12-07-2026, 02:20 PM
अम्मी खुशी से उठीं और एक गहरी सांस ली। उस गहरी सांस के साथ उनके सीने का उतार-चढ़ाव देखकर पैंट के अंदर मेरा लंड एक बार फिर कड़ा होने लगा।
उन्होंने अपने सुनहरे दुपट्टे को एक आखिरी बार ठीक किया और अपने चेहरे पर वही 'परफेक्ट होस्ट' वाली मुस्कुराहट पेस्ट की।
"आई, मामी!" और वो गेट की ओर चल दीं।
चलते वक्त उनके भारी हिप्स का वह मखमली उभार देखकर मेरी आँखों में हवस की आग दौड़ गई।
मैंने अपनी रेशमी शेरवानी को ठीक किया और उस झुंड के पीछे-पीछे हवेली के मेन गेट की तरफ चल पड़ा।
हवेली के अंदर, एक कमरे में, मैंने सुबह दुल्हन- सायमा खाला को देखा था। वो एक भारी, लाल जोड़े में, ज़ेवरों से लदी, बैठी थी। उसकी आँखें नीचे थीं, उनमें एक असली घबराहट और शर्म थी।
लेकिन यहाँ, गेट पर, माहौल बिल्कुल अलग था।
नजमा आंटी ने फौरन सब औरतों को 'ऑर्गेनाइज़' किया।
"फूलों की थालियाँ लो सब!"
हवेली की सब औरतें, अम्मी समेत, गेट के दोनों तरफ एक कतार में खड़ी हो गयीं। सबके हाथों में चांदी की थालियाँ थीं, जो गुलाब की पत्तियों से लबरेज़ थीं।
अम्मी भी उस कतार में सबसे आगे खड़ी थीं, और धूप में उनका वह कसमसाता हुआ जिस्म उस गैर मर्द विशाल के स्वागत के लिए जैसे अंदर ही अंदर तड़प रहा था।
उन्होंने अपने सुनहरे दुपट्टे को एक आखिरी बार ठीक किया और अपने चेहरे पर वही 'परफेक्ट होस्ट' वाली मुस्कुराहट पेस्ट की।
"आई, मामी!" और वो गेट की ओर चल दीं।
चलते वक्त उनके भारी हिप्स का वह मखमली उभार देखकर मेरी आँखों में हवस की आग दौड़ गई।
मैंने अपनी रेशमी शेरवानी को ठीक किया और उस झुंड के पीछे-पीछे हवेली के मेन गेट की तरफ चल पड़ा।
हवेली के अंदर, एक कमरे में, मैंने सुबह दुल्हन- सायमा खाला को देखा था। वो एक भारी, लाल जोड़े में, ज़ेवरों से लदी, बैठी थी। उसकी आँखें नीचे थीं, उनमें एक असली घबराहट और शर्म थी।
लेकिन यहाँ, गेट पर, माहौल बिल्कुल अलग था।
नजमा आंटी ने फौरन सब औरतों को 'ऑर्गेनाइज़' किया।
"फूलों की थालियाँ लो सब!"
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अम्मी भी उस कतार में सबसे आगे खड़ी थीं, और धूप में उनका वह कसमसाता हुआ जिस्म उस गैर मर्द विशाल के स्वागत के लिए जैसे अंदर ही अंदर तड़प रहा था।
Deepak Kapoor
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https://xossipy.com/thread-71793.html -- अनीता सिंह-
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