3 hours ago
पूजा ने काँपती हुई आवाज में कहा,
“बाबाजी… यह… यह बहुत अजीब लग रहा है… आपकी पीठ मेरी पीठ से… इतनी चिकनी और गर्म… मुझे बहुत गर्मी हो रही है।” प्रस्तुतकर्ता मैत्री।
बाबा ने धीरे-धीरे अपनी पीठ को पूजा की पीठ पर रगड़ते हुए, गहरी आवाज में बोले,
“पूजा… यह आसन शरीर की हर संवेदना को जागृत करता है। तुम्हारी पीठ कितनी नरम और चिकनी है… जैसे रेशम की चादर। हर बार जब मैं अपनी पीठ हिलाता हूँ, तुम्हारी चूचियाँ मेरी पीठ से रगड़ खाती हैं… तुम्हें महसूस हो रहा है ना?”
पूजा ने शर्म और उत्तेजना से आँखें बंद कर लीं। उसकी आवाज काँप रही थी,
“हाँ बाबाजी… बहुत अच्छे से महसूस हो रहा है… मेरी चूचियाँ आपकी पीठ से दब रही हैं… और… और नीचे भी कुछ हो रहा है। मुझे शर्म आ रही है… लेकिन रुकना भी नहीं चाह रही हूँ।”
बाबा ने जानबूझकर अपनी पीठ को और जोर से पूजा की पीठ से दबाया और हल्के-हल्के घुमाने लगे। तेल की चिकनाहट के कारण रगड़ और भी मीठी हो गई थी। मैत्री रचित कहानी।
पूजा के मुँह से अनियंत्रित सिसकारी निकली,
“आह्ह्ह… बाबाजी… आपकी पीठ… मेरी पीठ को रगड़ रही है… बहुत गर्मी हो रही है… मेरे स्तन… मेरी चूत… सब कुछ सिहर रहा है। मुझे लग रहा है जैसे मैं कुछ गलत कर रही हूँ… लेकिन फिर भी… बहुत अच्छा लग रहा है।”
बाबा ने धीरे से पूछा,
“पूजा… सच-सच बताओ… तुम्हें कैसा लग रहा है? शर्म ज्यादा है… या मजा ज्यादा है?”
पूजा ने शर्म से काँपते हुए, लेकिन सच्चाई से जवाब दिया,
“दोनों… दोनों हैं बाबाजी। बहुत शर्म आ रही है कि मैं एक बाबा के साथ इस तरह नंगी पीठ मिलाकर बैठी हूँ… लेकिन साथ ही… मेरे अंदर एक अजीब सी खुजली हो रही है। मेरी चूत गीली हो रही है… और मैं रुकना नहीं चाह रही हूँ। मुझे डर भी लग रहा है… और मजा भी आ रहा है। लगता है की कही मैं अपने पति को धोखा दे रही हूँ।”
बाबाजी: “जो इस दुनिया में है ही नहीं उस से क्या धोखा बेटी? सोचो अगर तुमने दूसरी शादी की होती तो तेरा नया पति तेरे इस सुन्दर शरीर का उपयोग नहीं करता? क्या तुम नए पति को अपना रस नहीं देती? उसे ठंडा करती या अपने गुजरे हुए पति को याद कर का के अपना नया संसार में आग लगाती?”
