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Misc. Erotica सुपरस्टीशन
तीन-चार बार बाबा की उँगलियाँ पूजा के ब्लाउज के अंदर घुसकर उसके स्तनों के नीचे वाले नरम हिस्से को छू गईं। हर बार पूजा का शरीर हल्का सा काँप जाता। लेखिका मैत्री है।

पूजा गरम होती जा रही थी। उसकी साँसें तेज़ और भारी हो चुकी थीं।
 
बाबा ने धीमी लेकिन गहरी आवाज में कहा, “पूजा… अब हमारी पूजा आखिरी चरण में है। वेदों और ग्रंथों में कुछ विशेष आसन बताए गए हैं।”
पूजा की आवाज काँप रही थी। वह शर्म और उत्तेजना के मिश्रण में बोली, “आ… स… सन…? कैसे आसन बाबाजी?”
 
बाबा ने पूजा की कमर पर हाथ रखकर उसे थोड़ा और पास खींच लिया और बोले, “अपने शरीर को शुद्ध करने के पश्चात जो स्त्री वो आसन लेती है, ऊपर वाला उससे सदा के लिए प्रसन्न हो जाता है। लेकिन ये आसन तुम्हें एक बाबा के साथ लेने होंगे। परंतु हो सकता है कि मेरे साथ आसन लेने में तुम्हें बहुत लज्जा आए।”
 
पूजा ने शर्म से नजरें झुकाकर, लेकिन दृढ़ स्वर में कहा, “आपके साथ आसन… मुझे कोई आपत्ति नहीं है बाबाजी।”
 
बाबा ने पूजा की आँखों में देखते हुए पूछा, “तो तुम मेरे साथ आसन लोगी…?”
 
पूजा ने धीरे से सिर हिलाया और बोली, “जी बाबाजी… मैं लूँगी।”
बाबा ने मुस्कुराते हुए कहा, “लेकिन आसन लेने से पहले मुझे भी बदन पर तेल लगाना होगा… और ये तेल तुम्हें लगाना है।”
 
पूजा ने शर्माते हुए कहा, “जी बाबाजी… जैसी आपकी आज्ञा।”
 
बाबा ने तेल की बोतल पूजा को थमा दी। दोनों आमने-सामने घुटनों के बल बैठ गए। रचियिता मैत्री [b]है।[/b]
 
पूजा ने थोड़ा तेल अपनी हथेलियों पर लिया और पहले बाबा की छाती पर लगाना शुरू किया। बाबा की छाती, पेट और अंडरआर्म्स पहले से शेव किए हुए थे, इसलिए उनकी त्वचा बिल्कुल स्मूथ और चिकनी थी। पूजा पहले भी बाबा के शरीर से आकर्षित हो चुकी थी। आज तेल लगाते समय बाबा का बदन और भी चमकदार और आकर्षक लग रहा था।
 
पूजा की उँगलियाँ बाबा की चौड़ी छाती पर घूम रही थीं। वह धीरे-धीरे पेट पर, बाहों पर और फिर पीठ पर तेल मलने लगी। जब वह बाबा के पीछे आई, तो उसकी भरी हुई चूचियाँ हल्के-हल्के बाबा की पीठ से टच होने लगीं।
 
पूजा ने बाबा की पीठ पर तेल मलते हुए धीरे से कहा, “बाबाजी… आपका बदन बहुत मजबूत और चिकना है।”
 
बाबा ने हल्के से मुस्कुराकर कहा, “पूजा, तुम्हारे हाथों का स्पर्श कितना सुखदायी है।”
 
पूजा अंदर से बाबा के बदन से लिपटना चाह रही थी, लेकिन शर्म की वजह से चुप रही। उसने बाबा की नाभि में दो-तीन बार उँगली घुमाई।
 
बाबा ने धीरे से कहा, “चलो… अब आसन लेते हैं। पहले आसन में हम दोनों को एक-दूसरे से पीठ मिलाकर बैठना है।”
 
दोनों चौकड़ी मारकर एक-दूसरे की तरफ पीठ करके बैठ गए। फिर धीरे-धीरे पास आए, जिससे दोनों की पीठ एक-दूसरे से मिल जाए।
 
