11-07-2026, 03:10 AM
सरताज सिंह (मन ही मन, खुद से बात करते हुए): "ठहरो... यह तो सिक्युरिटी का पुराना और आजमाया हुआ तरीका है! महकमे में यह बेहद आम बात है कि जब भी किसी बड़े क्रिमिनल गैंग के भीतर अपना कोई 'मुखबिर' या खुफिया एजेंट घुसाना होता है, तो सिक्युरिटी पहले से ही ऐसी परिस्थितियाँ तैयार करती है। जानबूझकर ऐसा नाटक रचा जाता है जिससे वह मुखबिर गैंग के सरगना की नज़रों में हीरो बन जाए और उसका अटूट भरोसा जीत सके। कभी-कभी तो सिक्युरिटी खुद अपने ही बंदों पर नकली हमला करवाती है ताकि मुखबिर उन्हें बचाकर गैंग में अपनी पैठ मज़बूत कर सके..."
जैसे ही सरताज ने इस थ्योरी को अपने परिवार के हालातों पर लागू किया, उसकी रीढ़ में एक ठंडी सिहरन दौड़ गई। वह सीधा होकर बैठ गया और अपने दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में भींचने लगा।
सरताज सिंह (विचारों की गहराई में डूबते हुए, धीमी फुसफुसाहट में): "क्या शेर भी हमारे साथ यही खेल खेल रहा है? क्या वो सारे एक्सीडेंट्स—मीरा का गाड़ी से गिरते-गिरते बचना, कोठी में चोरनी का घुसना और आज ज्योति का वो भयानक कार एक्सीडेंट—सिर्फ एक सोची-समझी साज़िश का हिस्सा थे? क्या वो जानबूझकर मेरे पूरे परिवार की जान को खतरे में डालता है, सिर्फ इसलिए ताकि ऐन मौके पर खुद रक्षक बनकर सामने आ सके और हमारा अंधविश्वास जीत सके? अगर यह सच है, तो उसका असली मकसद क्या है? वो आखिर पाना क्या चाहता है?"
सरताज ने अपने माथे पर आए पसीने को पोंछा। शक की सुई घूम तो रही थी, लेकिन उसके पास इस पहेली का कोई आखिरी सिरा नहीं था। वह इस साज़िश के पीछे के लालच को समझने की नाकाम कोशिश कर रहा था।
सरताज सिंह (असमंजस में अपना सिर हिलाते हुए): "अगर वो मेरी ऑफिशियल फाइलों का कोई राज़ चुराना चाहता है, तो आज तक मेरी किसी भी खुफिया डील या सरकारी काम की कोई भी जानकारी बाहर लीक नहीं हुई है। ऑफिस का एक भी पन्ना इधर से उधर नहीं हुआ। और जहाँ तक घर की बात है... आज तक उसने सिर्फ और सिर्फ हमारी मदद ही की है। कभी कोई बेईमानी नहीं की, कभी कोई पैसा नहीं चुराया... तो फिर इस वफ़ादारी के मुखौटे के पीछे उसका असली लालच क्या हो सकता है?"
