13-07-2026, 11:15 PM
अपडेट - 5
राज: (भविष्य से ) दादाजी के अंत के साथ में तुम्हारा अंधकारमय भविष्य था उसका भी अंत हो रहा है क्यूकी अब समय की धारा बादल गयी है तो जो कुछ मेरे समय में घटित हुआ था वो सब अब अंत हो जाएगा और एक नयी समय की धारा जन्म लेगी तुम भी धीरे धीरे सब भूल जाओगे। एक कागज भविष्य का राज आज के राज को हाथ मे देते हुये कल सुभा इस कागज को पढ्न है तुम्हें तो इसे ऐसी जगह रखो जहां से तुम इसे पढ़ सको क्यूकी कल तुम्हें ये भी याद नही रहेगा की तुम्हें ये पढ्न है तुम्हारी ज़िंदगी उसी वक़्त से फिर शुरू होगी जहां से तुम आईने में गए थे
अब आगे............
उठो........... उठ जाओ आलसी...... हे भगवान ये लड़का भी ना...
![[Image: db722e01-a8da-4938-be05-183d6abae012.jpg]](https://i.ibb.co/ymzWmFcW/db722e01-a8da-4938-be05-183d6abae012.jpg)
सरिता राज की मम्मी राज को जगा रही थी...
राज अचानक से उठ बैठता है। राज इतनी जल्दी उठा था की उठते वक़्त राज की मम्मी का सर राज से टकरा जाता है ।
सरिता: (अपना सर पकड़ते हुए) आह... (राज को एक चपत लगते हुए) ये क्या तरीका है उठने का......
राज : मम्मी आप यहाँ हो?......
सरिता: राज को गुस्से से देखते हुए और कहा रहूँगी ? चल उठ जा जल्दी तुम्हारी बहने अभी तइया हो जाती है... अगर तू समय पर तैयार नहीं होगा तो वो लोग तेरे साथ साथ मेरा भी जीना हराम कर देंगे......
राज:- मम्मी पापा कहा है........?
सरिता : (वापस गेट तक ही गयी थी उसके कदम रुक जाते है) तुम्हें नहीं पता ? राज तुम अच्छे से जाते हो की तुम्हारे पापा मुझे छोड़ कर जा चुके है फिर भी तुमने ऐसा सवाल किया......?
![[Image: 359c1fb3434a518f4eb1cb7ca9e9d3f2.jpg]](https://i.ibb.co/5g4GxVr4/359c1fb3434a518f4eb1cb7ca9e9d3f2.jpg)
राज:- क्या?॥ वो में
सरिता : (राज की बात बीच में ही काट ते हुए) मुझे पता है बेटा तुम उन्हे याद करते हो, हम सब भी करते है लेकिन इसका ये मतलब तो नहीं है न की हम जीना ही छोड़ दे... चलो जल्दी खड़े हो जाओ और तैयार हो जाओ... तुम्हें अपनी बहनो के साथ उनके कॉलेज जाना है ।
राज : हा लेकिन (राज कुछ बोलता उससे पहले ही सरिता जा चुकी थी) राज बस सोचता ही रह गया की आखिर कल जो तक जो था वो सपना था या क्या?