बाबा की पीठ तो पहले से ही नंगी थी क्योंकि उन्होंने सिर्फ लूंगी पहनी हुई थी। पूजा ब्लाउज और पेटिकोट में थी, लेकिन उसकी निचली पीठ नंगी थी और ब्लाउज के हुक खुले होने की वजह से ऊपरी पीठ भी काफी हद तक उजागर थी।
 
दोनों नंगी पीठ से पीठ मिलाकर बैठ गए। तेल की वजह से दोनों की पीठ चिकनी हो रही थी। फनलवर ने एडिट किया है[b][b]।[/b][/b]
 
बाबा ने हल्के-हल्के अपनी पीठ को पूजा की पीठ से रगड़ना शुरू कर दिया।
 
बाबा: “पूजा, तुम्हारी पीठ का स्पर्श कितना अच्छा है। क्या तुमने इससे पहले कभी अपनी नंगी पीठ किसी की पीठ से मिलाई है?”
 
पूजा शर्म से काँपते हुए बोली, “नहीं बाबाजी… पहली बार मिला रही हूँ।”
 
पूजा भी हल्के-हल्के बाबा की पीठ पर अपनी पीठ रगड़ने लगी। दोनों की चिकनी पीठें एक-दूसरे से रगड़ खा रही थीं। पूजा की चूचियाँ बाबा की पीठ से हल्के-हल्के दब रही थीं।
 
बाबा ने धीरे से कहा, “चलो, अब घुटनों के बल खड़े होकर पीठ से पीठ मिलानी है।”
 
दोनों घुटनों के बल हो गए। अब उनकी पीठें और भी अच्छे से मिल रही थीं। बाबा ने अपनी पीठ को पूजा की पीठ से जोर से दबाया। पूजा की साँसें तेज हो गईं।
 
पूजा ने शर्माते हुए कहा, “बाबाजी… यह आसन… बहुत अजीब सा लग रहा है।”
 
बाबा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “यह आसन शरीर को शुद्ध करने का है पूजा। लेकिन इसमें शरीर की हर संवेदना जागृत होती है।”
 
पूजा ने काँपती हुई आवाज में कहा, “बाबाजी… यह… यह बहुत अजीब लग रहा है… आपकी पीठ मेरी पीठ से… इतनी चिकनी और गर्म… मुझे बहुत गर्मी हो रही है।” मैत्री रचित कहानी[b][b]।[/b][/b]
 
 
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जुड़े रहिये दोस्तों।

मैत्री. Maitri.
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Messages In This Thread
सुपरस्टीशन - by maitripatel - 10-04-2026, 03:59 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Glenlivet - 10-04-2026, 05:01 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 25-04-2026, 07:06 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 29-04-2026, 01:06 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 29-04-2026, 03:45 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 07-05-2026, 07:42 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 19-05-2026, 09:54 AM
RE: सुपरस्टीशन - by naree - 22-05-2026, 04:12 AM
RE: सुपरस्टीशन - by naree - 22-05-2026, 04:14 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 09-06-2026, 03:40 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 12-06-2026, 08:37 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 27-06-2026, 05:02 PM
RE: सुपरस्टीशन - by maitripatel - 02-07-2026, 02:17 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Rizzi1198 - 30-07-2026, 12:21 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 22-08-2026, 06:21 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 28-08-2026, 05:28 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 07-09-2026, 06:23 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 08-09-2026, 10:10 PM
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RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 19-09-2026, 12:21 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 21-09-2026, 09:57 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 22-09-2026, 05:39 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 24-09-2026, 04:27 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Tadpole - 23-09-2026, 07:12 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Wanton - 23-09-2026, 07:24 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 01-10-2026, 09:20 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Bumchod - 05-10-2026, 05:27 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 07-10-2026, 08:23 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 10-10-2026, 07:50 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 21-10-2026, 06:40 PM
RE: सुपरस्टीशन - by sarit11 - 22-10-2026, 08:35 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 24-10-2026, 08:15 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Adonis - 27-10-2026, 12:20 PM



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