बाबा ने मुस्कुराते हुए अपनी पीठ को पूजा की पीठ पर और धीरे-धीरे रगड़ना शुरू किया। अब रगड़ थोड़ी और नीचे की तरफ सरक रही थी।
बाबा: “पूजा… यह आसन सिर्फ पीठ मिलाने का नहीं है। इसमें शरीर की हर ऊर्जा जागृत होती है। तुम्हारी चूचियाँ मेरी पीठ से दब रही हैं… तुम्हारी नाभि मेरी पीठ के पास है… और नीचे तुम्हारी चूत गर्म हो रही है। महसूस करो… पूरी तरह महसूस करो।” फनलवर द्वारा एडिटेड।
पूजा की साँसें अब पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थीं। वह हल्के-हल्के अपनी पीठ को बाबा की पीठ से रगड़ने लगी और बोली,
“बाबाजी… मैं महसूस कर रही हूँ… आपकी पीठ मेरी पीठ को गर्म कर रही है… मेरे स्तन काँप रहे हैं… और नीचे… मेरी चूत में एक अजीब सी लहर दौड़ रही है। मुझे लग रहा है कि मैं कुछ बहुत गलत कर रही हूँ… लेकिन फिर भी मैं और पास आना चाह रही हूँ।”
बाबा ने धीरे से पूजा की कमर पर हाथ रखकर उसे और पास खींच लिया। अब दोनों की पीठें पूरी तरह चिपक गई थीं। तेल की चिकनाहट के कारण हर हल्की हरकत एक मीठी रगड़ बन रही थी।
बाबा फुसफुसाए, “पूजा… अब बताओ… तुम्हें कैसा लग रहा है? बोलो… बिना शर्माए।” रचयिता मैत्री है।
पूजा ने आँखें बंद करके, काँपती हुई आवाज में कहा,
“बहुत अच्छा लग रहा है बाबाजी… लेकिन बहुत शर्म भी आ रही है। मैं अपनी माँ के सामने भी कभी इस तरह नहीं बैठी… और आज एक बाबा के साथ… नंगी पीठ से पीठ मिलाकर… मेरी चूत गीली हो रही है। मुझे लग रहा है कि मैं पाप कर रही हूँ… लेकिन फिर भी… मैं रुकना नहीं चाहती।”
बाबा ने संतुष्ट स्वर में कहा, “बहुत अच्छा… यही तो चाहिए। शर्म और आनंद दोनों साथ-साथ… यही पूजा का असली स्वाद है।”
पूजा ने हल्के से अपनी पीठ बाबा की पीठ से रगड़ते हुए धीरे से बोली,
“बाबाजी… अगला आसन क्या होगा…?”
बाबा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया,
“अगला आसन और भी निकटता वाला है पूजा… लेकिन पहले इस आसन का पूरा आनंद ले लो… अपनी हर संवेदना को जागृत होने दो…”
पूजा अब पूरी तरह उत्तेजित और मानसिक तनाव में थी - शर्म, डर, उत्तेजना और अनजाना मजा, सब एक साथ उसके अंदर उफान मार रहे थे।
****************************************************..
बस यही तक दोस्तों.
आपके कोमेंट आने के बाद अगला एपिसोड पोस्ट कर दूंगी.
मैत्री की तरफ से जय भारत।।
“बाबाजी… यह… यह बहुत अजीब लग रहा है… आपकी पीठ मेरी पीठ से… इतनी चिकनी और गर्म… मुझे बहुत गर्मी हो रही है।” प्रस्तुतकर्ता मैत्री।
बाबा ने धीरे-धीरे अपनी पीठ को पूजा की पीठ पर रगड़ते हुए, गहरी आवाज में बोले,
“पूजा… यह आसन शरीर की हर संवेदना को जागृत करता है। तुम्हारी पीठ कितनी नरम और चिकनी है… जैसे रेशम की चादर। हर बार जब मैं अपनी पीठ हिलाता हूँ, तुम्हारी चूचियाँ मेरी पीठ से रगड़ खाती हैं… तुम्हें महसूस हो रहा है ना?”
पूजा ने शर्म और उत्तेजना से आँखें बंद कर लीं। उसकी आवाज काँप रही थी,
“हाँ बाबाजी… बहुत अच्छे से महसूस हो रहा है… मेरी चूचियाँ आपकी पीठ से दब रही हैं… और… और नीचे भी कुछ हो रहा है। मुझे शर्म आ रही है… लेकिन रुकना भी नहीं चाह रही हूँ।”
बाबा ने जानबूझकर अपनी पीठ को और जोर से पूजा की पीठ से दबाया और हल्के-हल्के घुमाने लगे। तेल की चिकनाहट के कारण रगड़ और भी मीठी हो गई थी। मैत्री रचित कहानी।
पूजा के मुँह से अनियंत्रित सिसकारी निकली,
“आह्ह्ह… बाबाजी… आपकी पीठ… मेरी पीठ को रगड़ रही है… बहुत गर्मी हो रही है… मेरे स्तन… मेरी चूत… सब कुछ सिहर रहा है। मुझे लग रहा है जैसे मैं कुछ गलत कर रही हूँ… लेकिन फिर भी… बहुत अच्छा लग रहा है।”
बाबा ने धीरे से पूछा,
“पूजा… सच-सच बताओ… तुम्हें कैसा लग रहा है? शर्म ज्यादा है… या मजा ज्यादा है?”
