07-07-2026, 02:42 PM
पूजा ने हाँफते हुए, शर्म और मजा के मिश्रण में जवाब दिया,
“सब… सब अच्छे लग रहे हैं बाबाजी… लेकिन यह वाला… बहुत… बहुत गर्म और डरावना भी है…” मैत्री द्वारा रचित कहानी।
पूजा ने शर्म और उत्तेजना से काँपते हुए कहा,
“जी बा… बाबाजी… वो… घुटनों के बल… पीठ से पीठ… नीचे से नीचे वाला…”
बाबा ने मुस्कुराते हुए कहा,
“चलो, अब मैं बैठता हूँ और तुम्हें सामने से मेरे कंधों पर बैठना है। मेरा सिर तुम्हारी टाँगों के बीच में होना चाहिए।”
बाबा धीरे-धीरे आगे बढ़े और आराम से बैठ गए। पूजा अब जानती थी कि बाबाजी कुछ और नया, और भी लुभावन (intimate) कर रहे हैं, लेकिन वह खुद भी आगे बढ़ना चाहती थी। उसकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी।
पूजा ने धीरे से कहा,
“जी… आप सही से बैठ जाइए… मैं आपके सामने से आपके कंधों पर बैठने की कोशिश करती हूँ।” रचयिता मैत्री है।
पूजा ने बाबा का सिर अपनी टाँगों के बीच लिया और उनके कंधों पर बैठ गई। इस पोजीशन में पूजा की नाभि ठीक बाबा के होंठों के सामने आ गई। बाबा ने तुरंत अपनी गर्म जीभ बाहर निकाली और पूजा की नाभि (धुन्नी) में घुमाने लगे।
पूजा का पूरा शरीर सिहर उठा।
“अ… रे… आह्ह्ह… क्या… कर रहे हैं आप… उफ्फ्फ…”
लेकिन वह पीछे नहीं हटी। बल्कि उसने अपने कूल्हों को थोड़ा आगे किया, ताकि बाबा की जीभ और अच्छे से पहुँच सके। पूजा को बहुत मजा आ रहा था। उसकी साँसें तेज हो गईं और वह हल्के-हल्के कराहने लगी।
बाबा ने जीभ घुमाते हुए कहा,
“पूजा, आँखें बंद करके बोलो… स्वाहा…”
पूजा ने आँखें बंद कर लीं और काँपती हुई आवाज में बोली,
“स्वा… हा… आह्ह्ह…”
बाबा ने पूजा की नाभि को चूसते हुए कहा,
“पूजा, तुम्हारी धुन्नी कितनी मीठी और गहरी है। क्या तुम्हें यह वाला आसन अच्छा लग रहा है?”
पूजा ने हाँफते हुए जवाब दिया,
“हाँ… बाबाजी… यह आसन तो बहुत अच्छा है… बहुत अच्छा… आह्ह्ह…”
बाबा ने जीभ को और नीचे सरकाते हुए पूछा,
“क्या किसी ने तुम्हारी धुन्नी में जीभ डाली है? मुझे तो पक्का यकीन है कि किसी ने नहीं डाली। मैं ही पहला आदमी हूँ।”
पूजा शर्म और उत्तेजना से काँपते हुए बोली,
“आह्ह… नहीं बाबाजी… आप पहले हैं… कोई नहीं… आह्ह्ह…”
बाबा ने संतुष्ट स्वर में कहा,
“अब तुम मेरे कंधों पर रहकर ही पीछे की तरफ लेट जाओ… हाथों से जमीन का सहारा ले लो।” संपादिका फनलवर है।
पूजा बाबा के कंधों का सहारा लेकर पीछे लेट गई। अब वह जानती थी कि ऐसा करने से वह बाबाजी के सामने अपनी चूत पूरी तरह खोलकर दिखा देगी। लेकिन अब वह किसी भी विरोध के काबिल नहीं रही थी। उसकी चूत बाबा के होंठों के ठीक सामने थी।
बाबा ने धीरे से अपने हाथ पूजा के स्तनों पर ले गए और ब्लाउस के ऊपर से ही उन्हें दबाने लगे।
पूजा यही तो चाह रही थी। वह कराह उठी,
“आह्ह… बाबाजी… अच्छे से… दबाइए…”
बाबा ने पूजा की चूचियों को जोर-जोर से मसलते हुए कहा,
