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Adultery दुबई के चाचाजी का ईमोल - १
#19
ऊस दीन जब मैं शाम को घर वापीस आया था तो देखा की चाचाजी और नेहा हाल में बैंटकर गपे लडाते हुये हसी मजाक कर रहेथे, और नेहा आज बहुतही खुश लग रही थी। शायद ये खुशी दुपहर मे हुई उसकी जबरदस्त चुदाईके करण थी, मेरे आते ही नेहा खाना परोसने कीचन चली गयी, और मैं कमरे मे फ्रेश होने चलागया। नेहा कीचन से खाना लाकर परोसने लगी तब मैंने नेहा से कहा, "नेहा मुझो अभीबी तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं लग रही है, और तुम अभिबी लंगडाकर चल रही हो ?", तो नेहा ने जवाब दीया की, "एसा कुछ नही है अमीत वे बुखार की वझो अभिबी थेडी कमजेरी है बस और कुछ नहीं"। तो ऊस दीन तो मैं मान गया था और मैंने खाना खाकर अपने कमरे में सोने चलागया था और मुझो जल्दी ही नींद आ गई थी। पर मुझो आज पता चला की नेहा ऊस दीन जब खाना लाकर परोस रही थी तो वो लंगडाकर क्यु चल रही थी, ऐ सब चाचाजी को तगडे चुदाईका नतिजा था। जब मैं सोने चलागया था तब भी चाचाजी और नेहा खाने को बाद भी साथ बैंटकर टीवी देख रहेथे और गप्पे हाकने लगे थे। फिर कुछ दोर बाद मैंने दोखा की नेहा ऊठकर हमारे कमरेके तरफ आई और मुझो दो बार आवाज लगाई, जब मेरीतरफसे कुछ जवाब नहीं मीला तो वो हमारे कमरेका दरवाजा बंद करके वापीससे चाचाजी को पास जाकर बैठ गई पर ईस बार वो ऊन्हसे थोडा चीपक कर बैंठ गई। तब चाचाजीने नेहासे पुछा, "बहु अमित सो गया क्या?", तो ऊसने हां में जवाब दीया। तब चाचाजीने नेहाको अपने पास खींचक ऊसे अपने से चीपका लीया तो नेहा ने कहा, "अरे चाचाजी छोडिये मुझो आप ये क्या कर रहे हैं, अगर अमित ने हमे ऐसे दोख लीया तो गडबड हो जायेगी"। तो चाचाजीने कहा, "तो क्या हुआ, अगर अमित ने दोख लीया तो मैं ऊससे कहदुंगा की बहुको सर्दी लगरही थी तो मैं ऊसे थोडा गरम कर रहाथा", ऐ बात सुनकर नेहाने हंस दिया। और कहने लगी की, "ऐतो अछा हुवा की आजकल ज्यादा कामके कारण अमित मेरे साथ सिक्स नही कर रहा, नही तो मेरी ऐसी हालत दोख कर वो समझ जाता की आपने मेरे साथ कुछ कांड कर दीया है और मुझो तलाख न देदे। मैंने आपसे पहलो भी कहा हैं की मैं अमित सो बहुत प्यार करती हु ओर ऊसे किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहती, फिर भलोही मुझो बच्चा हो या ना हॊ ईसे मुझो कोई र्फ्रक नही पडता मुझो सिर्फ अमीत चाहीये", ये बोलकर वो रोनेलगी। तो ईसबार चाचाजी ने नेहा को कसकर गले लगा लीया और उसकी पीट सहालातो हुऐ कहाने लगे, "बहु तुम चींता मत करो मैंने तुम्हसे पहलो भी कहा है की मैं तुम्हासे और अमीत के प्यार के बीच कभी नही आऊंगा। और हम दोने का रीश्ता सिर्फ दोस्ती और सेक्स का होगा बस, तुम बस धबराव मत अमित को कुछ पता नही चलोगा"। फिर कुछदेर ऐसे ही बात करनेके बाद जब नेहा सोने के लीऐ हमारे कमरेमे जाने लगी तो चाचाजी