08-07-2026, 03:14 PM
नीरू ने मेरी चूत और गाँड को देखते हुए गहरी साँस ली और बोला,
“मैडमजी… आपकी चूत और गाँड दोनों का ही कोई जवाब नहीं है। कसम से दिल करता है कि बस आपकी इस गुलाबी-गुलाबी चूत में लंड डालकर आपको चोदता ही रहूँ। दिन-रात, सुबह-शाम… बस आपकी इस मुलायम, गीली और प्यारी चूत को अपने मोटे काले लंड से भरता रहूँ।” मैत्री रचित कहानी।
उसकी बात सुनकर मेरे गाल लाल हो गए। मैं मुस्कुराई और शरारत भरे अंदाज़ में बोली,
“और अगर तुम्हारे साहब को पता चल गया तो? वो आ गए तो क्या करोगे?”
नीरू ने एक उदासी सा चेहरा बनाया और बोला,
“मैडमजी… बस उन्हीं का तो डर है वरना मैं आपको अपने घर में ही ले जाऊँ। वहाँ आपको आराम से चोदता, आपकी चूत और गाँड दोनों को अपना बना लेता।”
यह कहते हुए नीरू ने अपनी मोटी काली उँगली को मेरी गाँड के अंदर और गहराई तक धकेल दिया। आधी से ज़्यादा उँगली मेरी टाइट गाँड के अंदर चली गई। मैं सिहर उठी। दर्द के साथ-साथ एक अजीब सा मज़ा भी होने लगा। नीरू ने कुछ देर तक उँगली को वहीं रोके रखा, फिर धीरे-धीरे उसे अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। फनलवर द्वारा संपादित।
दूसरी मोटी उँगली उसकी मेरी चूत में अंदर-बाहर हो रही थी। दोनों छेदों में एक साथ उसकी उँगलियों का खेल चल रहा था। मेरे दोनों छेद अब चुदवा रहे थे और मुझे एक नए अहसास का आनंद दे रहे थे। मेरी चूत से पानी की धार बहने लगी थी। मैं मज़े से तड़प रही थी। मेरी साँसें तेज़ हो गई थीं।
“आह्ह्ह्ह्ह… नीरू… क्या कर रहे हो तुम…”
मेरी चूत के मसल्स उसकी उँगलियों के चारों तरफ़ सिकुड़ने लगे। गाँड भी तन गई थी। अचानक मेरे पूरे जिस्म ने ज़ोर-ज़ोर से झटके लिए। मेरी चूत और गाँड दोनों के मसल्स नीरू की उँगलियों को कसकर भींचने लगे। मैं अपनी मंज़िल पर पहुँच गई।
“sssssssssssssssssssssssss… ooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhh…
मेरी चूत और गांड के मसल्स नीरू के उंगलियों के गिर्द सुकडने लगे और मैं ने उसकी उंगलियों को भींच लिया और मैं अपनी मंजिल पर पोहंच गई।
नीरू ने कुछ देर तक मेरे जिस्म को ठंडा होने दिया और फिर मेरी चूत के ऊपर मुँह रख कर मेरी चूत में से निकली हुई पानी को चाटने लगा। मेरी चूत में से पानी निकल कर मेरी गांड के सुरख पर भी जा रहा था। मेरी गांड का छेड़ अब थोडा सा ओर खुल गया था। मेरी चूत का बहता हुआ पानी अब मेरी गांड को सींच रहा था। प्रस्तुतकर्ता मैत्री।
मैं वही पर लेटी हुई थी, मेरी टांगें चौड़ी फैली हुईं। मेरी चूत पहले ही हवास की आग में इतनी गीली हो चुकी थी कि उसका रस लगातार बह रहा था, चादर को भीगो रहा था। नीरू मेरे पैरों के बीच घुटनों के बल बैठा था। उसकी आँखों में जानवर जैसी भूख थी।
उसने अपना चेहरा मेरी चूत के बिल्कुल करीब ले जाकर पहले अपनी गरम साँसों से मेरी फूली हुई, गुलाबी चूत की फांकों को सहलाया। फिर उसने अपने मोटे, नरम होंठों को मेरी चूत की दोनों फांकों पर रगड़ना शुरू कर दिया।
धीरे-धीरे, जैसे कोई प्यासा अपनी प्यारी चीज को चूम रहा हो।
फिर उसने अपनी नाक को मेरी चूत की उस गहरी, सुरख लाल दरार पर रख दिया।
"अम्म्म्म..." मैं सिहर उठी।
