12-07-2026, 01:54 PM
काफी देर समय यही सोचते सोचते और खुद की गांड मारते-मारते वह कब नींद की आगोश में चली गई उसे नहीं पता।
लेकिन जब तन और मन में वासना की आग लगी हो तब नींद का हुकम कब तक चलता! अभी सुबह की पोंह भी नहीं लगी थी की पूजा की आँखे खुली। कमरे में चारो तरफ देखा अंधरे ही था। और जो कुछ भी रौशनी थी वह चन्द्रमा की किरणों की वजह से थी। उसने पाया की अभी भी उसकी दो उंगलिया उसकी गांड में फंसी पड़ी हुई थी। उसने गांड को उंगलियों से आज़ाद किया और वह ऊँगली उसके मुंह में चली गई। उसने निचे देखा की चूत की सुजन काफी कम हो चुकी थी। वह मुस्कुराई और मन ही मन बोली:
“बाबाजी चूत को मार-मार के सुजा भी देते हो और दुसरे राउंड तक मिटा भी देते हो। आप की कृपा मेरी चूत पर पड़ी रहे। चलो चूतरानी, हो सकेगा तो आज भी तुम्हे बाबाजी का लंड सुजा देगा।“ मैत्री रचित।
यह सोच उसके मन में आई, तो उसने सोचा क्यों ना अभी ही चली जाऊ। बाबाजी का प्रेम कभी कभी ले सकती हूँ। वह उठ खड़ी हुई और बाथरूम की तरफ चली गई। उसने एक नजर अपने माता-पिता के कमरे में डाली, दोनों अपनी मस्त और गहरी नींद में सोये पड़े थे। उसे थोडा कमरे का हाल अजीब लगा, पिताजी के हाथ माँ के बोबले पर पड़े हुए थे जब की माँ को कुछ भी भान नहीं था उनके पेटीकोट ऊपर उठ चूका था ऊँकी झांगे ऊपर तक दिख रही थी, पिताजी की लुंगीभी काफी उठी हुई थी, पर अंधरे की वजह और अंतर होने से वह पिताजी का लंड नहीं देख पाई और उसे ऐसी कोई मंशा भी नहीं जगी थी।। और वह अपने माता-पिता के बारे में सोचते ही उसकी चूत में आग लग गई और वह अब जल्द से जल्द बाबाजी से मिलना चाहती थी। वह फ्रेश हो कर तुरंत कपडे पहन कर बाहर की ओर चल दी।
अगली सुबह.... मैत्री की पेशकश।
सुबह 5 बजे पूजा देवस्थल पहुँची। इस वक्त देवस्थल में और कोई नहीं होता था। पूजा ने जैसे ही अंदर कदम रखा, बाबा ने इशारे से देवस्थल के पीछे आने को कहा।
पूजा तेजी से पीछे चली गई। जैसे ही वह बाबा के पास पहुँची, वह बाबा से लिपट गई।
पूजा: “ओह… बाबाजी…आपने मेरी हालत कैसी बना रखी है, रहा भी नहीं जाता और सहा भी नहीं जाता।”
बाबा ने पूजा को कसकर अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठों पर गहरा किस किया।
“यही तो मेरा और मेरे लंड का जादू है बेटी। अभी तो मेरे लंड से तुम्हे काफी शांत होना है। और तू चिंता मत कर मेरा लंड अब तुझे शांत करता रहेगा।“
पूजा भी बाबा के होंठों को चूस रही थी। बाबा ने एक हाथ से पूजा की गांड को जोर से दबाया। और पूजा की गांड की दरार को थोडा फैलाया। पूजा ने कराहते हुए बाबा की छाती से चिपककर कहा,
“बाबाजी… कल रात… मैं सो नहीं पाई… आपको बहुत याद आ रही थी…”
बाबा ने पूजा की गर्दन चूमते हुए कहा,
“अरे मादरचोद.....श… पूजा… चुप… कोई आ जाएगा…”
लेकिन पूजा नहीं मानी। उसने बाबा की गर्दन पर किस करते हुए कहा,
“बाबाजी… आपकी उँगलियाँ… आपकी जीभ… आपका लंड… सब याद आ रहा था… मेरी चूत… और गांड… दोनों में चुभन हो रही थी… मुझे आपका लंड किसी भी हालत में चाहिए बाबाजी। ऐसा कुछ कीजिये जब मैं चाहू आपका लंड मेरी चूत और गांड को मार मार के अच्छे से भर दे।
”
“हाँ हाँ ...ठीक है...मेरी माँ, लेकिन अभी चुप हो जा मेरी माँ.....कोई आ जायेगा तो तेरी और मेरी दोनों की माँ चुद जायेगी। जो करना है चुप-चाप करते है।“ बाबाजी ने पूजा के कान में अपने शब्द डाले।
बाबाजी ने पूजा की साडी ऊपर उठाई और उसकी गांड की दरार को फैलाते उसकी एक ऊँगली गांड के छेद पर गई ही थी की...............