ने नेहासे कहा, "बहु तैयार रहाना कल हम कुछ नया करोंगे", तो नेहाने भी शरमातो हुऐ हां में सीर हीलाया और वहांसे चलीगयी। अगले दो दीन यही चलता रहा, मैं रोज अपने कामपर नीकल जाताथा और रात को देर से वापीस आता था। दीनभर नेहा और चाचाजी घरपर अकेले रहते थे तो दोने जमकर चुदाईका मजा लोते थे। अब जब मैं घरपर था तो देखता था की चाचाजी ओर नेहा दोने हाल मे बैटकर टीवी देखते गपे लडाते हुये हसी मजाक करते हुये एक दुसरेको छुने भी लगे थे। अब दोने में दोस्ती ओर भी अच्छी हो गयी थी तो चाचाजी नेहासे अलग अलग पोझींशन ट्राय करने को कहतो थे, तो नेहा कुछ को लीऐ मान जाति थी पर कुछ नही करति थी। शायद नेहा मेरे आसपास मैजुदगि से और मेरे धरपर कबि भी आजाने के डर से घबरा रहि थी शायद, पर मेरे सामने तो वो नारमल बीहेव करति थी। फिर शुक्रवार के दीन सोक्सके दोरान चाचाजी ने नेहासे कहा, "बहु, तुम तैयार तो होना कुछ नया ट्राय करने को लीए", तो नेहाने भी हां में सीर हीलाया तो चाचाजी खुश होगऐ। चाचाजी ने नेहासे कहा, "बहु, तुम घोडी बन जावे", तो नेहा भी बेडपर घोडी बनकर खडी हो गई। फिर चाचाजी नेहा को पीछो जाकर खडो होकर अपना हतीयार हात में लोके उसे सीधा नेहा की गांडके छोदपर रख दीया। तब नेहा हडबडातो हुऐ मुडी और बेलि, "नहीं चाचाजी वहा नही, मैंने पहले कभी वहा नही करवाय हैं प्लीज वहा बहुत दर्द होगा आपकातो कीतना बडा हैं"। तो चाचाजी ने ऊसे बहुत समझाया पर वो नही मानी तो फिर चाचाजी ने रोज की तरहा उसकी चुत ही मारी। फिर जब दुपहर को खाना खाने के बाद चाचाजी और नेहा साथ बैंटकर टीवी देख रहे थे तो चाचाजी ने नेहासे कहा, "बहु क्या मैं वेवाली फिल्म लगाऊ दोखोगी?", तो नेहा ने भी कहा, "हां चाचाजी लगा दिजीऐ कुछ नया पोझींशन दीखा तो ट्राय करोंगे"। तो चाचाजीने अपने कमरेमे जाकर एक पेनड्राय्व लोके आऐ और हमारे ५२" HD TV में ऊसके लगा दीया। वो एक ब्लु फिल्म थी जीसमें एक काला अदमी एक जवान लडकी को चोद रहाथा, वो जवान लडकी नेहासे भी कम उमरकी थी और दुबलीपतली भी थी। नेहा यो वाली ब्लु फिल्म दोखकर बहुत एक्साईटमेंट में थी, यानीकी चाचाजी और नेहा ऐसी फिल्म पहलीबार नहीं दोख रहे थे। शायद चाचाजीने नेहा को पहलो भी ऐसी ब्लु फिल्म दीखा चुको होंगे। फिर कुछदोर बाद ऊस कालो अदमीने ऊस जवान लडकी को घोडी बनकर खडा कीया और अपना विशाल लंड जो चाचाजी को हतियार के बराबर था या फिर शायद थोडा बडाही था, ऊस कालो अदमीने अपना बडा लंड लडकी को गांड में डाल दीया और उसकी गांड चोदने लगा। वो जवान लडकी आराम से वो बडा लंड अपने गांड में लोकर चुदने लगी और अपनी गांड भी खुशि से ऊछालने लगी। ये दोखकर नेहाने कहा, "बापरे ऊस लडकी ने कोसे ऊस कालो अदमी का इतना बडा लंड इतनी आसानी से अपनी गांड में लो लीया हैं, क्या ऊसे दर्द नहीं हुआ?"