माआआआआआ…”, नेहा फिर चिल्लाई और चाचाजी को गालि दोतोहुए चाचाजी से अलग हो गयी। नेहा के रोने चिल्लाने से चाचाजी ने भी ऊसे छोड़ दिया और हट गयो, दर्द से नेहा की आँखों से टपाटप आँसू बहने लगे। ऊसे दोखकर चाचाजी ने नेहा से कहने लगे, "नेहा तुम्हे गांड मरवाने में बहुत तकलीफ हो रही है क्या?"। तो नेहाने जवाब दिया, "हा चाचाजी आपका लंड तो किसी गधें कि तरहा मोठा और लंबा है, लगता है आपने तो मेरी गांड ही फाड़ दी आज......जान ही निकाल दी आपने मेरी" नेहा अपने गांड को सहलातेहुए चाचाजी से उनकी शिकायत करनेलगी। तब चाचाजी ने कहा, "अरे बहु पहली बार में तो थोड़ा दुखेगा ही और तेरी गांड भी तो बहुत टाइट है ना….... मजा तो ऊसके बाद ही तो आऐगा, भुल गई जब मैंने पहलि बार जब तोरी चुत मारी थी तब तो तुम्हो डाक्टर साहिबा के पास लो जाना पडा था"। ईसपर नेहा ने कहा, "जी हा चाचाजी मगर आपके खातिर मैंने वो दर्द तो सहलिया था, मगर मैं अपनी गांड नहीं फाड्डा सकती"। ईस बातपर चाचाजी कहने लगे, "अरे बहु आजकल तो तुमसे ऊमर में क्कम कालोज कि लेंडिया भी बडे शोक से और आरम से मुझसे भी बडे लंड से अपनी गांड मरवाती हैं और तुम हो कि रोने, चील्लाने लगी"। चाचाजी के ईस बातपर नेहा अब और भडकते हुऐ बोलने लगी, "वो कालोज कि लेंडिया लोती होंगी आपका शोकसे, पर मैं नहीं लो सकती ईस मुसल को अपने गांडके अंदर"। तो चाचाजी फिर से कहने लगे, "अरे बहु मैं तो तुम्हे बडी बाहदुर, हिम्मत वाली और सयनि समझता था, मगर तुम तो आजकल की कालोज कि लेंडिया से भी मात खाने वाली बहुत ही कमजोर निकली"। चाचाजी की ईस बात से नेहा ताव में आ गई और कहा, "मैं कोई आजकल की कालोज कि लेंडिया से मात खाने वाली नहीं हु, अगर मौका मीला तो मैं दिखा दुंगी की मैं ऊन कालोज कि लेंडियो से कम नहीं हु"। नेहा के ईस बातपर चाचाजी ने अब ऊसे और भडकने को लिऐ बोले, "ठिक हैं बहु तो हम एक शर्त लगाते है और दोखते है की कोन ऊस शर्त में जीतता हैं"। नेहा ने पुछा, "कैसी शर्त चाचाजी?" तो चाचाजी ने कहा, "कल मैं एक कालोज के लडका लडकि को पटाकर यहा हमारे घर पर लाता हु, और ऊनसे शर्त लगाते है की हम्म एक दुसरे को पाटर्न की गांड मारेंगे, और मुझो यकीन हैं की तुमको दोखकर कोईभी कालोज का लडका तुम्हारी गांड मारने के लिऐ तैयार हो जाऐगा और अपनी ग्रर्लफ्रेंड को भी मुझसे अपनी गांड मारने के मना लोगा. और अगर ऐसा हुआ और ऊस कालोज कि लडकी ने मुझसे अपने गांड मारली तो बहु तुम भी ऊनके सामने ही मुझसे अपनी गांड चुदवावोगि. बोलो क्या तुम्हे मेरी ऐ शर्त मंजुर हैं?"। चाचाजी का ऐ चैलोंज सुनकर नेहा घमंड में फिर से ताव आ गई और कहा, "मुझो आपकी शर्त मंजुर हैं चाचाजी. पर मेरी भी एक शर्त हैं, अगर ऊस कालोज कि लडकी ने आप से अपनी गांड नहीं चुदवाई तो आप फिर कभी भी मेरी गांड मारने की बात भी नहीं करेंगे. बोलीए मेरी शर्त मंजुर हैं?"