“पूजा, तुम्हारे बोबले कितने भरे-भरे और नरम हैं… बहुत अच्छे… बहुत अच्छे…”
पूजा ने एक हाथ से अपना पेटिकोट और पैंटी थोड़ा नीचे सरका दिया और अपनी गीली चूत को बाबा के होंठों पर लगा दिया। बाबा ने पैंटी के ऊपर से ही पूजा की चूत पर जीभ मारनी शुरू कर दी।
पूजा सिसकारी भरते हुए बोली,
“आह्ह… बाबाजी… और जोर से… चूसिए… चाटिए…”
बाबा ने पूजा की चूत को जीभ से अच्छे से चाटते हुए कहा,
“पूजा, अब तुम मेरी गोदी में आ जाओ।”
पूजा फौरन बाबा के लंड पर बैठ गई और उनसे लिपट गई। बाबा का सख्त, गर्म लंड पूजा की चूत के मुहाने पर दब रहा था।
पूजा तुरंत बाबा के लंड पर बैठ गई और बाबाजी को गले लगा लिया। बाबा का कड़ा, गर्म लंड पूजा की चूत के मुँह पर दबाव डाल रहा था। प्रस्तुतकर्ता मैत्री।
बाबा ने पूजा की कमर पकड़ी और पूछा, "पूजा... क्या यह आसन ठीक है?"
हाँफते हुए और पूरी तरह से उत्तेजित होकर पूजा ने जवाब दिया, "ह्म्म्म...स....ब....से......बेस्ट...उन्ह्ह...बाबाजी इसमें बहुत मज़ा आ रहा है।"
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जुड़े रहिये दोस्तों।
Maitri.
“सब… सब अच्छे लग रहे हैं बाबाजी… लेकिन यह वाला… बहुत… बहुत गर्म और डरावना भी है…” मैत्री द्वारा रचित कहानी।
पूजा ने शर्म और उत्तेजना से काँपते हुए कहा,
“जी बा… बाबाजी… वो… घुटनों के बल… पीठ से पीठ… नीचे से नीचे वाला…”
बाबा ने मुस्कुराते हुए कहा,
“चलो, अब मैं बैठता हूँ और तुम्हें सामने से मेरे कंधों पर बैठना है। मेरा सिर तुम्हारी टाँगों के बीच में होना चाहिए।”
बाबा धीरे-धीरे आगे बढ़े और आराम से बैठ गए। पूजा अब जानती थी कि बाबाजी कुछ और नया, और भी लुभावन (intimate) कर रहे हैं, लेकिन वह खुद भी आगे बढ़ना चाहती थी। उसकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी।
पूजा ने धीरे से कहा,
“जी… आप सही से बैठ जाइए… मैं आपके सामने से आपके कंधों पर बैठने की कोशिश करती हूँ।” रचयिता मैत्री है।
पूजा ने बाबा का सिर अपनी टाँगों के बीच लिया और उनके कंधों पर बैठ गई। इस पोजीशन में पूजा की नाभि ठीक बाबा के होंठों के सामने आ गई। बाबा ने तुरंत अपनी गर्म जीभ बाहर निकाली और पूजा की नाभि (धुन्नी) में घुमाने लगे।
पूजा का पूरा शरीर सिहर उठा।
“अ… रे… आह्ह्ह… क्या… कर रहे हैं आप… उफ्फ्फ…”
लेकिन वह पीछे नहीं हटी। बल्कि उसने अपने कूल्हों को थोड़ा आगे किया, ताकि बाबा की जीभ और अच्छे से पहुँच सके। पूजा को बहुत मजा आ रहा था। उसकी साँसें तेज हो गईं और वह हल्के-हल्के कराहने लगी।
बाबा ने जीभ घुमाते हुए कहा,
“पूजा, आँखें बंद करके बोलो… स्वाहा…”
पूजा ने आँखें बंद कर लीं और काँपती हुई आवाज में बोली,
“स्वा… हा… आह्ह्ह…”
बाबा ने पूजा की नाभि को चूसते हुए कहा,
“पूजा, तुम्हारी धुन्नी कितनी मीठी और गहरी है। क्या तुम्हें यह वाला आसन अच्छा लग रहा है?”
