08-07-2026, 03:09 PM
नीरू ने जल्दी से अपने गंदे मोटे होंठ मेरी चूत के ऊपर रखा और एक किस कर ली। उसके गर्म-गर्म होंठ मेरी चूत पर लगे तो मैं जैसे उछल ही पड़ी।
नीरू ने धीरे-धीरे अपने होंठ मेरी चूत के फांके पर फिराने शुरू कर दिया। उसकी बढ़ी हुई शेव और मूनचैन जैसी ही मेरी नर्म-नर्म चूत पर रगड़ खाने लगी तो मुझे एक अजीब सा अहसास होने लगा। जिस मैं दर्द के साथ-साथ मजा भी था। मैत्री का प्रयास।
मेरी चूत पर अपने होंठ फिराते हुए नीरू ने अपनी जुबान मेरी चूत के सुराग में डाल दी और आहिस्ता-आहिस्ता मेरी चूत के अंदर अपनी जुबान को अंदर-बाहर कर के चोदने लगा। मेरा तो मजे से बुरा हाल हो रहा था। नीरू ने मेरी टांगो को और खींचा और मेरे घुटनों को मोड़ कर मेरी छातियो से लगा दिया।
अब मेरी चूत और गांड के सुराग नीरू की नज़रों के सामने था।
नीरू ने मेरी चूत को चाटा, अपनी जुबान मेरी गांड के लाईट-गुलाबी सुराग को देखा और अपनी उंगली से उसको छुआ तो मैं जैसे उछल ही पड़ी।
नीरू: “मैडमजी कितनी टाइट है आप की गांड का छेद। लगता है के साहबजी ने कभी आपकी गांड नहीं मारी।“
“बकवास ना करो नीरू, यहां भी कोई सेक्स करने का मजा है क्या?” मैंने हाथ बढ़ा कर उसके सर के ऊपर एक चपत मारती हुई कहा।
नीरू मेरी गांड के टाइट सुराग पर उंगली घुमाते हुए बोला;
“तो मैडमजी फिर आपको मजा क्यों आ रहा है जब मेरा यहां पर हाथ फेराने से।“
मेरे पास कहने को कुछ नहीं था। उसकी बात सही थी, जब भी उसकी ऊँगली मेरी गांड से छेड़-छानी करती थी मुझे एक अजीब सा आनंद मिल रहा था। ना चाहते हुए भी मुझे ऐसा फिल होता था की वह ज्यादा से ज्यादा मेरी गांड से प्रेम करे। फिर भी मैं चुप रही और अपनी आंखें बंद कर के उसकी उंगली के लम्स को अपनी गोरी-गोरी, मस्त गांड के टाइट गुलाबी सुराग पर फील करने लगी। मैत्री द्वारा लिखित रचना।
नीरू ने झुक कर मेरी चूत को अपनी जुबान से चाटना शुरू कर दिया और उसकी उंगली अब भी मेरी गांड से खेल रही थी। नीरू अपनी जुबान मेरी से मेरी क्लिट को रगड़ते हुए नीचे को जाने लगा और मेरी चूत के पतले से होंठों को अपने मुँह में ले कर चूसने लगा। मेरी गांड के छेद पर हरकत हुई, उसने उंगली मेरी चूत में डाली और उसको मेरी चूत के पानी से चिकना कर के मेरी गांड के छेद पर दोबारा फेराने लगा। गीले चिकने पानी की वजह से अब मुझे और भी मज़ा आ रहा था। मेरी गांड का सुराग अब आगे-पीछे हो रहा था या फिर मैं खुद ही अपनी मॉस पेशियों को हरकत में ले आई थी। मैंने गांड के मुंह को खोल-बंद किये जा रही थी। नतीजा यह हो रहा था की मेरी ही चूत का रस मेरी गांड में जा रहा था और गांड का मार्ग चिकना हो रहा था।
मेरी चूत को चाटते हुए नीरू ने आहिस्ता से अपनी मोटी काली उंगली मेरी गांड के सुराग पर प्रेस की और मेरी चूत के चिकने पानी की वजह से उसकी मोटी उंगली फिसल कर मेरी गांड के तंग दरवाजे में दखिल हो गई।
“Oooooooooooooooooooooo iiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii.............” मेरे मुंह से एक हलकी सी चीख निकल गई।
मगर नीरू ने अपनी उगली बाहर नहीं निकाली और ना उसे अंदर धकेला। बस जहां और जितनी उंगली उसकी थी उसने वहां रख दिया।
मेरी चूत के दाने को मसलता हुआ बोला; “मैडमजी बस कुछ नहीं होगा सिर्फ मेरी उंगली ही तो है कोन सा मैंने खुदका लंड डाल दिया है। देखना अभी आपको मजा आएगा, आप सिर्फ थोडा सा सहन करे फिर जन्नत आपकी हो जाएगी। आपकी ही गांड आपको जन्नत में ले जायेगी।“
मैं उसकी बात सुन कर चुप रही और नीरू ने मेरी चूत के अंदर जुबान डाल कर दोबारा मेरी चूत को चाटना और चोदना शुरू कर दिया। मेरी चूत के दोनो होंठ आपस में मिले हुए थे और बिल्कुल गुलाबी रंग के हैं और इतना प्यारा नजारा नीरू को पेश कर रहे थे। शायद मेरी चूत अब उसको आमत्रण दे रही थी की आ जा और मार मुझे। मैत्री की प्रस्तुति।
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जुड़े रहिये दोस्तों............
