08-07-2026, 03:17 PM
नीरू की गंदी नाक मेरे मुँह में...
नीरू जोर से हँसा। उसकी हँसी में शरारत और हवास दोनों थे। वो थोड़ा ऊपर आया और अपने पूरे शरीर का भार मेरे नंगे, गोरे जिस्म पर डाल दिया। उसने अपने गर्म, गीले होंठों को मेरे होंठों पर रखकर जोरदार किस किया। उसके होंठ अभी भी मेरी चूत के रस से चिपचिपे थे। मैत्री रचित कहानी।
फिर उसने अपनी वो मोटी, काली नाक, जो अभी भी मेरी चूत के पारदर्शी रस से चमक रही थी, मेरे होंठों पर रगड़ दी।
"इस पानी को चाट लो मैडम जी..." उसने भारी, कामुक आवाज में कहा।
मैंने उसकी आँखों में झाँका। उसकी आँखें पागलपन से भरी हुई थीं। उसने अपनी नाक को मेरे दोनों होंठों के बीच धीरे-धीरे घुसा दिया। नीरू आधा मेरे ऊपर लेटा हुआ था। उसका काला, गंदा, पसीने से तर-बतर सीना मेरी नंगी, गोरी-गोरी चूचियों पर पूरी तरह दबा हुआ था। मेरी मुलायम, मक्खन जैसी छातियाँ उसके काले, रोंयेदार सीने के नीचे दबी हुई थीं। उसकी गंदी, मोटी नाक मेरे होंठों के बीच में फँसी हुई थी।
मैंने अनिच्छा के बावजूद हल्का-सा उसके नाक को चूमा।
लेकिन नीरू ने नाक हटाने की बजाय और जोर से आगे दबा दी।
"मैडम जी... थोड़ा मुँह खोलो ना..."
जैसे ही मैं कुछ बोलने के लिए मुँह खोली, नीरू ने अपनी नाक को और गहराई तक मेरे मुँह के अंदर ठेल दिया। उसकी नाक पर लगा मेरा ही चूत का रस एक बार फिर मेरी जीभ पर फैल गया। उसके नथुनों के बीच मेरे होंठ फँसे हुए थे। वो नाक से साँस लेते हुए अपनी गंदी, गरम हवा सीधे मेरे मुँह के अंदर भर रहा था। संपादिका फनलवर है।
मुझे खुद नहीं पता क्या हो गया। मैंने धीरे-धीरे अपने होंठों को उसकी नाक के चारों ओर कसकर बंद कर लिया और धीरे-धीरे चूसने लगी। मेरा ऊपरी होंठ उसकी मोटी काली नाक की हड्डी पर था, नीचे वाला होंठ उसके नथुनों पर। मेरे हाथ उठे और मैंने अपनी नर्म, गोरी, मक्खन जैसी बाहें उसके गंदे काले जिस्म के चारों ओर डाल दीं। उसे और भी जोर से अपने सीने से, अपनी चूचियों से भींच लिया।
नीचे से उसकी गंदी लुंगी के अंदर उसका मोटा, काला लंड खड़ा होकर मेरी नंगी, भीगी चूत से टकरा रहा था। जैसे ही उसका लंड मेरी चूत की फांकों को छुआ, नीरू ने झटके से उसे मेरी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया।
मैं और भी गर्म हो गई।
मेरी जीभ उसकी नाक की हड्डी को चाटने लगी। कभी उसके नथुनों की बाहर वाली चमड़ी को, कभी अंदर की नरम जगह को। अचानक मस्ती में मेरी जीभ उसकी नाक के अंदर चली गई। जैसे ही मेरी जीभ की नोक उसके नथुने के अंदर घुसी, मुझे उसका गंदा, नम, थोड़ा-बहुत सूखा मवाद महसूस हुआ। मैंने फौरन जीभ बाहर निकाल ली।
नीरू ने उत्तेजना से भरकर अपना लंड मेरी चूत पर और जोर से दबाते हुए कहा,
"ऐसे ही करो मैडम जी... प्लीज... बहुत अच्छा लग रहा है..."