सरताज का दिमाग अब दो राहों पर खड़ा था। एक तरफ वाहेगुरु का वो साफ़ और डरावना इशारा था जो शेर की नीयत पर गहरे सवाल खड़े कर रहा था, और दूसरी तरफ शेर का अब तक का रिकॉर्ड था, जिसमें उसने सिर्फ अपनी जान दांव पर लगाकर परिवार का भला ही किया था।
वह समझ नहीं पा रहा था कि शेर का निशाना उसके पैसे पर है, उसके रुतबे पर है... या फिर साज़िश का कोई ऐसा खौफनाक पहलू है जो अभी तक उसकी नज़रों से बिल्कुल ओझल है। इन्हीं उलझे हुए और गहरे ख्यालात के बीच, उसकी गाड़ी का अगला टायर उसकी कोठी के आलीशान गेट के भीतर दाखिल हो गया।
सरताज सिंह अब कोठी पहुँच चुका है, जहाँ मीरा वहशी हमले और दैवीय चमत्कार के सदमे से संभलने की कोशिश कर रही है।
जैसे ही सरताज ने इस थ्योरी को अपने परिवार के हालातों पर लागू किया, उसकी रीढ़ में एक ठंडी सिहरन दौड़ गई। वह सीधा होकर बैठ गया और अपने दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में भींचने लगा।
सरताज सिंह (विचारों की गहराई में डूबते हुए, धीमी फुसफुसाहट में): "क्या शेर भी हमारे साथ यही खेल खेल रहा है? क्या वो सारे एक्सीडेंट्स—मीरा का गाड़ी से गिरते-गिरते बचना, कोठी में चोरनी का घुसना और आज ज्योति का वो भयानक कार एक्सीडेंट—सिर्फ एक सोची-समझी साज़िश का हिस्सा थे? क्या वो जानबूझकर मेरे पूरे परिवार की जान को खतरे में डालता है, सिर्फ इसलिए ताकि ऐन मौके पर खुद रक्षक बनकर सामने आ सके और हमारा अंधविश्वास जीत सके? अगर यह सच है, तो उसका असली मकसद क्या है? वो आखिर पाना क्या चाहता है?"
सरताज ने अपने माथे पर आए पसीने को पोंछा। शक की सुई घूम तो रही थी, लेकिन उसके पास इस पहेली का कोई आखिरी सिरा नहीं था। वह इस साज़िश के पीछे के लालच को समझने की नाकाम कोशिश कर रहा था।
सरताज सिंह (असमंजस में अपना सिर हिलाते हुए): "अगर वो मेरी ऑफिशियल फाइलों का कोई राज़ चुराना चाहता है, तो आज तक मेरी किसी भी खुफिया डील या सरकारी काम की कोई भी जानकारी बाहर लीक नहीं हुई है। ऑफिस का एक भी पन्ना इधर से उधर नहीं हुआ। और जहाँ तक घर की बात है... आज तक उसने सिर्फ और सिर्फ हमारी मदद ही की है। कभी कोई बेईमानी नहीं की, कभी कोई पैसा नहीं चुराया... तो फिर इस वफ़ादारी के मुखौटे के पीछे उसका असली लालच क्या हो सकता है?"
सरताज का दिमाग अब दो राहों पर खड़ा था। एक तरफ वाहेगुरु का वो साफ़ और डरावना इशारा था जो शेर की नीयत पर गहरे सवाल खड़े कर रहा था, और दूसरी तरफ शेर का अब तक का रिकॉर्ड था, जिसमें उसने सिर्फ अपनी जान दांव पर लगाकर परिवार का भला ही किया था।
वह समझ नहीं पा रहा था कि शेर का निशाना उसके पैसे पर है, उसके रुतबे पर है... या फिर साज़िश का कोई ऐसा खौफनाक पहलू है जो अभी तक उसकी नज़रों से बिल्कुल ओझल है। इन्हीं उलझे हुए और गहरे ख्यालात के बीच, उसकी गाड़ी का अगला टायर उसकी कोठी के आलीशान गेट के भीतर दाखिल हो गया।
सरताज सिंह अब कोठी पहुँच चुका है, जहाँ मीरा वहशी हमले और दैवीय चमत्कार के सदमे से संभलने की कोशिश कर रही है।
Deepak Kapoor
Author on amazon
https://xossipy.com/thread-71793.html -- अनीता सिंह-
https://xossipy.com/thread-73166.html - अम्मी और अंकल
Author on amazon
- An Innocent Beauty Series ( 5 Books )
https://xossipy.com/thread-71793.html -- अनीता सिंह-
https://xossipy.com/thread-73166.html - अम्मी और अंकल



![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)