तभी राज को वो तिलस्मी आईना नज़र आता है ... राज उस तिलिस्मी आईने से रानी और सोनिया को देखता है तो वो दोनों उसे आईने मे तैयार होते नज़र आती है॥ राज को लगा ये कोई भ्रम है तो राज से उस आईने मे हाथ दाल कर रानी और सोनिया की अंडर वियर (ब्रा पेंटि) आईने में हाथ डाल कर चुपके से उठा लाता है ।
राज: मतलब में कोई सपना नहीं देख रहा था तिलिस्मी आईना तो है मेरे पास मतलब जो कुछ कल हुआ वो भी सच था लेकिन मुझे ठीक से याद नहीं की मुझे अब करना क्या है ।तभी राज को आईने के पीछे एक कागज नज़र आता है राज समझ जाता है की ये वही कागज है जो कल में खुद दिया था
राज: राज ने काँपते हाथों से कागज़ खोला। जैसे ही उसकी नज़र उस पर पड़ी, शब्द धीरे-धीरे चमकने लगे, मानो किसी अदृश्य शक्ति ने उन्हें अभी-अभी लिखा हो।
"राज, अगर तुम इसे पढ़ रहे हो, तो ध्यान से सुनो। तुम जिस दुनिया में थे, वह पूरी तरह सत्य नहीं थी। तिलिस्मी आईना अपने धारक के मन, उसकी इच्छाओं, उसके डर और उसकी यादों से भ्रमलोक रच सकता है। जो कुछ तुमने देखा, उसमें सत्य भी था और छल भी। याद रखना—आईना कभी किसी का मित्र नहीं होता। वह अपने धारक को शक्ति देता है, लेकिन बदले में कुछ चाहता है। सदियों पहले इस आईने को एक ऐसे तांत्रिक ने बनाया था, जो मनुष्यों की लालसा और वासना को ऊर्जा में बदल सकता था। यही उसकी असली शक्ति का स्रोत है। जब आईने को वह ऊर्जा नहीं मिलती जिसकी उसे आदत है, तब वह भ्रम पैदा करने लगता है। वह तुम्हारे अपनों को तुम्हारा दुश्मन दिखा सकता है। वह झूठी यादें बना सकता है। वह तुम्हें ऐसे रास्तों पर ले जा सकता है, जिनका अस्तित्व ही नहीं। उसका उद्देश्य केवल एक है— अपने धारक को धीरे-धीरे अपने वश में करना। यदि तुम उसकी शक्तियाँ चाहते हो, तो याद रखो कि आईना इच्छा, लालसा और मन की अंधेरी आकांक्षाओं से संचालित होता है। लेकिन सावधान रहना... हर बार जब तुम उससे शक्ति लोगे, वह बदले में तुम्हारे भीतर की किसी चीज़ को निगल जाएगा।
पहले तुम्हारा भय।
फिर तुम्हारी करुणा।
फिर तुम्हारी आत्मा।
और अंत में...
अंत में तुम स्वयं।
मैंने यह गलती की थी। तुम मत करना। क्योंकि दादाजी का अंत हो चुका है, लेकिन आईने का नहीं। असली शत्रु कभी दादाजी थे ही नहीं । असली शत्रु वही तिलिस्मी आईना है, जो इस समय तुम्हारे सामने रखा है। राज इस आईने को तुम पहली आहुती अपने पिता की दे चुके हो अब इसे मानव आहुती नहीं चाहिए अब आईना सिर्फ और सिर्फ वासना, और हवस चाहता है, यदि तुम आईने को वो दे सको जो ये चाहता है तो आईना खुद बा खुद तुम्हारा ग़ुलाम हो जाएगा लेकिन याद रखना आईने को साधारण और प्रेम की भाषा नहीं आती इसलिए सामान्य संभोग और सहवास आईने को मात्र शांत रख सकते है संतुष्ट नहीं संभोग और सहवास में जब तक कामुकता, वासना, व्हेशीपन नहीं आता शैतानी आईना अपने धारक को पवित्र मानता है।
तुम्हारा राज
कागज़ पढ़ते ही राज के हाथ काँप उठे। उसने धीरे-धीरे नज़र उठाई। कमरे के कोने में रखा तिलिस्मी आईना अब पहले जैसा नहीं दिख रहा था। उसकी सतह पर हल्की काली लहरें उठ रही थीं।
और फिर...
आईने में उसकी परछाई मुस्कुराई।
जबकि राज खुद बिल्कुल नहीं मुस्कुरा रहा था।
"तो आखिर तुमने सही रास्ता चुन ही लिया....
आईने के भीतर से एक धीमी, भयावह आवाज़ गूँजी।
राज का खून जम गया। क्योंकि वह आवाज़ उसकी अपनी थी।
राज : सही रास्ता कैसा सही रास्ता
आईना: तुम्हारी बहने? हा हा हा हा हा
अचानक सब कुछ शांत हो गया ...
