14-07-2026, 07:57 PM
चैताली जब वॉशरूम के दरवाजे तक पहुँची तो उसका नशा इतना बढ़ चुका था कि वह दरवाजे का हैंडल ठीक से पकड़ भी नहीं पा रही थी। उसकी उंगलियाँ लकड़ी के हैंडल पर फिसल रही थीं, और वह बार-बार अपना संतुलन खो रही थी। संजय और विवेक ने इस मौके का फायदा उठाया और तेजी से उसके पास पहुँच गए।
"मैडम, क्या आपको मदद चाहिए?" संजय ने नकली चिंता से भरे स्वर में पूछा, जबकि विवेक पीछे से चैताली के करीब आकर खड़ा हो गया। चैताली ने अपनी धुंधली आँखों से उन्हें देखा और हकलाते हुए कहा, "हाँ... मैं... दरवाजा... खोल नहीं पा रही..." उसकी आवाज़ में साफ नशा झलक रहा था।
संजय ने तुरंत आगे बढ़कर दरवाजा खोला और चैताली को अंदर जाने दिया, लेकिन उसके अंदर जाते ही वे दोनों भी चुपके से उसके पीछे हो लिए। वॉशरूम का अंदरूनी हिस्सा काफी बड़ा था, जिसमें एक तरफ वाश बेसिन और दूसरी तरफ भारतीय शैली के टॉयलेट थे। चैताली ने जैसे ही टॉयलेट की ओर कदम बढ़ाया, उसके पैर फिसल गए और वह जोर से गिर पड़ी। उसकी साड़ी का पल्लू बिखर गया, जिससे उसकी मोटी जांघें और छोटी काली लेस वाली पैंटी साफ दिखाई देने लगी।
"अरे मैडम! आप ठीक हैं?" संजय ने झट से आगे बढ़कर चैताली का हाथ पकड़ने की कोशिश की, जबकि विवेक उसके दूसरी तरफ घुटने के बल बैठ गया। चैताली ने अपनी धुंधली आँखों से उन्हें देखा और हकलाते हुए कहा, "मुझे... पेशाब... बहुत ज़ोर से आ रहा है..." उसकी आवाज़ में तीव्र इच्छा साफ झलक रही थी।
दोनों युवकों ने उसे सावधानी से उठाया और टॉयलेट की ओर ले गए। चैताली ने अपनी साड़ी को धीरे-धीरे ऊपर उठाया और उसे अपनी कमर के चारों ओर लपेट लिया, जिससे उसकी मोटी जांघें और छोटी काली लेस वाली पैंटी पूरी तरह स्पष्ट हो गई। संजय ने चैताली के पीछे से उसे सहारा देते हुए बैठने में मदद की जबकि विवेक आगे खड़ा होकर उसके मोटे शरीर को निहार रहा था।
चैताली को अपनी पैंटी नीचे करने में काफी संघर्ष करना पड़ा क्योंकि नशे के कारण उसकी उंगलियाँ सही से काम नहीं कर रही थीं। विवेक ने अचानक अपना फोन निकाला और संजय को इशारा किया। चैताली को पेशाब करते हुए फिल्माने के लिए विवेक ने अपने फोन को सावधानी से पोजिशन किया।
"संजय, उसे थोड़ा और सहारा दो," विवेक ने कहा, जबकि उसकी उंगलियाँ फोन के कैमरा बटन पर थीं। पेशाब की धार शुरू होते ही विवेक ने अपने फोन को चैताली के चेहरे से लेकर उसकी साफ-सुथरी योनि तक फोकस किया, जहाँ से पेशाब की धार बाहर आ रही थी।
"मैडम, आराम से करें," संजय ने चैताली के कंधे पर हाथ रखकर उसे संतुलन बनाए रखने में मदद की जबकि चैताली ने अपनी आँखें बंद कर ली थी। पेशाब करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, दोनों लड़कों ने चैताली को सावधानी से खड़ा किया और उसकी पैंटी ऊपर चढ़ाने में मदद की। विवेक ने चुपके से अपने फोन में रिकॉर्ड किया वीडियो सेव कर लिया और संजय की ओर मुस्कुराते हुए देखा।


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