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Misc. Erotica सुपरस्टीशन
घुटनों के बल पीठ मिलाने के बाद

दोनों घुटनों के बल बैठ गए। अब उनकी पीठें पूरी तरह चिपक गई थीं। तेल की चिकनाहट के कारण हर हल्की हरकत एक मीठी, फिसलती हुई रगड़ बन रही थी। बाबा ने अपनी चौड़ी, मजबूत पीठ को पूजा की नाजुक, मुलायम पीठ से जोर से दबाया। मैत्री की पेशकश
 
पूजा की साँसें एकदम तेज और अनियमित हो गईं। उसके भरे हुए स्तन बाबा की पीठ से हल्के-हल्के दब रहे थे। हर बार जब बाबा अपनी पीठ हिलाते, पूजा की चूचियाँ उनकी पीठ पर रगड़ खातीं और निप्पल सख्त होकर दर्द भरे आनंद से काँप जाते।
 
बाबा ने धीरे-धीरे अपनी हिप्स को पूजा की हिप्स से रगड़ना शुरू कर दिया। पूजा की नंगी, गोल चूतड़ बाबा की हिप्स से चिपककर फिसल रहे थे।
 
बाबा ने गहरी, मादक आवाज में पूछा;
 
“पूजा… क्या तुम्हें मेरी पीठ का स्पर्श सुखदायी लग रहा है?”
 
पूजा शर्म से काँप गई। उसकी आवाज barely सुनाई दे रही थी,
 
“हाँ… बाबाजी… आपकी पीठ बहुत गर्म और मजबूत है… मेरी पीठ से चिपककर… बहुत अजीब सा लग रहा है… लेकिन… अच्छा भी लग रहा है।”
 
बाबा ने अपनी हिप्स को और जोर से पूजा की हिप्स से रगड़ते हुए पूछा;
 
“और नीचे का? मेरी हिप्स तुम्हारी हिप्स से रगड़ खा रही हैं… तुम्हें कैसा लग रहा है?”
 
पूजा ने शर्म से आँखें बंद कर लीं। उसकी आवाज काँप रही थी,
 
“अम्म्म… हाँ बाबाजी… नीचे भी… बहुत गर्मी हो रही है… मेरी चूतड़ आपकी हिप्स से दब रही हैं… और… और मेरी चूत गीली हो रही है। मुझे बहुत शर्म आ रही है… लेकिन रुकना भी नहीं चाह रही हूँ।” मैत्री की रचना
 
दोनों एक-दूसरे की हिप्स को धीरे-धीरे रगड़ रहे थे। तेल की चिकनाहट के कारण रगड़ और भी कामुक (sensual) हो गई थी। पूजा खुद ही अपनी हिप्स को बाबा की हिप्स से हल्के-हल्के घुमा रही थी।
 
बाबा ने फुसफुसाकर कहा;
 
“पूजा… तुम्हारे चूतड़ कितने कोमल और सुडौल हैं… मेरे चूतड़ तो थोड़े कठोर हैं।”
 
पूजा शर्म से लाल होकर बोली;
 
“बाबाजी… आदमियों के चूतड़ थोड़े कठोर ही होते हैं… और अच्छे भी लगते हैं। आपकी हिप्स… बहुत मजबूत लग रही हैं।”
 
बाबा ने संतुष्ट स्वर में कहा;
 
“अब मैं पेट के बल लेटूँगा और तुम मेरे ऊपर पेट के बल लेट जाना।”
 
पूजा: “जी बाबाजी।”
 
बाबा जमीन पर पेट के बल लेट गए। पूजा उनके ऊपर पेट के बल लेट गई। पूजा के भरे हुए स्तन बाबा की चौड़ी पीठ पर पूरी तरह दब गए। उसका नंगा पेट बाबा की नंगी पीठ से चिपक गया। पूजा खुद ही अपना पेट बाबा की पीठ पर धीरे-धीरे रगड़ने लगी।
 
बाबा ने आह भरते हुए कहा;
 
“पूजा… तुम्हारे पेट का स्पर्श ऐसे लगता है जैसे मैंने शनील की रजाई ओढ़ ली हो। और एक बात कहूँ?”
 
पूजा ने शर्माते हुए पूछा, “जी… कहिए बाबाजी।”
 
बाबा: “तुम्हारे स्तनों का स्पर्श तो…”
 
पूजा ने अपनी चूचियों को बाबा की पीठ पर और जोर से दबाते हुए, काँपती हुई आवाज में पूछा;
 
“तो… क्या… बाबाजी… खुलकर बताइए ना… मुझे समझ आए ऐसे।”
 
बाबा ने गहरी साँस लेते हुए कहा;
 
“मदहोश कर देने वाला है… तुम्हारे स्तनों को हाथों में लेने के लिए कोई भी ललचा जाए।”
 
पूजा के मुँह से अनियंत्रित सिसकारी निकली, “स्साह्ह्ह…”
 
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बने रहिये दोस्तों.

Maitri.
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सुपरस्टीशन - by maitripatel - 10-04-2026, 03:59 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Glenlivet - 10-04-2026, 05:01 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 25-04-2026, 07:06 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 29-04-2026, 01:06 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 29-04-2026, 03:45 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 07-05-2026, 07:42 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 19-05-2026, 09:54 AM
RE: सुपरस्टीशन - by naree - 22-05-2026, 04:12 AM
RE: सुपरस्टीशन - by naree - 22-05-2026, 04:14 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 09-06-2026, 03:40 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 12-06-2026, 08:37 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 27-06-2026, 05:02 PM
RE: सुपरस्टीशन - by maitripatel - 07-07-2026, 02:35 PM



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