14-07-2026, 11:20 PM
आसिफ की साँसें तेज हो चुकी थीं और उसकी उंगलियाँ चैताली के बेहोश शरीर पर धीरे-धीरे खिसक रही थीं। उसने चैताली की साड़ी के पल्लू को और ऊपर खींचा, जिससे उसकी कोमल जांघों का अधिकांश हिस्सा उजागर हो गया। हवा का ठंडा स्पर्श भी चैताली के शरीर को नहीं जगा सका, क्योंकि वह अभी भी गहरी बेहोशी में डूबी हुई थी।
आसिफ की नजरें अब चैताली के ब्लाउज पर टिक गईं, जो उसके उभरे हुए स्तनों को ढके हुए था। उसने धीरे से अपने हाथ ब्लाउज के ऊपर से चैताली के स्तनों पर रख दिए। वे नर्म और भरे हुए थे, जैसे पके हुए आमों की तरह मुलायम और गोल। आसिफ ने अपनी उंगलियों से उन्हें महसूस किया—हर दबाव के साथ चैताली के स्तन उसकी हथेलियों में समा जाते और फिर वापस अपनी जगह ले लेते।
चैताली की निप्पल्स, जो अब तक ब्लाउज और ब्रा की कैद में दबी हुई थीं, आसिफ के स्पर्श से और भी सख्त हो गईं। वे कपड़े के अंदर से ही स्पष्ट रूप से उभर आई थीं, जैसे छोटे-छोटे कंकड़ जो त्वचा के नीचे दबे हों। आसिफ ने अपने अंगूठे से उन्हें दबाया, पहले हल्के से, फिर धीरे-धीरे जोर देकर। उसने महसूस किया कि कैसे चैताली की निप्पल्स उसकी मर्जी के अनुसार प्रतिक्रिया दे रही थीं, जैसे वे उसके नियंत्रण में हों।
फिर उसने अपनी पूरी हथेली से चैताली के स्तनों को मसलना शुरू कर दिया। उसकी उंगलियाँ ब्लाउज के ऊपर से ही उनकी गोलाई को नापने लगीं, कभी हल्के से दबाते हुए, तो कभी जोर से मलते हुए। चैताली की साँसें, जो पहले धीमी और अनियमित थीं, अब और भी अधिक तेज हो गईं, जैसे उसका शरीर बेहोशी में भी आसिफ के स्पर्श को महसूस कर रहा हो।
आसिफ ने अपना सिर झुकाकर चैताली के कान के पास अपने होठों को रखा और धीमी आवाज में कुछ फुसफुसाया, हालांकि वह जानता था कि वह उसे सुन नहीं पाएगी। फिर भी, उसके शब्दों की गर्मी ने चैताली की त्वचा पर एक सिहरन पैदा कर दी। उसकी उंगलियाँ अब और भी अधिक दृढ़ता से चैताली के स्तनों पर चलने लगीं, जैसे वह उन्हें अपने नियंत्रण में पूरी तरह से लेना चाहता हो।
हर स्पर्श, हर दबाव, हर मसलने के साथ, आसिफ चैताली के शरीर को और भी अधिक अपना बना रहा था, जबकि वह अभी भी गहरी बेहोशी में डूबी हुई थी।


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