राज: (भविष्य से ) दादाजी के अंत के साथ में तुम्हारा अंधकारमय भविष्य था उसका भी अंत हो रहा है क्यूकी अब समय की धारा बादल गयी है तो जो कुछ मेरे समय में घटित हुआ था वो सब अब अंत हो जाएगा और एक नयी समय की धारा जन्म लेगी तुम भी धीरे धीरे सब भूल जाओगे। एक कागज भविष्य का राज आज के राज को हाथ मे देते हुये कल सुभा इस कागज को पढ्न है तुम्हें तो इसे ऐसी जगह रखो जहां से तुम इसे पढ़ सको क्यूकी कल तुम्हें ये भी याद नही रहेगा की तुम्हें ये पढ्न है तुम्हारी ज़िंदगी उसी वक़्त से फिर शुरू होगी जहां से तुम आईने में गए थे
अब आगे............
उठो........... उठ जाओ आलसी...... हे भगवान ये लड़का भी ना...
![[Image: db722e01-a8da-4938-be05-183d6abae012.jpg]](https://i.ibb.co/ymzWmFcW/db722e01-a8da-4938-be05-183d6abae012.jpg)
सरिता राज की मम्मी राज को जगा रही थी...
राज अचानक से उठ बैठता है। राज इतनी जल्दी उठा था की उठते वक़्त राज की मम्मी का सर राज से टकरा जाता है ।
सरिता: (अपना सर पकड़ते हुए) आह... (राज को एक चपत लगते हुए) ये क्या तरीका है उठने का......
राज : मम्मी आप यहाँ हो?......
सरिता: राज को गुस्से से देखते हुए और कहा रहूँगी ? चल उठ जा जल्दी तुम्हारी बहने अभी तइया हो जाती है... अगर तू समय पर तैयार नहीं होगा तो वो लोग तेरे साथ साथ मेरा भी जीना हराम कर देंगे......
राज:- मम्मी पापा कहा है........?
सरिता : (वापस गेट तक ही गयी थी उसके कदम रुक जाते है) तुम्हें नहीं पता ? राज तुम अच्छे से जाते हो की तुम्हारे पापा मुझे छोड़ कर जा चुके है फिर भी तुमने ऐसा सवाल किया......?
![[Image: 359c1fb3434a518f4eb1cb7ca9e9d3f2.jpg]](https://i.ibb.co/5g4GxVr4/359c1fb3434a518f4eb1cb7ca9e9d3f2.jpg)
राज:- क्या?॥ वो में
सरिता : (राज की बात बीच में ही काट ते हुए) मुझे पता है बेटा तुम उन्हे याद करते हो, हम सब भी करते है लेकिन इसका ये मतलब तो नहीं है न की हम जीना ही छोड़ दे... चलो जल्दी खड़े हो जाओ और तैयार हो जाओ... तुम्हें अपनी बहनो के साथ उनके कॉलेज जाना है ।
राज : हा लेकिन (राज कुछ बोलता उससे पहले ही सरिता जा चुकी थी) राज बस सोचता ही रह गया की आखिर कल जो तक जो था वो सपना था या क्या?
तभी राज को वो तिलस्मी आईना नज़र आता है ... राज उस तिलिस्मी आईने से रानी और सोनिया को देखता है तो वो दोनों उसे आईने मे तैयार होते नज़र आती है॥ राज को लगा ये कोई भ्रम है तो राज से उस आईने मे हाथ दाल कर रानी और सोनिया की अंडर वियर (ब्रा पेंटि) आईने में हाथ डाल कर चुपके से उठा लाता है ।
राज: मतलब में कोई सपना नहीं देख रहा था तिलिस्मी आईना तो है मेरे पास मतलब जो कुछ कल हुआ वो भी सच था लेकिन मुझे ठीक से याद नहीं की मुझे अब करना क्या है ।तभी राज को आईने के पीछे एक कागज नज़र आता है राज समझ जाता है की ये वही कागज है जो कल में खुद दिया था
राज: राज ने काँपते हाथों से कागज़ खोला। जैसे ही उसकी नज़र उस पर पड़ी, शब्द धीरे-धीरे चमकने लगे, मानो किसी अदृश्य शक्ति ने उन्हें अभी-अभी लिखा हो।