तभी देवस्थल का घंटा बज उठा। दोनों चौंककर अलग हो गए। पूजा ने अपनी हाथ से बाबाजी की ऊँगली को पकड़ के गांड की दरार से अलग की और अपनी साडी को निचे कर दिया। उसका मुंह भय और अनचाही मुसीबत के मिश्रण से भर गया। निर्मार्त्री मैत्री है।
वह आस-पास देखने लगी की कही वह छुप सके।
******************************************************.
बस यही तक दोस्तों।
अगला अपडेट आप लोगो के कमेन्ट आने के बाद।
मैत्री पटेल का जय भारत।।
लेकिन जब तन और मन में वासना की आग लगी हो तब नींद का हुकम कब तक चलता! अभी सुबह की पोंह भी नहीं लगी थी की पूजा की आँखे खुली। कमरे में चारो तरफ देखा अंधरे ही था। और जो कुछ भी रौशनी थी वह चन्द्रमा की किरणों की वजह से थी। उसने पाया की अभी भी उसकी दो उंगलिया उसकी गांड में फंसी पड़ी हुई थी। उसने गांड को उंगलियों से आज़ाद किया और वह ऊँगली उसके मुंह में चली गई। उसने निचे देखा की चूत की सुजन काफी कम हो चुकी थी। वह मुस्कुराई और मन ही मन बोली:
“बाबाजी चूत को मार-मार के सुजा भी देते हो और दुसरे राउंड तक मिटा भी देते हो। आप की कृपा मेरी चूत पर पड़ी रहे। चलो चूतरानी, हो सकेगा तो आज भी तुम्हे बाबाजी का लंड सुजा देगा।“ मैत्री रचित।
यह सोच उसके मन में आई, तो उसने सोचा क्यों ना अभी ही चली जाऊ। बाबाजी का प्रेम कभी कभी ले सकती हूँ। वह उठ खड़ी हुई और बाथरूम की तरफ चली गई। उसने एक नजर अपने माता-पिता के कमरे में डाली, दोनों अपनी मस्त और गहरी नींद में सोये पड़े थे। उसे थोडा कमरे का हाल अजीब लगा, पिताजी के हाथ माँ के बोबले पर पड़े हुए थे जब की माँ को कुछ भी भान नहीं था उनके पेटीकोट ऊपर उठ चूका था ऊँकी झांगे ऊपर तक दिख रही थी, पिताजी की लुंगीभी काफी उठी हुई थी, पर अंधरे की वजह और अंतर होने से वह पिताजी का लंड नहीं देख पाई और उसे ऐसी कोई मंशा भी नहीं जगी थी।। और वह अपने माता-पिता के बारे में सोचते ही उसकी चूत में आग लग गई और वह अब जल्द से जल्द बाबाजी से मिलना चाहती थी। वह फ्रेश हो कर तुरंत कपडे पहन कर बाहर की ओर चल दी।
अगली सुबह.... मैत्री की पेशकश।
सुबह 5 बजे पूजा देवस्थल पहुँची। इस वक्त देवस्थल में और कोई नहीं होता था। पूजा ने जैसे ही अंदर कदम रखा, बाबा ने इशारे से देवस्थल के पीछे आने को कहा।
पूजा तेजी से पीछे चली गई। जैसे ही वह बाबा के पास पहुँची, वह बाबा से लिपट गई।
पूजा: “ओह… बाबाजी…आपने मेरी हालत कैसी बना रखी है, रहा भी नहीं जाता और सहा भी नहीं जाता।”
बाबा ने पूजा को कसकर अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठों पर गहरा किस किया।
“यही तो मेरा और मेरे लंड का जादू है बेटी। अभी तो मेरे लंड से तुम्हे काफी शांत होना है। और तू चिंता मत कर मेरा लंड अब तुझे शांत करता रहेगा।“
पूजा भी बाबा के होंठों को चूस रही थी। बाबा ने एक हाथ से पूजा की गांड को जोर से दबाया। और पूजा की गांड की दरार को थोडा फैलाया। पूजा ने कराहते हुए बाबा की छाती से चिपककर कहा,
“बाबाजी… कल रात… मैं सो नहीं पाई… आपको बहुत याद आ रही थी…”
बाबा ने पूजा की गर्दन चूमते हुए कहा,
“अरे मादरचोद.....श… पूजा… चुप… कोई आ जाएगा…”
लेकिन पूजा नहीं मानी। उसने बाबा की गर्दन पर किस करते हुए कहा,
“बाबाजी… आपकी उँगलियाँ… आपकी जीभ… आपका लंड… सब याद आ रहा था… मेरी चूत… और गांड… दोनों में चुभन हो रही थी… मुझे आपका लंड किसी भी हालत में चाहिए बाबाजी। ऐसा कुछ कीजिये जब मैं चाहू आपका लंड मेरी चूत और गांड को मार मार के अच्छे से भर दे।
”
“हाँ हाँ ...ठीक है...मेरी माँ, लेकिन अभी चुप हो जा मेरी माँ.....कोई आ जायेगा तो तेरी और मेरी दोनों की माँ चुद जायेगी। जो करना है चुप-चाप करते है।“ बाबाजी ने पूजा के कान में अपने शब्द डाले।
बाबाजी ने पूजा की साडी ऊपर उठाई और उसकी गांड की दरार को फैलाते उसकी एक ऊँगली गांड के छेद पर गई ही थी की...............
तभी देवस्थल का घंटा बज उठा। दोनों चौंककर अलग हो गए। पूजा ने अपनी हाथ से बाबाजी की ऊँगली को पकड़ के गांड की दरार से अलग की और अपनी साडी को निचे कर दिया। उसका मुंह भय और अनचाही मुसीबत के मिश्रण से भर गया। निर्मार्त्री मैत्री है।
वह आस-पास देखने लगी की कही वह छुप सके।
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बस यही तक दोस्तों।
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मैत्री पटेल का जय भारत।।



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