मैंने बिना कुछ सोचे फिर से अपनी जीभ उसके नथुनों के इर्द-गिर्द घुमाई। उसके नाक के बाल मेरी जीभ से टकराए। फिर मैंने अपनी जीभ को उसके नथुने के अंदर घुसा दिया। बस थोड़ी ही देर के लिए। अंदर गंदा, चिपचिपा, थोड़ा सूखा सा मवाद मेरी जीभ पर लगा। मैंने एक तरफ से जीभ निकाली, दूसरी तरफ घुसाई। दोनों नथुनों में घुसा-घुसाकर उसकी नाक को अच्छी तरह चाटा। मैत्री का प्रयास।
नीरू के शरीर में झुरझुरी दौड़ रही थी। उसका लंड लुंगी के अंदर से मेरी चूत को तेजी से रगड़ रहा था। मेरी चूचियाँ उसके सीने से दबकर चपटी हो रही थीं। कमरे में सिर्फ हमारी साँसों की आवाजें, चिपचिपाहट और चूसने की आवाजें गूँज रही थीं।
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यही तक दोस्तों।
Maitri की तरफ से जय भारत।।
नीरू जोर से हँसा। उसकी हँसी में शरारत और हवास दोनों थे। वो थोड़ा ऊपर आया और अपने पूरे शरीर का भार मेरे नंगे, गोरे जिस्म पर डाल दिया। उसने अपने गर्म, गीले होंठों को मेरे होंठों पर रखकर जोरदार किस किया। उसके होंठ अभी भी मेरी चूत के रस से चिपचिपे थे। मैत्री रचित कहानी।
फिर उसने अपनी वो मोटी, काली नाक, जो अभी भी मेरी चूत के पारदर्शी रस से चमक रही थी, मेरे होंठों पर रगड़ दी।
"इस पानी को चाट लो मैडम जी..." उसने भारी, कामुक आवाज में कहा।
मैंने उसकी आँखों में झाँका। उसकी आँखें पागलपन से भरी हुई थीं। उसने अपनी नाक को मेरे दोनों होंठों के बीच धीरे-धीरे घुसा दिया। नीरू आधा मेरे ऊपर लेटा हुआ था। उसका काला, गंदा, पसीने से तर-बतर सीना मेरी नंगी, गोरी-गोरी चूचियों पर पूरी तरह दबा हुआ था। मेरी मुलायम, मक्खन जैसी छातियाँ उसके काले, रोंयेदार सीने के नीचे दबी हुई थीं। उसकी गंदी, मोटी नाक मेरे होंठों के बीच में फँसी हुई थी।
मैंने अनिच्छा के बावजूद हल्का-सा उसके नाक को चूमा।
लेकिन नीरू ने नाक हटाने की बजाय और जोर से आगे दबा दी।
"मैडम जी... थोड़ा मुँह खोलो ना..."
जैसे ही मैं कुछ बोलने के लिए मुँह खोली, नीरू ने अपनी नाक को और गहराई तक मेरे मुँह के अंदर ठेल दिया। उसकी नाक पर लगा मेरा ही चूत का रस एक बार फिर मेरी जीभ पर फैल गया। उसके नथुनों के बीच मेरे होंठ फँसे हुए थे। वो नाक से साँस लेते हुए अपनी गंदी, गरम हवा सीधे मेरे मुँह के अंदर भर रहा था। संपादिका फनलवर है।
मुझे खुद नहीं पता क्या हो गया। मैंने धीरे-धीरे अपने होंठों को उसकी नाक के चारों ओर कसकर बंद कर लिया और धीरे-धीरे चूसने लगी। मेरा ऊपरी होंठ उसकी मोटी काली नाक की हड्डी पर था, नीचे वाला होंठ उसके नथुनों पर। मेरे हाथ उठे और मैंने अपनी नर्म, गोरी, मक्खन जैसी बाहें उसके गंदे काले जिस्म के चारों ओर डाल दीं। उसे और भी जोर से अपने सीने से, अपनी चूचियों से भींच लिया।
नीचे से उसकी गंदी लुंगी के अंदर उसका मोटा, काला लंड खड़ा होकर मेरी नंगी, भीगी चूत से टकरा रहा था। जैसे ही उसका लंड मेरी चूत की फांकों को छुआ, नीरू ने झटके से उसे मेरी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया।
मैं और भी गर्म हो गई।
मेरी जीभ उसकी नाक की हड्डी को चाटने लगी। कभी उसके नथुनों की बाहर वाली चमड़ी को, कभी अंदर की नरम जगह को। अचानक मस्ती में मेरी जीभ उसकी नाक के अंदर चली गई। जैसे ही मेरी जीभ की नोक उसके नथुने के अंदर घुसी, मुझे उसका गंदा, नम, थोड़ा-बहुत सूखा मवाद महसूस हुआ। मैंने फौरन जीभ बाहर निकाल ली।
नीरू ने उत्तेजना से भरकर अपना लंड मेरी चूत पर और जोर से दबाते हुए कहा,
"ऐसे ही करो मैडम जी... प्लीज... बहुत अच्छा लग रहा है..."
मैंने बिना कुछ सोचे फिर से अपनी जीभ उसके नथुनों के इर्द-गिर्द घुमाई। उसके नाक के बाल मेरी जीभ से टकराए। फिर मैंने अपनी जीभ को उसके नथुने के अंदर घुसा दिया। बस थोड़ी ही देर के लिए। अंदर गंदा, चिपचिपा, थोड़ा सूखा सा मवाद मेरी जीभ पर लगा। मैंने एक तरफ से जीभ निकाली, दूसरी तरफ घुसाई। दोनों नथुनों में घुसा-घुसाकर उसकी नाक को अच्छी तरह चाटा। मैत्री का प्रयास।
नीरू के शरीर में झुरझुरी दौड़ रही थी। उसका लंड लुंगी के अंदर से मेरी चूत को तेजी से रगड़ रहा था। मेरी चूचियाँ उसके सीने से दबकर चपटी हो रही थीं। कमरे में सिर्फ हमारी साँसों की आवाजें, चिपचिपाहट और चूसने की आवाजें गूँज रही थीं।
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यही तक दोस्तों।
Maitri की तरफ से जय भारत।।



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