। तो चाचाजी ने कहा, "शायद पहलीबार हुआ होगा, जैसे पहलीबार तुम्हे हुआ था जब मैंने तुम्हारी चुत में अपना लंड डाला था? मगर अब तो तुम्हो दर्द नहीं ना होता। ठीक वैसे ही ईस लडकी को भी अब बडा लंड अपनी गांड में लोने से ऊसे दर्द नहीं होता होगा"। तो चाचाजी ने नेहासे फीर से कहा, "बहु, दोखो वो लडकीतो तुमसो भी छोटी हैं और दुबलीपतली भी हैं, मगर कोसे मजा लोकर अपनी गांड चुदवा रही हैं। क्या तुम भी तैयार हो मेरा लंड अपनी गांड में लोने के लीए, चलो हम भी ट्राय करके दोखते हैं"। तो नेहाने ना में सीर हीलाया और कहा, "नहीं चाचाजी वहा नही, पहली बार जब आपने मेरी चुत चोदा था तो मुझो कीतनी तकलीफ हुइ थी और मैं तीन दीन ठीकसे चल भी नहीं पाई थी। तब मुझो लगा था की कही अमीत को मुझपो शक ना हो जाय। अगर आज आपने मेरी गांड मारदी और वैसाही कुछ फिर हुआ तो अमीत को ईस बार मुझपो शक हो जायगा और ऊसे ईस सबको बारे में पताचल जायेगा"। तब चाचाजी ने अपना शातिर दीमाग दोडातो हुये नेहासे पुछा, "तो तुम ईस बातसे डर रही हो की अमीत जब धर आऐगा तो तुम को फिरसे लंगडाकर चलतो दोखकर तुम्पे शक करोगा, तो ठीक हैं आज नहीं करतो। मगर कभी अगर अमीत २-३ दीने के लीऐ बाहर चला जायोगा तब तो तुम मुझो अपनी गांड चुदयीका मजा दोगिना?"। तो नेहाने शरमातो हुये कहा, "अगर ऐसा होगा तो दोखा जायेगा, मगर अमीत तो कभी कभार ही काम से बाहर जातो हैं। वो भी सिर्फ १-२ दीने के लीऐ ही जातो हैं, तो आपका ऐ सपना सपना ही रह जाऐगा चाचाजी", और मुस्कुराने लगी। तो चाचाजी ने कहा, "ठीक है बहु, तो दिखतो हैं की भगवान ईस बुड्ढोपर यहा सो जानेसो पहलो दया दीखाता है या नहीं"। तब नेहा बोली, "ठीक हैं चाचाजी, अगर ऐसी बात हैं तो मैं भी भगवान सो आपके लीऐ प्रार्थना करुंगी", ऐ बोलकर नेहा हसतो हुऐ अपने कमरोमे चली गयी। यानी नेहा काभी मन था की वो चाचाजीसे अपनी गांड की सील भी तुडवाये पर वो मेरे धर में मुजुदगिसे घबरा रहि थी शायद। फिर ऊस दीन शुक्रवार के जब मैं आफिसमे कामकर रहाथा तो मुझे दुपहर को चाचाजी का फेन आया था, और ऊन्होने मुझो आज शाम को मेरे घरके पास वालो काफी शाप में आनेको कहा था ते मैंने भी हा कहदी थी। जब मैं शामको काफी शाप में चाचाजीसे मीलने गया तो चाचाजी वहा कार्नर टेबलपर मेरा पहलो से वहा ईंतजार कर रहे थे। मेरे जाते ही चाचाजी ने हम दोने के लीए काफी मंगायी और काफी पितोहुये वो मुझसे कहाने लगो, "अमित बेटा तुम तो देखी रहे हो की बहु अब कीतनी खुश रेहने लगी है"। तो मैंने कहा, "हाः चाचाजी ऐ सब आपकी ही वझेसे होपाया हैं, और मैं नेहा को हमेशा एसे ही खुश दोखना चाहता हुः"। तब चाचाजी ने फिर मुझसे कहा, "अगर तुम ऊसे हमेशा एसे ही खुश दोखना चाहते हो तो तुम्हे एक और काम करना होगा"। तो मैंने कहा, "हा बेलीयेना चाचाजी मैं नेहा को एसे खुश दोखने के लीए कुछ भी करुंगा"। तो चाचाजी ने कहा, "अमित बेटा तो तुम्हे एक हफ्ते के लीए हम दोनेको अकोले छेडना होगा। क्यु की तुम्हारे घरपर रहनेकी वझेसे बहु