नीरू ने अपनी मोटी, काली पकौड़ी जैसी नाक को धीरे से मेरी चूत के अंदर घुसाने की कोशिश की। गीली चूत की दीवारें उसकी नाक को चिपकते हुए अंदर लेने लगीं। उसकी नाक का ऊपरी हिस्सा मेरी चूत के अंदर चला गया। मैंने अपने बाल पकड़कर सिर ऊपर उठाया और नीचे देखने लगी।
वो दृश्य बेहद अश्लील और उत्तेजक था। लेखिका मैत्री है।
नीरू की नाक मेरी चूत के अंदर आधी तक घुसी हुई थी। उसकी नाक की नोंक मेरी चूत की अंदरूनी दीवारों को छू रही थी। मैं महसूस कर रही थी कि उसकी नाक के बाल मेरी चूत की नरम मांसल दीवारों को छू-छूकर गुदगुदा रहे हैं। इतनी देर तक चुदाई की भूख, हवास की आग और लगातार पानी बहने के बाद आखिर कुछ तो मेरी खाली चूत के अंदर घुसा था। ये अजीब सा, लेकिन बेहद मजेदार एहसास था।
नीरू ने आँखें बंद करके गहरी साँस ली। वो मेरी चूत की (सु)गंध को अपने फेफड़ों में भर रहा था, वो खट्टी-मीठी, कामोद्दीपक महक जो सिर्फ मेरी चूत से निकलती थी। उसकी साँसें तेज हो गईं।
कुछ देर बाद जब उसने अपनी नाक बाहर निकाली, तो मेरा चूत का रस उसके पूरे चेहरे पर फैला हुआ था। उसकी मोटी नाक चमक रही थी, मेरे पारदर्शी, चिपचिपे रस से पूरी तरह भीगी हुई। उसके दोनों नथुनों से मेरी चूत का पानी टपक रहा था। नाक के ऊपर के घने काले बाल भी मेरे रस से लथपथ हो चुके थे, चिपके हुए थे।
नीरू ने अपनी जीभ बाहर निकालकर होंठ चाटे, फिर मेरी तरफ देखकर शरारती मुस्कान बिखेरी।
मैं भी मुस्कुराते हुए, शर्म और हवास से लाल चेहरे के साथ बोली,
"पागल... कितना गंदा है तू..." मैत्री की रचना।
मेरी आवाज में शिकायत नहीं, बल्कि और ज्यादा उकसावा था।
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जुड़े रहिये दोस्तों.................
क्रमश:
Maitri Patel.
“मैडमजी… आपकी चूत और गाँड दोनों का ही कोई जवाब नहीं है। कसम से दिल करता है कि बस आपकी इस गुलाबी-गुलाबी चूत में लंड डालकर आपको चोदता ही रहूँ। दिन-रात, सुबह-शाम… बस आपकी इस मुलायम, गीली और प्यारी चूत को अपने मोटे काले लंड से भरता रहूँ।” मैत्री रचित कहानी।
उसकी बात सुनकर मेरे गाल लाल हो गए। मैं मुस्कुराई और शरारत भरे अंदाज़ में बोली,
“और अगर तुम्हारे साहब को पता चल गया तो? वो आ गए तो क्या करोगे?”
नीरू ने एक उदासी सा चेहरा बनाया और बोला,
“मैडमजी… बस उन्हीं का तो डर है वरना मैं आपको अपने घर में ही ले जाऊँ। वहाँ आपको आराम से चोदता, आपकी चूत और गाँड दोनों को अपना बना लेता।”
यह कहते हुए नीरू ने अपनी मोटी काली उँगली को मेरी गाँड के अंदर और गहराई तक धकेल दिया। आधी से ज़्यादा उँगली मेरी टाइट गाँड के अंदर चली गई। मैं सिहर उठी। दर्द के साथ-साथ एक अजीब सा मज़ा भी होने लगा। नीरू ने कुछ देर तक उँगली को वहीं रोके रखा, फिर धीरे-धीरे उसे अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। फनलवर द्वारा संपादित।
दूसरी मोटी उँगली उसकी मेरी चूत में अंदर-बाहर हो रही थी। दोनों छेदों में एक साथ उसकी उँगलियों का खेल चल रहा था। मेरे दोनों छेद अब चुदवा रहे थे और मुझे एक नए अहसास का आनंद दे रहे थे। मेरी चूत से पानी की धार बहने लगी थी। मैं मज़े से तड़प रही थी। मेरी साँसें तेज़ हो गई थीं।
“आह्ह्ह्ह्ह… नीरू… क्या कर रहे हो तुम…”
