14-07-2026, 08:56 PM
चैतली अपनी साड़ी के पल्लू को उंगलियों से मरोड़ रही थी, जबकि उसके कानों में अशोक, आर्यन और राघव की हंसी किसी भारी शोर की तरह गूंज रही थी। उनके शब्दों में सम्मान था, लेकिन उनकी नज़रों में एक ऐसी भूख थी जो चैतली को अंदर तक सिहरा रही थी—एक ऐसा डर जो उसे डरा नहीं रहा था, बल्कि उत्तेजित कर रहा था।
"मैम, आप आज कुछ ज्यादा ही खूबसूरत लग रही हैं," राघव ने फुसफुसाते हुए कहा, और उसका हाथ गलती से—या शायद जानबूझकर—चैतली की कमर के निचले हिस्से को छू गया। वह स्पर्श बिजली की तरह उसकी रीढ़ की हड्डी से होता हुआ नीचे उतरा, जिससे उसके पेट के निचले हिस्से में एक हल्की सी ऐंठन हुई। चैतली ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन उसकी जीभ भारी हो चुकी थी और उसका शरीर किसी नरम मोम की तरह पिघलकर सोफे में धंसता जा रहा था।
तभी कमरे का दरवाजा धीरे से खुला और आसिफ खान अंदर दाखिल हुआ। असिग उन्ही के साथ कंपनी में काम करता था। उसकी चौड़ी छाती और कसरती बाहें उसके फिटेड सफेद शर्ट के बटन को चुनौती दे रही थीं, और उसकी गहरी, शिकारी नजरें कमरे में कदम रखते ही सीधे चैतली पर ठहर गईं। आसिफ की मौजूदगी ने कमरे के तापमान को अचानक बढ़ा दिया था; उसके चलने की आहट में एक ऐसा अधिकार था जिसने चैतली की सांसों की लय को पूरी तरह बिगाड़ दिया।
उसने अशोक और राघव की ओर एक संक्षिप्त, समझदारी भरी नजर डाली, जिससे बिना एक शब्द बोले यह तय हो गया कि वह भी इसी खेल का हिस्सा बनने आया है। जब वह चैतली के करीब आया, तो उसके महंगे परफ्यूम की तीखी खुशबू और उसके शरीर से निकलने वाली गर्मी ने चैतली को पूरी तरह घेर लिया, जिससे उसका सिर और भी ज्यादा घूमने लगा।
उसने झुककर चैतली के कान के ठीक पास फुसफुसाते हुए कहा, "पार्टी अभी तो शुरू हुई है, मैम," और उसकी गर्म सांसें चैतली की गर्दन की संवेदनशील त्वचा से टकराईं, जिससे उसके शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। आसिफ का एक मजबूत हाथ धीरे से उसके कंधे पर टिका, जिसकी पकड़ में एक अजीब सा दबाव था—एक ऐसा दबाव जो उसे यह अहसास दिला रहा था कि अब भागने का कोई रास्ता नहीं बचा है। चैतली ने महसूस किया कि उसका दिल उसकी पसलियों के खिलाफ तेजी से धड़क रहा है, और उसके निचले हिस्से में एक भारीपन सा महसूस होने लगा।
तभी सन्नाटे को चीरते हुए आर्यन के फोन की तीखी रिंगटोन बजी। उसने झिझकते हुए फोन निकाला और स्क्रीन पर 'घर' लिखा देख उसका चेहरा एक पल के लिए तनावग्रस्त हो गया। "शिट, घर से कॉल है, मुझे अभी निकलना होगा," उसने अपनी टीम के साथियों की ओर एक अधूरी, हताश नजर डालते हुए कहा। उसके शब्दों में एक झुंझलाहट थी, क्योंकि वह उस चरम बिंदु पर था जहाँ उत्तेजना अपने शिखर पर थी, लेकिन पारिवारिक मजबूरी ने उसे इस शिकारी समूह से अलग कर दिया।
आर्यन के जाते ही कमरे की हवा और भी गाढ़ी और भारी हो गई। अब केवल तीन पुरुष और एक मदहोश महिला बची थी।
आसिफ ने अपने एक हाथ में ठंडे पानी से भरा हुआ एक लंबा गिलास पकड़ा हुआ था, जिसमें बर्फ के टुकड़े टकरा रहे थे। उसने चैताली की ओर बढ़ते हुए अपनी मुस्कुराहट को थोड़ा और चौड़ा करते हुए कहा, "मैडम, आप पिछले तीन घंटे से लगातार काम कर रही हैं। आपको थोड़ा ब्रेक लेना चाहिए। यह लीजिए, ताज़ा हो जाइए।" चैताली ने थकान भरी मुस्कुराहट के साथ गिलास को अपने हाथों में ले लिया। उसने गिलास को होंठों से लगाया और धीरे-धीरे पीना शुरू किया, बिना यह जानते हुए कि उनके पीछे खड़े उनके दो सहकर्मी एक-दूसरे की ओर मायावी नज़रों से देख रहे थे - उन्होंने चैताली के ड्रिंक में कुछ ऐसा मिला दिया था जो उनकी योजना का हिस्सा था।
कुछ ही मिनटों में, चैताली ने अपने सिर में एक अजीब सी भारीपन महसूस करना शुरू कर दिया। उनकी आँखों के सामने धुंधलापन छाने लगा, जैसे कोई धुंआ उनकी दृष्टि को ढक रहा हो। उन्होंने अपने कुर्सी के हत्थे को मजबूती से पकड़ने की कोशिश की, लेकिन उनकी उंगलियों में ताकत नहीं रह गई थी। "मुझे... मुझे बहुत चक्कर आ रहा है," उन्होंने धीमी, डगमगाती आवाज में कहा। उनके सहकर्मी तुरंत आगे बढ़े, उनके चेहरे पर चिंता का भाव नाटक करते हुए। "मैडम, क्या हुआ? आप ठीक तो हैं?" एक ने पूछा, जबकि दूसरा पहले से ही उनकी बाँह पकड़ चुका था। चैताली ने कुछ कहने की कोशिश की, लेकिन उनकी जीभ लड़खड़ा गई। अंतिम बात जो उन्होंने देखी, वह थी उनके सहकर्मियों की चालाक मुस्कुराहट, इससे पहले कि अंधेरा उन्हें पूरी तरह से निगल लेता। वह बेहोश होकर गिरने ही वाली थीं कि उनके पीछे खड़े सहकर्मियों ने उन्हें सहारा देकर पकड़ लिया।
"जल्दी करो," एक ने फुसफुसाते हुए कहा, "कोई देख न ले।" उन्होंने चैताली के बेजान शरीर को सहारा देते हुए के एक सुनसान कोने की ओर देखा, जहाँ एक खाली मीटिंग रूम था। एक ने दरवाजा खोला जबकि दूसरा चैताली को उठाकर अंदर ले गया। दरवाजा धीरे से बंद हो गया, उनकी योजना का अगला चरण शुरू होने वाला था।


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