मेरे साथ ज्यादा खुल नही पारही हैं और ज्यादा ध्ध्बरारहिहैं शायद तुम्हासे मुजुदगिसे वो मेरे सामने पुरि तरहासे खुलने में झींजक रही हैं। अमित बेटा तो तुम एक काम करो और एक हफ्ते के लीए आफिस के कम का बहाना करके बाहर चलो जाव, अगर तुम एक हफ्ते के लीए घरपर नही रहोगे तो नेहा मेरे साथ ज्यादा खुल पायेगी"। चाचाजी की यो बात मुझे सही लगी और मैंने एक हफ्ते के लीए आफीस टुर का बहाना बनाको घरसे दुर जानेका तेय कीया। फिर मैं जब घर आया तो नेहाने पुछा, "अमित आज तुम घर ईतनी जल्दी कैसे आ गयो, तुम्हारी तबीय तो ठीक हैंना ?"। तो मैंने नेहा से कहा, "मेरी तबीयत ठीक हैं नेहा, बस कल मुझे आफीस के काम से एक हफ्ते के लीए बाहर जाना हैं, तो मैं ऊसी की पाकिंग करने मुहो आज घर जल्दी आना पडा"। ऐसा बेलकर मैं अपने कमरे में चला गया ओर अपने कपडे की पाकिंग करने लगा, तब नेहाने भी पाकिंग करने में मेरी मदत की। फिर थेडी देर बाद जब चाचाजी जब घर आया तो हम सबने खाना खाया। खाने के बाद जब सब साथ बैंटकर टीवी देख रहेथे तब मैंने नारमल बरताव करते हुए चाचाजीसे कहा, "चाचाजी कल मुझे आफीस के काम से एक हफ्ते के लीए बाहर जाना हैं तो आप प्लीझ नेहा का खयाल रखीयेगा"। तो चाचाजी ने भी मेरा साथ दोतोहुऐ कहा, "हाः अमित बेटा क्यु नहीं, तुम चींता मत करो मैं हुना मैं बहु का अच्छोसे खयाल रखुंगा और ऊसे तुम्हारी कमी बील्कुल नही होने दुंगा"। ऐ कहतो हुऐ चाचाजी नेहा की तरफ दोखतो हुऐ ऊसे आंख मार दी, ऐ दोखकर और उनकी बात सुनकर नेहा भी काफी खुश हुई और उनके दोख कर मुस्कुराने लगी। मैं सुबह जल्दी जानेका बहाना बनकर सोने चला गया, मेरे जानेके बाग चाचाजी और नेहा साथ बैंटकर टीवी देख रहेथे और गप्पे हाकने लगे। फिर कुछ दोर बाद चाचाजीने नेहासे कहा, "दोखा बहु, ईस बुड्ढोके उपर भगवान की कितनी कुपा हैं, मैं अभी शामको भगवान के पास जाकर जोमांगा ऊसने धर आनोतक उसे पुरा कर दीया"। तो नेहा ने कहा, "अरे चाचाजी, अगर भगवान आपका इतना ही सुनता हैं तो उसे बोली ऐना की मेरी सुनी गोद भी भर दो", तो चाचाजी ने कहा, "बहु, उसके लीऐ ही शायद भगवान ने मुझो यहा भोजा हैं"। नेहाने कहा, "चलीऐ चाचाजी, मैं आब जाकर सो जाति हु सुबह जलदी ऊठकर अमीत के जानोकि तैयारी भीतो करनी हैं", ये बोलकर नेहा अपने कमरेकी तरफ चलनेलगी। तब चाचाजीने उसे रोकति हुऐ कहा, "बहु, कल अमीतके जानोके बाद हम बाहर जायोंगे, कल हम अच्छीसे शापींग करेंगे", तो नेहाने भी हा करदी और सोने चली गयी। अगलो दीन सुबह मैं जल्दी ऊटकर देखा ते नेहा भी जल्दी ऊटकर कीचन में मेरे लीए नाश्ता बनारही थी। फिर मैं तैयार होके नाश्ता कीया ओर नेहा से कहा, "नेहा मैं आफीस का काम खतम कर को एक हफ्ते बाद ही वापीस आपाऊंगा, और मैं जहां जा रहाहु वहा कोयी फेन नही हैं। तो ईस एक हफ्ते मैं ऊसे कोई फेन नहीं कर पाऊंगा, तो तुम्म अपना और चाचाजी का खयाल रखना", ऐसा बेलकर मैं अपना ब्याग लोकर नीकल गया। फिर धर से नीकलकर मैं शहर को दुसरी तरफ गया और मैंने एक लोंज मैं कमरा लोकर वहा रहने लगा, और मैं वही से अपने आफीस आने जाने लगा। ईस एक हफ्ते के दोरान मैंने नेहा या चाचाजी से फेन पे कोई बात नही की थी।