। ईसबात पर चाचाजी ने कहा, "ठिक हैं बहु मुझो तुम्हारी हर शर्त मंजुर हैं" और वो मन ही मन हसने लगे. क्युकी उन्होने आखिरकारा नेहा को अपने बातोके जाल मे फसाकर ऊसकी गांड मारने का इंतजाम कर ही लिया था। चाचाजी अब ऐ जान गयो थे की नेहा एक बहुतही घमंडी और मगरुर औरत हैं, अग ऊसे किसी बातके लिए ऊकराकर ऊसे चैलोंज करे ते नेहा घमंड में आकर जितने के लिए कुछ भी करेगी. और चाचाजी ने आज नेहा की ईसी कमजोरिका फायदा उठाया था। अब चाचाजी ने लोहे के मुसहल जैसे अपने लंड को सहलाते हुए नेहा से कहा, "चलो बहु आज अपनी गांड ना सही पर अपनी चुत को तो देकर मेरे ईस लंड को शांत कर दो"। ऐ बात सुनतो ही नेहा ने हलकोसे मुस्कुराते हुऐ बेड पर लोट गई और अपने पैर फैलाकर अपनी नाझुक मखमली गुलाबी चुत को चाचाजी के सामने खोलकर ऊन्हे आनेका निमंत्रण दो दिया। ऊसे देखकर चाचाजी का काला मोटा लंड ऊपर नीचे होते हुये झटके मार रहा था। नेहा की गोरी गोरी मक्खन जैसी जांघें और फूली हुई चूत के गुलाबी होंठ देखकर चाचाजी उत्तेजना से पागल हो गयो ओर नेहा की चूत पर टूट पडो। नेहा की गुलाबी चूत के फूले होठों को देखकर चाचाजी कामवसना से पागल हो उठे, और ऊन्हेने नेहा की चूत में जीभ लगाकर चाटने लगे वो उसकी क्लिट को जीभ से छेड़ने लगे। “....उनन्नज्ग्घह... …...आअहह.......आअहह…...आअहह.....” चाचाजी की जीभ अपनी चूत पर रगड़ने से नेहा सिसकारियाँ लेने लगी। नेहा को अपनी चूत चटवाना बहुत पसंद था, चाचाजी के चूत चाटने से नेहा बहुत उत्तेजित हो गयी ओर उसकी चूत से रस निकलने लगा। नेहा उत्तेजना से भरकर अपने नितंबों को चाचाजी के मुँह पर उछालने लगी। चाचाजी नेहा की ईस कामुकता से हैरान रह गया और सोचने लगा ये तो बहुत ही मज़े ले रही है, उन्हेने अपनी जीभ लगाकर नेहा की चूत से बहते रस को चाटने लगो। फिर चाचाजी ने नेहा की दोने टाँगें खींचकर अलग कर दी और फिर उसकी फड़कती चूत में मुँह लगाकर चूत के अंदर जीभ डाल दी और उसे अंदर घुमाने लगे और अपने जीभ से चाटने लगे। नेहा लेटे हुए सिसकारियाँ लेने लगी और बडबडाने लगी “उहह….चाचाजी…. उन्न्नह…उननग्ज्ग……एसस्स्सस्स….ज़ोर से चाचाजी और ज़ोर से….” ऐसे बोलते हुऐ उसने अपने बड़े नितंबों को उछालकर चाचाजी के मुँह में झटका देने लगी। अब नेहा उत्तेजना से तड़प रही थी और वो चुदाई के लिए तरस रही थी उसने कहा, “ मुझे चोदो….हाँ मुझे चोदो चाचाजी…..प्लीज़….चोदोमुझे....”