क्रमश:
Maitri.
नीरू ने धीरे-धीरे अपने होंठ मेरी चूत के फांके पर फिराने शुरू कर दिया। उसकी बढ़ी हुई शेव और मूनचैन जैसी ही मेरी नर्म-नर्म चूत पर रगड़ खाने लगी तो मुझे एक अजीब सा अहसास होने लगा। जिस मैं दर्द के साथ-साथ मजा भी था। मैत्री का प्रयास।
मेरी चूत पर अपने होंठ फिराते हुए नीरू ने अपनी जुबान मेरी चूत के सुराग में डाल दी और आहिस्ता-आहिस्ता मेरी चूत के अंदर अपनी जुबान को अंदर-बाहर कर के चोदने लगा। मेरा तो मजे से बुरा हाल हो रहा था। नीरू ने मेरी टांगो को और खींचा और मेरे घुटनों को मोड़ कर मेरी छातियो से लगा दिया।
अब मेरी चूत और गांड के सुराग नीरू की नज़रों के सामने था।
नीरू ने मेरी चूत को चाटा, अपनी जुबान मेरी गांड के लाईट-गुलाबी सुराग को देखा और अपनी उंगली से उसको छुआ तो मैं जैसे उछल ही पड़ी।
नीरू: “मैडमजी कितनी टाइट है आप की गांड का छेद। लगता है के साहबजी ने कभी आपकी गांड नहीं मारी।“
“बकवास ना करो नीरू, यहां भी कोई सेक्स करने का मजा है क्या?” मैंने हाथ बढ़ा कर उसके सर के ऊपर एक चपत मारती हुई कहा।
नीरू मेरी गांड के टाइट सुराग पर उंगली घुमाते हुए बोला;
“तो मैडमजी फिर आपको मजा क्यों आ रहा है जब मेरा यहां पर हाथ फेराने से।“
मेरे पास कहने को कुछ नहीं था। उसकी बात सही थी, जब भी उसकी ऊँगली मेरी गांड से छेड़-छानी करती थी मुझे एक अजीब सा आनंद मिल रहा था। ना चाहते हुए भी मुझे ऐसा फिल होता था की वह ज्यादा से ज्यादा मेरी गांड से प्रेम करे। फिर भी मैं चुप रही और अपनी आंखें बंद कर के उसकी उंगली के लम्स को अपनी गोरी-गोरी, मस्त गांड के टाइट गुलाबी सुराग पर फील करने लगी। मैत्री द्वारा लिखित रचना।
नीरू ने झुक कर मेरी चूत को अपनी जुबान से चाटना शुरू कर दिया और उसकी उंगली अब भी मेरी गांड से खेल रही थी। नीरू अपनी जुबान मेरी से मेरी क्लिट को रगड़ते हुए नीचे को जाने लगा और मेरी चूत के पतले से होंठों को अपने मुँह में ले कर चूसने लगा। मेरी गांड के छेद पर हरकत हुई, उसने उंगली मेरी चूत में डाली और उसको मेरी चूत के पानी से चिकना कर के मेरी गांड के छेद पर दोबारा फेराने लगा। गीले चिकने पानी की वजह से अब मुझे और भी मज़ा आ रहा था। मेरी गांड का सुराग अब आगे-पीछे हो रहा था या फिर मैं खुद ही अपनी मॉस पेशियों को हरकत में ले आई थी। मैंने गांड के मुंह को खोल-बंद किये जा रही थी। नतीजा यह हो रहा था की मेरी ही चूत का रस मेरी गांड में जा रहा था और गांड का मार्ग चिकना हो रहा था।
मेरी चूत को चाटते हुए नीरू ने आहिस्ता से अपनी मोटी काली उंगली मेरी गांड के सुराग पर प्रेस की और मेरी चूत के चिकने पानी की वजह से उसकी मोटी उंगली फिसल कर मेरी गांड के तंग दरवाजे में दखिल हो गई।
“Oooooooooooooooooooooo iiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii.............” मेरे मुंह से एक हलकी सी चीख निकल गई।
मगर नीरू ने अपनी उगली बाहर नहीं निकाली और ना उसे अंदर धकेला। बस जहां और जितनी उंगली उसकी थी उसने वहां रख दिया।
मेरी चूत के दाने को मसलता हुआ बोला; “मैडमजी बस कुछ नहीं होगा सिर्फ मेरी उंगली ही तो है कोन सा मैंने खुदका लंड डाल दिया है। देखना अभी आपको मजा आएगा, आप सिर्फ थोडा सा सहन करे फिर जन्नत आपकी हो जाएगी। आपकी ही गांड आपको जन्नत में ले जायेगी।“
मैं उसकी बात सुन कर चुप रही और नीरू ने मेरी चूत के अंदर जुबान डाल कर दोबारा मेरी चूत को चाटना और चोदना शुरू कर दिया। मेरी चूत के दोनो होंठ आपस में मिले हुए थे और बिल्कुल गुलाबी रंग के हैं और इतना प्यारा नजारा नीरू को पेश कर रहे थे। शायद मेरी चूत अब उसको आमत्रण दे रही थी की आ जा और मार मुझे। मैत्री की प्रस्तुति।
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जुड़े रहिये दोस्तों............
क्रमश:
Maitri.



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