"राज, अगर तुम इसे पढ़ रहे हो, तो ध्यान से सुनो। तुम जिस दुनिया में थे, वह पूरी तरह सत्य नहीं थी। तिलिस्मी आईना अपने धारक के मन, उसकी इच्छाओं, उसके डर और उसकी यादों से भ्रमलोक रच सकता है। जो कुछ तुमने देखा, उसमें सत्य भी था और छल भी। याद रखना—आईना कभी किसी का मित्र नहीं होता। वह अपने धारक को शक्ति देता है, लेकिन बदले में कुछ चाहता है। सदियों पहले इस आईने को एक ऐसे तांत्रिक ने बनाया था, जो मनुष्यों की लालसा और वासना को ऊर्जा में बदल सकता था। यही उसकी असली शक्ति का स्रोत है। जब आईने को वह ऊर्जा नहीं मिलती जिसकी उसे आदत है, तब वह भ्रम पैदा करने लगता है। वह तुम्हारे अपनों को तुम्हारा दुश्मन दिखा सकता है। वह झूठी यादें बना सकता है। वह तुम्हें ऐसे रास्तों पर ले जा सकता है, जिनका अस्तित्व ही नहीं। उसका उद्देश्य केवल एक है— अपने धारक को धीरे-धीरे अपने वश में करना। यदि तुम उसकी शक्तियाँ चाहते हो, तो याद रखो कि आईना इच्छा, लालसा और मन की अंधेरी आकांक्षाओं से संचालित होता है। लेकिन सावधान रहना... हर बार जब तुम उससे शक्ति लोगे, वह बदले में तुम्हारे भीतर की किसी चीज़ को निगल जाएगा।
पहले तुम्हारा भय।
फिर तुम्हारी करुणा।
फिर तुम्हारी आत्मा।
और अंत में...
अंत में तुम स्वयं।
मैंने यह गलती की थी। तुम मत करना। क्योंकि दादाजी का अंत हो चुका है, लेकिन आईने का नहीं। असली शत्रु कभी दादाजी थे ही नहीं । असली शत्रु वही तिलिस्मी आईना है, जो इस समय तुम्हारे सामने रखा है। राज इस आईने को तुम पहली आहुती अपने पिता की दे चुके हो अब इसे मानव आहुती नहीं चाहिए अब आईना सिर्फ और सिर्फ वासना, और हवस चाहता है, यदि तुम आईने को वो दे सको जो ये चाहता है तो आईना खुद बा खुद तुम्हारा ग़ुलाम हो जाएगा लेकिन याद रखना आईने को साधारण और प्रेम की भाषा नहीं आती इसलिए सामान्य संभोग और सहवास आईने को मात्र शांत रख सकते है संतुष्ट नहीं संभोग और सहवास में जब तक कामुकता, वासना, व्हेशीपन नहीं आता शैतानी आईना अपने धारक को पवित्र मानता है।
तुम्हारा राज
कागज़ पढ़ते ही राज के हाथ काँप उठे। उसने धीरे-धीरे नज़र उठाई। कमरे के कोने में रखा तिलिस्मी आईना अब पहले जैसा नहीं दिख रहा था। उसकी सतह पर हल्की काली लहरें उठ रही थीं।
और फिर...
आईने में उसकी परछाई मुस्कुराई।
जबकि राज खुद बिल्कुल नहीं मुस्कुरा रहा था।
"तो आखिर तुमने सही रास्ता चुन ही लिया....
आईने के भीतर से एक धीमी, भयावह आवाज़ गूँजी।
राज का खून जम गया। क्योंकि वह आवाज़ उसकी अपनी थी।
राज : सही रास्ता कैसा सही रास्ता
आईना: तुम्हारी बहने? हा हा हा हा हा
अचानक सब कुछ शांत हो गया ...
बर्बादी को निमंत्रण
https://xossipy.com/thread-1515.html
Hawas ka ghulam
https://xossipy.com/thread-33284-post-27...pid2738750
द मैजिक मिरर (THE MAGIC MIRROR) ( Unexpected Desire of Darkness ) PART-II
https://xossipy.com/thread-70677-post-60...pid6048878
https://xossipy.com/thread-1515.html
Hawas ka ghulam
https://xossipy.com/thread-33284-post-27...pid2738750
द मैजिक मिरर (THE MAGIC MIRROR) ( Unexpected Desire of Darkness ) PART-II
https://xossipy.com/thread-70677-post-60...pid6048878


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