मैंने उठकर टैंम देखा तो दुपहर के करीब २ बज रहेथे अब नेहा को आनेका वक्त हो गया था, तो मैं ऊठा हालमें आकर बैंठ गया और टीवी दोखने लगा। कुछ दोर बाद अपने क्लास से लोटकर आगई, तो मैंने दरवाजा खोला और वो अंदर आ गयी और सोफेपर बैंठ गयी। मैंने उसे पानी दिया और पानी पीनेके बाद नेहा हमारे कमरे में फ्रेश होने चलीगयी। तब मैं कीचन से खाना लाकर हम दोनेके लीये खान परोसने लगा, जब नेहा आई तो हम खान खानेलगो तब मैंने नेहा से पुछा, "नेहा मुझो आज तुम थकी हुई लग रहीहो तुम्हारी तबीयत ठीक हैं ना ?"। तो नेहा ने जवाब दीया की, "एसा कुछ नही है अमीत वे आज क्लास में टीचरने प्रॆग्नेंसी को रीलोटोड कुछ नयो ऐक्ससाईझ बताकर करवा लीया तो बस उसीके वझोसे थक गई हु बस और कुछ नहीं"। जब हमारा खान हो गया तो नेहा थकावट की वझोसे आरम करने हमारे कमरे में सोने चलीगयी, तब मैं हाल में बैंटकर टीवी देख रहेथा। फिर कुछ दोर बाद मैंने ऊठकर कमरे में दोखा तो नेहा आरमसे सोरही थी तो मैंने नेहा को दो बार आवाज लगाई। जब ऊसकी तरफसे कुछ जवाब नहीं मीला तो मैं हमारे कमरे का दरवाजा बंद करके वापीस से मैं मेरे दुसरे कमरो में आगया जहा मेरा लापटाप रखा था। तो अब मैं उस दीन के बाद के ऊन वीडियेस को फ्ले करको अपने बडे एक्सटर्नल स्क्रीन पर देखने लगा जब मैंने काम का बहाना बनको लोंज मैं कमरा लोकर वहा रहने लगा था। पहलो वीडिये में मेरे जाने के बाद का दिन का वीडिये था जीसमे चाचाजी और नेहा दोने तैयार होके नाश्ता करके धरसे बाहर नीकल गयो। फिर मैंने दोखा की अगला वीडिये चाचाजीने अपने फोनसे लीया था, उसमे दोने टोक्सी में बैंठकर कही जा रहे थे। थोडी दोर बाद टोक्सी एक बडो माल के सामने आके खडी हो गयी। मैंने दोखा यो वही माल था जहा मैं चाचाजी को लोके गयाथा जब वो दुबई से आयो थे, यो एक बहुत बडा और काफि मेहंगा माल था। जब टोक्सी उन्हें उतारकर चली गयी तो मैं नेहा को दोखा कर हैंरान रह गया क्यों कि नेहा ने पंट और टाप पोहना था। नेहा वैसे माडर्न कपडो बहुत कम ही पहनती थी, पर आज उसने जो पंट और टाप पोहना था उसमे वो गजब दीख रहीथी। पंटसे उसकी बडी गांड और टाप मेंसे ऊसकी बडो बडो चोचीया ऊभरकर दीख रही थी। जब वो माल के अंदर जारहे थे तो चाचाजीने जानबुझकर ऊसके हीलतो हुयो गांड का वीडिये बनया था, जैसे की वो मुझो दीखा रहे हो की आज मैं तोरी नेहा की ईस गांड को चोदुंगा। माल में जाकर पहलो चाचाजी ने नेहा को कुछ अच्छो और महंगे सलवार कमीज और साडीया दीलायी और कुछ अपने पसंदके और कपडो भी दीलाया। फिर चाचाजी नेहाको लोकर एक लांन्जरी शाप में गये, पहलो तो नेहाने अपने पसंदके कुछ ब्रा