मेरी चूत के मसल्स उसकी उँगलियों के चारों तरफ़ सिकुड़ने लगे। गाँड भी तन गई थी। अचानक मेरे पूरे जिस्म ने ज़ोर-ज़ोर से झटके लिए। मेरी चूत और गाँड दोनों के मसल्स नीरू की उँगलियों को कसकर भींचने लगे। मैं अपनी मंज़िल पर पहुँच गई।
“sssssssssssssssssssssssss… ooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhh…
मेरी चूत और गांड के मसल्स नीरू के उंगलियों के गिर्द सुकडने लगे और मैं ने उसकी उंगलियों को भींच लिया और मैं अपनी मंजिल पर पोहंच गई।
नीरू ने कुछ देर तक मेरे जिस्म को ठंडा होने दिया और फिर मेरी चूत के ऊपर मुँह रख कर मेरी चूत में से निकली हुई पानी को चाटने लगा। मेरी चूत में से पानी निकल कर मेरी गांड के सुरख पर भी जा रहा था। मेरी गांड का छेड़ अब थोडा सा ओर खुल गया था। मेरी चूत का बहता हुआ पानी अब मेरी गांड को सींच रहा था। प्रस्तुतकर्ता मैत्री।
मैं वही पर लेटी हुई थी, मेरी टांगें चौड़ी फैली हुईं। मेरी चूत पहले ही हवास की आग में इतनी गीली हो चुकी थी कि उसका रस लगातार बह रहा था, चादर को भीगो रहा था। नीरू मेरे पैरों के बीच घुटनों के बल बैठा था। उसकी आँखों में जानवर जैसी भूख थी।
उसने अपना चेहरा मेरी चूत के बिल्कुल करीब ले जाकर पहले अपनी गरम साँसों से मेरी फूली हुई, गुलाबी चूत की फांकों को सहलाया। फिर उसने अपने मोटे, नरम होंठों को मेरी चूत की दोनों फांकों पर रगड़ना शुरू कर दिया।
धीरे-धीरे, जैसे कोई प्यासा अपनी प्यारी चीज को चूम रहा हो।
फिर उसने अपनी नाक को मेरी चूत की उस गहरी, सुरख लाल दरार पर रख दिया।
"अम्म्म्म..." मैं सिहर उठी।
नीरू ने अपनी मोटी, काली पकौड़ी जैसी नाक को धीरे से मेरी चूत के अंदर घुसाने की कोशिश की। गीली चूत की दीवारें उसकी नाक को चिपकते हुए अंदर लेने लगीं। उसकी नाक का ऊपरी हिस्सा मेरी चूत के अंदर चला गया। मैंने अपने बाल पकड़कर सिर ऊपर उठाया और नीचे देखने लगी।
वो दृश्य बेहद अश्लील और उत्तेजक था। लेखिका मैत्री है।
नीरू की नाक मेरी चूत के अंदर आधी तक घुसी हुई थी। उसकी नाक की नोंक मेरी चूत की अंदरूनी दीवारों को छू रही थी। मैं महसूस कर रही थी कि उसकी नाक के बाल मेरी चूत की नरम मांसल दीवारों को छू-छूकर गुदगुदा रहे हैं। इतनी देर तक चुदाई की भूख, हवास की आग और लगातार पानी बहने के बाद आखिर कुछ तो मेरी खाली चूत के अंदर घुसा था। ये अजीब सा, लेकिन बेहद मजेदार एहसास था।
नीरू ने आँखें बंद करके गहरी साँस ली। वो मेरी चूत की (सु)गंध को अपने फेफड़ों में भर रहा था, वो खट्टी-मीठी, कामोद्दीपक महक जो सिर्फ मेरी चूत से निकलती थी। उसकी साँसें तेज हो गईं।
कुछ देर बाद जब उसने अपनी नाक बाहर निकाली, तो मेरा चूत का रस उसके पूरे चेहरे पर फैला हुआ था। उसकी मोटी नाक चमक रही थी, मेरे पारदर्शी, चिपचिपे रस से पूरी तरह भीगी हुई। उसके दोनों नथुनों से मेरी चूत का पानी टपक रहा था। नाक के ऊपर के घने काले बाल भी मेरे रस से लथपथ हो चुके थे, चिपके हुए थे।
नीरू ने अपनी जीभ बाहर निकालकर होंठ चाटे, फिर मेरी तरफ देखकर शरारती मुस्कान बिखेरी।
मैं भी मुस्कुराते हुए, शर्म और हवास से लाल चेहरे के साथ बोली,
"पागल... कितना गंदा है तू..." मैत्री की रचना।
मेरी आवाज में शिकायत नहीं, बल्कि और ज्यादा उकसावा था।
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Maitri Patel.



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