पूजा ने शर्म से काँपते हुए, लेकिन सच्चाई से जवाब दिया,
“दोनों… दोनों हैं बाबाजी। बहुत शर्म आ रही है कि मैं एक बाबा के साथ इस तरह नंगी पीठ मिलाकर बैठी हूँ… लेकिन साथ ही… मेरे अंदर एक अजीब सी खुजली हो रही है। मेरी चूत गीली हो रही है… और मैं रुकना नहीं चाह रही हूँ। मुझे डर भी लग रहा है… और मजा भी आ रहा है। लगता है की कही मैं अपने पति को धोखा दे रही हूँ।”
बाबाजी: “जो इस दुनिया में है ही नहीं उस से क्या धोखा बेटी? सोचो अगर तुमने दूसरी शादी की होती तो तेरा नया पति तेरे इस सुन्दर शरीर का उपयोग नहीं करता? क्या तुम नए पति को अपना रस नहीं देती? उसे ठंडा करती या अपने गुजरे हुए पति को याद कर का के अपना नया संसार में आग लगाती?”
बाबा ने मुस्कुराते हुए अपनी पीठ को पूजा की पीठ पर और धीरे-धीरे रगड़ना शुरू किया। अब रगड़ थोड़ी और नीचे की तरफ सरक रही थी।
बाबा: “पूजा… यह आसन सिर्फ पीठ मिलाने का नहीं है। इसमें शरीर की हर ऊर्जा जागृत होती है। तुम्हारी चूचियाँ मेरी पीठ से दब रही हैं… तुम्हारी नाभि मेरी पीठ के पास है… और नीचे तुम्हारी चूत गर्म हो रही है। महसूस करो… पूरी तरह महसूस करो।” फनलवर द्वारा एडिटेड।
पूजा की साँसें अब पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थीं। वह हल्के-हल्के अपनी पीठ को बाबा की पीठ से रगड़ने लगी और बोली,
“बाबाजी… मैं महसूस कर रही हूँ… आपकी पीठ मेरी पीठ को गर्म कर रही है… मेरे स्तन काँप रहे हैं… और नीचे… मेरी चूत में एक अजीब सी लहर दौड़ रही है। मुझे लग रहा है कि मैं कुछ बहुत गलत कर रही हूँ… लेकिन फिर भी मैं और पास आना चाह रही हूँ।”
बाबा ने धीरे से पूजा की कमर पर हाथ रखकर उसे और पास खींच लिया। अब दोनों की पीठें पूरी तरह चिपक गई थीं। तेल की चिकनाहट के कारण हर हल्की हरकत एक मीठी रगड़ बन रही थी।
बाबा फुसफुसाए, “पूजा… अब बताओ… तुम्हें कैसा लग रहा है? बोलो… बिना शर्माए।” रचयिता मैत्री है।
पूजा ने आँखें बंद करके, काँपती हुई आवाज में कहा,
“बहुत अच्छा लग रहा है बाबाजी… लेकिन बहुत शर्म भी आ रही है। मैं अपनी माँ के सामने भी कभी इस तरह नहीं बैठी… और आज एक बाबा के साथ… नंगी पीठ से पीठ मिलाकर… मेरी चूत गीली हो रही है। मुझे लग रहा है कि मैं पाप कर रही हूँ… लेकिन फिर भी… मैं रुकना नहीं चाहती।”
बाबा ने संतुष्ट स्वर में कहा, “बहुत अच्छा… यही तो चाहिए। शर्म और आनंद दोनों साथ-साथ… यही पूजा का असली स्वाद है।”
पूजा ने हल्के से अपनी पीठ बाबा की पीठ से रगड़ते हुए धीरे से बोली,
“बाबाजी… अगला आसन क्या होगा…?”
बाबा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया,
“अगला आसन और भी निकटता वाला है पूजा… लेकिन पहले इस आसन का पूरा आनंद ले लो… अपनी हर संवेदना को जागृत होने दो…”
पूजा अब पूरी तरह उत्तेजित और मानसिक तनाव में थी - शर्म, डर, उत्तेजना और अनजाना मजा, सब एक साथ उसके अंदर उफान मार रहे थे।
****************************************************..
बस यही तक दोस्तों.
आपके कोमेंट आने के बाद अगला एपिसोड पोस्ट कर दूंगी.
मैत्री की तरफ से जय भारत।।



![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)