07-07-2026, 02:38 PM
अगला आसन
बाबा: “अब मैं सीधा लेटूँगा और तुम मुझ पर पेट के बल लेट जाओ… लेकिन तुम्हारा मुँह मेरे चरणों की तरफ और मेरा मुँह तुम्हारे चरणों की तरफ होना चाहिए। ठीक है?”
पूजा ने शर्म और उत्तेजना के मिश्रण में कहा,
“जी बाबाजी… अब जैसा आप कहें… वैसा ही करूँगी।”
पूजा को भी इस नई, अजीब और गर्म रमत में एक अलग तरह का मजा आने लगा था।
बाबा पीठ के बल लेट गए। पूजा उनके ऊपर पेट के बल लेट गई। अब पूजा की टाँगें बाबा के चेहरे की तरफ थीं और बाबा की टाँगें पूजा के चेहरे की तरफ। पूजा की नाभि ठीक बाबा के खड़े लंड पर दब रही थी। वह बाबा के सख्त, गर्म लंड को अपनी नाभि के छेद में साफ महसूस कर रही थी।
पूजा ने शर्म से काँपते हुए कहा, मैत्री द्वारा लिखित।
“बाबाजी… आपका… बहुत गर्म और सख्त है… मेरी नाभि पर दब रहा है…”
बाबा ने पूजा की जाँघों पर हाथ फेरते हुए कहा,
“पूजा… तुम्हारी टाँगें कितनी अच्छी और चिकनी हैं।”
बाबा ने पूजा का पेटिकोट ऊपर चढ़ा दिया। अब पूजा की जाँघें और पैंटी साफ दिख रही थीं। बाबा ने पूजा की जाँघें थोड़ी और चौड़ी कर दीं। पूजा की तरफ से कोई विरोध नहीं था। वह थोड़ा-थोड़ा बाबा की हर हरकत पर साथ दे रही थी।
बाबा ने पूजा की चूत के पास हल्के-हल्के हाथ फेरना शुरू कर दिया और बोले,
“पूजा… तुम्हारी जाँघें कितनी गोरी और मुलायम हैं… एकदम मक्खन की तरह। किसी का भी हाथ फिसल सकता है।”
पूजा की चूत के पास हाथ लगते ही वह और गर्म हो गई। उसने शर्माते हुए कहा,
“बाबाजी… वहाँ… बहुत संवेदनशील है… मुझे बहुत अजीब सा लग रहा है…” संपादिका फनलवर है।
बाबा ने पूजा की चूत के ऊपर उँगली फेरते हुए पूछा,
“पूजा… अब तक तुम्हें सबसे अच्छा आसन कौन-सा लगा?”
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जुड़े रहिये दोस्तों।
Maitri.
बाबा: “अब मैं सीधा लेटूँगा और तुम मुझ पर पेट के बल लेट जाओ… लेकिन तुम्हारा मुँह मेरे चरणों की तरफ और मेरा मुँह तुम्हारे चरणों की तरफ होना चाहिए। ठीक है?”
पूजा ने शर्म और उत्तेजना के मिश्रण में कहा,
“जी बाबाजी… अब जैसा आप कहें… वैसा ही करूँगी।”
पूजा को भी इस नई, अजीब और गर्म रमत में एक अलग तरह का मजा आने लगा था।
बाबा पीठ के बल लेट गए। पूजा उनके ऊपर पेट के बल लेट गई। अब पूजा की टाँगें बाबा के चेहरे की तरफ थीं और बाबा की टाँगें पूजा के चेहरे की तरफ। पूजा की नाभि ठीक बाबा के खड़े लंड पर दब रही थी। वह बाबा के सख्त, गर्म लंड को अपनी नाभि के छेद में साफ महसूस कर रही थी।
पूजा ने शर्म से काँपते हुए कहा, मैत्री द्वारा लिखित।
“बाबाजी… आपका… बहुत गर्म और सख्त है… मेरी नाभि पर दब रहा है…”
बाबा ने पूजा की जाँघों पर हाथ फेरते हुए कहा,
“पूजा… तुम्हारी टाँगें कितनी अच्छी और चिकनी हैं।”
बाबा ने पूजा का पेटिकोट ऊपर चढ़ा दिया। अब पूजा की जाँघें और पैंटी साफ दिख रही थीं। बाबा ने पूजा की जाँघें थोड़ी और चौड़ी कर दीं। पूजा की तरफ से कोई विरोध नहीं था। वह थोड़ा-थोड़ा बाबा की हर हरकत पर साथ दे रही थी।
बाबा ने पूजा की चूत के पास हल्के-हल्के हाथ फेरना शुरू कर दिया और बोले,
“पूजा… तुम्हारी जाँघें कितनी गोरी और मुलायम हैं… एकदम मक्खन की तरह। किसी का भी हाथ फिसल सकता है।”
पूजा की चूत के पास हाथ लगते ही वह और गर्म हो गई। उसने शर्माते हुए कहा,
“बाबाजी… वहाँ… बहुत संवेदनशील है… मुझे बहुत अजीब सा लग रहा है…” संपादिका फनलवर है।
बाबा ने पूजा की चूत के ऊपर उँगली फेरते हुए पूछा,
“पूजा… अब तक तुम्हें सबसे अच्छा आसन कौन-सा लगा?”
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