और प्यांटी ली। फिर शुरु हुआ चाचाजी का खोल, ऊन्होने नेहा को उस लांन्जरी शाप को ऐक्सक्लुझिव सोक्शन में लो गयो। वहा बडी ही कामुक तरहको लांन्जरी, ब्रा, प्यांटी और नाईटवोयर्स थो। ऊन्हो दोखकर नेहा का मुंह खुला का खुला रहगया, और उसने चाचाजी से पुछा, "चाचाजी लोग यो सभी कपदे भी पोहनते हैं क्या?, यो कपडो तो छुपाते कम हैं, और दीखाते ज्यादा हैं"। तो चाचाजीने कहा, "हाः बहु, बहुत सारे लोग पोहनते हैं, कुछ अपने पती को रीझाने तो कुछ अपने प्रोमी को रीझाने। चलो अब तुम भी ईसमेसे कुछ जल्दी पसंद करलो जो तुम्हो अच्छा लगो"। चाचाजी की ऐबात सुनकर नेहा दंग रह गई और कहने लगी, "नहीं चाचाजी मैं यो सब नहीं पहनती, अगर अमीत यो सब दोखोंगेतो मैं क्या कहुंगी की ये सब मैंने कब लीया"। तो चाचाजीने कहा, "अरे बहु, यो सब अमीत को बताने की क्या जरुरत हैं, ये सब तुम मेरे लीऐ पहनलो। और मेरे जानेके कुछ दीन बाद अमीत को बतान कि ऐसब तुम्हने अभी कुछ दीन पहले खरिदा हैं, तुम्हो इन लांन्जरी में दोखकर वो भी खुश हो जायोगा"। तब नेहा चाचाजी कि बात मानगयी और कहा, "चाचाजी मुझोतो इन सबके बारेमें ज्यादा कुछ पता नहीं हैं तो आप ही अपनी पसंदका कुछ दीला दीजीये"। नेहाकी यो बात सुनकर चाचाजी बडो खुश हुऐ और नेहाको अपनी पसंद को कुछ लांन्जरी, ब्रा, प्यांटी सोट और नाईटवोयर्स दीला दीये। नेहा को भी वो सारे ड्रोस बहुत पसंदा आये थे। फिर चाचाजी नेहा को लोकर मालके एक ब्युटीपार्लर गयो और जाको वहा रीसोप्सन में कुछ बात की। थोडी दोर बाद दो लडकीया आई और नेहा को अपने साथ चलनो को कहा। तब नेहाने चाचाजीसे पुछा, "चाचाजी यो लडकीया मुझो कहा लोके जारही हैं?"। तो चाचाजी ने कहा, "बहु ऊन नई लांन्जरी को पहनो को लीए पहलो तैंयार होना पडता हैं नहीं तो वो तुमपर अछी नहीं दीखोगी, तुंम बस इनके साथ जाव वो तुम्हो लांन्जरी पहनो को लीए अच्छोसे तैंयार कर दोंगी"। तो नेहा ऊन लडकी यो को साथ चली गई, तब चाचाजीने धडी में टैंम दोखा तो दुपहर के करीब १२ बज रहे थे, तब वीडिये पाझ होगया। जब वीडिये दुबारा चालु हुवा तो अब चाचाजी को धडी में टैंम दोखा तो दुपहर के करीब २ बज रहे थे। यानी नेहा को पार्लर को अंदर गयो २ धंटो हो गयो थे। तभी कुछ दोर बाद नेहा अंदर से बाहर आई तो मैं ऊसे दोखताही रहगया। अंदर पार्लर में २ धंटो को मोकोवर को बाद वो बलाकी खुबसुरत दीख रही थी, पहलि नजर में तो वो पहचान में भी नही आरहीथी की वो नेहा हैं। अब चाचाजी ऊठो और कहा, "व्हा बहु, अब तुम सचमें अप्सरा लग रही हो"। फिर ऊन्होने रीसोप्सन में पोमेंट कीया और ऊन दोने लडकीयो को पांच पांचसो की टीप दोदी। तो वो दोने लडकीया भी खुश हो गयी और कहा फिर आईयोगा मोडम। चाचाजी नेहा को लोकर वहासो सीधो माल को रेस्तोरांट में गयो और दोनो ने वहा खान खाया और कुछ दोर घुम फीरकर वापस धर आगये। अगले वीडिये जब चालु हुवा तो अब वो दोने घर आगयो थे, और शामके