पूजा ने हाँफते हुए जवाब दिया,
“हाँ… बाबाजी… यह आसन तो बहुत अच्छा है… बहुत अच्छा… आह्ह्ह…”
बाबा ने जीभ को और नीचे सरकाते हुए पूछा,
“क्या किसी ने तुम्हारी धुन्नी में जीभ डाली है? मुझे तो पक्का यकीन है कि किसी ने नहीं डाली। मैं ही पहला आदमी हूँ।”
पूजा शर्म और उत्तेजना से काँपते हुए बोली,
“आह्ह… नहीं बाबाजी… आप पहले हैं… कोई नहीं… आह्ह्ह…”
बाबा ने संतुष्ट स्वर में कहा,
“अब तुम मेरे कंधों पर रहकर ही पीछे की तरफ लेट जाओ… हाथों से जमीन का सहारा ले लो।” संपादिका फनलवर है।
पूजा बाबा के कंधों का सहारा लेकर पीछे लेट गई। अब वह जानती थी कि ऐसा करने से वह बाबाजी के सामने अपनी चूत पूरी तरह खोलकर दिखा देगी। लेकिन अब वह किसी भी विरोध के काबिल नहीं रही थी। उसकी चूत बाबा के होंठों के ठीक सामने थी।
बाबा ने धीरे से अपने हाथ पूजा के स्तनों पर ले गए और ब्लाउस के ऊपर से ही उन्हें दबाने लगे।
पूजा यही तो चाह रही थी। वह कराह उठी,
“आह्ह… बाबाजी… अच्छे से… दबाइए…”
बाबा ने पूजा की चूचियों को जोर-जोर से मसलते हुए कहा,
“पूजा, तुम्हारे बोबले कितने भरे-भरे और नरम हैं… बहुत अच्छे… बहुत अच्छे…”
पूजा ने एक हाथ से अपना पेटिकोट और पैंटी थोड़ा नीचे सरका दिया और अपनी गीली चूत को बाबा के होंठों पर लगा दिया। बाबा ने पैंटी के ऊपर से ही पूजा की चूत पर जीभ मारनी शुरू कर दी।
पूजा सिसकारी भरते हुए बोली,
“आह्ह… बाबाजी… और जोर से… चूसिए… चाटिए…”
बाबा ने पूजा की चूत को जीभ से अच्छे से चाटते हुए कहा,
“पूजा, अब तुम मेरी गोदी में आ जाओ।”
पूजा फौरन बाबा के लंड पर बैठ गई और उनसे लिपट गई। बाबा का सख्त, गर्म लंड पूजा की चूत के मुहाने पर दब रहा था।
पूजा तुरंत बाबा के लंड पर बैठ गई और बाबाजी को गले लगा लिया। बाबा का कड़ा, गर्म लंड पूजा की चूत के मुँह पर दबाव डाल रहा था। प्रस्तुतकर्ता मैत्री।
बाबा ने पूजा की कमर पकड़ी और पूछा, "पूजा... क्या यह आसन ठीक है?"
हाँफते हुए और पूरी तरह से उत्तेजित होकर पूजा ने जवाब दिया, "ह्म्म्म...स....ब....से......बेस्ट...उन्ह्ह...बाबाजी इसमें बहुत मज़ा आ रहा है।"
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जुड़े रहिये दोस्तों।
Maitri.



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