। फिर की चाचाजी ने नेहा की टांगों को उठा कर अपने कंधों पों रख लिया और नेहा की टाइट चूत के छेद पर अपने स्खंत लंड का सूपाड़ा रगडने लगे। नेहा बेड पर पड़े हुए चाचाजी को अपने अंदर लंड धुसानेका इंतज़ार करते देखकर चाचाजी मुस्कुराया और अपना स्खंत लंड नेहा की प्यासी परंतु गीली चूत पर लगाया और उत्तेजना से फूले हुए चूत के होठों के भीतर डालकर एक झटके में सुपाड़ा अंदर घुसा दिया। चाचाजी को लंड का सुपाड़ा नेहा की टाइट चूत की दीवारों को फैलाते हुए जैसे ही अंदर घुसा, नेहा के मुँह से सिसकारियाँ निकल ने लगी "……ओह्ह……ऊऊहह ……आआअहह…… उनन्ं…… आआआहह......…ओइईईईईईईईईईईईईई….....म्म्म्माआआआआआआ…..... तुम मेरी फाड़ दोगे चाचाजी …….....उईईईईई……......माआआअ....….”। नेहा सिसकारियों के बीच बोली, “ ऊ...आअहह….इट फील्स सो गुड….”। फिर चाचाजी ने अपने पूरे लंड को नेहा की चूत में गहराई तक घुसाकर लम्बे स्ट्रोक लगाने शुरू कर दिए, चाचाजी के ताकतवर धक्कों से नेहा का जिस्म हिल गया उत्तेजना में अब वो भी अपनी गांड ऊपर को उछालकर चाचाजी के धक्कों का जवाब देने लगी। “आआहाआंन्न…..... बहुत मज़ा आ रहा है….....चोदो…चोदो…उईईई माआ....और चोदो....…चाचाजी…...….चोदोमुझे...." उत्तेजना में अपने नितंबों को ऊपर उछालती हुई नेहा बोली। तब चाचाजी ने कमरे में लगे CCTV कैमरा की तरफ दिखते हुऐ मुस्कुराने लगे, मुझे पताथा लगा की ये वो मुझे दीखनेके लीए कर रहे थे की दोखो कैसे तुम्हारी पतनी नेहा मुझसे चुदनेके लीए तडप रही है। लेकिन नेहा को ईस बात का पता नही था की कमरे में CCTV कैमरा लगे हुए है ओर ये सब रेकॉर्ड हो रहा है। अब चाचाजी ने तेज़ी से स्ट्रोक लगाने शुरू कर दिए उसकी जांघे नेहा की उठी हुई गांड से टकराने लगी और ठप... ठप... ठप... की आवाज़ पूरे बेडरूम में गूंजने लगी। मैने देखा कि चाचाजी और नेहा में जैसे जंग छीडगयी हैं, वो देने एक दुसरे को दबातो, मसलतो हुऐ जोरदार चुदायी करने लगो। अगले दो धंटे तक चाचाजी का बेड चरमराता रहा और नेहा चीखति, चील्लाते हुऐ सिसकारियाँ भरती रही। आज ऊसो पहलोसे काफि कम दर्द हो रहा था, और वो आज बडो मजोसे चाचाजी से चुदवा रहीथी। दो धंटे को चुदाई के बाद चाचाजी अपने सारा गरम वीर्य नेहा की चूत की गहराई में ऊतारने को बाद, नेहा की चूत से लंड बाहर निकालकर वो नेहा के बगल में लेट गये। दोनो के बदन पसीने से भीग गये थे और साँसे रुक रुक कर चल रही थी, बेडसीट पर उनके और नेहा के प्यार के निशानीया बन गई थी, और दो धंटे को चुदाईके दोरान चाचाजी ने नेहा को इतनीबार झडा दीयाथा की पुरी बेडसीट ऊसके चुतरससे गीली हो गईथी ओर उसपे धःबे पड गायो थे। अब कुछ देर मैं ही नेहा दो धंटे को चुदाई से पुरी तरह से संतुश्ट होकर थक कर चाचाजी के मोटे कालो शरीर से लिपटकर सो गई। नेहा को सोया हुवा पाकर चाचाजी ने CCTV केमरे की तरफ देखकर मुझो फिरसे थंम्स अप का ईशार करके मुस्कुराये। और फिर वीडिये खतम हो गया।
ಇ೦ತಿ ನಿಮ್ಮ,
ಕಾಮರಾಜ
ಕಾಮರಾಜ


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