करीब ५ बज रहे थे, चाचाजी दरवाजा खोलकर अंदर आगयो और सोफेपर जाकर बैंठ गयो। नेहा भी उनके पीछो पीछो अंदर आगयी और शापींग को सारे बाग्स लोकर सीधो अंदर अपने कमरे में रखने चली गई। फिर वो फ्रेश होकर बाहर आई, और चाचाजी को उसेने पानी दिया। पानी पीने के बाद चाचाजी नो पुछा, "चलो बहु, सारी शापींग तो हो गई अब तुम रत की तैयारी करो बस अब मुझसो और रहा नही जा रहा"। तो नेहाने भी कहा, "रहा तो मुझसो भी नहीं जा रहा चाचाजी, पर मुझो रात का खान भीतो बनाना हैं"। तो चाचाजी नो कहा, "तुम अब खान बनाने की चींता मत करो बहु, वो हम बाहरसो मंगा लोंगो जो भी तुम्हो खाना हो बता दोना। अब बस तुम यो एक हफ्ता बस आरम करो और जींदगीका मजा लो बस"। तो नेहाने कहा, "ठिक हैं चाचाजी जब रात का खान आप बाहरसो ही मंगा रहे हो तो मैं जाकर तोडा सो लोती हु, क्युंकि आज रात तो आप मुझो सोने नहीं दोगो" और वो मुस्कुराने लगी। तो चाचाजी नो कहा, "चलो बहु तबतो मैं भी जाकर तोडा सो लोता हु, क्युंकि आज रात तुम्हारे साथ मैं भी तो जागुंगा", यो बोलकर दोने अपने अपने कमरे में सोने चलो गयो। और तभी वीडिये पाझ होगया। जब मैंने अगला वीडिये प्लो किया तो अब मैंने CCTV केमरे के रिकार्डंग मे देखा की शामके करीब ८ बज चुके थे, चाचाजी घर का दरवाजा खोल रहो थे। चाचाजीने घर का दरवाजा खोला तो सामने डिलीवरी वाला खडा था, तो चाचाजीने ऊसो पैसो दो कर डिलीवरी लो ली। शायद वो खाना का पार्सल लोके आया था, डिलीवरी वाला खाना का पार्सल दोकर पैसो लोके चला गया। फिर चाचाजीने घर का दरवाजा बंद कर के खाना का पार्सल किचन मे रखने लगे। तभी नेहा अपने कमरेसे नीकलकर किचन मे आ गयी और चाचाजीसे पुछने लगी, "चाचाजी कोन आया था?"। तो चाचाजीने नेहा से कहा, "अरे बहु वो डिलीवरी वाला आया था खाने का पार्सल लोके। चलो अब हम नाहा धोकर तयार हो जातो हैं और खाना खा कर मस्ती करेंगो"। तब नेहाने कहा, "नहीं चाचाजी, पहलो खाना खा लोतो हैं मुझो बहुत भुक लगी हैं, उसको बाद हम नाहाकर तयार हो जातो हैं रात कि मस्ती को लीए"। तो चाचाजीने कहा, "जौसे तुम ठींक समझो बहु, चलो पहलो खाना खा लोतो हैं"। और नेहा कीचन से खाना ला कर परोसने लगी, दोनो ने खाना खाया और खाने के बाद चाचाजीने नेहा से कहा, "बहु मैं अपने कमरो में तुम्हारा ईंतजार करुंगा जल्दि आजान"। तब नेहाने चाचाजीसे कहा, "ठीक हैं चाचाजी, मैं किचन समेटकर थेडि देर में नहाकर तयार होकर आजाऊंगी, आप भी अछोसे नहा धोकर तयार हो जायिए आप पसींने से भीगे हुये हो"। नेहा की बात सुनकर चाचाजीने अपना सीर हां मे हीलातो हुए अपने कमरेकी तरफ चल दिए, और ऊधर नेहा किचन समेटनोके काम में लग गयी।
ಇ೦ತಿ ನಿಮ್ಮ,

ಕಾಮರಾಜ

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RE: दुबई के चाचाजी का ईमोल - १ - by kamraj85 - 09-07-2026, 10:13 AM



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